Thursday, 2 April 2026

प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करके हुए प्रार्थना की

 प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 02 APR 2026 10:48AM by PIB Delhi

सुभाषितम् साझा करते हुए भगवान हनुमान जी से प्रार्थना की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भगवान हनुमान जी भक्ति, शक्ति और अटूट समर्पण के अद्वितीय प्रतीक हैं। श्री मोदी ने कहा, "महाबली की कृपा से उनके सभी भक्तों में साहस और सकारात्मकता का संचार हो।"

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

“मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥”

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर लिखा:

“भगवान हनुमान जी भक्ति, शक्ति और अटूट समर्पण के अद्वितीय प्रतीक हैं। महाबली की कृपा से उनके सभी भक्तों में साहस और सकारात्मकता का संचार हो।

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥”

Wednesday, 1 April 2026

परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई

प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 01 APR 2026 10:37AM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए स्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की 

नई दिल्ली: 01 अप्रैल 2026:(PIB Delhi//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज परम पूज्‍य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक कल्याण और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान से देश की हर पीढ़ी निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित होती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

“पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः

स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।


नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः

परोपकाराय सतां विभूतयः॥”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“मानवता के अनन्य उपासक परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी को उनकी जन्म-जयंती पर कोटि-कोटि नमन! शिक्षा, समाज कल्याण और अध्यात्म के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान देश की हर पीढ़ी को निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः

स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।


नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः

परोपकाराय सतां विभूतयः॥”


https://x.com/narendramodi/status/2039190669550612658?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2039190669550612658%7Ctwgr%5E7bd5b509296f5f291e6b8fe19ac406aaecc449f6%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.pib.gov.in%2FPressReleasePage.aspx%3FPRID%3D2247496reg%3D3lang%3D2****//पीके/केसी/एसकेजे/एम//(रिलीज़ आईडी: 2247496) 

Thursday, 19 March 2026

नवरात्रि साधना के त्यौहार का पूरा वैज्ञानिक आधार है

Media Link Team on 19th March 2026 at 02:30 AM 

नौ दिन-नौ रात की साधना शक्ति संचय का ही त्यौहार है

चंडीगढ़: 19 मार्च 2026: (मीडिया लिंक टीम//आराधना टाईम्स डेस्क)::

नवरात्रि का हमेशां से विशेष महत्व रहा है। मौसम के लिहाज़ से भी और अंतरकी साधना के लिए भी। नवरात्रि के पर्व को पूरी आस्था के साथ मनाया जाए तो इस गहरे असर महसूस भी होने लगते हैं जो किसी चमत्कार से कम नहीं होते। शरीर की ऊर्जा भी बढ़ती है और मन की ऊर्जा भी। इस सब से अंतरात्मा बहुत बलवान होने लगती है। 

आपको याद दिला दें कि हिंदू पंचांग में चार नवरात्रि आती हैं, पर दो मुख्य रूप से मनाई जाती हैं:  चैत्र नवरात्रि (मार्च‑अप्रैल, नववर्ष की शुरुआत)  शारदीय नवरात्रि (सित‑अक्टूबर, दुर्गा‑पूजा)  अन्य दो गुप्त नवरात्रि (आषाढ़ और माघ) तंत्र‑साधकों में खास महत्व रखती हैं। 

न चारों को मिलाकर साल में चार बार आत्म‑शोधन, ऊर्जा‑संतुलन और नई शुरुआत का मौका मिलता है। यही है सबसे बड़ा लाभ।  पहला नवरात्रि का संदेश “शुरुआत”चैत्र नवरात्रि वसंत के साथ आती है, जब प्रकृति नींद से जागती है। 

