Saturday, 24 January 2026

केवल वेदलक्षणा गोमाता के घी एवं पंचगव्य से हों धार्मिक आयोजन

poonam rajpurohit Manvtadharmi on 24th January 2026 at 5:11 PM Regarding Indigenous Cow or Indian Cow

जनसंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता पूनम राजपुरोहित ने फिर उठाई आवाज़ 


लुधियाना: 24 जनवरी 2026:(मीडिया लिंक रविंदर//आराधना टाईम्ज़ डेस्क):: 

सनातन धार्मिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान केवल वेदलक्षणा गोमाता के घी एवं पंचगव्य से ही हो। जनसंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता पूनम राजपुरोहित मानवतधर्मी ने यह आह्वान एक प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए किया है। उन्होंने सावधान भी किया कि भैंसादि तथा बाजार के चर्बी युक्त अप्रमाणिक घी से हवन,यज्ञ,पूजादि अनुष्ठान धर्म के नाम पर धोखा धड़ी बड़े पैमाने पर जारी है। 

अखिल भारतीय जनसंघ के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री श्री पूनम राजपुरोहित मानवताधर्मी ने तीन दिवसीय पंजाब प्रवास के दौरान हवन,यज्ञ आदि धार्मिक-अध्यात्मिक अनुष्ठानों में केवल और केवल वेदलक्षणा गोमाता के घी के ही उपयोग का आह्वान किया है! उन्होंने स्पष्ट कहा है कि "बाजार के मिलावटी एवं चर्बी युक्त अप्रमाणिक घी से हवन,यज्ञादि अनुष्ठान सरासर धर्म के नाम पर धोखा है! ऐसे अनुष्ठानों के सुखद,शान्तिमय एवं समृद्धि युक्त परिणाम नहीं मिलते हैं! अपितु चर्बी युक्त मिलावटी तथा भैंसादि के घी से किए गए अनुष्ठानों से प्रेत्मात्माओं तथा नकारात्मक शक्तियों को पुष्टि मिलती है!"

देश के जाने-माने प्रखर विचारक-चिंतक श्रीराजपुरोहित ने इस विषय पर बेलाग व बेबाक स्वर में सनातन के शीर्ष साधु-संतो,आचार्यों एवं धार्मिक कर्मकांडिय विद्वानों से एक सर्वसम्मत मत घोषित करने की मांग की है!

तथ्य,तर्क व प्रमाण के साथ सनातन मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते रहे श्रीराजपुरोहित ने प्रश्न किया है कि" वर्तमान में सनातन धर्मवलम्बियों का करोड़ों-अरबों का धन,समय और श्रमशक्ति अनुष्ठानों में व्यय होकर भी अपेक्षित सकारात्मक परिणाम क्यों नहीं आ रहे हैं? अपितु ठीक विपरीत चंहूऔर मानव समाज एवं विश्व जगत में ईर्ष्या-द्वेष,वैमनस्य,आपाधापी, दूसरों के अधिकारों का अपहरण,अराजकता,आंतकवाद जैसी अमानवीय प्रवतियाँ लगातार बढ़ती ही जा रही है! आखिर इतने धार्मिक-अध्यात्मिक अनुष्ठानों के बाद भी यह विकट स्थितियां क्यों खड़ी है? श्रीराजपुरोहित कहते हैं कि "इस सनातन क्षति, गिरावट एवं अवमुल्यन के पीछे मूल कारण धार्मिक-आध्यात्मिक वैदिक अनुष्ठानों में वेदलक्षणा गोमाता के घी और पंचगव्य का उपयोग नहीं होना है!"

जनसंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता श्रीराजपुरोहित तीन दिवसीय पंजाब प्रवास में अनेक साधु-संतो से मिलेंगे! देश के भक्ति रस के अग्रणी महापुरुष गोसेवा मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष परम पूज्य संत श्री कृष्णानंदजी महाराज 'भूरी वालों' के सानिध्य में कई सामाजिक,सांस्कृतिक,धार्मिक,

आध्यात्मिक और संकीर्तन कार्यक्रमों में भाग लेंगे! 

