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Sunday, 3 December 2023

दिव्य जयोति जाग्रति संस्थान की तरफ से हरनाम पूरा में विशेष आयोजन

Sunday 3rd December 2023 at 4:00 PM

साध्वी सुश्री राजविद्या भारती ने सुनाई मनुष्य की करुण दास्तान 


लुधियाना
: 3 दिसंबर 2023: (कार्तिका कल्याणी सिंह//आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

समाज को जागरूक और आध्यात्मिक  बनाए रखने के लिए जो संगठन सक्रिय हैं उनमें दिव्य जयोति जाग्रति संस्थान भी है। की तरफ से लगातार धार्मिक भजन संगीत के कार्यक्रम किए जाते हैं। इसी तरह का एक और प्रोग्राम हरनामपुरा आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस आयोजन में  सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की  शिष्या साध्वी सुश्री राजविद्या भारती जी ने मनुष्य की लगातार सुख के पीछे लगी हुई दौड़ के विषय में अपने विचार रखे। 

साध्वी जी ने कहा की जन्म से मृत्यु तक बचपन से बुढ़ापे तक एक दौर निरंतर चलता रहता है सुख को पाने का। मनुष्य अपना पूरा प्रयास करता है एक-एक सुख के तिनके को इकट्ठा करने के लिए।संपूर्ण शक्ति और कीमती समय सुख के तिनके के लिए खर्च होता है  पर सुख के इस तिनके की तलाश में वह कहीं दूर ही  चला गया,किसी और ही दिशा में पहुँच गया। किसी और ही उलझन को बुनता चला गया। धीरे-धीरे यह जाल इतना विशाल हो गया कि उसको कहीं  छोर  दिखाई नहीं  दे रहा। 

सुख के तिनके की लालसा उसके जीवन में ढेरों दुखों को निमंत्रण देने लगी है ।   कैसा आश्चर्य है? पाने की आकांक्षा कुछ और थी, परंतु प्राप्ति कुछ और की हो जाती है। आखिर इसके पीछे कारण क्या है?  उन्होंने कहा  कि इसका कारण और निवारण हमें तुलसीदास जी द्वारा रचित ज्ञानदीपक प्रसंग से स्पष्ट होता है। वे इस प्रसंग में लिखते हैं कि अगर एक मनुष्य अंधेरे कमरे में एक गांठ को सुलझाना चाहे, तो क्या होगा? वह उस गांठ को सुलझाने की बजाय उसे और अधिक उलझा देगा। वह गांठ उस अंधकार में कभी सुलझ ना पाएगी। 

परंतु यदि उस कमरे में दीप जला दिया जाए, तो उस दीपक के प्रकाश में मनुष्य गांठ को शीघ्र ही सुलझा पाएगा।  इसी प्रकार मनुष्य भी आज अज्ञानता रूपी अंधकार में विचरण कर रहा है। इसलिए आवश्यकता है, दीप जलाने की अर्थात् प्रकाश करने की। जब तक उसके हृदय में ज्ञान का दीपक प्रज्वलित नहीं होगा, तब तक मनुष्य दुखों का अधिकारी रहेगा। परंतु यह ज्ञान  का बीज केवल मात्र एक पूर्ण गुरु ही जीव के अंदर रोपित कर सकते हैं।

Thursday, 21 September 2023

माननीय दादा श्री सत्यश्रेयानन्द अवधूत बता रहे हैं सफलता के गुर

Thursday 21st September 2023 at 07:35 AM FB

बाबा आज भी मार्गियों को निकटता का अहसास दिलाते हैं 


नई दिल्ली
: 21 सितंबर 2023: (रेक्टर कथूरिया//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