पहला दिन माँ शैलपुत्री को समर्पित होता है। पर्वत‑की‑बेटी, स्थिरता और धैर्य की प्रतीक के रूप में ज़ेहन में उभरती है। इस विशेष संदेश यह है कि जीवन में जब सब कुछ बिखरा‑बिखरा लगे तो जमीन‑से‑जुड़ी नींव बनाओ। छोटे‑छोटे व्रत (एक‑दो घंटे भोजन‑विराम) और सादा प्रार्थना‑पाठ दिमाग को “डिजिटल‑डिटॉक्स” देते हैं। स्वास्थ्य छ होने लगता है। इसके साथ ही निराशा दूर होने लगती है कि और स्पष्टता सुदृढ़ होने लगती है। दूसरा नवरात्रि का  संदेश भी बहुत अहम है। इससे “संकल्प” मज़बूत होने लगता है। शारदीय नवरात्रि का पहला दिन माँ शैलपुत्री ही है पर यहाँ मौसम शरद‑ऋतु का परिपक्व‑प्रकाश लाता है। इस से पर्यावरण में जादुई तबदीली का अहसास होने लगता है। अब उद्देश्य सिर्फ़ शुरू‑नहीं, बल्कि लक्ष्य‑पर‑कदम रखने की याद भी दिलाता है। नवरात्रि के दिनों में आस्था और पूजा अर्चना से ऊर्जा की बढ़ोतरी का यह सिलसिला लगातार बना रहता है। इस आंतरिक विकास की चमक धीरे धीरे बहरी जीवन में भी दिखाई देने लगती है।   

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संदेश: अंदर के डर‑को‑पहचानो, फिर ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) की तरह संयम‑और‑साधना अपनाओ। इस जीवनशैली से इतना कुछ मिलेगा कि आप उस ऊंचाई को सोच भी नहीं पाएंगे। गौरतलब है कि उपवास से शरीर‑में‑इंसुलिन‑सेंसिटिविटी सुधरती है, मन‑में‑स्थिरता आती है और डिप्रेशन दूर होने लगता है। इसके परिणाम स्वरूप शक्ति का पहला कदम बढ़ता है और फिर यह एक सिलसिला बन जाता है। 

पूजा‑पाठ‑उपवास और साधना जो रहस्य खोलते हैं वे बहुत गहरे हैं लेकिन नवरात्रि रखने से उनकी समझ सहजता से आने लगती है। नियमित श्वास‑प्रश्वास (दीया‑जप) → पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय, तनाव‑हॉर्मोन घटते हैं। अंतर्मन में जो नई ऊर्जा जागने लगती है इसका अहसास उसी को होता जो इसका अनुभव कर पाता है। नवरात्रि के फायदे और लाभ पुस्तक पढ़कर या किसी से सुनकर नहीं बल्कि स्व अनुभूति से ही समझे जा सकते हैं। इनकी अभिव्यक्ति भी धीरे धीरे बाहर आने लगती है। 

नौ‑रात्रि‑उपवास (फल‑आहार या निराहार) रखने से ऑटोफैजी बढ़ती है, शरीर‑के‑‘खराब‑सेल’ साफ होते हैं। शारीरिक‑रिफ्रेश महसूस होता है। मानसिक‑हल्कापन आने लगता है।  देवी‑के‑नौ‑रूप → हर रूप (धैर्य, शक्ति, ज्ञान…) को रोज‑एक‑आइना मानो; आत्म‑मंथन से “मैं कौन हूँ/क्या चाहता हूँ” साफ होता है।  मानसिक दृष्टि साफ़ स्पष्ट होने लगती है। जल्दी किए कोई आपको धोखा नहीं दे सकता। धोखेबाज़ लोग आपके सामने आने से घबराने लगेंगे। इस साधना के बहुत से दुसरे फायदे भी  होते हैं। 

इन्हीं दिनों सामूहिक गरबा/जागरण के आयोजन का भी अलग ही जादू होता है। इससे → समुदाय‑सिंक्रोनाइज़ेशन, अकेलेपन‑का‑विरोध सूक्ष्म ढंग से होने लगता है और डोपामाइन‑बूस्ट होने लगता है। जिन्होंने कभी गरबा में अभाग लिया है वे इसे अच्छी तरह महसूस भी कर सकते हैं। 

इन चारों स्तंभों से निराशा → आशा, अस्थिरता → केंद्रित शक्ति का परिवर्तन वैज्ञानिक‑आधारित भी है। उपवास‑से‑मेटाबॉलिक‑रिसेट, जप‑से‑माइंडफुलनेस, समूह‑से‑ऑक्सीटोसिन।  ब्लॉग‑के‑लिए एक त्वरित विज़ुअल (नीचे उत्तरबोधि‑मुद्रा की तरह, यहाँ देवी‑के‑रूप का एक सादा सा कोलाज़ दिखाया गया है। पहले दो नवरात्रि के मुख्य प्रतीक: शैलपुत्री का पर्वत‑पृष्ठभूमि और ब्रह्मचारिणी का ज्योति‑दीया। आप ध्यान से देख सकें टोंटो आपको इसका सम्मोहन पहली झलक से ही महसूस होगा।  

