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Friday, 6 February 2026

जादू की तरह फायदा पहुंचाती हैं हस्त मुद्राएं

Rector Kathuria on Thursday 05th February 2026 at 20:28 Regarding Finger Yoga  or Hand Yoga Regarding 

लेकिन किस योग्य मार्गदर्श्क की देखरेख में ही करना उचित होगा


लुधियाना
:6 फरवरी 2025: (रेक्टर कथूरिया//मीडिया लिंक रविंदर//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

उम्र बढ़ती जा रही है और समय हाथ से निकला जा रहा है। ज़िंदगी की गर्दिश और संघर्ष ने बहुत कुछ दिखाया भी समझाया भी लेकिन फिर भी उलझनें मन को उलझाती रही। कई बार ज़िंदगी निरथर्क भी लगने लगती। स्वास्थ्य बिगड़ा तो मुश्किलें और बढ़ गई। अंग्रेज़ी मेडिकल सिस्टम की दवाओं से तो मन ही चलने लगा। इन दवाओं से अगर एक मर्ज़ ठीक होती तो दस नई बीमारियां और लगने लगती। ऊपर से यह सिस्टम महंगा भी बहुत है। इस हालात में चिंता भी बहुत हुई लेकिन इसी चिंता का सामना करते करते चिंतन भी बढ़ा। मेडिटेशन और अच्छी लगने लगी। सेहत ज़्यादा बिगड़ी तो तिब्बती इलाज प्रणाली की शरण में जाने का मन हुआ। तिब्बत वाले मेडिसिन सिस्टम ने मौत के मुँह से निकालने का चमत्कार कर दिखाया। जान बच गई लेकिन साथ में बुढ़ापे की अपनी अलह दुश्वारियां होती हैं। उम्र 68 को पार करने लगी तो भविष्य अंधेरा भी लगने लगा। कई छोटी छोटी मुश्किलें भी अभी बाकी हैं। इसके बाद अच्छी,किस्मत से मिला हस्त मुद्रा योग साधना का ज्ञान। 

सही ढंग तरीका तो यह है कि इस साधना को ठीक से बैठ कर करना चाहिए और रीढ़ बिलकुल सीढ़ी रहे। लेकिन बुढ़ापे वाली उम्र और स्वास्थ्य कारणों से ज़्यादा समय तक सीधे बैठना कठिन हो जाता। इस लिए तलाश कर रहा है कि लेट कर कौन कौन सी मुद्रा संभव है। 

छह दशक से अधिक की उम्र अर्थात 68 प्लस की उम्र में लेट कर की जाने वाली हस्त मुद्रा के लिए ज्ञान मुद्रा एक अच्छा विकल्प है। यह मुद्रा न केवल लेट कर की जा सकती है, बल्कि यह ध्यान और श्वास अभ्यास के लिए भी बहुत उपयोगी है। इस से बहुत फायदा भी हुआ। एक तो जल्दी से नींद आने लगी। दूसरा फायदा यह कि मन भी शांत होने लगा। विचारों पर नियंत्रण भी बढ़ने लगा और बार बार इधर उधर भागता मन भी काबू में आने लग। 

विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन करते हुए बताया कि ज्ञान मुद्रा के अलावा, आप शून्य मुद्रा (चिन मुद्रा) भी लेट कर कर सकते हैं। इसमें आप अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें और अपने अंगूठे को अपनी सूचक अँगली के साथ जोड़ें। यह मुद्रा भी ध्यान और श्वास अभ्यास के लिए बहुत उपयोगी है।

इसके अलावा, आप प्राण मुद्रा भी लेट कर कर सकते हैं। इसमें आप अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें और अपने अंगूठे को अपनी सूचक अँगली और मध्यमा अँगली के साथ जोड़ें। यह मुद्रा ऊर्जा को बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करती है।

फ़िलहाल इतना ही लेकिन एक बात ज़रूर ध्यान रखें कि यदि कोई स्वास्थ्य समय हो तो किसी योग एक्सपर्ट से मार्गदर्शन ज़रूर ले लें। इन मुद्राओं को करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना उचित होगा, खासकर अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है। गलत मुद्रा अपनाने से नुकसान की संभावना भी बनी रहती है। 

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Sunday, 15 September 2024

क्या ज्योतिष से रोगों का इलाज संभव है?