आनंद मार्ग को जिन लोगों ने नज़दीक से देखा है उनको मालुम है कि आनंद मार्ग में रह कर इन्सान को जहां सात्विक और अध्यात्मिक ढंग से जीवन जीने के ढंग तरीके आ जाते हैं वहीं उसमें अनुशासन और एकाग्रता जैसे गुण भी धीरे धीरे विकसित हो जाते हैं।  साधक चमत्कारों और सिद्धियों से बहुत ऊंचा उठ कर केवल बाबा के चरणों में ध्यान लगाना ही सबसे आवश्यक समझने लगते हैं। समाज को कैसे ऊंचा उठाना है यही सोच अधिक सक्रिय हो जाती है। 

सफलता और खुशहाली  उनके कदम चूमने लगती है। पराजय उनसे दूर भागने लगती है। किसी भी तरह का भय उनके निकट नहीं आता। अंतर्मन से लेकर बाहरी जीवन तक में उनमे एक गरिमा और मज़बूती सी आ जाती है। किसी भी तरह की मुसीबत अगर उन पर आ भी जाए तो वह उन्हें और भी मज़बूत बना कर जाती है। 

खुशियों में भी संतुलित बनाए रहना और संकट में भी घबराहट से बचे रहना हर मार्गी के लाइफ स्टाईल में शामिल हो जाता है। ज़रूरत पड़ने पर वह बड़ी से बड़ी नकारत्मक शक्ति के खिलाफ स्टैंड लेने से गुरेज़ नहीं करता। हालाँकि हर क्षेत्र में सक्रिय मार्गी समाज उसका साथ देने को तत्पर रहता है लेकिन मार्गी साधक अकेले में भी बेहद बलवान हो जाता है। उसकी प्रतिबद्धता और संकल्पशीलता कभी भी डगमगाते ही नहीं। 

साधकों और दुसरे मार्गियों के लिए भी हर पल आनंद जैसी स्थिति ही बन जाती है इस सब के बावजूद ज़िंदगी हर कदम पर एक जंग कही जाती है। बिना संघर्ष वाले जीवन की मार्गी कल्पना भी नहीं करते। हर रोज़ सुबह से लेकर रात्रि तक उनका साधनामय जीवन उन्हें याद दिलाता है कि जीवन के एक क्षण भी व्यर्थ नहीं जाने देना। मानव जन्म अनमोल है इसलिए इस सो कर या खा कर व्यर्थ नहीं गंवाना है। 

इस सारे संघर्ष और साधनामय जीवन में बहुत सी मुश्किलें भी आती ही हैं। साधनापथ पर चलना सहज भी नहीं होता ख़ास तौर पर नए साधकों के लिए। इसी बात को सामने रख कर माननीय दादा श्री सत्यश्रेयानन्द अवधूत समय समय पर गहरे ज्ञान की बातें सोशल मीडिया पर भी शेयर करते रहते हैं।  

अपनी नई पोस्ट में दादा बताते हैं-अपने जीवन में चार बातें याद रखें।

1. अगर आप सही हैं तो इसे सबके सामने साबित करने में समय बर्बाद न करें।

 2. अगर आप गलत हैं तो सही होने का दिखावा करने में समय बर्बाद न करें।

 3. अगर आपको मदद की जरूरत है तो इसे मांगने में समय बर्बाद न करें ।

और

4.  हमेशा याद रखें कि जीवन बहुत छोटा है, अपना समय दुःख, उदासी और नकारात्मकता में बर्बाद न करें।

इसके साथ ही दादा याद दिलाते हैं कि बाबा ने समय समय पर बहुत से सूत्र बताए हैं जिन्हें अपना कर हम बड़े से बड़े संकट को हर सकते हैं। बाबा ने निन्दन्तु नीतिनिपुणा यद...निन्दन्त

निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु ।

लक्ष्मी: समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम् ॥

अधैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा ।

न्याय्यात्पथ: प्रविचलन्ति पदं न धीरा: ॥ ( भर्तृहरि )

अर्थ :- नीति को जानने वाले लोग चाहें निन्दा करें या प्रशंसा , धन आय या जाए, मृत्यु अभी आ जाए या चिरकाल के बाद आए प्रन्तु धैर्यवान् लोग न्याय के मार्ग से विचलित नही होते ।

