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Sunday, 23 February 2025

शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से बचा जा सकता है रेडिएशन के कहर से

Sent by Writer Krishna Goyal on the eve of MahaShivratri   16th February 2025 at 21:14 WhatsApp

जानीमानी लेखिका कृष्णा गोयल  ने बताए हैं गहरे रहस्य 


पंचकूला
: 23 फरवरी 2025: (कृष्णा गोयल//आराधना टाईम्ज़ डेस्क )::

पारद से बने शिवलिंग पर दूध और पानी मिलाकर कच्ची लस्सी चढ़ाने  से जो प्रतिक्रिया होती है वह हमको अल्ट्रावायलेट किरणों के हानिकारक प्रभाव से बचाती है।  इसीलिए शिवलिंग पर चढ़ाए हुए जल को लांघते नही है। जल चढ़ाने के बाद आधी परिक्रमा ही की जाती है। जिस नाली में से चढ़ाया हुआ जल बहता है, उधर माथा टेक कर फिर वापिस आ कर बाकी की परिक्रमा पूरी करते हैं। 

खगोलीय तथ्य:

यह तो हम सब जानते हैं कि 23 मार्च के आस पास दिन-रात बराबर होते हैं क्योंकि 23 मार्च को पृथ्वी भूमध्य रेखा पर आ जाती है और इस समय सूर्य की सीधी किरणे पृथ्वी पर पड़ती हैं।  शिवरात्रि से 15-20 दिनों के बाद पृथ्वी ठीक भूमध्य रेखा पर होती है, जैसे जैसे पृथ्वी भूमध्य रेखा की ओर  बढ़ती है UV किरणों से होने वाला किरणपात बढ़ने लगता है जो जनजीवन के लिए अच्छा नहीं होता। 

यह किरणपात (रेडिएशन) शिवरात्रि को शुरू हो जाता है, जो लोगों के शरीर को अंदर से और बाहर से जला देता है जिस से लोगों को बुखार, जुकाम, अनपच की शिकायत होने लगती है। वास्तव में यह सब सूर्य की बाह्य लपटों से होने वाले किरणपात (रेडिएशन) के कारण होता है। पारद से बने शिवलिंग पर दूध मिला पानी चढ़ाने से जो रासायनिक क्रिया होती है उससे वातावरण में UV किरणपात का प्रभाव न्यूनतम हो जाता है। इस किरणपात को हमारे ऋषि मुनियों ने जाना, समझा और हमारे लिए कुछ नियम बना दिए जिससे हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें।

शास्त्रों में कहा गया हैब्रह्माण्ड़ेयस्ति यत्किंचित् पिण्ड़ेप्यस्ति सर्वथा।

ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु किसी-न-किसी रूप में मानव पिण्ड में विद्यमान है। इसीलिये मानव शरीर को दुर्लभ बतलाया गया है जिसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य ही नहीं अपितु हमारा धर्म है जिस के लिए जो नियम बनाए उनको त्योहारों से जोड़ दिया गया ताकि लोग इस घटनाचक्र को भूल न जाएं और धर्म के साथ भी जोड़ दिया गया ताकि लोग श्रद्धा से उनका पालन करें।

शिवलिंग पर दूध की आस्था भरी तस्वीरें पूरे ध्यान से देखते हुए मनन करें तो आपको हिन्दू समाज के रीतिरिवाजों के मिथक कहे जाने स्वयं भी समझ आने लगेंगें। मिथक कहे पर लेखिका कृष्णा गोयल ने एक विशेष किताब लिखी जो हर बात  तथ्यों सहित जवाब भी देती है। इसी मुद्दे पर अन्य बौद्धिक क्षेत्रों में भी विचार विमर्श जारी है। इन क्षेत्रों में चल रहे सक्रिय विचार विमर्श में जो लोग रूचि ले रहे हैं उनमें से गैर हिन्दू भी शामिल हैं। संकेतक तस्वीरें यहाँ भी दी गई हैं। 

