Thursday, 7 September 2023

बस भगवान कृष्ण का संदेश याद रखिए हर संकट आपसे हार जाएगा

भगवान कृष्ण हर संकट का सामना सहजता से करना सिखाते हैं


लुधियाना
: 6 सितम्बर 2023: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

यूं तो जन्माष्टमी एक हिन्दू त्यौहार के तौर पर ही जाना और मनाया जाता है लेकिन वास्तव में यह सारे  विभाजन हम लोगों ने ही बनाए और मज़बूत किए हैं जबकि वास्तव में धर्म की स्थापना के लिए आने वाले महापुरुषों का उपदेश सभी के लिए फायदेमंद होता है। जीवन की गहराइयां इन्हीं उपदेशों से समझ में आती हैं। धर्म कोई भी हो उसका मर्म बहुत गहरा होता है।   

बहुत से अन्य त्योहारों की तरह जन्माष्टमी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पूरी तरह से विलक्षण भी है। जन्म के साथ ही संघर्षों भरे जीवन के सत्य  है यह त्योहार। केवल जन्माष्टमी के पावन त्यौहार से ही हमें समझ में आता और समरण आने लगता है कि भगवान श्री कृष्ण तो जन्म के समय ही  मुसीबतों से घिरे हुए थे। इन मुश्किलों ने काफी देर तक उनका पीछा भी नहीं छोड़ा लेकिन इसके बावजूद वह हर संकट का सामना मुस्कराते हुए बहादुरी से करते हैं। 

यह ख़ास त्यौहार है जिसके आते और जाने की रात में ही मौसमी तब्दीली शुरू समझी जाती है। गर्मी का प्रकोप भी मंद पड़ना है। कुछ ही दिनों के बाद आने वाली गुलाबी ठंडक एक खास अहसास भी कराएगी। जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मुसीबतें भी मामूली नहीं थी। कंस सगा मामा ही तो था लेकिन हत्या पर उतारू था। आज हमारा कोई अपना अगर ज़रा सा भी हमारे खिलाफ हो जाए तो हम समझते हैं न जाने कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन भगवान् श्री कृष्ण ने बाकायदा एक जंग लड़ी अन्याय के खिलाफ। अत्याचार के खिलाफ। राजशाही के खिलाफ। 

आज हम में से कितने लोग हैं जो अपने बेगानी के रिश्ते को दरकिनार कर के गलत को गलत कहने की हिम्मत जुटा पाते हैं? भगवान श्री कृष्ण का जीवन और उपदेश हमें विपरीत प्रस्थितियों में भी हंसना, मुस्कराना, हिम्मत बनाए रखना और इन विपरीत हालात के साथ पूरी शक्ति से टकराना सिखाता है। 

आसान नहीं है भगवान कृष्ण का भक्त बन जाना। कालिया नाग आज भी ज़हर जैसी खतरनाक मुसीबतों का ही प्रतीक है। तस्वीर बहुत कुछ बताती और सिखाती है। उस कालिया नाग के फन पर नाचना आना चाहिए अगर जीवन जीना है तो।  हालत को अपने वश में करना सीखना होगा। भगवान श्री कृष्ण की हर बात बहुत कुछ सिखाती है। जीवन के गहन सत्यों से रूबरू करवाती है। 

जन्माष्टमी की रात्रि को लोग व्रत और उपवास रखते हैं-इसका भी गहरा अर्थ है। उपवास से ही भक्ति, आस्था, चेतना और हिम्मत का सामंजस्य बना रहता है। इसी से एक शक्ति जगती है। मदहोशी की नींद से जाग कर ही सम्भव हैं भगवान कृष्ण के दर्शन। इस लिए मध्यरात्रि में जब जन्म का समय आता है तो उस वक्त तक पूरी तरह से सतर्कता के साथ जागना, प्रेम के साथ जागना आम तौर पर सभी के लिए सम्भव नहीं रहता। बहुत कठिन होता है कुछ घंटों का ही यह जागरण लेकिन अगर आस्था, श्रद्धा और विधि से कर लिए जाए तो शक्ति की अनुभूति भी देता है। 