कुल मिला कर सार यह कि: नवरात्रि सिर्फ़ व्रत‑त्यौहार नहीं; बल्कि वास्तव में यह साल‑में‑चार‑बार मिलने वाला मानसिक‑डिटॉक्स है। पहला नवरात्रि “जमीन‑बनाओ”, दूसरा “चलो‑आगे”, और नौ‑दिवसीय क्रम मिल‑जुलकर जीवन के गहरे रहस्यों—संतुलन, संकल्प, शुद्धि—को खोलता है, निराशा को आशा में, डिप्रेशन को शक्ति में बदलता है।  

नवरात्रि के नो दिनों के रहस्यों पर बहुत समय तक चर्चा की जा सकती है। इसके मनन से भी एक अलग किस्म का आनंद महसूस होता है। देवी मां कृपा करे और आप अधयत्मिक साधना के रंग में रंगें रहें। 

Monday, 16 February 2026

लुधियाना: आगामी सात दिवसीय श्री मद्भागवत कथा

Emailed on Monday 16th February 2026 at 5:45 PM Regarding Bhagwat Katha Week Event 
बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और उसके दुष्प्रभावों पर होगी विशेष चर्चा

लुधियाना: 16 फरवरी 2026: (मीडिया लिंक रविंद्र/ /आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::


भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं संस्कृति मंच द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री मद्भागवत कथा का ऐलान आज नागपाल रीजेंसी होटल फिरोजपुर लुधियाना में आयोजित प्रेस वार्ता में किया गया।

प्रेस वार्ता की अगुवाई संस्थान के प्रतिनिधि स्वामी गुरुकृपानंद जी संयोजक दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान लुधियाना , स्वामी प्रकाशानंद जी, साध्वी कपिला भारती जी, साध्वी मीनाक्षी भारती एवं साध्वी मनेंद्रा भारती जी ने संयुक्त रूप से की।

स्वामी गुरुकृपानंद जी ने बताया कि 19 से 25 फरवरी 2026 तक सेक्टर 32 A स्थित मार्किट ग्राउंड में यह विशाल श्री मद्भागवत कथा आयोजित होगी। प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाला यह कार्यक्रम निःशुल्क होगा व हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

कथा दौरान बच्चों के लिए विशेष सत्र
इस कथा का विशेष फोकस आधुनिकता की दौड़ में बच्चों के खेल कूद का मैदान अब मोबाइल फोन बनता जा रहा है, जो तनाव का मुख्य कारण बनता जा रहा है, इस विषय पर होगा।

बच्चों के लिए बढ़ते स्क्रीन टाइम और उसके दुष्प्रभावों पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होगा।
स्वामी गुरुकृपानंद जी ने हेल्पलाइन नंबर 9814002124 जारी किया। जो स्कूल या बच्चों के अभिभावक इस नंबर पर रजिस्ट्रेशन करवाएंगे उनके लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होगा।

साध्वी मनेंद्रा  भारती जी ने कहा सभी श्रद्धालुओं से शामिल होने होने का विशेष अनुरोध करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जीवनचरित हर आयु वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह कथा मन, विचार और जीवन को पवित्र करने का माध्यम है। उन्होंने सभी परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने परिजनों और मित्रों के साथ इस आध्यात्मिक महोत्सव में अवश्य पधारें।

उन्होंने बताया कि विश्वविख्यात कथा व्यास साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी कथा का वाचन करेंगी। साध्वी जी देश-विदेश में अपने ज्ञान, वाणी और आध्यात्मिकता से लाखों लोगों को प्रेरित कर चुकी हैं। कथा के माध्यम से वह भगवान श्री कृष्ण के संदेशों को आधुनिक समाज की चुनौतियों—जैसे बच्चों में बढ़ती स्क्रीन टाइमिंग,नशा-निवारण, कन्या भ्रूण हत्या, नारी संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण—के संदर्भ में प्रस्तुत करेंगी।