इसके साथ ही एक बात और भी कि आक, धतूरा, भांग और बिल्वपत्र जो शिवलिंग पर चढ़ाए जाते  हैं हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए औषधियां है। आक के फूल की डोडी खाने से उल्टियां वगैरह रुक जाती हैं। धतूरे के औषधि रूप से  बाहरी त्वचा की समस्या दूर होती है जबकि सही मात्रा में भांग पीने से हमारे अंदरूनी प्रणाली पर रेडिएशन के प्रभाव से पड़ी दरारें ठीक होती हैं, इन्हीं दरारों के कारण पेट दर्द व हाजमे की परेशानियां होती हैं। बिल्वपत्र पर चंदन का लेप करके शिवलिंग को ढका जाना पावन समझा जाता है जो ये संकेत देता है कि इन दिनों यदि हम चंदन का लेप करके बिल्वपत्र से सिर ढक  कर गर्म धूप में भी निकलते हैं तो  UV किरणों के दुष्प्रभाव से बचाव किया जा सकता है। पुरातन काल में लिखने की विधि विकसित न होने के कारण ये सारा ज्ञान  सांकेतिक भाषा में था और जुबानी ही आगे बढ़ाया जाता था जो चिरकाल से समाप्त प्राय: हो गया है। इसलिए इस दुर्लभ ज्ञान की खोज और प्रसार बहुत आवश्यक है। 

सुश्री कृष्ण गोयल की एक विशेष खोजपूर्ण रचना आप आराधना टाईम्ज़ में पढ़ ही रहे हैं। भविष्य में हमारा प्रयास रहेगा कि ऐसी सामग्री आप तक पहुँचती रहे।  हिन्दू मिथक के वैज्ञानिक पहलुओं पर आई इस विशेष पुस्तक पर आधारित यह विशेष पोस्ट आप सभी तक पहुंचनी ज़रूरी भी है। 

हिन्दू रीति रिवाजों को मिथक कहे जाने के विरोध में सुश्री कृष्ण गोयल ने तकरीबन हर संशय को दूर करने की कोशिश की है। जिस जिस बात पर आशंका की जाती है हर उस बात का जवाब वैज्ञानिक पहलु से देने का प्रयास किया है। 

ये भी सभी को ज्ञात है कि हमारे 12 महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग एक ही लाइन में एक ही ऊंचाई पर स्थापित किए गए हैं। कदाचित हमारे पूर्वजों को यह ज्ञान था कि इस जगह पर यूवी किरणों का दुष्प्रभाव अधिकतम हो सकता है। ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए लोग देश के  सभी भागों से आते हैं, अभिषेक करते हैं और ज्योतिर्लिंग पर कच्ची लस्सी चढ़ाते हैं, जिस से यूवी किरणों का दुष्प्रभाव शांत रहता है। दुनिया में सभी कहीं हमने ज्वालामुखी फटते हुए सुने हैं, परंतु भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ। जिस जगह पर रेडिएशन ज्यादा हो जाती है और पृथ्वी भी यदि उसी जगह भौगोलिक कारणों से ज्यादा गर्म है तो लावा फटना शुरू हो जाता है। परंतु भारत में ऐसी जगह पर वातावरण को  समय अनुसार शांत कर दिया  जाता है (पारद के बने ज्योतिर्लिंग पर कच्ची लस्सी चढ़ाने की क्रिया से), इसी लिए भारत में ज्वालामुखी आमतौर पर चिंताजनक हालात तक नहीं फटे।

पाश्चात्य प्रभाव में आकर हमारे उच्च शिक्षित वर्ग में से कुछ लोग इन क्रियाओं को रूढ़िवादी कहने लगे हैं, जबकि ऐसा करने से पहले हमको हमारे पूर्वजों की बुद्धिमता से मार्गदर्शन को धन्यवाद देना चाहिए।

गौरतलब है कि दुष्प्रभाव वाली यूवी किरणों का प्रभाव जो अमावस्या (शिवरात्रि) को शुरू होता है वह पूर्णिमा तक उच्चतम होता है, इसी लिए शिवरात्रि के बाद आने वाली पूर्णिमा को हम होली के रूप में मनाते है (इन दिनों को जलते बलते दिन कहा जाता है) जब अबीर उड़ाने और एक दूसरे पर अबीर लगाने की प्रथा है। अबीर उड़ाने से वातावरण का प्रकोप कम होता है और चेहरे पर लगने से जलन दूर होती है। 