पिछले तीन-चार दशकों से सनातन धर्म सम्बंधित कुरीतियों, सनातन विरोधी नीतियों,सनातन को कमजोर करने वाले तत्वों एवं सनातन समाज की समसामयिक ज्वलंत समस्याओं को पूरजोर से उठाते रहने वाले श्रीराजपुरोहित ने " हर हाल में सनातन वैदिक पूजा,आरती,दीपक, ज्योति एवं यज्ञादि अनुष्ठानों को शुद्ध वेदलक्षणा गोमाता के घी से सम्पन्न करवाने के लिए राष्टव्यापी अभियान का आह्वान किया है। 

उन्होंने शीघ्र ही परम पूज्य सर्वश्री चारों शंकराचार्यों, देश के प्रमुख अखाडा परिषदों,महा मंडलेश्वरों,मठाधीसों,बड़े मंदिरों के पुजारियों और सनातन विद्वानों को विशेष पत्र लिखकर तथा प्रत्यक्ष मिलकर धार्मिक-आध्यत्मिक कार्यों में केवल और केवल भारतीय देशी गाय के घी एवं पंचगव्य का ही उपयोग करने में सहयोग व आशीर्वाद के प्रयासों में तेजी लाने की घोषणा की है!

विशेष घोषणा:

अग्रणी महान गोसेवक-गोभक्त जीवंट व्यक्तित्व-कृतित्व रुपी लाखों लोगों के आदर्श श्रीराजपुरोहित ने कहा कि "वेदलक्षणा गोमाता एवं उनके पंचगव्य की महिमा अपार है। गाय और पंचगव्य के बिना सनातन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। गोसंरक्षण,गोपालन,गोसंवर्धन तथा पंचगव्य परिषकरण व विनियोग से ही धर्म,मानव जाति,प्रकृति व पर्यावरण और सृष्टि सुरक्षित रह सकती है। गाय के बिना उन्नति,स्वास्थ्य एवं मानव कल्याण की बात करना ही अर्थहीन है। वेदलक्षणा गाय बचेगी तो ही मानव,मानवता और सृष्टि बचेगी।"

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का विशेष आयोजन

Aneeta Sharma on Friday 23rd January 2026 at 15:56 AM Regarding Basant  Panchami 

वीर हकीकत राय की शहादत को श्रद्धांजलि — अनिता शर्मा  


लुधियाना
: 23 जनवरी 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

तक्षिला (TAKSHILA) करियर अकादमी, अगापी ग्लोबल में हुआ कार्यक्रम आयोजित जिसमें लोगों को याद दिलाया गया कि आज पैसे के युग में सिर्फ मां लक्ष्मी की पूजा की तरफ न ध्यान दें बल्कि मां सरस्वती को भी यद् रखें तभी मिलेगी असली सफलता। 

नवकिरण महिला कल्याण एसोसिएशन भी इस विशेष आयोजन में शामिल हुई।  इस सुअवसर पर वीर हकीकत राय की शहीदी को भी याद किया गया।  धर्म के लिए दिए गए इस बलिदान को याद कृते हुए कहा गया कि इस बलिदान को याद रखने की आवश्यकता बहुत अधिक है। 

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर नवकिरण महिला कल्याण एसोसिएशन की ओर से टाकशिला (TAKSHILA) करियर अकादमी, अगापी ग्लोबल में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ पारंपरिक सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का नेतृत्व समाज सेविका एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़ी शख्सियत आर्किटेक्ट अनिता शर्मा ने किया। इस अवसर पर धर्म और सत्य की रक्षा हेतु अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर हकीकत राय की शहादत को भी गहरे सम्मान और श्रद्धा के साथ स्मरण किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनिता शर्मा ने कहा,“बसंत पंचमी ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यह पर्व समाज में नए विचारों, उत्साह और खुशियों के रंग भरने का संदेश देता है।”

उन्होंने युवाओं और महिलाओं से शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान भी किया।

इस कार्यक्रम में संस्था की सदस्य शोभिता, मनजीत, अमन सहित अन्य सहयोगियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और आयोजन को सफल बनाया।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं और मंगलकामनाएं प्रेषित की गईं।

Sunday, 18 January 2026

7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा 19 से श्रद्धा और आस्था से शुरू

Divya Jyoti Ldh Sunday 18th Jan.2026 at 3:53 PM Regarding श्रीमद्भागवत कथा//Shri Mad Bhagwat Katha

कथा के उपलक्ष्य में प्रथम संध्या फेरी का आयोजन भी हुआ 


लुधियाना
: 18 जनवरी 2026: (मीडिया लिंक 32//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

सर्दियां जा रही हैं। ठंडक तेज़ी से कम होती जा रहे है। इस लिए मौसम बसंत के रंगों और भावनाओं का अहसास करवाने लगा है। ऐसे में आध्यत्मिक रंग भी बहुत तेज़ी से प्रभावी होता है।  इसी रंग का एक विशेष आयोजन 19  जनवरी से लुधियाना में हो रहा है। 