यह परम्परा भी है कि जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, उस समय मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना की जाती है। उस समय घंटियां बहुत मधुरता से सुनाई देती हैं। इस पूजा अर्चना और सेलिब्रेशन का भी बाकायदा एक विज्ञान है। जब अंतर्मन में जाग्रति आती है। किसी महान शक्ति की अनुभूति होती है और विराटता के दर्शन होते हैं तो संगीत सुनाई देने लगता है। घंटियां सी बजने लगती हैं। वास्तव में अगर आस्था और हसरद्दा सच में है तो आपके अंतर्मन में भी वही सब अनुभव होने लगेगा। बेशक आप मंदिर में न भी हों पर अगर वह आस्था और श्रद्धा नहीं है तो फिर मंदिर में बैठ कर भी शायद वो बात न बने। 

जन्माष्टमी के दिन लोग श्रीकृष्ण की कथाएँ सुनते हैं, भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं। बच्चे श्रीकृष्ण के वेश में सजकर उनकी लीलाओं का अनुकरण करते हैं। यह सब हमारे अंतर्मन में एक सात्विक शख्सियत के निर्माण की प्रक्रिया का ही भाग होता है। इसका असर पूरे समाज के नव निर्माण तक पहुंचता है। इन्हीं छोटे छोटे कदमों से मिलने लगती हैं बड़ी बड़ी उपलब्धियां। 

इसी अवसर पर एक प्रमुख परंपरा 'दही-हांडी' की भी होती है, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है लेकिन अब तो पंजाब में  लोकप्रिय होती जा रही है। इसमें एक ऊंचाई पर दही भरी मटकी (हांडी) टांग दी जाती है और युवक टोलियाँ उसे तोड़ने का प्रयास करते हैं। यह प्रसंग श्रीकृष्ण की माखन चोर लीला को प्रस्तुत करता है। बात केवल माखन चोरी की तो नहीं है। यह भी बेहद महत्वपूर संकट है कि ज़िंदगी में सफलता का माखन आसानी से नीचे बैठे बिठाए नहीं मिलता। उसके लिए संघर्ष की भी ज़रूरत होती है और साथियों के सहयोग की भी। तब बनती है बात। सफलता के लिए संघर्ष का ही संदेश है यह रस्म भी। 

दिलचस्प बात है कि जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति में श्रीकृष्ण के जीवन, उनके संदेश और उनकी लीलाओं की महत्वपूर्णता को प्रकट करता है। यह त्योहार विशेष रूप से भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना के साथ मनाया जाता है। बांसुरी और सुदर्शन चक्र के दरम्यान का समन्यव भगवन कृष्ण की बातों को गहराई से समझ कर ही समझा जा सकता है। ये प्रतीक बेहद अनमोल हैं। 

Thursday, 17 August 2023

'मेरा बंगाल, व्यसन मुक्त बंगाल' अभियान का शुभारंभ किया

प्रविष्टि तिथि: 17 AUG 2023 1:25 PM by PIB Delhi

आयोजन का शुभारंभ किया राष्ट्रपति ने कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित


नई दिल्ली//कोलकाता: 17 अगस्त 2023: (पी आई बी//आराधना टाईम्ज़)::

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (17 अगस्त, 2023) राजभवन, कोलकाता में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत 'मेरा बंगाल, व्यसन मुक्त बंगाल' अभियान का शुभारंभ किया।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि मादक द्रव्यों का दुरुपयोग समाज और देश के लिए चिंता का विषय है। इन व्यसनों के कारण युवा अपने जीवन में सही दिशा नहीं चुन पाते हैं। यह अत्यंत चिंताजनक है और इस मामले में सभी मोर्चों पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में आध्यात्मिक जागृति, चिकित्सा, सामाजिक एकजुटता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के माध्यम से सुधार किया जा सकता है। उन्होंने ऐसे मुद्दों पर चर्चा करने और उनके समाधान की दिशा में काम करने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ जैसे संगठनों की सराहना की।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी प्रकार का व्यसन मानसिक तनाव और साथियों के दबाव के कारण विकसित होता है। नशे की लत स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। व्यसन से कई अन्य विकार भी उत्पन्न होते हैं। व्यसन करने वाले लोगों के परिवार और मित्रों को भी काफी परेशानी होती है। उन्होंने सभी युवाओं से आग्रह किया कि वे नशे के आदी किसी भी मित्र की जानकारी उसके परिवार को दें।