आजकल अबीर का स्थान घटिया किस्म के गुलाल ने ले लिया है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता। पंजाब में होली के बाद बासडा भी तो मनाते हैं क्योंकि मीठा और तला हुआ भोजन खाने से शरीर की अंदर की प्रणाली में जो दरारें आ जाती हैं, उनकी मालिश हो जाती है और हम स्वस्थ रहते हैं। नमन है हमारे पूर्वजों की दार्शनिकता को जो ये जानते थे कि आने वाली पीढ़ियां शायद ये प्रभाव/दुष्प्रभाव को भूल न जाएं, इसी लिए इन खगोलीय घटनाचक्रों को त्योहारों का नाम दे दिया।

शिवरात्रि के पावन सुअवसर पर आप सभी इन रीति रिवाजों को गहराई से समझें और बेहद गंभीरता से इन्हें अपने जीवन में भी उतारें। आप देखेंगे कि आपको अपने जीवन में बहुत कुछ बदलता हुएभी महसूस होने लगेगा। तन को नै आभा मिलेगी हुए मन को एक नै शक्ति भी। आपका प्रभामंडल आपके आसपास के माहौल को भी प्रभावित करने लगेगा। मुसीबतों और कठिनाईओं के जो रूप सांप की तरह सामने आ कर दस्ते हुए से लगते हैं वे भी आपके मित्र बन जाएंगे। आपकी शक्ति बन जाएंगे।  

***   

नोट: यह रचना सुश्री कृष्ण गोयल की बहु चर्चित पुस्तक "हिंदू त्यौहार और विज्ञान" में भी संकलित है। 

Wednesday, 12 February 2025

सूर्य भी अपने परिवार के साथ अपनी आकाश गंगा के गिर्द चक्कर लगाता है

Writeup By Krishna Goyal on 12th February 2025 at 12:34 WhatsApp Regarding Kumbh Sankranti Panchkula

सूर्य के इस प्रवेश को अति उत्तम माना गया है

कुंभ संक्रांति के रहस्यों पर कृष्णा गोयल का विशेष आलेख 


पंचकूला:12 फरवरी 2025: (कृष्णा गोयल//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

कुंभ संक्रांति शब्दार्थ: सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को सूर्य का दूसरी राशि में संक्रमण (जाना) कहते हैं! पृथ्वी सूर्य के गिर्द चक्कर लगाती है। इस घूमने को क्रांति कहते हैं। संक्रमण + क्रांति =संक्रांति।

सूर्य के इस प्रवेश (एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश) का समय लगभग एक घंटा 49 मिनट होता है। प्रवेश के समय से कुछ घंटे पहले और  कुछ घंटे बाद के समय को पुण्यकाल कहा जाता है। इस समय में पूजा पाठ दान इत्यादि किया जाता है। इस समय के दौरान कोई सांसारिक/शुभ कार्य जैसे विवाह, ग्रह प्रवेश इत्यादि नही किया जाता। कुंभ संक्रांति का महत्व और कई दुसरे पहलुओं पर कृष्णा गोयल का विशेष आलेख जिसमें हैं कई जानकारियां 

पृथ्वी सूर्य के गिर्द चक्कर लगाती है। पृथ्वी के घूमने के पथ को क्रांतिवृत कहते हैं। खगोल के अध्ययन के लिए  इस परिधि को 12 भागों में बांट कर 12 राशियों का नाम दिया गया है। पृथ्वी जब एक राशि से दूसरी राशि में जाती है उसको सक्रांति कहते हैं। प्रत्येक राशि में पृथ्वी पर प्रभाव अलग-अलग होता है। उस प्रभाव को समझने के लिए क्रांतिवृत की 360 डिग्री को 12 से भाग करके हरेक राशि 30 डिग्री की मानी जाती है। प्रत्येक राशि का ब्रह्मांड में विशेष स्थान है। हम जानते हैं कि हरेक राशि 30 डिग्री की नही होती, थोड़ा कम या ज़्यादा डिग्री की होती है, परंतु अपनी सुविधा के लिए हम प्रत्येक राशि को 30 डिग्री का ही मान लेते हैं।