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 19 से 25 फरवरी 2026 तक सेक्टर 32 A, मार्केट ग्राउंड , बी.सी.एम स्कूल के सामने चंडीगढ़ रोड,लुधियाना में 7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा होने जा रही है जिसका समय प्रतिदिन सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक रहेगा। इसके उपलक्ष्य में जमालपुर , लुधियाना वासियों को कथा का निमंत्रण देने के लिए प्रथम संध्या फेरी का आयोजन किया गया। संध्या फेरी का शुभारंभ श्री विश्वनाथ मंदिर , जमालपुर से मंदिर कमेटी के चेयरमैन श्री जतिंदर मित्तल जी ,श्री पुरूषोत्तम मित्तल जी ( प्रधान) एवं कमेटी के अन्य सदस्यों द्वारा पावन पूजन एवं नारियल फोड़ कर किया गया। जिसमें श्री कृष्ण जी की महिमा का गुणगान करते हुए भक्तों ने वातावरण को कृष्णमयी बना दिया।

‘बंसी बजा के श्याम ने दीवाना कर है दिया, मेरी लगी श्याम संग प्रीत दुनिया क्या जाने...’ जैसे सुमधर भजनों के गायन से  सारा क्षेत्र कृष्णमयी बन गया। इस अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री मीनाक्षी भारती जी ने कहा कि आपके क्षेत्र में 7 दिन तक चलने वाले श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी अपनी संत मंडली सहित पधार रही हैं। 

वह आपको श्री कृष्ण जी की बाल लीलाओं में छिपे अध्यात्मिक रहस्यों को कथा रूप में वाचन कर के बहुत ही मधुर ढंग से बताएंगी कि कैसे हम अपने जीवन के लक्ष्य ईश्वर से मिल सकते हैं। कैसे हम अपनी समस्त चिंताओं को चिंतन में बदल सकते हैं। 

ऐसे अध्यात्मिक विचारों को श्रवण करने के लिए हम आपको सपरिवार आने का निमंत्रण देने के लिए आये हैं। अत: आप सभी 19 से 25 फरवरी 2026 तक सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक अवश्य आएं और जीवन को सफल बनायें। 

इस यादगारी सुअवसर पर क्षेत्र वासियों ने बढ़ चढ़ कर अपनी भागीदारी देकर प्रभु के चरणों मे अपनी हाजरी लगवाई ।श्री सनातन धर्म मंदिर के प्रधान श्री राजेन्द्र पाहवा जी,श्री पवन शर्मा जी,श्री हरसिमरजीत सिंह जी (लक्की एक्सपोर्ट), एवं श्री राजेन्द्र नारंग जी ने परिवार सहित संध्या फेरी का स्वागत किया।


Wednesday, 17 December 2025

लुधियाना से अशोक भारती द्वारा कीर्तन आयोजन की रिपोर्ट


WhatsApp Ashok Bharti Ludhiana 17th December 2025 at 16:59 Kirtan Event  

मैंने मोहन को बुलाया है वह आता होगा......! पर झूमे भक्तजन 

लुधियाना: 17 दिसंबर 2025: (मीडिया लिंक टीम/ /आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

एक तरफ शीत लहर ज़ोरों पर है और दूसरी तरफ कलियुग का प्रकोप भी बढ़ा हुआ है। ऐसे में आध्यात्मिक कीर्तन ही हमरे समाज और दुनिया को अध्यात्म की तरफ आकर्षित करके लोगों को बचाए हुए है। यदि यह भी न होता तो लोगों के मन और विचार गिरावट की खाईयों में गिरने के लिए तैयार ही बैठे हैं। जीवन को ऊंचाई की तरफ लेजाने वाली कीर्तन की परंपरा लगता कहीं न कहीं जारी है। 

रामनगर हरगोविंद मार्ग रवि सेल्स कॉरपोरेशन के प्रांगण में भव्य संकीर्तन सभा का आयोजन किया गया! जिसकी अध्यक्षता श्री दंडी स्वामी महाराज वेदाचार्य श्री दंडी स्वामी निगम बोध तीर्थ महाराज ने की। उन्होंने ज्योति प्रचंड करके संकीर्तन सभा का शुभारंभ किया।  

संगत से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि आप भाग्यशाली है जो इस संकीर्तन सभा में बैठे हैं वरना आजकल तो लोग टीवी सिनेमा इत्यादि कार्यों में व्यस्त रहते हैं। विश्व प्रसिद्ध भजन गायिका बहन पूर्णिमा यादव ने अपने सुंदर-सुंदर भजनों द्वारा पंडाल में बैठी संगत को राधा रानी कह कर बिहारी जी के साथ जोड़ने का प्रयास किया। 