राष्ट्रपति ने मादक पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों से अपना जीवन नष्ट नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर वे किसी भी तरह के तनाव में हैं तो उन्हें अपने मित्रों, परिवार या किसी सामाजिक संगठन से बात करनी चाहिए। ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका वे अपनी इच्छाशक्ति से सामना नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि असामाजिक तत्व मादक द्रव्यों के उपयोग और नशे की लत का फायदा उठाते हैं। मादक द्व्यों को खरीदने में खर्च होने वाले पैसे का उपयोग आपराधिक गतिविधियों में भी किया जाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नशे के आदी लोग अपनी भलाई तथा समाज और देश के हित में इस बुरी आदत से बाहर आएंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा हमारी सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। उन्हें अपना समय और अपनी ऊर्जा भविष्य की नींव को मजबूत करने में लगानी चाहिए, वह नशे की वजह से बर्बाद हो रही है। शिक्षण संस्थानों को यह पता लगाना चाहिए कि क्या विद्यार्थी गलत दिशा में जा रहे हैं। यदि कुछ सामने आता है, तो तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें -

*** PIB//एमजी/एमएस/आरपी/एजी/एसके/डीके

Sunday, 6 August 2023

विश्वास फाउंडेशन ने लगाया पंचकूला में खीर मालपूड़े का लंगर

 Saturday 5th August 2023 at 3:38 PM

3 अगस्त से 9 अगस्त तक चलाया जा रहा है सेवा सप्ताह 


पंचकूला
: 5 अगस्त 2023: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

भारतीय संस्कृति में धर्मकर्म के सा भी विधिविधान पूरी तरह से वैज्ञानिक हैं। सुबह उठने से ले कर रात्रि को सोने तक हर बात में पूरा विज्ञान है। सुबह सुबह मेडिटेशन से लेकर रात्रि की मेडिटेशन तक गहरे अर्थों से भरी बातें हैं। यही सब खानपान में भी है। सावन महीने में माल पूरे और खीर खाने की परम्परा भी बहुत गहरी है। सावन में शराब, नशीली चीज़ें और शरीर को बिगड़ने वाले सभी पदार्थ सेवन करने की मनाही है लेकिन माल पूरे और खीर का विशेष महत्व है। आर्थिक कारणों से सब के बस में नहीं होता खीर और मालपूरे खा पाना। इस लिए लगातार ख़ामोशी से काम करती आ रही विश्वास फाउंडेशन ने खीर और माल पूर्व का लंगर भी लगाया। 

गौरतलब है कि विश्वास फाउंडेशन द्वारा सेवा कार्यों की श्रृंखला में 3 अगस्त से 9 अगस्त तक चलाये जा रहे सेवा सप्ताह के अंतर्गत सती साध्वी बहन कृष्णामूर्ति विश्वास जी की स्मृतिओं को ताज़ा रखने व सावन के उपलक्ष्य पर आज पंचकूला में खीर मालपूड़े का लंगर लगाया गया। लगभग 1500 लोगों में लंगर वितरित किया गया।

विश्वास फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी नीलिमा विश्वास ने बताया कि लंगर पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर 6 के बाहर मरीजों के उनके अभिभावकों को व अन्य आने जाने वालों को, सूरजपुर पंचकूला कालका मार्ग पर स्थित झुग्गिओं में, सेब मंडी पिंजोर में व हिमशीखा की झुग्गिओं में लोगों को बाँटा गया। इस मौके पर इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी यूटी चंडीगढ़ से सुशील कुमार टाँक व विश्वास फाउंडेशन के सभी अनुयाईओं ने बढ़ चढ़ कर सेवा की। 

इस शुभअवसर पर बहुत सी संगत के साथ गैर सतसंगी लोगों ने भी खीर और माल पूरे खाए और विश्वास फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि इस संगठन की तरफ से इस तरह के कार्य पूरा बरस जारी रहते हैं। 