बात यह नही है कि सूर्य स्थाई है अपितु सूर्य भी अपने सूर्य परिवार के साथ अपनी आकाश गंगा (गैलेक्सी) के गिर्द चक्कर लगाता है। ऐसी लाखों आकाश गंगाएं आकाश में हैं। हमारी गैलेक्सी भी अपने परिवार के साथ धीरे-धीरे किसी बड़ी गैलेक्सी के गिर्द घूमती है। 

वर्ष के 365  दिन क्यों पृथ्वी का सूर्य के गिर्द चक्कर लगाने का पथ 360 degree है। पृथ्वी एक दिन में एक डिग्री चलती है। 360 degree 360 दिनों  में पूरे हो जाने चाहिए थे। परंतु जब तक पृथ्वी सूर्य के गिर्द 360 डिग्री का एक चक्कर लगाती है, सूर्य थोड़ा सा आगे खिसक जाता है। उस दूरी को पूरा करनें केलिए पृथ्वी को 5 दिन, 5 घंटे, 58 मिनट और 46 सेकिंड लगते है। इस लिए वर्ष के 360 दिन न होकर 365 दिन होते हैं। बाकी का समय चार वर्षों के बाद एक दिन के बराबर हो जाता है। इसलिए चार वर्षों के बाद फरवरी के महीने में एक दिन और जोड़ दिया जाता है। जिसको लीप ईयर की संज्ञा दी जाती है। (Leep का अर्थ है jump, भाव प्रत्येक चौथे वर्ष एक दिन jump हो जाता है, बढ़ जाता है।) जो बाकी के मिनट और सेकंड बच जाते हैं, वह 72 वर्ष के बाद एक दिन के बराबर हो जाता है, जिसकी गिनती हमारे कैलेंडर में नही आती। यही कारण है कि मकर संक्रति का दिन कुछ समय बाद बदल जाता है। कभी यह मकर सक्रांति 12 दिसंबर को होती थी।

खगोलीय घटनाओं का महत्व समझना तो दूर (कुछ विद्वानों को छोड़ कर) आम लोग इसके बारे जानते ही नहीं जब कि  पुरातन काल में हमारे घरों में यह ज्ञान आम था क्योंकि हमारी दादी ही बोल देती थी कि आज पुष्य नक्षत्र है, आज बच्चों को स्वर्णप्राशन (इम्युनिटी की आयुर्वेदिक बूंदे) पिला कर ले आओ"  या आज ये नक्षत्र है आज ये कम नहीं करना" इत्यादि! परंतु संयुक्त परिवार न  होने के कारण ये ज्ञान आगे नहीं बढ़ा।

इन घटनाओं का ज्ञान हमारे पूर्वजों ने हमें पर्व के रूप में सौंपा है ताकि पर्व के बहाने हम खगोलीय घटना चक्र को समझें और उसका लाभ उठा सकें।

आज 12 फरवरी 2025 को कुंभ संक्रांति है और पूर्णिमा भी है। पूर्णिमा और कुंभ संक्रांति एक ही दिन, ये पर्व 144 वर्ष के बाद आया है

जैसे कि पहले कहा गया है सूर्य जिस मार्ग पर घूमता है उसको क्रांति पथ कहते हैं। संक्रमण का अर्थ है एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवर्तित। सूर्य मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश कर रहा है। इस प्रवेश को मकर से कुंभ में सूर्य का संक्रमण कहा जाता है। इस लिए सांक+राँती ( संक्र मण + क्रांति) (संक्र+क्रांति)

संक्रांति।सूर्य के इस प्रवेश को अति उत्तम माना गया है। 

प्रवेश के समय को पुण्यकाल कहा जाता है। ये लगभग चार घंटे का होता है। 

पुण्य काल  में पाठ पूजा की जाती है, दान किया जाता है जिस से सब कष्ट दूर होते हैं।  व्रत पर्व विवरण - संत रविदास जयंती, ललिता जयंती, माघ पूर्णिमा, विष्णुपदी संक्रांति ( आज संक्रांति पुण्यकाल दोपहर 12:41 से सूर्यास्त तक)*