भजनों के गायन में एक जादू सा छाया हुआ था। उन्होंने राधे किशोरी दया करो, अलबेली सरकार दूर करो हर बाधा, राधा रानी सरकार मोहे प्यारा लगे तेरो बरसाना, मुझे रास आ गया है तेरे दर पर सर झुकाना, नी मैं कमली यार दी कमली, मैंने मोहन को बुलाया है वह आता होगा इत्यादि भजनों द्वारा इस शाम को बहुत ही हसीन बनाया। प्रोग्राम यधारी बना रहा। 

इस अवसर पर गुप्ता परिवार की ओर से बिहारी जी को 56 भोग अर्पित किए गए वह आई हुई संगत को लंगर वितरित किया गया। इस संकीर्तन सभा का आनंद उठाने वालों में सुदेश कुमार गुप्ता, उषा रानी, रविंदर गुप्ता, सविता रानी, दीपक गर्ग, अमित गुप्ता,विनोद अग्रवाल, बृजबाला, हरीश कुमार,कपिल कुमार,अनू भारती, रमन अग्रवाल, रोहन अग्रवाल,पंकज मित्तल,सुनील मित्तल इत्यादि भी शामिल रहे। भक्तों ने बहुत बड़ी संख्या में इस कीर्तन का रसपान किया

Tuesday, 16 December 2025

ओशो का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया

 WhatsApp Ashok Bharti Ludhiana Tuesday16th December 2025 at 16:44 Osho  Birthday Event  

ओशो उत्सव और उत्साह का संदेश देते हैं 


लुधियाना
: 16 दिसंबर 2025: (मीडिया लिंक टीम//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

ओशो उत्सव लुधियाना में भी छाया रहा। ओशो उत्सव लुधियाना द्वारा आचार्य रजनीश ओशो का जन्म दिवस बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया गया। ओशो का ध्यान आते ही अब मन में उत्सव का ही ख्याल आता है। इस मौके पर ओशो प्रेमी बढ़चढ़ कर एकत्र हुए। 

स्वामी मनोज प्रीत ने बताया कि भजन कीर्तन ओशो के प्रवचन और ओम के ध्यान द्वारा सभी श्रद्धालु आनंदित हुए ओशो द्वारा दी गई ध्यान विधियां मानव मन को एकाग्र व शांत करती है क्योंकि आज के अवसाद भरे जीवन में तनाव रहित होने के लिए ध्यान अत्यंत आवश्यक है।  

स्वामी अशोक भारती ने कहा कि ओशो ने हमें जीने का सलीका बताया है ओशो जीवन उदेशना का एक परिपक्व स्तंभ है जिसकी आज हमारे समाज को अति आवश्यकता है। 

इस यादगारी आयोजन में पहुंचे सभी सन्यासी ध्यान बरखा से आनंदित हुए और उन्होंने एक दूसरे का हार्दिक धन्यवाद भी किया।  

कनाडा से पहुंची मां चन्नी ने कहा ध्यान कक्षा हमें आत्मिक सुख प्रदान करती है।  

स्वामी आरिफ ने बताया कि ओशो उत्सव लुधियाना सदैव समाज में प्रेम और ध्यान प्रति अग्रसर कक्षाएं आयोजित करने का प्रयास करती है इस अवसर पर स्वामी सतनाम सिंह, स्वामी मनोज प्रीत, स्वामी अशोक भारती, स्वामी रमेश चौहान, स्वामी गोपाल बत्रा, स्वामी महेश्वरी इत्यादि मित्रों ने उत्सव का आनंद उठाया। 

जन्मदिवस पर हुए आयोजन के बाद ज़िंदगी सभी समस्यायों का सामना हंसी और उत्सव वाले मूड में करते हुए सभी ओशो प्रेमी विदा हुए।  

Thursday, 11 December 2025

नियमित ध्यान से संभव है समस्त रोगों का निवारण:स्वामी आनंद सिद्धार्थ

WhatsApp On  Thursday 11th December 2025 at 10:13 From Ashok Bharti 

ओशो के जन्मदिवस पर हुआ विशेष आयोजन 


लुधियाना: 11 दिसंबर २०२५:  (मीडिया लिंक 32/ /आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