Sunday 14th September 2024 at 5:15 PM 

भारत में कहां कहां होता है यह इलाज संभव है?

चंडीगढ़: 15 सितम्बर 2024: (मीडिया लिंक//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

क्या ज्योतिष से रोगों का इलाज संभव है?---क्या इसके वैज्ञानिक आधार मौजूद हैं? यदि ऐसा  तो भारत और दुनिया में इस तरह से कहां कहां इलाज होते हैं? क्या ऐसे स्थानों और लोगों का पता चल सकता है? ऐसे सवाल अक्सर वे लोग जिनके ज्योतिष अभी भी अज्ञात है। 

वास्तव में ज्योतिष के माध्यम से रोगों का इलाज करना लंबे समय से एक विवादास्पद और चर्चित विषय रहा है। यूं भी कई मामलों पर  ज्योतिष को लेकर विभिन्न मत हैं और इसका वैज्ञानिक आधार पर समर्थन करना काफी चुनौतीपूर्ण है। हालाँकि कई जगहों पर मेडिसिन के साथ साथ ज्योतिष विद्या से इलाज के अलग सेक्शन भी बने हुए हैं। निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से इस विषय को स्पष्ट करने का प्रयास किया जा सकता है। 

ज्योतिष और रोगों का इलाज  बहु संख्यक लोगों के लिए भले ही कुछ अजीब सी बात हो लेकिन जिन लोगों की इस ज्ञान विज्ञान में आस्था है और जिन लोगों को ज्योतिष का ज्ञान है वे इसे पूरी तरह से परफेक्ट मानते हैं। ज्योतिष विज्ञान रोग की पड़ताल करते हुए कई बार पिछले जन्मों तक जाता है। आधुनिक विज्ञान इसे पारिवारिक पृष्ठभूमि के हिसाब से देखते हैं। उनका मानना है कि यह बीमारी मां या पिता के जीन से आई है।  इस सिलसिले  करते करते कई बार कई पीढ़ियों तक के स्वास्थ्य को खंगाल लिया जाता है। थैलेसीमिया जैसे रोग जैनेटिक रोग ही गिने जाते हैं। शायद यह कारण भी उन कारणों में से एक हो जिनके अंतर्गत नज़दीक के रिश्तों mein शादी विवाद निषिद्ध माना  जाता था। लोग शादी का संबंध जोड़ते समय माता और पिता की तरफ से सात पुश्तों को छोड़ना ही उचित समझते थे। शायद इसी वजह से गाँव की लड़की को सगी बहिन की तरह सम्मान दिया जाता था। उसके साथ शादी की बता सोची भी नहीं  जाती थी।  

ज्योतिष का सिद्धांत कई अन्य पहलुओं से भी बहुत गहरा है। ज्योतिष में माना जाता है कि ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति हमारे जीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती है। ज्योतिषी ग्रहों की स्थिति और कुंडली का विश्लेषण कर यह बताने का प्रयास करते हैं कि कौन से ग्रह या नक्षत्र आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं और इसके उपाय सुझाते हैं।

अब ज्योतिष के मुताबिक सुझाए जाते उपचार के तरीके भी तो विशेष हैं। यह बात अलग है की ज्योतिष में आस्था न रखने वालों को यह तौर तरीके भी अजीब लग सकते हैं। 

इन्हीं में से एक तरीका है रत्न धारण करना। रत्न धारण करना करना तो होता है लेकिन इसकी जानकारी सभी को नहीं होता। कुछ अध्सीखे लोग कई बार गलत रत्न धारण करवा देते हैं और अपनी जेब गर्म करने तक ही मतलब रखते हैं। इसलिए  करते समय अच्छा जानकार ज्योतिष कौन है इसका पता लगाना बहुत ज़रूरी है। 