पुण्यकाल के दौरान शारीरिक कष्ट दूर करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करें 108 बार, इच्छापूर्ति के लिए गायत्री मंत्र , स्वास्थ्य के लिए ॐ नम: शिवाय या ॐ का जप करें या गुरु चरणों में ध्यान लगाते  हुए गुरबाणी का जाप करें तदोपरांत गुड और गेहूं का दान करें।

इस पर्व पर ईश्वर से प्रार्थना है कि ईश्वर की कृपा से आपके सब कष्ट दूर हों, मनोकामना की पूर्ति हो, ढेरों खुशियां मिलें।   ***

लेखिका कृष्णा गोयल

पूर्व जॉइंट रजिस्ट्रार

12.2.2025

Sunday, 6 August 2023

विश्वास फाउंडेशन ने लगाया पंचकूला में खीर मालपूड़े का लंगर

 Saturday 5th August 2023 at 3:38 PM

3 अगस्त से 9 अगस्त तक चलाया जा रहा है सेवा सप्ताह 


पंचकूला
: 5 अगस्त 2023: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

भारतीय संस्कृति में धर्मकर्म के सा भी विधिविधान पूरी तरह से वैज्ञानिक हैं। सुबह उठने से ले कर रात्रि को सोने तक हर बात में पूरा विज्ञान है। सुबह सुबह मेडिटेशन से लेकर रात्रि की मेडिटेशन तक गहरे अर्थों से भरी बातें हैं। यही सब खानपान में भी है। सावन महीने में माल पूरे और खीर खाने की परम्परा भी बहुत गहरी है। सावन में शराब, नशीली चीज़ें और शरीर को बिगड़ने वाले सभी पदार्थ सेवन करने की मनाही है लेकिन माल पूरे और खीर का विशेष महत्व है। आर्थिक कारणों से सब के बस में नहीं होता खीर और मालपूरे खा पाना। इस लिए लगातार ख़ामोशी से काम करती आ रही विश्वास फाउंडेशन ने खीर और माल पूर्व का लंगर भी लगाया। 

गौरतलब है कि विश्वास फाउंडेशन द्वारा सेवा कार्यों की श्रृंखला में 3 अगस्त से 9 अगस्त तक चलाये जा रहे सेवा सप्ताह के अंतर्गत सती साध्वी बहन कृष्णामूर्ति विश्वास जी की स्मृतिओं को ताज़ा रखने व सावन के उपलक्ष्य पर आज पंचकूला में खीर मालपूड़े का लंगर लगाया गया। लगभग 1500 लोगों में लंगर वितरित किया गया।

विश्वास फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी नीलिमा विश्वास ने बताया कि लंगर पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर 6 के बाहर मरीजों के उनके अभिभावकों को व अन्य आने जाने वालों को, सूरजपुर पंचकूला कालका मार्ग पर स्थित झुग्गिओं में, सेब मंडी पिंजोर में व हिमशीखा की झुग्गिओं में लोगों को बाँटा गया। इस मौके पर इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी यूटी चंडीगढ़ से सुशील कुमार टाँक व विश्वास फाउंडेशन के सभी अनुयाईओं ने बढ़ चढ़ कर सेवा की। 

इस शुभअवसर पर बहुत सी संगत के साथ गैर सतसंगी लोगों ने भी खीर और माल पूरे खाए और विश्वास फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि इस संगठन की तरफ से इस तरह के कार्य पूरा बरस जारी रहते हैं। 

निरंतर सामाजिक चेतना और जनहित ब्लॉग मीडिया में योगदान दें। हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने या कभी-कभी इस शुभ कार्य के लिए आप जो भी राशि खर्च कर सकते हैं, उसे अवश्य ही खर्च करना चाहिए। आप इसे नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आसानी से कर सकते हैं।

Friday, 3 June 2022

विश्वास फाउंडेशन के कैंप में किया 78 युवाओं ने रक्तदान

3rd June  2022 at  4:27 PM

 गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक सेक्टर 26 पंचकूला में हुआ विशेष आयोजन 