इस श्लोक को अनेक प्रवचनों में कहा गया है। बाबा के प्रवचन पढ़ते या सुनते हुए या फिर कोई पुरानी वीडियो देखते हुए ऐसा लगने लगते है जैसे एक नई ऊर्जा हमें मिल रही है। कईओं की तो सुनते सुनते समाधि लग जाते है। कुछ साधक बैठे बैठे सुनते हुए ही आनंद विभोर हो जाते हैं। 

Wednesday, 14 June 2023

ज्योतिष विज्ञान: सच और झूठ की सीमा कहाँ तक?

ज्योतिष से जुड़े विज्ञान के संबंधों की विशेष चर्चा 

लुधियाना: 14 जून 2023: (आराधना टाइम्स//ज्योतिष डेस्क)::

मानवीय तन मन की सरंचना भी अजीब है। आज क्या सामने है इसकी उसे न चिंता रहती है और न ही कोई जिज्ञासा। कल क्या होगा इसमें आम तौर पर सभी की रुचि रहती है। इस बात को जानने की चाहत ने ही ज्योतिष विज्ञान को विकसित किया। समुन्द्र में आने वाला ज्वार भाटा, सागर के विशाल जल पर चन्द्रमा का प्रभाव, उंगलियों के निशान, हाथों की लकीरें, ऋतू बदली, दिन रात इत्यादि बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनसे ज्योतिष के विज्ञान होने  समझ में आने लगती हैं। उंगलियों के निशान कभी किसी से नहीं मिलते। चन्द्रमा के प्रभाव से समुन्द्र का पानी आसमान की तरफ बहुत बड़ी ऊंचाई को छूता है। निश्चित ही हमारे अंदर के पानी पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है। तिब्बती मेडिसिन सिस्टम में दलाईलामा के पैरोकार ज्योतिष के आधार पर भी विभिन्न रोगों का इलाज करते हैं। जटिल रोगों के लिए वह बाकायदा जन्म तारीख और जन्म जा समय पता लगाने को कहते हैं। पिछले जन्मों को जान लेने का विज्ञान भी इस मामले में सहायक समझा जाता है। 

अब आज के दौर में भी ज्योतिष विज्ञान हमारे समाज में बेहद अहमियत रखने लगा है। ज्योतिष हमारे जीवन में हमेशा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह एक ऐसा विज्ञान है जो हमारी भविष्यवाणी करके हमें कल घटित होने वाली बातें आज दिखाने का प्रयास करता है। ज्योतिष के जरिए भविष्य देखने दिखाने की कोशिश हमें कई बार शक्तिशाली भी बना देती है और कई बार कमजोर भी। 

इस ज्ञान का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है जैसे कि समाज, राजनीति और व्यापार। हालांकि, ज्योतिष विज्ञान के बारे में बहुत से मतभेद भी हैं। कुछ लोग इसे एक वैज्ञानिक विषय के रूप में मानते हैं, जबकि दूसरे इसे एक धार्मिक विषय के रूप में मानते हैं। इस लेख में, हम इस सवाल का जवाब ढूंढेंगे कि ज्योतिष विज्ञान की सच और झूठ की सीमा कहाँ तक है। इन सवालों के जवाब भी महत्वपूर्ण हैं। बहुत सी वैज्ञानिक घटनाएं और रूटीन आस को साबित करते नज़र आने लगे हैं कि प्रकृति के रहस्य बहुत गहरे हैं।


इन रहस्यों के जरिए ही समझा जा सकता है कि ज्योतिष विज्ञान क्या है? इस विज्ञान के नियम और सिद्धांत क्या हैं?