ओशो मेडिटेशन लवर परिवार द्वारा एक दिवसीय ध्यान शिवर आयोजन  बहुत ही धूमधाम के साथ ओशो के विशेष दूत स्वामी  आनंद सिद्धार्थ (डॉक्टर रवींद्र सेठ) की  अध्यक्षता में बहुत ही धूमधाम से महानगर के एक रिजॉर्ट्स में  किया गया। जिसमें पंजाब के दूर-दूर मोहाली,चंडीगढ़ लुधियाना ब राजपुरा इत्यादि से आए  मित्रों ने शिविर का आनंद लिया। स्वामी सिद्धार्थ ने विशेष रूप से ओशो द्वारा रचित ध्यान विधियां वार्डो, ज़िबारिश, नादब्रह्म,लाफ्टर ध्यान,विपासना,गोल्डन फ्लावर नाइट ध्यान इत्यादि विस्तार पूर्वक समझाते हुए बताया कि इन ध्यान वीडियो को करने से हमें क्या-क्या लाभ हो सकता है। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमित ध्यान करने से हम सभी प्रकार के रोगों से बच सकते हैं।इस शिविर में स्वामी जगदीश सदाना,स्वामी गुरचरण नारंग,स्वामी मनजीत सिंह,स्वामी अशोक भारती,योग गुरु स्वामी राजिंदर धरवाल,अतुल जैन,स्वामी आकाश वर्मा,स्वामी विजय जिंदल,सतनाम सिंह,मनजीत कौर,संभव जैन,स्वामी मनु समयाल,स्वामी शाम शर्मा,स्वामी प्रदीप इत्यादि ने शिविर का आनंद लिया।

तस्वीरें,  समाचार और अन्य विवरण अशोक भारतीय के सौंजन्य से। 

Friday, 28 November 2025

उडुपी, कर्नाटक में श्री कृष्ण मठ में लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम में

 प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 28 NOV 2025 at 3:26 PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ


नई दिल्ली: 28 नवंबर 2025: (पीआईबी दिल्ली )::

एल्लारीगू नमस्कारा !

जय श्री कृष्णा !

जय श्री कृष्णा !

जय श्री कृष्णा !

मैं अपनी बात बताना शुरू करूं उसके पहले, यहां कुछ बच्चे चित्र बनाके ले आए हैं, जरा SPG के लोग और लोकल पुलिस के लोग मदद करें, उसको कलेक्ट कर लें। अगर आपने उसके पीछे अपना एड्रेस लिखा होगा, तो मैं जरूर आपको धन्यवाद पत्र भेजूंगा। जिसके पास कुछ न कुछ है, दे दीजिए, वो कलेक्ट कर लेंगे, और आप फिर शांति से बैठ जाइए। ये बच्चे इतनी मेहनत करते हैं, और कभी-कभी, मैं उनके साथ कभी अन्याय कर देता हूं, तो दुख होता है मुझे।        

जय श्री कृष्णा !

भाइयों-बहनों, 

कर्नाटका की इस भूमि पर, यहां के स्नेही जनों के बीच आना मेरे लिए सदा ही एक अलग अनुभूति होती है। और उडुपी की धरती पर आना तो हमेशा अद्भुत होता है। मेरा जन्म गुजरात में हुआ, और गुजरात और उडुपी के बीच एक गहरा और विशेष संबंध रहा है। मान्यता है कि यहां स्थापित भगवान श्री कृष्ण के विग्रह की पूजा पहले द्वारका में माता रुक्मिणी करती थीं। बाद में जगदगुरु श्री मध्वाचार्य जी ने इस प्रतिमा को यहां प्रतिष्ठापित किया। और आप तो जानते हैं, अभी पिछले ही वर्ष मैं समुद्र के भीतर श्री द्वारका जी का दर्शन करने गया था, वहां से भी आशीर्वाद ले आया। आप खुद समझ सकते हैं कि मुझे इस प्रतिमा के दर्शन करके क्या अनुभूति हुई होगी। इस दर्शन ने मुझे एक आत्मीय आध्यात्मिक आनंद दिया है। 

साथियों, 

उडुपी आना मेरे लिए एक और वजह से विशेष होता है। उडुपी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के सुशासन की, मॉडल की कर्मभूमि रही है। 1968 में, उडुपी के लोगों ने जनसंघ के हमारे वीएस आचार्या जी को, यहां की नगर पालिका परिषद में विजयी बनाया था। और इसके साथ ही उडुपी ने एक नए गवर्नेंस मॉडल की नींव भी रखी थी। आज हम स्वच्छता के जिस अभियान को राष्ट्रीय रूप देख रहे हैं, उसे उडुपी ने 5 दशक पहले अपनाया था। जल आपूर्ति और ड्रेनेज सिस्टम का एक नया मॉडल देना हो, उडुपी ने ही 70 के दशक में इन कार्यक्रमों की शुरुआत की थी। आज ये अभियान देश के राष्ट्रीय विकास का, राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा बनकर हमारा मार्गदर्शन कर रहा है। 