पंचकूला: 3 जून 2022: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो):: 

गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक सेक्टर 26,  व इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी जिला शाखा पंचकूला द्वारा संयुक्त रूप से मिलकर कॉलेज के हॉल में रक्तदान शिविर लगाया। शिविर में भारतीय स्टेट बैंक सेक्टर 26 के ब्रांच मैनेजर श्री वेंकटेश ने भी सहयोग किया। इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी की सचिव श्रीमती सविता अग्रवाल ने भी रक्तदताओं का हौंसला बढ़ाया व रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया। भीषण गर्मियों की वजह से अस्पतालों में भारी मात्रा में रक्त की कमी चल रही है इसी को देखते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रक्तदान करने में कॉलेज के छात्र बढ़ चढ़ कर आगे आए।    

विश्वास फाउंडेशन की महासचिव साध्वी नीलिमा विश्वास ने बताया कि शिविर का उद्घाटन मुख्यातिथि कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभागहरियाणा के महानिदेशक श्री रमेश चंद्र बिधान (आईएएस) व कॉलेज के प्रिंसिपल दलजीत जी के करकमलों द्वारा रक्तदताओं को बैज लगाकर किया। ब्लड बैंक जीएमएसएच सेक्टर 16 चंडीगढ़ की टीम ने डॉक्टर सिमरजीत कौर गिल की देखरेख में 78 यूनिट्स रक्त एकत्रित किया। डॉक्टरों द्वारा को किन्ही कारणों की वजह से रक्तदान करने के लिए मना कर दिया गया। शिविर को सफल बनाने में कॉलेज के स्टाफ ने खूब प्रयास किया।

श्री रमेश चंद्र बिधान ने बताया कि लोगों में यह भ्रम है कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है। रक्तदान के कारण कोई कमजोरी नहीं आतीबल्कि सभी को 90 दिन में एक बार अवश्य ही रक्तदान करना चाहिए। इससे जरूरतमंदों को मदद मिलती है साथ ही शरीर स्वस्थ रहता है। रक्तदान जैसा पुनीत काम सबसे बड़ी सेवा में आता है। रक्त ही एकमात्र ऐसा पदार्थ है जिसका निर्माण किसी फैक्ट्री में नहीं किया जा सकता।

कॉलेज के प्रिंसिपल दलजीत जी ने बताया कि केवल स्वयं अपनी मर्जी से रक्तदाताओं द्वारा रक्तदान करने से ही रक्त की कमी पूरी की जा सकती है। पहले रक्तदान जब जरूरत होती थी तब किया जाता था। अब तो कई लोग ऐसे भी हैंजो जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर भी रक्तदान करते हैं। रक्तदान जीवन का सबसे बड़ा दान हैजिससे मनुष्य ना जाति देखता है ना धर्म देखता। यह मनुष्य के लिए जीवन का सबसे पुनीत कार्य है। रक्तदान करके ही हम जरूरतमंदों की जान बचा सकते हैं।

इस रक्तदान शिविर में आये सभी क्तदानियों को प्रशंसा पत्र व गिफ्ट देकर प्रोत्साहित किया गया। इस अवसर पर गंभीर सिंह व विश्वास फाउंडेशन से मुलखराज मनोचा, सुनीता मनोचा, शत्रुघन कुमार, विशाल कुवर, नीरज यादव व अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे।


Friday, 21 May 2021

विश्वास फाउंडेशन का कोरोना को हराने का प्रयास सराहनीय

21st May 2021 at 3:44 PM

मेयर कुलभूषण गोयल ने कहा इससे वातावरण की शुद्धता भी होगी 


पंचकूला
:21 मई 2021: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़)::

