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Sunday, 14 June 2026

लुधियाना में गुरमत चेतना कैंप का सफलता से आयोजन

WhatsApp From Sheeba Singh on Sunday 14th June 2026 at 15:06 Regarding Gurmat Camp Aradhana Times

5 से 15 साल के बच्चों ने भी हिस्सा लिया 


लुधियाना
: 14 जून 2026: (दिलजोत कौर शीबा सिंह
//आराधना टाईम्ज़ डेस्क):: 

हर साल की तरह इस बार भी बच्चों को सिख इतिहास, संस्कृति और गुरबानी/गुरमत सिद्धांतों की जानकारी देने के लिए 4 जून से 14 जून तक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा शहीद भगत सिंह नगर धांधरा रोड में गुरमत चेतना कैंप लगाया गया। इस कैंप में 5 से 15 साल के बच्चों और कई अन्य संगतों ने हिस्सा लिया। कैंप के दौरान संगत और संगत को जपजी साहिब जी के पवित्र पाठ का जाप करवाया गया। छोटे बच्चों को मूल मंत्र का जाप भी करवाया गया। इस तरह नई पीढ़ी को गुरुघर और गुरुबाणी से जोड़ा गया। 

संगत को गुरबाणी,गुरु इतिहास, सिख संस्कृति, रहत मर्यादा के बारे में बताया गया। पूछे गए सवालों के जवाब कैंप डायरेक्टर गुरचरण सिंह पंछी और कैंप एडमिनिस्ट्रेटर भाई भूपिंदर सिंह सैनी ने विस्तार से दिए। बीबी हरजीत कौर, बीबी दर्शन कौर सैनी, बीबी जसवीर कौर और बीबी गुरप्रीत कौर ने छोटे और बड़े बच्चों को हर दिन 2 घंटे सिख इतिहास, रहत मर्यादा के बारे में शानदार जानकारी दी। 

बच्चों ने सिख इतिहास से जुड़ी सुंदर आर्ट वर्कशॉप और पेंटिंग मुकाबले करवाए। अच्छा प्रदर्शन करने वालों को इनाम बांटे गए। कैंप में इस्तेमाल होने वाली स्टेशनरी फ्री बांटी गई। कैंप में हिस्सा लेने के लिए आज हर बच्चे को सर्टिफिकेट भी दिया गया। हर बच्चे  लैपटॉप बैग, पानी की बोतल, कॉफी, पेन, टूथपेस्ट दिया गया। बच्चों के दांत और मसूड़े डॉ. पी. एस. सिद्धू ने चेक किए और जनरल चेक-अप डॉ. श्रुति सिद्धू की टीम ने किया। अलायंस क्लब्स इंटरनेशनल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एली करनजीत सिंह की तरफ से हर दिन रिफ्रेशमेंट का पूरा लंगर लगाया गया।

कैंप डायरेक्टर गुरचरण सिंह पंछी ने क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान बच्चों के पेरेंट्स के साथ अपने विचार शेयर किए, जिसमें कई पेरेंट्स ने कहा कि ऐसे धार्मिक कैंप नई पीढ़ी और आम संगत के लिए बहुत फायदेमंद हैं, जिन्हें समय-समय पर ऑर्गनाइज करना चाहिए। धार्मिक कवि भाई भूपिंदर सिंह सैनी ने बच्चों और पेरेंट्स को धार्मिक कविताएं सुनाईं। उन्होंने बच्चों के पूछने पर कविताएं लिखने और प्रेजेंट करने के हिंट भी दिए। आखिर में, कैंप डायरेक्टर गुरचरण सिंह पंछी ने कैंप में शामिल होने के लिए उनका धन्यवाद किया। गुरु का लंगर बीबी हरजीत कौर के परिवार द्वारा आयोजित किया गया था।

आशा ही नहीं विश्वास है कि इस तरह के कैंपों का सिलसिला भविष्य में भी जारी रहेगा। 

Sunday, 7 November 2021

भगवान श्री परशुराम मंदिर में लगा फ्री आर्थो कैंप

 7th November 2021 at 6:56 PM WhatsApp

  मेडिकल कैंप में हुई 100 लोगों की हुई जांच  

कैंप में शिरकत करने पर मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्वू का स्वागत करते व
सिरोपा भेंट करके उन्हें सम्मानित करते मंदिर कमेटी के पदाधिकारी 


मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्वू ने किया कैंप का उदघाटन

मंदिर प्रबंधकों के कार्याे की सराहना की

इलाज करवाने वाले मरीज बोले आगे भी लगना चाहिए ऐसा फ्री कैंप

मोहाली: 7 नवंबर 2021:(गुरजीत सिंह बिल्ला//आराधना टाईम्ज़)::

फेस-9 के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित भगवान श्री परशुराम मंदिर एवं धर्मशाला में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए रीड़ की हड्डी और सरवाईकल जैसी बीमारियों को दूर करने के लिए एक फ्री अर्थो कैंप का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन मोहाली के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्वू ने रिबन काट कर किया। 

इस कैंप के दौरान श्री ब्रहामण सभा और मोयाल सभा मोहाली के प्रधान वी.के वैद, सरप्रस्त रोमेश दत्त, सरप्रस्त शिव शरन कुमार,उपाध्यक्ष जसविंदर शर्मा , सीनियर उपाध्यक्ष नवलकिशोर शर्मा, गोपाल कृष्ण,चेयरमैन राजीव दत्त, रिशी राज, के के छिब्बर, मनमोहन दादा, बलदेव राज वशिष्ट, यशपाल अगिनहोत्री, श्री ब्रहामण सभा मोहाली महिला संकीर्तन मंडल अध्यक्ष मैडम हेमा गैरोला, कमलेश राज, वरिंदर शर्मा, प्रवीन शर्मा, अरूण वैद, कृष्ण शर्मा,हनीत,टोनी, ओम प्रकाश, गुरमेल सिंह सियाण, बॉबी शंकर, राजेश कुमार अपने परिवार सहित और मंदिर के पुजारी अमित मिश्रा,अशोक कुमार भाट,ऊमेश द्विवेदी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