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Saturday, 1 July 2023

दोराहा में पत्रकार हरमिंदर सेठ को गहरा सदमा

2 जुलाई को पत्नी की अंतिम अरदास निरंकारी भवन में होगी 

दोराहा: 1 जुलाई 2023: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

दिवंगत सुश्री सुरिंदर कौर जो30 जून
को हमेशां के लिए बिछड़ गए 
पति पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का रिश्ता गिना जाता है। पत्नी को अर्धांगिनी का सम्मानजनक दर्जा भी  हासिल है। ज़िंदगी की कठिनाइयों का सफर हो या फिर सुख और आनंद का सागर दोनों को दोनों का साथ ही सफल बनता है। जब जीवन रूपी इस रथ का एक पहिया टूट जाता है तो सफर  बेहद कठिन हो जाता है। कुछ इसी तरह का सदमा पहुंचा है दोराहा के पत्रकार हरमिंदर सेठ को। 

दैनिक नवां ज़माना के लिए दोराहा से रिपोर्टिंग करने वाले हरमिंदर सेठ को उस समय गहरा सदमा लगा जब उनकी जीवन साथी सुरिंदर कौर अचानक उनसे अलग हो गईं। साँसों की पूँजी का समापन होते ही भगवान्उ ने उन्हें अपने पास बुला लिया। उनका अंतिम संस्कार दोराहा में ही कर दिया गया था। अंतिम अरदास, भोग और श्रद्धांजलि समारोह 2 जुलाई को दोराहा में आयोजित किया जाना है। 

अंतिम संस्कार के मौके पर पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की तरफ से तरूण आनंद, प्रोफेसर लवली बैंस, जोगिंदर सिंह ओबेरॉय, जसवीर झज, मंजीत सिंह गिल, मनप्रीत मांगट, रोहित गुप्ता, नरेंद्र कुमार आनंद, रविंदर सिंह ढिल्लों, विपन भारद्वाज, सुखवीर सिंह चंकोया, शिव. विनायक, मैडम गुरमीत कौर, जोगिंदर सिंह कीर्ति , मुदित महिंद्रा, पंकज सूद, विकास सूद, प्रकाश सेह, मनप्रीत सिंह रणदिओ  और कई अन्य भी शामिल हुए। 

लुधियाना से एमएस भाटिया, प्रदीप शर्मा, रेक्टर कथूरिया, डीपी मोड़, रमेश रतन, चमकौर सिंह, विजय कुमार और कई अन्य लोगों ने भी शोक संदेश भेजे। भाई साहिब गुरमेल सिंह जी ने भी अंतिम अरदास  की सुचना को लेकर संत निरंकारी मंडल दोराहा के कार्यक्रम के अनुसार निश्चित प्रोग्राम बताया। 

यह समारोह 2 जुलाई को किया जाना है। दोराहा शाखा के प्रधान भाई साहिब भाई गुरमेल सिंह,  शाखा दोराहा के प्रबंधक-हरमिंदर सेठ, शाखा दोराहा के शिक्षक-भाई साहिब जीत सिंह  द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि अंतिम प्रार्थना की यह रस्म रविवार, 2 जुलाई को आयोजित की जाएगी. और समय रहेगा दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक। ज़ेह सारा आयोजन निरंकारी सत्संग भवन दोराहा में होगा जो कि नहर के किनारे है। । इस मौके पर कई अन्य संगठनों और लोगों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। 

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Wednesday, 14 June 2023

ज्योतिष विज्ञान: सच और झूठ की सीमा कहाँ तक?