17 फरवरी को निकलेगी 1100 महिलाओं की मंगल कलश यात्रा

साध्वी जी ने बताया कि कार्यक्रम से दो दिन पूर्व 17 फ़रवरी 2026 को 1100 महिलाओं की भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा कथा स्थल से शुरू होकर सेक्टर 32 A,और 33 के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कथा स्थल तक पहुँचेगी। यह यात्रा विश्व शांति और सामाजिक सौहार्द का संदेश देगी।

Friday, 6 February 2026

जादू की तरह फायदा पहुंचाती हैं हस्त मुद्राएं

Rector Kathuria on Thursday 05th February 2026 at 20:28 Regarding Finger Yoga  or Hand Yoga Regarding 

लेकिन किस योग्य मार्गदर्श्क की देखरेख में ही करना उचित होगा


लुधियाना
:6 फरवरी 2025: (रेक्टर कथूरिया//मीडिया लिंक रविंदर//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

उम्र बढ़ती जा रही है और समय हाथ से निकला जा रहा है। ज़िंदगी की गर्दिश और संघर्ष ने बहुत कुछ दिखाया भी समझाया भी लेकिन फिर भी उलझनें मन को उलझाती रही। कई बार ज़िंदगी निरथर्क भी लगने लगती। स्वास्थ्य बिगड़ा तो मुश्किलें और बढ़ गई। अंग्रेज़ी मेडिकल सिस्टम की दवाओं से तो मन ही चलने लगा। इन दवाओं से अगर एक मर्ज़ ठीक होती तो दस नई बीमारियां और लगने लगती। ऊपर से यह सिस्टम महंगा भी बहुत है। इस हालात में चिंता भी बहुत हुई लेकिन इसी चिंता का सामना करते करते चिंतन भी बढ़ा। मेडिटेशन और अच्छी लगने लगी। सेहत ज़्यादा बिगड़ी तो तिब्बती इलाज प्रणाली की शरण में जाने का मन हुआ। तिब्बत वाले मेडिसिन सिस्टम ने मौत के मुँह से निकालने का चमत्कार कर दिखाया। जान बच गई लेकिन साथ में बुढ़ापे की अपनी अलह दुश्वारियां होती हैं। उम्र 68 को पार करने लगी तो भविष्य अंधेरा भी लगने लगा। कई छोटी छोटी मुश्किलें भी अभी बाकी हैं। इसके बाद अच्छी,किस्मत से मिला हस्त मुद्रा योग साधना का ज्ञान। 

सही ढंग तरीका तो यह है कि इस साधना को ठीक से बैठ कर करना चाहिए और रीढ़ बिलकुल सीढ़ी रहे। लेकिन बुढ़ापे वाली उम्र और स्वास्थ्य कारणों से ज़्यादा समय तक सीधे बैठना कठिन हो जाता। इस लिए तलाश कर रहा है कि लेट कर कौन कौन सी मुद्रा संभव है। 

छह दशक से अधिक की उम्र अर्थात 68 प्लस की उम्र में लेट कर की जाने वाली हस्त मुद्रा के लिए ज्ञान मुद्रा एक अच्छा विकल्प है। यह मुद्रा न केवल लेट कर की जा सकती है, बल्कि यह ध्यान और श्वास अभ्यास के लिए भी बहुत उपयोगी है। इस से बहुत फायदा भी हुआ। एक तो जल्दी से नींद आने लगी। दूसरा फायदा यह कि मन भी शांत होने लगा। विचारों पर नियंत्रण भी बढ़ने लगा और बार बार इधर उधर भागता मन भी काबू में आने लग। 

विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन करते हुए बताया कि ज्ञान मुद्रा के अलावा, आप शून्य मुद्रा (चिन मुद्रा) भी लेट कर कर सकते हैं। इसमें आप अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें और अपने अंगूठे को अपनी सूचक अँगली के साथ जोड़ें। यह मुद्रा भी ध्यान और श्वास अभ्यास के लिए बहुत उपयोगी है।

इसके अलावा, आप प्राण मुद्रा भी लेट कर कर सकते हैं। इसमें आप अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें और अपने अंगूठे को अपनी सूचक अँगली और मध्यमा अँगली के साथ जोड़ें। यह मुद्रा ऊर्जा को बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करती है।