कार्यक्रम में पहुंचे मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्वू ने श्री ब्रहामण सभा मोहाली और भगवान श्री परशुराम मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों के कार्यो की सराहना की और मंदिर के विकास कार्यो में पहले की तरह आगे भी अनुदान देने की बात कही। इस दौरान उनके साथ विक्टर भी उपस्थित थे। 

मंदिर प्रबंधकों की ओर से दोनों अतिथियों को गुलदस्ता भेंट करके स्वागत किया गया और उनको सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया गया। इस दौरान श्री ब्रहामण सभा के प्रधान वी.के वैद ने मंदिर के कार्यो के बारें में मुख्यातिथि को विस्तारपूर्वक अवगत करवाया और श्री सिद्वू परिवार का मंदिर के विकास कार्यो में अहम योगदान बताया। 

इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि कैंप में लगभग 1०० के करीब लोगों का इलाज किया गया और यह कैंप सुबह 1० बजे से लेकर शाम 5 बजे तक चलता रहा। वहीं कैंप में इलाज करवाने आए मरीजों का कहना था कि इस तरह के कैंप अधिक से अधिक लगाए जाने चाहिए और वह मंदिर कमेटी प्रबंधकों से अपील करते हैं कि भविष्य में भी इस तरह का कैंप लगाया जाए। इस दौरान कैंप को सफल बनाने में मैडम हेमा गैरोला एवम उनकी महिला मंडल जिसमें पुष्पा शर्मा,सुधा,गीतांश, कुसुमा,सुशीला, वेद बाला, लीला शर्मा, गीता शर्मा, पूनम शर्मा,मुस्कान वैद ,साधना वैद,मालती देवी,ममता शर्मा,लता,खुश्बू सहित अन्य महिलाओं ने कैंप को सफल बनाने में अपना अहम योगदान दिया।

Sunday, 28 June 2020

रूस के लोग अंधविश्वासी नास्तिक हैं-ओशो

 हिंदुस्तान के लोग अंधविश्वासी आस्तिक हैं-ओशो 
सोशल मीडिया//Whats App//28 जून 2020:(आराधना टाईम्ज़ रिसर्च डेस्क)::
ईश्वर को मानने वाला भी अंधविश्वासी हो सकता है, ईश्वर को न मानने वाला भी उतना ही अंधविश्वासी, उतना ही सुपरस्टीशस हो सकता है। अंधविश्वास की परिभाषा समझ लेनी चाहिए। अंधविश्वास का मतलब है, बिना जाने अंधे की तरह जिसने मान लिया हो। रूस के लोग अंधविश्वासी नास्तिक हैं, हिंदुस्तान के लोग अंधविश्वासी आस्तिक हैं। दोनों अंधविश्वासी हैं। न तो रूस के लोगों ने पता लगा लिया है कि ईश्वर नहीं है और तब माना हो, और न हमने पता लगा लिया है कि ईश्वर है और तब माना हो। तो अंधविश्वास सिर्फ आस्तिक का होता है, इस भूल में मत पड़ना। नास्तिक के भी अंधविश्वास होते हैं। बड़ा मजा तो यह है कि साइंटिफिक सुपरस्टीशन जैसी चीज भी होती है, वैज्ञानिक अंधविश्वास जैसी चीज भी होती है। जो कि बड़ा उलटा मालूम पड़ता है कि वैज्ञानिक अंधविश्वास कैसे होगा! वैज्ञानिक अंधविश्वास भी होता है।

अगर आपने युक्लिड की ज्यामेट्री के बाबत कुछ पढ़ा है, तो आप पढ़ेंगे, बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं ज्यामेट्री तो युक्लिड कहता है रेखा उस चीज का नाम है जिसमें लंबाई हो, चौड़ाई नहीं। इससे ज्यादा अंधविश्वास की क्या बात हो सकती है? ऐसी कोई रेखा ही नहीं होती, जिसमें चौड़ाई न हो। बच्चे पढ़ते हैं कि बिंदु उसको कहते हैं जिसमें लंबाई चौड़ाई दोनों न हों। और बड़े से बड़ा वैज्ञानिक भी इसको मानकर चलता है कि बिंदु उसे कहते हैं जिसमें लंबाई  चौड़ाई न हो। जिसमें लंबाई चौड़ाई न हो, वह बिंदु हो सकता है?