साथियों, 

राम चरित मानस में लिखा है- कलिजुग केवल हरि गुन गाहा। गावत नर पावहिं भव थाहा॥ अर्थात, कलियुग में केवल भगवद् नाम और लीला का कीर्तन ही परम साधन है। उसके गायन कीर्तन से, भवसागर से मुक्ति हो जाती है। हमारे समाज में मंत्रों का, गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है, पर जब एक लाख कंठ, एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं, जब इतने सारे लोग, गीता जैसे पुण्य ग्रंथ का पाठ करते हैं, जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर, एक साथ गूंजते हैं, तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे मन को, हमारे मस्तिष्क को एक नया स्पंदन, एक नई शक्ति देती है। यही ऊर्जा, आध्यात्म की शक्ति की है, यही ऊर्जा, सामाजिक एकता की शक्ति है। इसलिए आज लक्ष कंठ गीता का ये अवसर एक विशाल ऊर्जा-पिंड को अनुभव करने का अवसर बन गया है। ये विश्व को सामूहिक चेतना, Collective Consciousness की शक्ति भी दिखा रहा है।

साथियों, 

आज के दिन, विशेष रूप से मैं परमपूज्य श्री श्री सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामी जी को प्रणाम करता हूं।  उन्होंने लक्ष कंठ गीता के इस विचार को इतने दिव्य रूप में साकार किया है। पूरे विश्व में, लोगों को अपने हाथ से गीता लिखने का विचार देकर, उन्होंने जिस कोटि गीता लेखन यज्ञ की शुरुआत की है, वो अभियान सनातन परंपरा का एक वैश्विक जनांदोलन है। जिस तरह से हमारा युवा भगवद्गीता के भावों से, इसकी शिक्षाओं से जुड़ रहा है, वो अपने आप में बहुत बड़ी प्रेरणा है। सदियों से भारत में वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों के ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की परंपरा रही है। और ये कार्यक्रम भी इसी परंपरा का भगवद्गीता से अगली पीढ़ी को जोड़ने का एक सार्थक प्रयास बन गया है।

साथियों, 

यहां आने से तीन दिन पहले मैं अयोध्या में भी था। 25 नवंबर को विवाह पंचमी के पावन दिन अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना हुई है। अयोध्या से उडुपी तक असंख्य रामभक्त इस दिव्यतम और भव्यतम उत्सव के साक्षी बने हैं। राम मंदिर आंदोलन में उडुपी की भूमिका कितनी बड़ी है, सारा देश इसे जानता है। परमपूज्य स्वर्गीय विश्वेश तीर्थ स्वामी जी ने दशकों पहले राम मंदिर के पूरे आंदोलन को जो दिशा दी, ध्वजारोहण समारोह उसी योगदान की सिद्धि का पर्व बना है। उडुपी के लिए राम मंदिर का निर्माण एक और कारण से विशेष है। नए मंदिर में जगदगुरु मध्वाचार्य जी के नाम पर एक विशाल द्वार भी बनाया गया है। भगवान राम के अनन्य भक्त, जगदगुरु मध्यावार्य जी ने लिखा था- रामाय शाश्वत सुविस्तृत षड्गुणाय, सर्वेश्वराय बल-वीर्य महार्णवाय, अर्थात, भगवान श्री राम—छः दिव्य गुणों से विभूषित, सर्वेश्वर, और अपार शक्ति-साहस के सागर हैं। और इसीलिए राम मंदिर परिसर का एक द्वार उनके नाम पर होना उडुपी, कर्नाटका और पूरे देश के लोगों के लिए बहुत गौरव की बात है। 

साथियों, 

जगद्गुरु श्री मध्वाचार्य जी भारत के द्वैत दर्शन के प्रणेता और वेदांत के प्रकाश-स्तंभ हैं। उनके द्वारा बनाई गई उडुपी के अष्ट मठों की व्यवस्था, संस्थाओं और नव परंपराओं के निर्माण का मूर्त उदाहरण है। यहां भगवान श्री कृष्ण की भक्ति है, वेदांत का ज्ञान है, और हजारों लोगों की अन्न सेवा का संकल्प है। एक तरह से ये स्थान ज्ञान, भक्ति और सेवा का संगम तीर्थ है। 

साथियों, 

जिस काल में जगदगुरु मध्वाचार्य जी का जन्म हुआ, उस काल में भारत बहुत सी आंतरिक और बाहर की चुनौतियों से जूझ रहा था। उस काल में उन्होंने भक्ति का वो मार्ग दिखाया, जिससे समाज का हर वर्ग, हर मान्यता जुड़ सकते थे। और इसी मार्गदर्शन के कारण आज कई शताब्दियों के बाद भी उनके द्वारा स्थापित मठ प्रतिदिन लाखों लोगों की सेवा का कार्य कर रहे हैं। उनकी प्रेरणा के कारण द्वैत परंपरा में ऐसी कई विभूतियां जन्मी हैं, जिन्होंने सदा धर्म, सेवा और समाज निर्माण का काम आगे बढ़ाया है। और जनसेवा की ये शाश्वत परंपरा ही, उडुपी की सबसे बड़ी धरोहर है। 