इसी मकसद के लिए एक और तरीका होता है पूजा और अनुष्ठान करना। इसके भी कई फायदे होते हैं लेकिन इसका सही तरीका भी किसी अच्छे जानकार से पूछना सही रहता है। पूजा और अनुष्ठान पुराने वक्तों में भी होते थे और आज भी होते हैं। 

किसी विशेष मकसद और इलाज के लिए विशेष दान देना भी एक अच्छा जरिया माना जाता है। कुछ विशेष चीज़ों का दान कुछ विशेष  विशेष समय पर विशेष स्थानों पर हो तो उससे भी फायदा मिलता है। इस तरह के दान का भी एक विज्ञान और विधान है। उसे समझे बिना ज़ेह सब शायद फायदा न दे सके। 

विशेष मंत्रों का जाप करना तो कई बार तुरंत फायदा देने वाला तरीका बन जाता है। मंत्र जाप इसी विधि विधान में आ जाते हैं। जिनक उच्चारण, जिनका समय और आवाज़ या धुन सब वैज्ञानिक हिसाब से ही होते हैं।  इनका असर भी गहरायी से होता है।  

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक प्रमाण शायद बहुत कुछ साबित न भी कर सके इसके बावजूद इसमें लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है। जो लोग इस पर यकीन करते हैं वे करते ही हैं। वर्तमान में, ज्योतिष से रोगों का इलाज करने के वैज्ञानिक प्रमाण बहुत कम हैं लेकिन फिर भी इसमें आस्था और विश्वास लगातार बढ़ रहा है। 

ज्योतिष के सिद्धांत और इसके प्रभावों का वैज्ञानिक परीक्षण करना हालांकि कठिन भी है क्योंकि यह बहुत से व्यक्तिगत और पर्यावरणीय कारकों पर निर्भर करता है। ज्योतिष पर किए गए कई वैज्ञानिक अध्ययन यह साबित करने में असफल रहे हैं कि ग्रहों की स्थिति और मानव स्वास्थ्य के बीच कोई स्पष्ट संबंध है। 

इसके इलावा प्लेसिबो प्रभाव भी बहुत काम करता है। कुछ मामलों में, लोगों को ज्योतिषीय उपाय करने से मनोवैज्ञानिक लाभ हो सकता है। इसे प्लेसिबो प्रभाव कहा जाता है, जहां व्यक्ति की आस्था और विश्वास उसके स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

देश और दुनिया में ज्योतिष आधारित उपचार कहां कहां होते हैं? इस सवाल को भी अक्सर बहुत पूछा जाता है। यह सवाल ज़रुरी भी है। भारत में ज्योतिष का एक लंबा इतिहास है और यह व्यापक रूप से प्रचलित है। कई लोग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए ज्योतिषीय उपायों का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में ज्योतिष आधारित स्वास्थ्य क्लीनिक और उपचार केंद्र होते हैं।

उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ हिमाचल प्रदेश भी इस मामले में बहुत अहम है। हिमाचल के धर्मशाला से आठ किलोमीत ऊपर पहाड़ की तरफ जाएं तो वहां दलाईलामा का मुख्यालय है। वहां का माहौल भी बहुत ही धार्मिक सा महसूस होने लगता है। 

इसे मैक्लोडगंज के नाम से जाना जाता है। इस स्थान पर तिब्बती समुदाय का मन्दिर भी है और अस्पताल भी है। इसी अस्पताल में तकरीबन उन सभी बिमारियों का इलाज किया जाता है जिन के मामले में आधुनिकचिकित्सा पद्धति नाकाम सिद्ध होती है। आम बिमारियों से लेकर कैंसर तक का इलाज यहाँ सफलता से किया जाता है। 