यह बात हकीकत है कि ज्योतिष विज्ञान भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं माना जाता है। यह एक ऐसी विधा है जो कि व्यक्ति की जन्मकुंडली को अध्ययन कर उसके वर्तमान और भविष्य के बारे में बताती है। ज्योतिष विज्ञान में कुंडली में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, और आकाश जैसे पाँच महाभूत होते हैं जो कि मानव शरीर में उपस्थित हैं। ज्योतिष विज्ञान में विभिन्न ग्रहों की स्थिति के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है। ज्योतिष विज्ञान व्यक्ति को उसकी कुंडली के आधार पर विभिन्न विषयों जैसे उनके स्वास्थ्य, व्यवसाय, शिक्षा, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन आदि के बारे में बताती है। ज्योतिष विज्ञान के बारे में कहा जाता है कि इसमें एक अंधविश्वास होता है। लेकिन ज्योतिष विज्ञान वास्तव में एक विज्ञान है जो कि अध्ययन करने से हमें अपने जीवन के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता है।ज्योइसी तरह तिष विज्ञान के प्रकार

इस तरह ज्योतिष विज्ञान, जिसे ज्योतिष के रूप में भी जाना जाता है, एक आधुनिक दुनिया में भी एक प्राचीन कला है। यह एक ऐसी विज्ञान है जो ब्रह्मांड और इसके भागों, जैसे कि ग्रह और नक्षत्रों के बीच के संबंधों के अध्ययन पर आधारित है। ज्योतिष विज्ञान विभिन्न प्रकारों में आता है, जिनमें वैदिक ज्योतिष, चीनी ज्योतिष, वेस्टर्न ज्योतिष, ईजिप्टी ज्योतिष, जापानी ज्योतिष और मायान ज्योतिष शामिल हैं। प्रत्येक विधा के ज्योतिष विज्ञान में अपने अंतर्निहित सिद्धांत होते हैं, जिन्हें विभिन्न तरीकों से आवश्यक सामग्री के अध्ययन के उपयोग से लागू किया जाता है। वैदिक ज्योतिष भारतीय ज्योतिष का एक प्रमुख भाग है, जो वेदों के अध्ययन पर आधारित है। इसके अलावा, वेस्टर्न ज्योतिष उत्तर अमेरिका में प्रचलित है, जो विशेष रूप से यूरोपीय ज्योतिष पर आधारित है। चीनी ज्योतिष, जिसे शेंग ज्योतिष भी कहा जाता है, एक अन्य प्रसिद्ध ज्योतिष विज्ञान है, जो चीन में प्रचलित है। जहाँ तक झूठ और सच की सीमा की बात है, ज्योतिष विज्ञान एक विवादित विषय है और इस बारे में विभिन्न मत होते हैं। हालांकि, अगर आपको इसमें विश्वास है, तो आप इसे एक मान्य और उपयोगी विज्ञान के तौर पर हर कदम पर हर पल घटित होता हुआ पाएंगे।

इस हकीकत के बावजूद ज्योतिष में भी सच और झूठ की सीमा होती है। ज्योतिष बताने वाला ज्योतिषी स्वयं कितना जानकार है इसका भी असर होता है।

उल्लेखनीय है कि ज्योतिष विज्ञान, जिसे ज्योतिष भी कहा जाता है, एक विज्ञान है जो व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर उनकी भविष्यवाणी करता है। यह विज्ञान बहुत समय से लोगों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। लेकिन कुछ लोगों के मन में अभी भी सवाल होते हैं कि ज्योतिष विज्ञान में सच और झूठ की सीमा कहाँ तक है? इसके रहस्यों को समझे बिना इसके उत्तर समझे भी नहीं जा सकते।

आम तौर पर ज्योतिष विज्ञान की भविष्यवाणियों के पीछे अक्सर नज़र आने वाली साइंस के वैज्ञानिक तथ्य नहीं होते हैं। इसलिए, कुछ लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या ज्योतिष विज्ञान सही होता है या नहीं? इसके जवाब में कहा जा सकता है कि ज्योतिष विज्ञान की भविष्यवाणियों की सटीकता से ज्यादा इसकी आधारभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए। प्राकृति के नियमों को सामने रखते हुए ही ज्योतिष के इशारे समझे जा सकते हैं।