ज्योतिष से जुड़े विज्ञान के संबंधों की विशेष चर्चा 

लुधियाना: 14 जून 2023: (आराधना टाइम्स//ज्योतिष डेस्क)::

मानवीय तन मन की सरंचना भी अजीब है। आज क्या सामने है इसकी उसे न चिंता रहती है और न ही कोई जिज्ञासा। कल क्या होगा इसमें आम तौर पर सभी की रुचि रहती है। इस बात को जानने की चाहत ने ही ज्योतिष विज्ञान को विकसित किया। समुन्द्र में आने वाला ज्वार भाटा, सागर के विशाल जल पर चन्द्रमा का प्रभाव, उंगलियों के निशान, हाथों की लकीरें, ऋतू बदली, दिन रात इत्यादि बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनसे ज्योतिष के विज्ञान होने  समझ में आने लगती हैं। उंगलियों के निशान कभी किसी से नहीं मिलते। चन्द्रमा के प्रभाव से समुन्द्र का पानी आसमान की तरफ बहुत बड़ी ऊंचाई को छूता है। निश्चित ही हमारे अंदर के पानी पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है। तिब्बती मेडिसिन सिस्टम में दलाईलामा के पैरोकार ज्योतिष के आधार पर भी विभिन्न रोगों का इलाज करते हैं। जटिल रोगों के लिए वह बाकायदा जन्म तारीख और जन्म जा समय पता लगाने को कहते हैं। पिछले जन्मों को जान लेने का विज्ञान भी इस मामले में सहायक समझा जाता है। 

अब आज के दौर में भी ज्योतिष विज्ञान हमारे समाज में बेहद अहमियत रखने लगा है। ज्योतिष हमारे जीवन में हमेशा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह एक ऐसा विज्ञान है जो हमारी भविष्यवाणी करके हमें कल घटित होने वाली बातें आज दिखाने का प्रयास करता है। ज्योतिष के जरिए भविष्य देखने दिखाने की कोशिश हमें कई बार शक्तिशाली भी बना देती है और कई बार कमजोर भी। 

इस ज्ञान का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है जैसे कि समाज, राजनीति और व्यापार। हालांकि, ज्योतिष विज्ञान के बारे में बहुत से मतभेद भी हैं। कुछ लोग इसे एक वैज्ञानिक विषय के रूप में मानते हैं, जबकि दूसरे इसे एक धार्मिक विषय के रूप में मानते हैं। इस लेख में, हम इस सवाल का जवाब ढूंढेंगे कि ज्योतिष विज्ञान की सच और झूठ की सीमा कहाँ तक है। इन सवालों के जवाब भी महत्वपूर्ण हैं। बहुत सी वैज्ञानिक घटनाएं और रूटीन आस को साबित करते नज़र आने लगे हैं कि प्रकृति के रहस्य बहुत गहरे हैं।


इन रहस्यों के जरिए ही समझा जा सकता है कि ज्योतिष विज्ञान क्या है? इस विज्ञान के नियम और सिद्धांत क्या हैं?

यह बात हकीकत है कि ज्योतिष विज्ञान भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं माना जाता है। यह एक ऐसी विधा है जो कि व्यक्ति की जन्मकुंडली को अध्ययन कर उसके वर्तमान और भविष्य के बारे में बताती है। ज्योतिष विज्ञान में कुंडली में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, और आकाश जैसे पाँच महाभूत होते हैं जो कि मानव शरीर में उपस्थित हैं। ज्योतिष विज्ञान में विभिन्न ग्रहों की स्थिति के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है। ज्योतिष विज्ञान व्यक्ति को उसकी कुंडली के आधार पर विभिन्न विषयों जैसे उनके स्वास्थ्य, व्यवसाय, शिक्षा, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन आदि के बारे में बताती है। ज्योतिष विज्ञान के बारे में कहा जाता है कि इसमें एक अंधविश्वास होता है। लेकिन ज्योतिष विज्ञान वास्तव में एक विज्ञान है जो कि अध्ययन करने से हमें अपने जीवन के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता है।ज्योइसी तरह तिष विज्ञान के प्रकार