हम सब जानते हैं कि एक से नौ तक की गिनती होती है, नौ डिजिट होते हैं, नौ अंक होते’ हैं गणित के। कोई पूछे कि यह अंधविश्वास से ज्यादा है? नौ ही क्यों? कोई वैज्ञानिक दुनिया में नहीं बता सकता कि नौ ही क्यों? सात क्यों नहीं? सात से क्या काम में अड़चन आती है? तीन क्यों नहीं? ऐसे गणितज्ञ हुए हैं। लिबनीत्स एक गणितज्ञ हुआ है जिसने तीन से ही काम चला लिया। है।, उसका ऐसा है कि एक, दो, तीन, फिर आता है दस, ग्‍यारह, बारह, तेरह, फिर आता है बीस, इक्कीस, बाईस, तेईस। बस, ऐसी उसकी संख्या चलती है। काम चल जाता है, कौन सी अड़चन होती है! वह भी गिनती कर लेगा यहां बैठे लोगों की। और वह कहता है कि मेरी गिनती गलत, तुम्हारी सही, कैसे तुम कहते हो २: हम तीन से ही काम चला लेते हैं। वह कहता है, नौ की जरूरत क्या है? नौ कौन कहता है? आइंस्टीन ने बाद में कहा कि तीन भी फिजूल है, दो ही से काम चल जाता है। सिर्फ एक से नहीं चल सकता, बहुत मुश्किल होगी। दो से भी चल सकता है। नाइन डिजिट, नौ आकड़े होने चाहिए गणित में, यह एक वैज्ञानिक अंधविश्वास है। लेकिन गणितज्ञ भी पकडे हुए बैठा है कि इतने ही हो सकते हैं आकड़े। उससे कहो कि सात से काम चलेगा, तो वह भी मुश्किल में पड़ जाएगा। यह भी मान्यता है, इसमें कुछ और ज्यादा मतलब नहीं है।

हजारों चीजें वैज्ञानिक रूप से हम मानते हैं कि ठीक हैं, वे अंधविश्वास ही होती हैं। तो वैज्ञानिक अंधविश्वास भी होते हैं। इस युग में तो धार्मिक अंधविश्वास क्षीण होते जा रहे हैं, वैज्ञानिक अंधविश्वास मजबूत होते चले जा रहे हैं। फर्क इतना होता है कि अगर धार्मिक आदमी से पूछो कि भगवान का तुम्हें कैसे पता चला? तो वह कहेगा कि गीता में लिखा है। और अगर उससे यह पूछो कि तुम यह कह रहे हो कि गणित में नौ आकड़े होते हैं, यह तुम्हें कैसे पता चला है? तो वह कहेगा कि फलां गणितज्ञ की किताब में लिखा हुआ है। फर्क क्या हुआ इन दोनों में? एक गीता बता देता है, एक कुरान बता देता है, एक गणित की किताब बता देता है। फर्क क्या है?

मैं अंधविश्वास के एकदम विरोध में हूं। सब तरह के अंधविश्वास टूटने चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं तोड्ने के लिए अंधविश्वासी हूं कि किसी भी चीज को तोडना चाहिए तो फिर बिना फिकिर उसको तोड्ने में लग जाने की जरूरत है। वह ठीक है या गलत, इसकी फिक्र छोड़ो, तोड़ो पहले, तोडना जरूरी है। फिर यह तोडना भी एक अंधविश्वास हो जाएगा।

इसका मतलब यह हुआ कि हमें समझ लेना चाहिए कि अंधविश्वास, सुपरस्टीशन का मतलब क्या है।

 सुपरस्टीशन का मतलब है कि जिसे हम बिना जाने मान लेते हैं। और हम बहुत सी चीजें मान लेते हैं। और बहुत सी चीजें बिना जाने इनकार कर देते हैं, यह भी अंधविश्वास है।

ओशो
मैं मृत्यु सिखाता हूँ

Sunday, 3 May 2020

पूज्य श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 99 वां आनंद पूर्णिमा दिवस 7 मई को

लॉक डाउन के चलते सभी मार्गी घरों में मनाएंगे जन्मोत्सव 
पुरुलिया: 2 मई 2020: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
आनंद मार्ग के सौजन्य से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बार पूज्य गुरुदेव भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 99 वां आनंद पूर्णिमा दिवस 7 मई 2020 को सभी मार्गी अपने अपने घर में मनाएंगे। यह फैसला कोरोना के चलते लॉक डाउन को देखते हुए लिया गया है। इस संबंध में पुरुलिया स्थित  केन्द्रीय कार्यालय:-आनन्द नगर प.बंगाल से आनंद मार्ग प्रचारक संघ ने सभी मार्गियों के नाम एक अपील भी जारी की है। इस अपील में कहा गया है:
प्रिय मार्गी भाइयों एवं बहनों 
नमस्कार।
आशा करता हूं बाबा के कृपा से आप सपरिवार स्वस्थ होंगे।
वर्तमान वैश्विक संकट कोरोनावायरस के कारण उत्पन्न महामारी से निजात पाने के लिए जो लॉक डाउन लगाया गया उसी के मध्य नजर पूज्य गुरुदेव भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 99 वां आनंद पूर्णिमा दिवस 7 मई 2020  को सभी मार्गी अपने अपने घर में ही मनाएंगे।
6 मई को ही संध्या में साधना स्थल को सजा लेंगे।
 कार्यक्रम इस प्रकार है :____ 
 सुबह 4:00 जाग जायें। 
  गुरु सकाश, शपथ स्मरण, उत्क्षेप मुद्रा, नित्य क्रिया, स्नान एवं सज-धज कर पोशाक पहनकर

 4 बजकर 50 मिनट तक अपने घर में जहाँ साधनास्थल तय किया है वहां पर ही परिवार के सभी सदस्य गण बैठकर प्रेम और निष्ठा से 

5:00 बजे 5:35 तक पाञ्चजन्य करें ।
पाञ्चजन्य के उपरांत 

5 बजकर 35 मिनट से लेकर 6:00 बजकर 7 मिनट तक आविर्भाव,  व आगमन के सम्बन्धित प्रभात संगीत गायन करें । 
जो लोग प्रभात संगीत नहीं जानते हैं वे 5 बजकर 35 मिनट से 6 बजकर 7 मिनट तक 
कीर्तन करते रहें। 

6 बजकर 7 में शंख ध्वनि करें और जहां शंख नहीं है वहां कोई भी वाद्य यंत्र जैसे थाली, ताली , झाल बजाकर जयघोष करें ।