कभी सोचा न था कि कोरोना युग आएगा। सांस लेते वक़्त भी डॉ और अपराध का बोध होगा। अपनों से दुरी बना कर रखनी पड़ेगी। नाक और मुँह पर मास्क लगाने पड़ेंगे। कुछ वर्ष पहले अगर इस तरह की बात भी की जाती तो लोग इसे  और बुरी तरह मज़ाक उड़ाते। अब जबकि यह हमारे वक़्तों की एक हकीकत बन चुकी है तो इसे स्वीकार किये बिना कोई रास्ता भी नहीं। अब कोविड/कोरोना के खिलाफ चल रहे युद्ध में सक्रिय भागीदारी दिखाते हुए विश्वास फाउंडेशन, पंचकूला ने कोरोना महामारी के इन कठिन दिनों में वातावरण की शुद्धता के लिए जड़ी-बूटियों वाले मिक्सचर से शहर के सेक्टरों में "हर्बल धूनी की आहूति" के लिए जागरूकता का आगाज किया है। इससे पर्यावरण शुद्ध होगा। सांस लेने लायक हवा आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। 

अपने इस इस मकसद को पूरा करने के लिए विशवास फाउंडेशन ने एक अभियान चलाया है। पंचकूला में इसका शुभारम्भ बहुत सराहा गया। आज शुक्रवार को बीकेएम विश्वास स्कूल कैंपस से मेयर कुलभूषण गोयल ने झंडी दिखाकर सेक्टर 9, 10, 11, 12, 17 और 18 के लिए तीन टीमों को रवाना करके जागरुकता कार्यक्रम का आगाज किया। उन्होंने वातावरण की शुद्धता के लिए विश्वास फाउंडेशन के प्रयास को खुले शब्दों में सराहा। इससे आम जनता में भी स्वस्थ हवा और सुरक्षित सांस को ले कर आत्म वोइश्वास में वृद्धि हुई। 

इस मौके पर विश्वास फाउंडेशन की जनरल सेक्रेटरी साध्वी नीलिमा विश्वास ने कहा कि वातावरण में फैले कोरोना संक्रमण के अंशों को कम करने की कोशिश की गई है। मकसद पंचकूलावासियों की भी भागीदारी बढे। लोग भी घरों व मोहल्लों में हवन करें और धूनी यात्रा निकालें। कोरोना महामारी की दूसरी लहर हवा के जरिए ही संक्रमण फैला रही, ऐसा सरकार और वैज्ञानिकों ने कहा है, सो वातावरण की शुद्धता से भी संक्रमण को कम करने की कोशिश होनी चाहिए। इस अवसर पर सेक्टर 9 शिवा मार्किट के प्रेजिडेंट सुरिंदर कुमार बंसल, विश्वास फाउंडेशन से रजनीश सिंगला, आशीष सिंगला, श्यामसुन्दर साहनी, सविता साहनी, मुलखराज मनोचा, सुनीता मनोचा, अविनाश शर्मा, वर्षा शर्मा, राजिंदर गुलाटी व अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

Thursday, 20 May 2021

कोविड/कोरोना के युग में विश्वास फाउंडेशन की नई पहल

मीडियाकर्मियों में बांटे सेनेटाइजर व अन्य जरूरी बूस्टर


पंचकूला
20 मई 2021: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़):: 

विश्वास फाउंडेशन की ओर से जारी कोरोना महामारी के इन कठिन दिनों में सेवा कार्यों की कड़ी में आज वीरवार 20 मई को पंचकूला में मीडियाकर्मियों को मास्क, सेनेटाइजर और अन्य जरूरी बूस्टर दिए। ये वो फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स हैं जो रोजाना अपनी जान जोखिम में डाल कर शहरवासियों को देश-प्रदेश व शहर भर की खबरों से रूबरू करवाते हैं। 