इस तरह ज्योतिष विज्ञान, जिसे ज्योतिष के रूप में भी जाना जाता है, एक आधुनिक दुनिया में भी एक प्राचीन कला है। यह एक ऐसी विज्ञान है जो ब्रह्मांड और इसके भागों, जैसे कि ग्रह और नक्षत्रों के बीच के संबंधों के अध्ययन पर आधारित है। ज्योतिष विज्ञान विभिन्न प्रकारों में आता है, जिनमें वैदिक ज्योतिष, चीनी ज्योतिष, वेस्टर्न ज्योतिष, ईजिप्टी ज्योतिष, जापानी ज्योतिष और मायान ज्योतिष शामिल हैं। प्रत्येक विधा के ज्योतिष विज्ञान में अपने अंतर्निहित सिद्धांत होते हैं, जिन्हें विभिन्न तरीकों से आवश्यक सामग्री के अध्ययन के उपयोग से लागू किया जाता है। वैदिक ज्योतिष भारतीय ज्योतिष का एक प्रमुख भाग है, जो वेदों के अध्ययन पर आधारित है। इसके अलावा, वेस्टर्न ज्योतिष उत्तर अमेरिका में प्रचलित है, जो विशेष रूप से यूरोपीय ज्योतिष पर आधारित है। चीनी ज्योतिष, जिसे शेंग ज्योतिष भी कहा जाता है, एक अन्य प्रसिद्ध ज्योतिष विज्ञान है, जो चीन में प्रचलित है। जहाँ तक झूठ और सच की सीमा की बात है, ज्योतिष विज्ञान एक विवादित विषय है और इस बारे में विभिन्न मत होते हैं। हालांकि, अगर आपको इसमें विश्वास है, तो आप इसे एक मान्य और उपयोगी विज्ञान के तौर पर हर कदम पर हर पल घटित होता हुआ पाएंगे।

इस हकीकत के बावजूद ज्योतिष में भी सच और झूठ की सीमा होती है। ज्योतिष बताने वाला ज्योतिषी स्वयं कितना जानकार है इसका भी असर होता है।

उल्लेखनीय है कि ज्योतिष विज्ञान, जिसे ज्योतिष भी कहा जाता है, एक विज्ञान है जो व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर उनकी भविष्यवाणी करता है। यह विज्ञान बहुत समय से लोगों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। लेकिन कुछ लोगों के मन में अभी भी सवाल होते हैं कि ज्योतिष विज्ञान में सच और झूठ की सीमा कहाँ तक है? इसके रहस्यों को समझे बिना इसके उत्तर समझे भी नहीं जा सकते।

आम तौर पर ज्योतिष विज्ञान की भविष्यवाणियों के पीछे अक्सर नज़र आने वाली साइंस के वैज्ञानिक तथ्य नहीं होते हैं। इसलिए, कुछ लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या ज्योतिष विज्ञान सही होता है या नहीं? इसके जवाब में कहा जा सकता है कि ज्योतिष विज्ञान की भविष्यवाणियों की सटीकता से ज्यादा इसकी आधारभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए। प्राकृति के नियमों को सामने रखते हुए ही ज्योतिष के इशारे समझे जा सकते हैं।

यदि एक व्यक्ति ज्योतिष विज्ञान को सही ढंग से समझता है तो उन्हें इसके माध्यम से अपने जीवन में बहुत सी मदद मिल सकती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ज्योतिष विज्ञान की भविष्यवाणियों में आपके कर्मों और भाग्य का खास महत्व होता है और इन भविष्यवाणियों को समझने के बाद भी यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने कर्मों के माध्यम से अपनी भविष्यवाणियों को साकार करते हैं या नहीं।

यदि ज्योतिष आधारित जीवन जीवन जिया जाए तो ज्योतिष विज्ञान के फायदे और नुकसान भी समझे जा सकेंगे। इसके संकेत कदम कदम पर नज़र भी आने लगेंगे।