 6:10 से 6: 20 तक प्रभात संगीत:- 1. तुमि जे एसे छो आज व्यथित जनेर कथा भाविते, 
2. तुमि एसे छो भालोबेसेछो मोरे विश्वे तोमार नय कोनो तुलना 3.आये हो तुम,आये हो तुम युगों के बाद प्यारे का गायन करें :

 तदोपरांत कीर्तन 6:20 से 6:35 तक और 

6:35 से 7:05 बजे तक आधे घंटे का सामूहिक साधना करें 

7:05 से 7:30 तक आनन्द वाणी पाठ और व्याख्या करें । आनंद वाणी पाठ के बाद सामूहिक रूप से आसन, कौशिकी एवं तांडव करने के बाद प्रसाद वितरण करें। हर्ष उल्लास के साथ स्वादिष्ट भोजन बनाकर पूरे परिवार मिलजुल कर भोजन करें। सेवा के रूप में कम से कम एक आदमी का भोजन(50रूपये) ,अधिक आपकी क्षमता पर निर्भर करता है, कोरोना रिलीफ ऑपरेशन चला रहे अपने भुक्ति कमिटी को 
सुपुर्द करें।
नाश्ता के उपरांत जीवन वेद एवं चर्याचर्य प्रथम भाग द्वितीय भाग एवं तृतीय भाग से प्रश्नोत्तरी का कार्यक्रम अवश्य करें।
दोपहर में सामूहिक साधना करने के बाद मिलित भोजन ग्रहण करें।

विशेष द्रष्टव्य :--- किन्हीं के परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक है या दृढ़ संकल्प शक्ति है तो तो वे 3 घंटे 6 घंटे का अखंड कीर्तन करने के लिए स्वतंत्र हैं।

            आपका ही
आचार्य सत्याश्रयानंद अवधूत
 केंद्रीय धर्म प्रचार सचिव
 आनंद मार्ग प्रचारक संघ

Monday, 13 April 2020

कोरोना के कहर में फंसे लोगों का दर्द सुना ठाकुर दलीप सिंह ने

कुलदीप कौर की टीम को भेजा ज़रूरतमंद घरों तक ज़रूरी सामान के साथ 
पटियाला: 13 अप्रैल 2020: (कार्तिका सिंह//आरधना टाईम्ज़)::
कोरोना का कहर टूटा तो सबसे अधिक दिक्कत आई उन लोगों को जो हर रोज़ दिहाड़ी करके कमाते थे और उसी से उनका घर चलता था।  इसके साथ ही वे लोग भी थे मध्यवर्गों से सबंधित थे। जब मार्च के अंत में लॉक डाउन शुरू हुआ तो  उनके घरों का राशन भी समाप्त हो चुका था और वेतन अभी मिला नहीं था। साथ ही गली मौहल्लों के वो दुकानदार भी इसी संकट का शिकार हुए जिनकी दुकानें कर्फ्यू के कारण बंद करा दी गईं थीं। छोले-भटूरे, टिक्की-समोसा, भुजे हुए चने इत्यादि और चाय बेचने वालों का भी यही हाल हुआ। इन लोगों ने कभी ज़िंदगी में हाथ नहीं फैलाया था। हमेशां अपना कमाते और जो कमाई होती उसी में खुश रहते हुए ज़िंदगी काटते। कोरोना के संकट की बात तो किसी की कल्पना में भी नहीं थी। सबसे ज़्यादा  दिक्क्त समाज के इन्हीं वर्गों से सबंधित लोगों को आई। न तो ये लोग गरीबों के लिए बनी राशन वितरण लाइनों में जा कर खड़े हो सकते थे और न ही किसी और के पास जा सकते थे। ऐसे लोगों की आवाज़ नामधारी प्रमुख ठाकुर दलीप सिंह ने सुनी और वह भी इन लोगों के बोले बिना। ठाकुर दलीप सिंह ने विदेश की धरती से ही अपने पैरोकारों से कहा कि इस तरह के सभी वर्गों का पता लगाएं और बिना कोई शोर या प्रचार किये इन लोगों तक सहायता पहुंचाएं। 
आदेश का पालन भी तुरंत शुरू हुआ। घरों की रसोई के लिए आवश्यक सामान को छोटे छोटे पैकटों में बंद कराया गया। उनकी किट अर्थात गठड़ियाँ बनवायीं गईं। हर ज़रूरतमंद के घर तक यह सब सामान पहुंचा दिया गया। साथ ही दवाई और दूध जैसे ज़रूरी खर्चों के लिए एक निश्चित अमाउंट के पैसे भी सभी घरों तक पहुंचाए गए। हर घर का पता लगाना।  फिर बिना किसी को बताए चुपके से अचानक जा कर उनका दरवाज़ा खटखटाना और जब दरवाज़ा खुलना तो बहुत ही स्नेह और सम्मान के साथ उनको वह राशन की किट भी पकड़ा देनी और साथ ही पैसे भी। देश भर के बहुत से राज्यों में यह सिलसिला शुरू हुआ और अब तक जारी है। ठाकुर दलीप सिंह के सेवक पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार, राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों के पिछड़े इलाकों तक भी तेज़ी से पहुंचे। ख़ामोशी के साथ सेवा का यह बिलकुल ही नया अध्याय बना। 
पटियाला में इसकी कमान संभाली महिला वैलफेयर सोसायटी की प्रमुख कुलदीप कौर और उनकी टीम ने। इस टीम ने कच्चा राशन भी ज़रूरतमंद लोगों के घरों तक पहुंचाया और पका हुआ लंगर भी। इस मकसद के लिए इन्होने अपनी चिर परिचित वैन का सदुपयोग किया जिसे आप तस्वीर में भी देख सकते हैं।   
टीम की अध्यक्षा कुलदीप कौर के साथ महासचिव-बीमा सेन, कोषाधिकारी-मनप्रीत कौर और जसबीर कर सहित अन्य पदाधिकारी भी साथ रहे। पुरुष सहयोगियों में से हरमीत सिंह, चरणजीत सिंह मंगा और रवनीत सिंह ने भी सक्रिय हो कर इस टीम का साथ दिया।
यह भी पढ़िए बस यहां नीचे दिए गए  नीले लिंक पर क्लिक करके 
 नामधारी संगत के साथ शहीद सरबजीत की बहन ने भी बांटा राशन 