इन सब कोरोना वारियर्स जो कि विभिन्न समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों से जुड़े हुए हैं, को आज बीकेएम विश्वास स्कूल सेक्टर 9 में बुलाकर किट्स दी गईं। विश्वास फाउंडेशन की जनरल सेक्रेटरी साध्वी नीलिमा विश्वास ने बताया कि हरेक किट में 10 मास्क, सेनेटाइजर, मल्टी विटामिन, जूस और अन्य जरूरी चीजें दी गई। इस कोरोना काल में पत्रकार निस्वार्थ सेवा में जुटे हुए हैं और अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को मौजूदा हालातों के अलावा शहर की प्रमुख खबरों से भी अवगत करवा रहे हैं, इसलिए विश्वास फाउंडेशन ने फैसला किया कि पत्रकारों को उनकी सुरक्षा एवं कोरोना संकट में बचाए रखने के लिए यह विशेष किट प्रदान की जाए। सभी के प्रति संस्था की ओर से आभार भी जताया गया जो ये लोग हर दिन अपनी जान की परवाह किए बिना देश व समाज के लिए काम कर रहे हैं। साध्वी नीलिमा विश्वास ने कहा कि पत्रकार रोजाना सैकड़ों लोगों के संपर्क में आते हैं, इसलिए उन्हें अपनी सावधानी विशेष तौर पर रखनी चाहिए। विश्वास फाउंडेशन की ओर से कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए कोविड-19 मेडिसन किट तैयार की गई है, जोकि सभी लोगों को जिन्हें कोरोना संक्रमण है, उन्हें फ्री दी जाएगी। इस किट में बुखार की दवा, एंटीबायोटिक, मल्टीविटामिन, एंटी एलर्जिक, विटामिन सी, जिंक समेत कई दवाएं हैं। जिसको भी जरूरत हो वो बीकेएम विश्वास स्कूल सेक्टर 9 पंचकूला में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक आकर इन दवाइयों की किट प्राप्त कर सकते हैं। इस किट का कोई भी शुल्क नहीं है, सभी के लिए निशुल्क/फ्री है।

Thursday, 11 March 2021

ज़ीरकपुर बलटाना मार्किट में लगा रक्तदान शिविर

    2 रक्तदानियों ने किया रक्तदान   


जीरकपुर
11 मार्च 2021: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

ज़ीरकपुर में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर खूनदान का कैंप लगा कर इस त्यौहार को बहुत ही मानवीय अंदाज़ में मनाया गया। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर यह एक अनूठा प्रयास था इस त्यौहार को मनाने का। गौरतलब है कि अस्पतालों में आयी रक्त की कमी गंभीर होती जा रही है। इसे पूरा करने के लिए विश्वास फाउंडेशन ने आज वीरवार को बलटाना मार्किट में एक खूनदान कैंप लगाया गया। अपना वैष्णो ढाबा रामलीला ग्राउंड के पास ब्लड डोनेशन कैंप में खूनदानियों ने बहुत ही उत्साह से खूनदान दिया। 

उल्लेखनीय है कि यह कैंप इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी डिस्ट्रिक्ट ब्रांच मोहाली व अपना वैष्णो ढाबा के सहयोग से लगाया गया। शिविर में सामाजिक दूरी, मास्क व सैनिटाईज़ेशन का ख़ास ध्यान रखा गया। इस मौके पर 62 रक्तदानियों ने अपनी स्वेछा व उत्साह से रक्तदान किया। शिविर में ब्लड बैंक सोहाना मोहाली की टीम ने डॉ रितेश गुलाटी की निगरानी में रक्त एकत्रित किया। 

 इस अवसर पर विश्वास फाउंडेशन की जनरल सेक्रेटरी साध्वी नीलिमा विश्वास ने बताया कि एक स्वस्थ व्यक्ति का इंसानी, नैतिक और सामाजिक दायित्व बनता है की वह स्वयं को रक्तदान के लिए तैयार रखे। इस संकट की घडी में हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। क्योंकि रक्त का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इससे शरीर में किसी तरह की कमी नहीं आती है। रक्तदान का मकसद उन मरीज़ो की मदद करना है, जिनकी रक्त की कमी से ज़िन्दगी की डोर कमज़ोर पड़ जाती है। थैलीसीमिया जैसी कई गंभीर बीमारियां इसी तरह की होती हैं। 

गौरतलब है कि इस रक्तदान शिविर में आये हुए सभी रक्तदानियों को प्रशंसा पत्र, मास्क, साबुन, सैनिटाईजर व गिफ्ट देकर प्रोत्साहित किया गया। इस मौके पर संदीप कुमार यादव, रमेश सक्सेना, कृष्णा सक्सेना, हेम चंद गुप्ता, विवेक पसरीचा, शालिनी, शिवानी ब्लड बैंक के डॉक्टर्स व अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।