यदि एक व्यक्ति ज्योतिष विज्ञान को सही ढंग से समझता है तो उन्हें इसके माध्यम से अपने जीवन में बहुत सी मदद मिल सकती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ज्योतिष विज्ञान की भविष्यवाणियों में आपके कर्मों और भाग्य का खास महत्व होता है और इन भविष्यवाणियों को समझने के बाद भी यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने कर्मों के माध्यम से अपनी भविष्यवाणियों को साकार करते हैं या नहीं।

यदि ज्योतिष आधारित जीवन जीवन जिया जाए तो ज्योतिष विज्ञान के फायदे और नुकसान भी समझे जा सकेंगे। इसके संकेत कदम कदम पर नज़र भी आने लगेंगे।

ज्योतिष विज्ञान के बारे में बहुत कुछ सुना जा सकता है। यह एक विषय है जिसके बारे में लोग सहमत नहीं होते हैं। इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम ज्योतिष विज्ञान के फायदे और नुकसान के बारे में जानें। ज्योतिष विज्ञान को उन लोगों द्वारा मान्यता दी जाती है जो अपने जीवन में निरंतर समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। ज्योतिष विज्ञान उन लोगों को मार्गदर्शन देता है जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित होते हैं। ज्योतिष विज्ञान के फायदे कुछ इस प्रकार हैं। ज्योतिष विज्ञान में आप अपने भविष्य को जान सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ज्योतिष विज्ञान आपको अपने शुभ और अशुभ ग्रहों के बारे में बताता है जो आपके जीवन में कैसे प्रभावित होते हैं। हालांकि, ज्योतिष विज्ञान के नुकसान भी होते हैं। ज्योतिष विज्ञान को समझना आसान नहीं है और इसमें कुछ लोग धोखा भी देते हैं। इसलिए, ज्योतिष विज्ञान के बारे में असत्य बातें फैलाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, अधिकतर लोग अपने भविष्य को जानने के लिए ज्योतिष विज्ञान का इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें अनिश्चितता में रखता है। इसलिए, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते है कि अभी भी इस क्षेत्र में गहन अध्यन और साधना को जरूरत है। कई राज्यों को यूनिवर्सिटी में इसकी बकायदा शिक्षा शुरू हो चुकी है। निकट भविष्य में इसका ट्रेंड और भी बढ़ेगा।