फ़िलहाल इतना ही लेकिन एक बात ज़रूर ध्यान रखें कि यदि कोई स्वास्थ्य समय हो तो किसी योग एक्सपर्ट से मार्गदर्शन ज़रूर ले लें। इन मुद्राओं को करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना उचित होगा, खासकर अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है। गलत मुद्रा अपनाने से नुकसान की संभावना भी बनी रहती है। 

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Saturday, 24 January 2026

केवल वेदलक्षणा गोमाता के घी एवं पंचगव्य से हों धार्मिक आयोजन

poonam rajpurohit Manvtadharmi on 24th January 2026 at 5:11 PM Regarding Indigenous Cow or Indian Cow

जनसंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता पूनम राजपुरोहित ने फिर उठाई आवाज़ 


लुधियाना: 24 जनवरी 2026:(मीडिया लिंक रविंदर//आराधना टाईम्ज़ डेस्क):: 

सनातन धार्मिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान केवल वेदलक्षणा गोमाता के घी एवं पंचगव्य से ही हो। जनसंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता पूनम राजपुरोहित मानवतधर्मी ने यह आह्वान एक प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए किया है। उन्होंने सावधान भी किया कि भैंसादि तथा बाजार के चर्बी युक्त अप्रमाणिक घी से हवन,यज्ञ,पूजादि अनुष्ठान धर्म के नाम पर धोखा धड़ी बड़े पैमाने पर जारी है। 

अखिल भारतीय जनसंघ के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री श्री पूनम राजपुरोहित मानवताधर्मी ने तीन दिवसीय पंजाब प्रवास के दौरान हवन,यज्ञ आदि धार्मिक-अध्यात्मिक अनुष्ठानों में केवल और केवल वेदलक्षणा गोमाता के घी के ही उपयोग का आह्वान किया है! उन्होंने स्पष्ट कहा है कि "बाजार के मिलावटी एवं चर्बी युक्त अप्रमाणिक घी से हवन,यज्ञादि अनुष्ठान सरासर धर्म के नाम पर धोखा है! ऐसे अनुष्ठानों के सुखद,शान्तिमय एवं समृद्धि युक्त परिणाम नहीं मिलते हैं! अपितु चर्बी युक्त मिलावटी तथा भैंसादि के घी से किए गए अनुष्ठानों से प्रेत्मात्माओं तथा नकारात्मक शक्तियों को पुष्टि मिलती है!"

देश के जाने-माने प्रखर विचारक-चिंतक श्रीराजपुरोहित ने इस विषय पर बेलाग व बेबाक स्वर में सनातन के शीर्ष साधु-संतो,आचार्यों एवं धार्मिक कर्मकांडिय विद्वानों से एक सर्वसम्मत मत घोषित करने की मांग की है!

तथ्य,तर्क व प्रमाण के साथ सनातन मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते रहे श्रीराजपुरोहित ने प्रश्न किया है कि" वर्तमान में सनातन धर्मवलम्बियों का करोड़ों-अरबों का धन,समय और श्रमशक्ति अनुष्ठानों में व्यय होकर भी अपेक्षित सकारात्मक परिणाम क्यों नहीं आ रहे हैं? अपितु ठीक विपरीत चंहूऔर मानव समाज एवं विश्व जगत में ईर्ष्या-द्वेष,वैमनस्य,आपाधापी, दूसरों के अधिकारों का अपहरण,अराजकता,आंतकवाद जैसी अमानवीय प्रवतियाँ लगातार बढ़ती ही जा रही है! आखिर इतने धार्मिक-अध्यात्मिक अनुष्ठानों के बाद भी यह विकट स्थितियां क्यों खड़ी है? श्रीराजपुरोहित कहते हैं कि "इस सनातन क्षति, गिरावट एवं अवमुल्यन के पीछे मूल कारण धार्मिक-आध्यात्मिक वैदिक अनुष्ठानों में वेदलक्षणा गोमाता के घी और पंचगव्य का उपयोग नहीं होना है!"

जनसंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता श्रीराजपुरोहित तीन दिवसीय पंजाब प्रवास में अनेक साधु-संतो से मिलेंगे! देश के भक्ति रस के अग्रणी महापुरुष गोसेवा मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष परम पूज्य संत श्री कृष्णानंदजी महाराज 'भूरी वालों' के सानिध्य में कई सामाजिक,सांस्कृतिक,धार्मिक,

आध्यात्मिक और संकीर्तन कार्यक्रमों में भाग लेंगे! 