Friday, 5 April 2019

नवरात्रि के पावन पर्व पर दमोह में विशेष आयोजन


24 घंटे के अखंड श्री चालीसा पाठ का आयोजन
दमोह: (मध्य प्रदेश): 5 अप्रैल 2019: (आराधना टाईम्ज़ सर्विस)::
संकेतिक और साभार चित्र 
आध्यात्मिक साधना के सुसवसर पर आप सभी लोग आमंत्रित हैं। यह आमंत्रण आयोजकों की तरफ से बहुत ही श्रद्धा भावना से दिया जा रहा है। विश्व वंदनीय धर्म सम्राट युग चेतना पुरुष परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज जी के आशीर्वाद स्वरुप एवं आदिशक्ति जगत जननी जगदंबा की कृपा से नवरात्रि के पावन पर्व पर 6 अप्रैल 2019  को सुबह 9:00 बजे से 24 घंटे के अखंड श्री चालीसा पाठ का आयोजन किया जा रहा है जिस का समापन 7 अप्रैल 2019 को सुबह 9:00 बजे किया जाएगा इस दिव्य अनुष्ठान में सभी गुरु भाई गुरु बहने मां के भक्त टीम प्रमुख सक्रिय कार्यकर्ता भगवती मानव कल्याण के सभी पदाधिकारी सादर आमंत्रित है। 
इस कार्यक्रम के आयोजक हैं श्री प्रमोद पटेल (जिला मीडिया प्रभारी दमोह)
कार्यक्रम का पावन स्थल होगा-एसपीएम नगर नई पुलिस लाइन दमोह मध्य प्रदेश
टीम के प्रमुख श्री ज्ञानी रजक जी दमोह आप सभी को आमंत्रित करते हैं। जय माता की जय गुरुवर की।
ज्ञानी रजक जी का सम्पर्क नंबर है:+91 98939 23054
 

Tuesday, 30 May 2017

उसको सेवा से मिल गया सचमुच सच्चा मालिक

मजदूर हंसा ओर बोला-मजाक तो आप अब कर रहे हो
Courtesy Photo
"सतनाम श्री वाहेगुरु" 
एक मजदूर नया नया दिल्ली आया पत्नी को किराए के मकान मे छोडकर काम की तलाश मे निकला। एक जगह गुरद्वारे में सेवा चल रही थी कुछ लड़कों को काम करते देखा। उनसे पूछा-कया मे यहाँ काम कर सकता हूं? लड़कों ने हां कहा तो मजदूर पूछा-तुम्हारे मालिक कहा हैं? लड़कों को शरारत सूझी बोले मालिक बाहर गया हे तुम बस काम पर लग जाओ हम बता देगे आज से लगे। मजदूर खुश हुआ और काम करने लगा। रोज सुबह समय से आता शाम को जाता पूरी मेहनत लगन से काम करता। ऐसे हफ्ता निकल गया। मजदूर ने फिर लड़कों से पूछा मालिक कब आयेंगे? लड़कों ने फिर हफ्ता कह दिया। फिर से हफ्ता निकल गया। मजदूर लडको से बोला- भैया आज तो घर पर खाने को कुछ नही बचा पत्नी बोली कुछ पैसे लाओगे तभी खाना बनेगा मालिक से हमें मिलवा दो। लड़कों ने बात अगले दिन तक टाल दी मगर मजदूर के जाते ही उन्हें अपनी गलती का एहसास होने लगा ओर उनहोने आखिर फैसला किया वो मजदूर को सब कुछ सच सच बता देगे ये गुरूदा्रे की सेवा हे यहाँ कोई मालिक नही ये तो हम अपने गुरू महाराज जी की सेवा कर रहे हे। अगले दिन मजदूर आया तो सभी लड़कों के चेहरे उतरे थे वो बोले अंकल जी हमें माफ कर दो हम अबतक आपसे मजाक कर रहे थे ओर सारी बात बता दी। मजदूर हंसा ओर बोला-मजाक तो आप अब कर रहे हो हमारे मालिक तो सचमुच बहुत अच्छे है। कल दोपहर मे हमारे घर आये थे पत्नी को 1 महीने की पगार ओर 15 दिनों का राशन देकर गए। कौन मालिक मजदूर को घर पर पगार देता है।  राशन देता हे सचमुच हमारे मालिक बहुत अच्छे हैं। यह कह कर वह फिर अपने काम पर मेहनत से जुट गया। लड़कों की समझ मे आ गया जो बिना स्वार्थ के गुरु की सेवा करता है; गुरू हमेशा उसके साथ रहते हैं और उसके दुख तकलीफ दूर करते रहते हैं।  तो बोलिए:  

जो बोले सो निहाल

सत श्री अकाल, 


सतनाम श्री वाहेगुरु 

बाबा जी की चरणों की धूल कण समान
WhatsApp के P9 ग्रुप से साभार (R P Singh Ldh. posted on 28th May 2017 at 12:29 PM) 