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Tuesday, 7 July 2020

गुरुकृपा से बन जाती है हर एक बिगड़ी बात

 जो भाग्य में नहीं लिखा होता वह भी मिलने लगता है  
इस प्रतीकात्मक तस्वीर को अभिनव गोस्वामी ने 11 नवम्बर 2015 को सुबह 11:16 पर क्लिक किया
अध्यात्मिक दुनिया: 07 जुलाई 2020: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
सत्य विपरीत रूपों में भी सत्य ही रहता है। कभी कभीं उसके विपरीत ध्रुव या बदले हुए रूप देख कर कन्फ्यूज़न होने लगता है कि आखिर असली सच कौन सा है? लेकिन सच तो सच ही रहता है। उस पर रंग या हालात का असर महसूस होने भी लगे तो भी वे सभी प्रभाव अल्प काल के ही होते हैं। 
यही कहानी जिंदगी और किस्मत के सत्यों पर भी लागू होती है। भले हीं आपके भाग्य में कुछ नहीं लिखा हो पर अगर गुरु की कृपा आप पर हो जाए तो आप वो भी पा सकते है जो आपके भाग्य में नही लिखा था  या नहीं लिखा हैं।
इस प्रतीकात्मक तस्वीर को Khirod Behera ने 07 जून 2020 को
बाद दोपहर 1:00 बजे क्लिक किया 
शायद एक कहानी से आपको यह बात सुगमता से समझ में आ सके। काशी नगर के एक धनी सेठ थे जिनके कोई संतान नही थी। बड़े-बड़े विद्धान ज्योतिषियों से सलाह-मशवरा करने के बाद भी उन्हें कोई लाभ नही मिला। सभी उपायों से निराश होने के बाद सेठ जी को किसी ने सलाह दी कि आप गोस्वामी जी के पास जाइये वे रोज़ रामायण पढ़ते हैं और बहुत ही श्रद्धा और आस्था से पढ़ते हैं। जब वह रामायण पढ़ते हैं तो कहा जाता है कि तब भगवान राम स्वयं उस कथा को सुनने आते हैं। इसलिये उनसे कहना कि भगवान से पूछें कि आपके संतान कब होगी? सेठजी गोस्वामी जी के पास जाते हैं। अपनी समस्या के बारे में भगवान से बात करने को कहते हैं। कथा समाप्त होने के बाद गोस्वामी जी भगवान से पूछते है कि प्रभु वो सेठजी आये थे जो अपनी संतान के बारे में पूछ रहे थे। तब भगवान राम ने कहा कि गोस्वामी जी उन्होंने पिछले जन्मों में अपनी संतान को बहुत दुःख दिए हैं। इस कारण उनके तो सात जन्मो तक संतान नही लिखी हुई हैं। दूसरे दिन गोस्वामी जी, सेठ जी को सारी बात बता देते हैं। सेठ जी मायूस होकर ईश्वर की मर्जी मानकर चले जाते है।
थोड़े दिनों बाद सेठजी के घर एक संत आते हैं और वो भिक्षा मांगते हुए कहते है कि भिक्षा दो फिर जो मांगोगे वो मिलेगा। तब सेठजी की पत्नी संत से बोलती हैं कि गुरूजी मेरे संतान नही हैं तो संत बोले तू एक रोटी देगी तो तेरे एक संतान जरुर होगी। व्यापारी की पत्नी संत जी को दो रोटी दे देती है। उससे प्रसन्न होकर संत जी ये कहकर चले जाते हैं कि जाओ तुम्हारे दो संतान होगी। 
एक वर्ष बाद सेठजी के दो जुड़वां संताने हो जाती है। कुछ समय बाद गोस्वामी जी का उधर से निकलना होता है।व्यापारी के दोनों बच्चे घर के बाहर खेल रहे होते हैं। उन्हें देखकर वे व्यापारी से पूछते है कि ये बच्चे किसके हैं। व्यापारी बोलता है गोस्वामी जी ये बच्चे मेरे ही हैं। आपने तो झूठ बोल दिया कि भगवान ने कहा की मेरे संतान नही होगी। पर ये देखो गोस्वामी जी मेरे दो जुड़वां संताने हुई हैं। गोस्वामी जी यह सुन कर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। फिर व्यापारी उन्हें उस संत के वचन के बारे में बताता हैं। उसकी बात सुनकर गोस्वामी जी चले जाते है।  शाम को गोस्वामीजी कुछ चितिंत मुद्रा में रामायण पढते हैं तो भगवान उनसे पूछते है कि गोस्वामी जी आज क्या बात है? चिन्तित मुद्रा में क्यों हो? तो गोस्वामी जी कहते है की प्रभु आपने मुझे उस व्यापारी के सामने झूठा पटक दिया। आपने तो कहा ना कि व्यापारी के सात जन्म तक कोई संतान नही लिखी है। फिर उसके दो संताने कैसे हो गई? तब भगवान् बोले कि उसके पूर्व जन्म के बुरे कर्मो के कारण में उसे सात जन्म तक संतान नही दे सकता था क्योकि मैं नियमो की मर्यादा में बंधा हूं पर अगर मेरे किसी संत सतगुरु ने उन्हें कह दिया कि तुम्हारे संतान होगी तो उस समय में भी कुछ नही कर सकता गोस्वामी जी क्योकि मैं भी संतों की मर्यादा से बंधा हूं मै पूर्ण संतो के वचनों को काट नही सकता। मुझे संत की बात रखनी पड़ती हैं। इसलिए गोस्वामी जी अगर आप भी उसे कह देते कि जा तेरे संतान हो जायेगी तो मुझे आप जैसे भक्तों के वचनों की रक्षा के लिए भी अपनी मर्यादा को तोड़ कर वह सब कुछ देना पड़ता हैं जो उसके भाग्य मे नही लिखा हैं।