पिछले तीन-चार दशकों से सनातन धर्म सम्बंधित कुरीतियों, सनातन विरोधी नीतियों,सनातन को कमजोर करने वाले तत्वों एवं सनातन समाज की समसामयिक ज्वलंत समस्याओं को पूरजोर से उठाते रहने वाले श्रीराजपुरोहित ने " हर हाल में सनातन वैदिक पूजा,आरती,दीपक, ज्योति एवं यज्ञादि अनुष्ठानों को शुद्ध वेदलक्षणा गोमाता के घी से सम्पन्न करवाने के लिए राष्टव्यापी अभियान का आह्वान किया है। 

उन्होंने शीघ्र ही परम पूज्य सर्वश्री चारों शंकराचार्यों, देश के प्रमुख अखाडा परिषदों,महा मंडलेश्वरों,मठाधीसों,बड़े मंदिरों के पुजारियों और सनातन विद्वानों को विशेष पत्र लिखकर तथा प्रत्यक्ष मिलकर धार्मिक-आध्यत्मिक कार्यों में केवल और केवल भारतीय देशी गाय के घी एवं पंचगव्य का ही उपयोग करने में सहयोग व आशीर्वाद के प्रयासों में तेजी लाने की घोषणा की है!

विशेष घोषणा:

अग्रणी महान गोसेवक-गोभक्त जीवंट व्यक्तित्व-कृतित्व रुपी लाखों लोगों के आदर्श श्रीराजपुरोहित ने कहा कि "वेदलक्षणा गोमाता एवं उनके पंचगव्य की महिमा अपार है। गाय और पंचगव्य के बिना सनातन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। गोसंरक्षण,गोपालन,गोसंवर्धन तथा पंचगव्य परिषकरण व विनियोग से ही धर्म,मानव जाति,प्रकृति व पर्यावरण और सृष्टि सुरक्षित रह सकती है। गाय के बिना उन्नति,स्वास्थ्य एवं मानव कल्याण की बात करना ही अर्थहीन है। वेदलक्षणा गाय बचेगी तो ही मानव,मानवता और सृष्टि बचेगी।"

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का विशेष आयोजन

Aneeta Sharma on Friday 23rd January 2026 at 15:56 AM Regarding Basant  Panchami 

वीर हकीकत राय की शहादत को श्रद्धांजलि — अनिता शर्मा  


लुधियाना
: 23 जनवरी 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

तक्षिला (TAKSHILA) करियर अकादमी, अगापी ग्लोबल में हुआ कार्यक्रम आयोजित जिसमें लोगों को याद दिलाया गया कि आज पैसे के युग में सिर्फ मां लक्ष्मी की पूजा की तरफ न ध्यान दें बल्कि मां सरस्वती को भी यद् रखें तभी मिलेगी असली सफलता। 

नवकिरण महिला कल्याण एसोसिएशन भी इस विशेष आयोजन में शामिल हुई।  इस सुअवसर पर वीर हकीकत राय की शहीदी को भी याद किया गया।  धर्म के लिए दिए गए इस बलिदान को याद कृते हुए कहा गया कि इस बलिदान को याद रखने की आवश्यकता बहुत अधिक है। 

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर नवकिरण महिला कल्याण एसोसिएशन की ओर से टाकशिला (TAKSHILA) करियर अकादमी, अगापी ग्लोबल में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ पारंपरिक सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का नेतृत्व समाज सेविका एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़ी शख्सियत आर्किटेक्ट अनिता शर्मा ने किया। इस अवसर पर धर्म और सत्य की रक्षा हेतु अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर हकीकत राय की शहादत को भी गहरे सम्मान और श्रद्धा के साथ स्मरण किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनिता शर्मा ने कहा,“बसंत पंचमी ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यह पर्व समाज में नए विचारों, उत्साह और खुशियों के रंग भरने का संदेश देता है।”

उन्होंने युवाओं और महिलाओं से शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान भी किया।

इस कार्यक्रम में संस्था की सदस्य शोभिता, मनजीत, अमन सहित अन्य सहयोगियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और आयोजन को सफल बनाया।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं और मंगलकामनाएं प्रेषित की गईं।