Saturday, 27 May 2017

दान हज़ारों गुना हो कर लौटता है पर इस नियत से दान मत करो

WhatsApp on 26 May 2017 at 18:16
राबिया बसरी की नज़र में आध्यात्मिक गुर 
चिड़ी चोंच भर ले गई नदी न घटयो नीर ;
दान दिये धन न घटे कह गये दास कबीर !
सुदूर देश में एक महिला संत हुई है-राबिया। बचपन काफी मुश्किलों में बीता पर परमात्मा की अपार अनुकम्पा से जवानी की दहलीज पर आते आते संत बन गई है।  

एक नगर के बाहर कुटिया बना कर के तो भजन-पाठ में जीवन बिताया करती है। बहुत ख्याति है राबिया की कि परमात्मा की परम अनुरक्ता है अतः लोग दूर दूर से आ कर के तो उससे अपनी समस्याओं का समाधान करवाया करते है। एक दफा दो फकीर राबिया की कुटिया पर पधारे है। बोले राबिया बहुत भूखे हैं। दो तीन दिन से कुछ भी नहीं खाया है। गर हो सके तो हमारे लिए भोजन की व्यवस्था कीजियेगा। ठीक है महाराज। यह कह कर के राबिया बर्तनों में भोजन तलाशना शुरू कर देती है। पर यह क्या केवल दो ही रोटिया घर में हैं। इतने में ही एक भिखारी कुटिया के बाहर से आवाज लगाता है। भूखा हूँ। कोई खाने को दो। राबिया वे दोनों ही रोटिया उस भिखारी को दे देती है।
फकीर सब नजारा अपनी आँखों से देख रहे हैं। राबिया के इस व्यवहार से काफी अचंभित हुए हैं। इस से पहले कि वे राबिया को कुछ कहें। छोटी सी एक लड़की हाथो में पोटली लिये दौड़ी दौड़ी राबिया की कुटिया में आती है कहती है ये अम्मा ने भेजी हैं। राबिया उस पोटली को खोलती हैं। इसमें तो रोटिया हैं। उन्हें गिनती है पर कुछ सोच कर के तो पोटली बंद कर उसी लड़की के हाथों ही उसे वापिस भिजवा देती हैं। 
फकीर फटी आंखों से राबिया की इस "अशिष्टता" को देख रहेहैं। आपस में बुदबुदा रहे हैं। लगता है कि हमें भोजन ही नहीं करवाना चाहती। इस से पहले कि वो राबिया को क्रोधपूर्वक कुछ कहें वह लड़की पोटली लिये पुनः कुटिया में आती है अम्मा ने भेजी है। राबिया फिर से उन्हें गिनती है ठीक है। उन रोटियों को फकीरों की सेवा में परोसती है। भोजन कीजिये महाराज। राबिया भोजन तो हम बाद में करेगे पहले हमे जो कुछ भी हुआ सब समझाओ। 
ठीक है महाराज। जब मैंने देखा कि घर में केवल दो ही रोटिया हैं तो मैं सोच में पड़ गई कि इन से क्या होगा एक एक रोटी अगर मैं आप दोनों को ही दे दूं तो उस से पेट क्या भरेगा? अगर दोनों रोटिया आप में से किसी एक को ही दे दूं तो दूसरा नाराज हो जायेगा। इतने में भिखारी आ गया मैंने सोचा कम से कम इस का तो पेट भरा जा सकता है। सो परमात्मा का नाम ले कर के वे दोनों रोटिया मैंने उसे दे दी। साथ ही साथ परमात्मा से प्रार्थना भी की कि हे देवाधिदेव सुना है कि तुम दिये दान का दस गुणा तो कम से कम अवश्य ही वापिस किया करते हो। सो आज मुझे तुरंत ही इस दान का फल प्रदान कीजियेगा। वह लड़की पहली बार जब रोटिया ले कर आई तो गिनने पर पाया कि केवल 18 ही रोटिया हैं। जब कि दो का दस गुणा तो बीस होता है। मैंने सोचा क्या परमात्मा के नियत किये विधान में भी कोई गलती हो सकती है?अवश्य ही उस महिला से गलती लग गई होगी। सो पोटली ज्यों कि त्यों वापिस कर दी। अब क़ी बार जब पुनः पोटली में गिनती क़ी है तो पूरी बीस क़ी बीस रोटिया ही हैं। परमात्मा क़ी शुक्रगुजार हूँ क़ि उसने मेरी लाज रख ली क़ि जो द्वार पर आये आप लोगो को भूखा नहीं जाने दिया। धन्य हो राबिया तुम और तुम्हारी ईश्वरभक्ति! 
साधकजनों मानवता की भलाई के कार्यो में दिल खोल कर दान दिया कीजियेगा। ये परमात्मा का विधान है क़ि वह दान देने वाले को कभी किसी का मोहताज नहीं रहने देता। संत महात्मा फ़रमाते है क़ि वह दिये दान का दस गुणा तो कम से कम अवश्य ही वापिस किया करता है। नि:स्वार्थ भाव से दिये दान को कभी कभी वह हजारो-लाखो गुणा कर के भी लौटाया करता है गर उसकी रजा हुई तो। अतः नि:स्वार्थ भाव से जन-कल्याण के कार्यो में खूब दान दीजियेगा। वापिस मिलेगा यह सोच कर नहीं। यह तो उस पर निर्भर है क़ि वह किस कर्म का फल कब और किस काल में दे। 
मनमीत सिंह (9916324232) ने Sikh World नाम के वाटसअप ग्रुप में 26 मई 2017 को शाम 18:16 पर पोस्ट किया। 

Saturday, 8 April 2017

मुगल शासन की नींव रखने में हम सब बने थे बाबर के सहायक?