अन्य देशों की बात करें तो नेपाल में भी ज्योतिष और तंत्र-मंत्र का प्रचलन है। यहां पर बहुत सी बिमारियों को स्थानीय ढंग तरीकों से ठीक कर दिया जाता है। तिब्बती ज्योतिष और चिकित्सा का अपना अलग महत्व है। इसकी चर्चा हम ऊपर भी कर आए हैं। 

इसके साथ यह भी सत्य है कि पश्चिमी देश भी इस मामले में कम नहीं हैं। कुछ पश्चिमी देशों में भी लोग ज्योतिष में रुचि रखते हैं, लेकिन यह मुख्यधारा वाली चिकित्सा का हिस्सा कभी नहीं बने है। इस तरह की इलाज पद्धति से लोग ठीक भी होते हैं लेकिन इसके बावजूद दुनिया के सामने नहीं आते। 

निष्कर्ष यह भी निकलता है कि ज्योतिष से इलाज के केंद्र कई जगहों पर मौजूद हैं। ज्योतिष से रोगों का इलाज करना एक विवादास्पद और व्यक्तिगत विश्वास का विषय है। इसके वैज्ञानिक प्रमाण बहुत सीमित हैं और आधुनिक चिकित्सा में इसका समर्थन नहीं किया जाता है। हालांकि, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह कई समाजों में प्रचलित है। 

आखिर में एक विशेष सलाह भी ज़रूरी है कि ज्योतिषीय उपचार करते समय सावधानी बरतनी चाहिए और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए हमेशा योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

Wednesday, 22 June 2022

नारी भोग की वस्तु नहीं योग का अवतार है-दिव्य ज्योति जागृति संस्थान

 22nd June 2022 at 3:02 PM

 कैलाश नगर आश्रम में हुआ महिलाओं के लिए विशेष योग आयोजन  


लुधियाना
: 22 जून 2022: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

योग की लोकप्रियता दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही है। ऐसे ट्रेंड और माहौल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने एक विशेष शिविर आयोजित किया जिसमें महिलाओं के लिए योग के गहरे गुर सिखाए गए। 

दिव्य ज्योति जागृती संस्थान के सामाजिक प्रकल्प संतुलन के तहत अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में कैलाश नगर आश्रम में एक दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया गया | जिसमें विभिन्न प्रकार के योगासन जैसे भुजंगासन, नौकासन, तितली आसन, गौमुख आसन, वृक्ष आसन, धनुरासन, वीरभद्र आसन एवं अनुलोम विलोम, कपाल भाती, नाड़ी शोधन आदि प्राणायाम करवाए गये और इन सभी आसनों एवं प्राणयाम के विभिन्न लाभों के बारे में बताया |

इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए साध्वी वीरेशा भारती जी ने बताया कि प्राचीन भारतीय ज्ञान में योग बहुत अधिक महत्व रखता है । यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने का एक उत्तम साधन है बल्कि मनुष्यों को मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर कारगर पद्धति को  प्रदान करता है । योग की उत्पत्ति ऋषि पतंजलि द्वारा दिए गए “पतंजलि योग सूत्र " से हुई है । योग , जैसा कि नाम से ही समझ आ जाता है की एक ऐसी पद्धिति है जिससे शरीर , मन , और आत्मा में समरसता की स्थापना की जा सके । यह न केवल शरीर को स्वस्थ , लचीला और विषाणुओ के विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रदान करता है , बल्कि हमारे मन को भी एकाग्रता एंव तदनुसार कार्य करने के लिए भी मार्गदर्शन करता है । 

साध्वी जी ने योग के महत्व को बताते हुए कहा कि शिव संहिता में मुख्यतः 84 प्रकार के  योगासनों का वर्णन हैं जिन्हें हर वर्ग का व्यक्ति कर सकता है | प्रत्येक व्यक्ति को शारीरिक एंव मानसिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए हर रोज योग करना चाहिए |