--------इस कहानी से तात्पर्य यही हैं कि भले हीं विधाता ने आपके भाग्य में कुछ ना लिखा हो पर अगर किसी गुरु की आप पर कृपा हो जाये तो आपको वो भी मिल सकता है जो आपके किस्मत में नही।

भाग लिखी मिटे नही, लिखे विधाता लेख
मिल जावे गुरु मेहर तो, लगे लेख पे मेख।

भाग्य में लिखा विधाता का लेख मिट नही सकता पर किसी पर गुरु की मेहरबानी हो जाए तो विधाता का लेख भी दिवार की मेख पर लटका रह जाता है।

सतिनाम श्री वाहिगुरू 

Saturday, 8 April 2017

मुगल शासन की नींव रखने में हम सब बने थे बाबर के सहायक?

केवल तीन दिनों में ही राणा सांगा की सेना मार दी गई थी 
वाटसएप: 8 अप्रैल 2017: (Divine way of life)::
Divine way of life
बाबर और राणा सांगा में भयानक युद्ध चल रहा था।
बाबर ने युद्ध में पहली बार तोपों का इस्तेमाल किया था। उन दिनों युद्ध केवल दिन में लड़ा जाता था, शाम के समय दोनों तरफ के सैनिक अपने अपने शिविरों में आराम करते थे। फिर सुबह युद्ध होता था !
लड़ते लड़ते शाम हो चली थी,  दोनों तरफ के सैनिक अपने शिविरों में भोजन तैयार कर रहे थे ।
बाबर टहलते हुए  अपने शिविर के बाहर खड़ा दुश्मन सेना के कैम्प को देख रहा था तभी उसे राणा सांगा की सेना के शिविरों से कई जगह से धुँआ उठता दिखाई दिया।
बाबर को लगा कि दुश्मन के शिविर में आग लग गई है, उसने तुरंत अपने सेनापति मीर बांकी को बुलाया और पूछा कि देखो दुश्मन के शिविर में आग लग गई है क्या? शिविर में पचासों जगहों से धुँआ निकल रहा हैं।
सेनापति ने अपने गुप्तचरों को आदेश दिया-जाओ पता लगाओ कि दुश्मन के सैन्य शिविर से इतनी बड़ी संख्या में इतनी जगहों से धुँओ का गुब्बार क्यों निकल रहा है?
गुप्तचर कुछ देर बाद लौटे उन्होंने बताया हुजूर दुश्मन सैनिक सब हिन्दू हैं वो एक साथ एक जगह बैठकर खाना नहीं खाते। सेना में कई जात के सैनिक है जो एक दूसरे का छुआ नहीं खाते इसलिए सब अपना अपना भोजन अलग अलग बनाते हैं अलग अलग खाते हैं। एक दूसरे का छुआ पानी तक नहीं पीते।
यह  सुनकर बाबर खूब जोर से हँसा काफी देर हँसने के बाद उसने अपने सेनापति से कहा .मीर बांकी फ़तेह हमारी ही होगी !
ये क्या हमसे लड़ेंगे, जो सेना एक साथ मिल बैठकर खाना तक नहीं खा सकती, वो एक साथ मिलकर दुश्मन के खिलाफ कैसे लड़ेगी? बाबर सही था।
तीन दिनों में राणा सांगा की सेना मार दी गई और बाबर ने मुग़ल शासन की नीव रखी।
भारत की गुलामी का कारण जातिवाद छुआछूत भेदभाव था जो आज भी जारी है।

🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹  Divine way of life ग्रुप से साभार 
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