केवल तीन दिनों में ही राणा सांगा की सेना मार दी गई थी 
वाटसएप: 8 अप्रैल 2017: (Divine way of life)::
Divine way of life
बाबर और राणा सांगा में भयानक युद्ध चल रहा था।
बाबर ने युद्ध में पहली बार तोपों का इस्तेमाल किया था। उन दिनों युद्ध केवल दिन में लड़ा जाता था, शाम के समय दोनों तरफ के सैनिक अपने अपने शिविरों में आराम करते थे। फिर सुबह युद्ध होता था !
लड़ते लड़ते शाम हो चली थी,  दोनों तरफ के सैनिक अपने शिविरों में भोजन तैयार कर रहे थे ।
बाबर टहलते हुए  अपने शिविर के बाहर खड़ा दुश्मन सेना के कैम्प को देख रहा था तभी उसे राणा सांगा की सेना के शिविरों से कई जगह से धुँआ उठता दिखाई दिया।
बाबर को लगा कि दुश्मन के शिविर में आग लग गई है, उसने तुरंत अपने सेनापति मीर बांकी को बुलाया और पूछा कि देखो दुश्मन के शिविर में आग लग गई है क्या? शिविर में पचासों जगहों से धुँआ निकल रहा हैं।
सेनापति ने अपने गुप्तचरों को आदेश दिया-जाओ पता लगाओ कि दुश्मन के सैन्य शिविर से इतनी बड़ी संख्या में इतनी जगहों से धुँओ का गुब्बार क्यों निकल रहा है?
गुप्तचर कुछ देर बाद लौटे उन्होंने बताया हुजूर दुश्मन सैनिक सब हिन्दू हैं वो एक साथ एक जगह बैठकर खाना नहीं खाते। सेना में कई जात के सैनिक है जो एक दूसरे का छुआ नहीं खाते इसलिए सब अपना अपना भोजन अलग अलग बनाते हैं अलग अलग खाते हैं। एक दूसरे का छुआ पानी तक नहीं पीते।
यह  सुनकर बाबर खूब जोर से हँसा काफी देर हँसने के बाद उसने अपने सेनापति से कहा .मीर बांकी फ़तेह हमारी ही होगी !
ये क्या हमसे लड़ेंगे, जो सेना एक साथ मिल बैठकर खाना तक नहीं खा सकती, वो एक साथ मिलकर दुश्मन के खिलाफ कैसे लड़ेगी? बाबर सही था।
तीन दिनों में राणा सांगा की सेना मार दी गई और बाबर ने मुग़ल शासन की नीव रखी।
भारत की गुलामी का कारण जातिवाद छुआछूत भेदभाव था जो आज भी जारी है।

🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹  Divine way of life ग्रुप से साभार 
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Friday, 31 March 2017

विश्वास की शक्ति: जब उसने भगवान को देखा

.........और परमात्मा को ढूंढने निकल पड़ा
सोशल मीडिया: 30 मार्च 2017: (Classique Melodies//व्हाटसअप ग्रुप//आराधना टाईम्स)::
एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर परमात्मा से मिलने की जिद किया करता था। उसे परमात्मा के बारे में कुछ भी पता नहीं था पर मिलने की तमन्ना, भरपूर थी।उसकी चाहत थी कि एक समय की रोटी वो परमात्मा के साथ खाये।
1 दिन उसने 1 थैले में 5- 6 रोटियां रखीं और परमात्मा को ढूंढने निकल पड़ा।
चलते-चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया।
उसने देखा नदी के तट पर एक बुजुर्ग बूढ़ा बैठा है,जिनकी आँखों में बहुत गजब की चमक थी, प्यार था,और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहाँ बैठा उसका रास्ता देख रहा हो।
वो 6 साल का मासूम बालक बुजुर्ग बूढ़े के पास जा कर बैठ गया,अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया।और उसने अपना रोटी वाला हाथ बूढे की ओर बढ़ाया और मुस्कुरा के देखने लगा,बूढे ने रोटी ले ली, बूढ़े के झुर्रियों वाले चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी आ गई आँखों में ख़ुशी के आंसू भी थे,,,,
बच्चा बूढ़े को देखे जा रहा था, जब बूढ़े ने रोटी खा ली बच्चे ने एक और रोटी बूढ़े को दी।
बूढ़ा अब बहुत खुश था। बच्चा भी बहुत खुश था। दोनों ने आपस में बहुत प्यार और स्नेह केे पल बिताये।
जब रात घिरने लगी तो बच्चा इजाज़त ले घर की ओर चलने लगा वो बार- बार पीछे मुड़ कर देखता ! तो पाता बुजुर्ग बूढ़ा उसी की ओर देख रहा था।
बच्चा घर पहुँचा तो माँ ने अपने बेटे को आया देख जोर से गले से लगा लिया और चूमने लगी,बच्चा बहुत खुश था। माँ ने अपने बच्चे को इतना खुश पहली बार देखा तो ख़ुशी का कारण पूछा, तो बच्चे ने बताया!
माँ.....आज मैंने परमात्मा के साथ बैठ क्ऱ रोटी खाई,आपको पता है उन्होंने भी मेरी रोटी खाई,,,माँ परमात्मा बहुत बूढ़े हो गये हैं,,,मैं आज बहुत खुश हूँ माँ
उस तरफ बुजुर्ग बूढ़ा भी जब अपने गाँव पहुँचा तो गाँव वालों ने देखा बूढ़ा बहुत खुश है,तो किसी ने उनके इतने खुश होने का कारण पूछा????
बूढ़ा बोला-----मैं 2 दिन से नदी के तट पर अकेला भूखा बैठा था....मुझे पता था परमात्मा आएंगे और मुझे खाना खिलाएंगे।
आज भगवान आए थे, उन्होंने मेरे साथ बैठ कर रोटी खाई मुझे भी बहुत प्यार से खिलाई,बहुत प्यार से मेरी ओर देखते थे, जाते समय मुझे गले भी लगाया---परमात्मा बहुत ही मासूम हैं बच्चे की तरह दिखते हैं।
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इस कहानी का अर्थ बहुत गहराई वाला है।