साथियों, 

जगद्गुरु मध्वाचार्य की परंपरा ने ही, हरिदास परंपरा को ऊर्जा दी। पुरंदर दास, कनक दास जैसे महापुरुषों ने भक्ति को सरल, सरस और सुगम कन्नड़ा भाषा में जन-जन तक पहुंचाया। उनकी ये रचनाएं, हर मन तक, गरीब से गरीब वर्ग तक पहुंचीं, और उन्हें धर्म से, सनातन विचारों से जोड़ा। ये रचनाएं आज की पीढ़ी में भी वैसी की वैसी ही हैं। आज भी हमारे नौजवान सोशल मीडिया की रील्स में, श्री पुरंदरदास द्वारा रचित चंद्रचूड़ शिव शंकर पार्वती सुनकर एक अलग भाव में पहुंच जाते हैं। आज भी, जब उडुपी में मेरे जैसा कोई भक्त एक छोटी सी खिड़की से भगवान श्री कृष्ण का दर्शन करता है, तो उसे कनक दास जी की भक्ति से जुड़ने का अवसर मिलता है। और मैं तो बहुत सौभाग्यशाली हूं, मुझे इसके पहले भी, ये सौभाग्य प्राप्त होता रहा है। कनकदास जी को नमन करने का सौभाग्य मिला है। 

साथियों, 

भगवान श्री कृष्ण के उपदेश, उनकी शिक्षा, हर युग में व्यवहारिक हैं। गीता के शब्द सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, राष्ट्र की नीति को भी दिशा देते हैं। भगवदगीता में, श्री कृष्ण ने सर्वभूतहिते रता: ये बात कही है। गीता में ही कहा गया है- लोक संग्रहम् एवापि, सम् पश्यन् कर्तुम् अर्हसि ! इन दोनों ही श्लोकों का अर्थ यही है कि हम लोक कल्याण के लिए काम करें। अपने पूरे जीवन में, जगदगुरु मध्वाचार्य जी ने इन्हीं भावों को लेकर भारत की एकता को सशक्त किया। 

साथियों, 

आज सबका साथ, सबका विकास, सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, ये हमारी नीतियों के पीछे भी भगवान श्री कृष्ण के इन्हीं श्लोकों की प्रेरणा है। भगवान श्री कृष्ण हमें गरीबों की सहायता का मंत्र देते हैं, और इसी मंत्र की प्रेरणा आयुष्मान भारत और पीएम आवास जैसी स्कीम का आधार बन जाती है। भगवान श्री कृष्ण हमें नारी सुरक्षा, नारी सशक्तिकरण का ज्ञान सिखाते हैं, और उसी ज्ञान की प्रेरणा से देश नारी शक्ति वंदन अधिनियम का ऐतिहासिक निर्णय करता है। श्रीकृष्ण हमें सबके कल्याण की बात सिखाते हैं, और यही बात वैक्सीन मैत्री, सोलर अलायंस और वसुधैव कुटुंबकम की हमारी नीतियों का आधार बनती है। 

साथियों, 

श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश युद्ध की भूमि पर दिया था। और भगवद्गीता हमें ये सिखाती है कि शांति और सत्य की स्थापना के लिए अत्याचारियों का अंत भी आवश्यक है। राष्ट्र की सुरक्षा नीति का मूल भाव यही है, हम वसुधैव कुटुंबकम भी कहते हैं, और हम धर्मो रक्षति रक्षित: का मंत्र भी दोहराते हैं। हम लालकिले से श्री कृष्ण की करुणा का संदेश भी देते हैं, और उसी प्राचीर से मिशन सुदर्शन चक्र की उद्घोषणा भी करते हैं। मिशन सुदर्शन चक्र, यानि, देश के प्रमुख स्थानों की, देश के औद्योगिक और सार्वजनिक क्षेत्रों की सुरक्षा की ऐसी दीवार बनाना, जिसे दुश्मन भेद ना पाए, और अगर दुश्मन दुस्साहस दिखाए, तो फिर हमारा सुदर्शन चक्र उसे तबाह कर दे।

साथियों, 

ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में भी देश ने हमारा ये संकल्प देखा है। पहलगाम के आतंकी हमले में कई देशवासियों ने अपना जीवन गंवाया। इन पीड़ितों में मेरे कर्नाटका के भाई-बहन भी थे। लेकिन पहले जब ऐसे आतंकी हमले होते थे, तो सरकारें हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाती थीं। लेकिन ये नया भारत है, ये ना किसी के आगे झुकता है, और ना ही अपने नागरिकों की रक्षा के कर्तव्य से डिगता है। हम शांति की स्थापना भी जानते हैं, और शांति की रक्षा करना भी जानते हैं।