असल में बात सिर्फ इतनी है कि दोनों के दिलों में परमात्मा के लिए प्यार बहुत सच्चा है

और परमात्मा ने दोनों को, दोनों के लिये, दोनों में ही(परमात्मा) ने  खुद को भेज दिया।

जब मन परमात्मा भक्ति में रम जाता है तो हमें हर एक में वो ही नजर आता है।

परमात्मा सदा हमारे करीब है बहुत ज्यादा करीब है,हमारे आस-पास वो ही वो रहता है।

जब हम उसके दर्शन को सही मायनो में तरसते हैं तो हमें हर जगह वो ही वो दिखता है,हर एक में वो ही दिखता है। 

Thursday, 30 March 2017

समस्तीपुर में आनन्द मार्ग का सेमिनार

अवधूतिका आनन्द चितप्रभा और मृदुला दीदी ने दिए सवालों के जवाब 
समस्तीपुर: 29 मार्च 2017: (कार्तिका//आराधना टाईम्स):: 
मानव जीवन बहुत अजीब सा है। साधना की तरफ आसानी से नहीं बढ़ता। इसे साधने के लिए नियमित साधना करना आवश्यक है। उच्च जीवन की तरफ ले जाने वाली सात्विक दिनचर्य और साधना के इस भाव को दृढ़ बनाये रखने के लिए आनन्द मार्ग में सेमिनारों का आयोजन समय समय पर अलग अलग स्थाननपर होता रहता है।   इन सेमिनारों में जहाँ समाज में  उतपन्न समस्यायों की चर्चा होती है वहीँ मानव जीवन को इन सभी कठिनाईयों का सामना करने के काबिल बनाने वाली साधना पद्धति को दृढ़ करने की  होतीहै।
आज समस्तीपुर भुक्ति के हिन्दुस्तान न्यूज कार्यालय में नारी सशक्तिकरण पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें भुक्ति के सशक्त महिलाओ ने अपना अपना वकतव्य दिया ।आनन्दमार्ग महिला कल्याण विभाग की ओर से अवधूतिका आनन्द चितप्रभा आचार्या ने भी अपनी बातें सभी के सामने रखीं तथा मृदुला दीदी ने सभी लोगों को महिला कल्याण विभाग द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यशाला में आने हेतु निमन्त्रण दिया। इस सब के प्रसार के लिए दादा केवल सिन्हा ने सक्रिय योगदान दिया।

Monday, 29 August 2016

पार्वती ने शिव से उसे बचाने का अनुरोध किया

मनुष्य खतरे को भी अनदेखा कर देता है.....।
एक इंसान घने जंगल में भागा जा रहा था।
शाम हो गई थी। 
अंधेरे में कुआं दिखाई नहीं दिया और वह उसमें गिर गया।
गिरते-गिरते कुएं पर झुके पेड़ की एक डाल उसके हाथ में आ गई।
जब उसने नीचे झांका, तो देखा कि कुएं में 
चार अजगर मुंह खोले उसे देख रहे हैं
और जिस डाल को वह पकड़े हुए था, उसे दो चूहे कुतर रहे थे।
इतने में एक हाथी आया और पेड़ को जोर-जोर से हिलाने लगा।
वह घबरा गया और सोचने लगा कि हे भगवान अब क्या होगा।
उसी पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता लगा था।
हाथी के पेड़ को हिलाने से मधुमक्खियां उडऩे लगीं और
शहद की बूंदें टपकने लगीं।
एक बूंद उसके होठों पर आ गिरी।
उसने प्यास से सूख रही जीभ को होठों पर फेरा, 
तो शहद की उस बूंद में गजब की मिठास थी।
कुछ पल बाद फिर शहद की एक और बूंद उसके मुंह में टपकी।
अब वह इतना मगन हो गया कि अपनी मुश्किलों को भूल
गया।
तभी उस जंगल से शिव एवं पार्वती अपने वाहन से गुजरे।
पार्वती ने शिव से उसे बचाने का अनुरोध किया।
भगवान शिव ने उसके पास जाकर कहा-मैं तुम्हें बचाना चाहता हूं। 
मेरा हाथ पकड़ लो।
उस इंसान ने कहा कि एक बूंद शहद और चाट लूं, फिर चलता हूं।
एक बूंद, फिर एक बूंद और हर एक बूंद के बाद अगली बूंद का इंतजार।
आखिर थक-हारकर शिवजी चले गए।
वह जिस जंगल में जा रहा था,
वह जंगल है दुनिया
और
अंधेरा है अज्ञान-
पेड़ की डाली है-आयु
दिन-रात रूपी चूहे उसे कुतर रहे हैं।
घमंड का मदमस्त हाथी पेड़ को उखाडऩे में लगा है।
शहद की बूंदें सांसारिक सुख हैं, जिनके कारण 
मनुष्य खतरे को भी अनदेखा कर देता है.....।
यानी, सुख की माया में खोए मन को भगवान भी नहीं बचा सकते....!!
परमपाल सिंह ने शिरोमणि खालसा पंचायत ग्रुप में 27 अगस्त 2016 को 22:17 पर पोस्ट किया