साथियों,

भगवद् गीता हमें कर्तव्यों का, हमारे जीवन संकल्पों का बोध कराती है। और इसी प्रेरणा से मैं आज आप सभी से कुछ संकल्पों का आग्रह भी करूंगा। ये आग्रह, 9 संकल्प की तरह हैं, जो हमारे वर्तमान और भविष्य के लिए बहुत आवश्यक है। संत समाज जब इन आग्रहों पर अपना आशीर्वाद दे देगा, तो इन्हें जन-जन तक पहुंचने से कोई रोक नहीं पाएगा।

साथियों, 

हमारा पहला संकल्प होना चाहिए, कि हमें जल संरक्षण करना है, पानी बचाना है, नदियों को बचाना है। हमारा दूसरा संकल्प होना चाहिए, कि हम पेड़ लगाएंगे, देशभर में एक पेड़ मां के नाम अभियान को गति मिल रही है। इस अभियान के साथ अगर सभी मठों का सामर्थ्य जुड़ जाएगा, तो इसका प्रभाव और व्यापक होगा। तीसरा संकल्प कि हम देश के कम से कम एक ग़रीब का जीवन सुधारने का प्रयास करें, मैं ज्यादा नहीं कह रहा हूं। चौथा संकल्प स्वदेशी का विचार होना चाहिए। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम सब स्वदेशी को अपनाएं। आज भारत आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे उद्योग, हमारी टेक्नोलॉजी, सब अपने पैरों पर मजबूती से खड़े हो रहे हैं। इसलिए हमें जोर-शोर से कहना है- Vocal for Local. Vocal for Local. Vocal for Local. Vocal for Local. 

साथियों, 

पाँचवे संकल्प के रूप में हमें नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देना है। हमारा छठा संकल्प होना चाहिए, कि हम हेल्दी लाइफ स्टाइल को अपनाएंगे, मिलेट्स अपनाएंगे, और खाने में तेल की मात्रा कम करेंगे। हमारा सातवां संकल्प ये हो कि हम योग को अपनाएं, इसे जीवन का हिस्सा बनाए। आठवां संकल्प- मैन्युस्क्रिप्ट, पांडुलिपियों के संरक्षण में सहयोग करें। हमारे देश का बहुत सा पुरातन ज्ञान पांडुलीपियों में छिपा हुआ है। इस ज्ञान को संरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ज्ञान भारतम मिशन पर काम कर रही है। आपका सहयोग इस अमूल्य धरोहर को बचाने में मदद करेगा।

साथियों, 

आप नौवां संकल्प लें कि हम कम से कम देश के 25 ऐसे स्थानों का दर्शन करेंगे, जो हमारी विरासत से जुड़े हैं। जैसे मैं आपको कुछ सुझाव देता हूं। 3-4 दिन पहले, कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र की शुरुआत हुई है। मेरा आग्रह है कि आप इस केंद्र में जाकर भगवान श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन देखें। गुजरात में हर साल भगवान श्रीकृष्ण और मां रुक्मिणी के विवाह को समर्पित माधवपुर मेला भी लगता है। देश के कोने-कोने से और खासकर के नॉर्थ ईस्ट से बहुत से लोग इस मेले में खासतौर पर पहुंचते हैं। आप भी अगले साल इसमें जाने का प्रयास जरूर करिएगा।

साथियों, 

भगवान श्री कृष्ण का पूरा जीवन, गीता का हर अध्याय, कर्म, कर्तव्य और कल्याण का संदेश देता है। हम भारतीयों के लिए 2047 का काल सिर्फ अमृत काल ही नहीं, विकसित भारत के निर्माण का एक कर्तव्य काल भी है। देश के हर नागरिक की, हर भारतवासी की अपनी एक जिम्मेदारी है। हर व्यक्ति का, हर संस्थान का अपना एक कर्तव्य है। और इन कर्तव्यों की पूर्णता में कर्नाटका के परिश्रमी लोगों की भूमिका बहुत बड़ी है। हमारा हर प्रयास देश के लिए होना चाहिए। कर्तव्य की इसी भावना पर चलते हुए विकसित कर्नाटका, विकसित भारत का स्वप्न भी साकार होगा। इसी कामना के साथ उडुपी की धरती से निकली ये ऊर्जा, विकसित भारत के इस संकल्प में हमारा मार्गदर्शन करती रहे। एक बार फिर इस पवित्र आयोजन से जुड़े हर सहभागी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। और सबको- जय श्री कृष्णा ! जय श्री कृष्णा ! जय श्री कृष्णा ! 

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MJPS/VJ/RK/AK//(रिलीज़ आईडी: 2195836)