ज्योतिष विज्ञान के बारे में बहुत कुछ सुना जा सकता है। यह एक विषय है जिसके बारे में लोग सहमत नहीं होते हैं। इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम ज्योतिष विज्ञान के फायदे और नुकसान के बारे में जानें। ज्योतिष विज्ञान को उन लोगों द्वारा मान्यता दी जाती है जो अपने जीवन में निरंतर समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। ज्योतिष विज्ञान उन लोगों को मार्गदर्शन देता है जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित होते हैं। ज्योतिष विज्ञान के फायदे कुछ इस प्रकार हैं। ज्योतिष विज्ञान में आप अपने भविष्य को जान सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ज्योतिष विज्ञान आपको अपने शुभ और अशुभ ग्रहों के बारे में बताता है जो आपके जीवन में कैसे प्रभावित होते हैं। हालांकि, ज्योतिष विज्ञान के नुकसान भी होते हैं। ज्योतिष विज्ञान को समझना आसान नहीं है और इसमें कुछ लोग धोखा भी देते हैं। इसलिए, ज्योतिष विज्ञान के बारे में असत्य बातें फैलाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, अधिकतर लोग अपने भविष्य को जानने के लिए ज्योतिष विज्ञान का इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें अनिश्चितता में रखता है। इसलिए, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते है कि अभी भी इस क्षेत्र में गहन अध्यन और साधना को जरूरत है। कई राज्यों को यूनिवर्सिटी में इसकी बकायदा शिक्षा शुरू हो चुकी है। निकट भविष्य में इसका ट्रेंड और भी बढ़ेगा।

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Sunday, 7 May 2023

नास्तिक भाई रमेश के आस्तिक भाई मनमोहन कौशल को याद करते हुए

विचारधारक अंतरालों में एक पुल की तरह थे मनमोहन कौशल 

लुधियाना: 6 मई 2023: (रेक्टर कथूरिया//आराधना टाईम्ज़)::

मनमोहन कृष्ण अब स्वर्गीय हो गए हैं।
गत 27 अप्रैल 2023 को उनका निधन हो गया। याद आ रहा है वो समय जब वह इसी दुनिया के थे और इसी दुनिया में थे। रमेश कौशल ज़्यादातर जालंधर में होते या फिर पार्टी के कार्यों में जहां भी डयूटी लग जाए। 

उन दिनों सी पी आई एम की सरगर्मियां भी बहुत ज़यादा हुआ करती थीं। इसी बीच रमेश कौशल वाम सियासत में लगातार सक्रिय होते चले गए और साथ ही पत्रकारिता में भी। राजनीति में बहुत से झमेले रहते हैं सो रमेश जी भी बेहद व्यस्त रहते। इसके साथ लिखने पढ़ने का जो लगाव था उसके चलते भी किसी न किसी किताब की खोज में रहते या फिर जहां अध्यन करते रहते। 

पंजाब में आतंकवाद ने ज़ोर पकड़ा तो मुश्किलें और भी बढ़ गईं। कई बार हम कुछ मित्र उस तरफ से निकलते तो सोचते रमेश जी के घर से हो कर जाएं। बहुत बार ऐसा होता रमेश जी घर पर नहीं होते। स्वर्गीय माता जी के दर्शन करते उनके  और वापिसी के लिए निकलने लगते तो रास्ते में रमेश जी के बड़े भाई मनमोहन कौशल रास्ता रोक लेते। हाथ मिलाते मिलाते  हाथ कस कर पकड़ लेते और कहते जलपान के बिना कैसे जा सकते हैं आप!

जलपान के लिए उनका अंदाज़ इतना ज़ोरदार रहता कि इनकार करने की कोई गुंजायश ही न बचती। वह  हमें अपने ड्राइंग  रूम में ले जाते और सरे परिवार से एक बार फिर मिलवाते। सभी से कहते रमेश के दोस्त आए हैं। उनका परिवार भी हमें मुस्कराहट से मिलता। रमेश के भाभी जी भी और बच्चे भी। झट से चाय या कॉफी आ जाती साथ ही कई तरह के मिष्ठान और नमकीन भी। 

कामरेड रमेश शुरू से ही पूरी तरह से नास्तिक थे और दूसरी तरफ मनमोहन जी आस्तिक थे लेकिन विचारों का यह अंतर कभी भी उनकी ज़ुबान पर न आया। वह वाम सियासत पर भी बात करते और दूसरी सियासी पार्टियों पर भी लेकिन पारिवारिक मधुरता हमेशां बनी रहती। मनमोहन जी ने अपने जीवन काल में भागवत गीता और अन्य धार्मिक ग्रंथों का भी गहन अध्ययन भी किया था। इसी अध्ययन के आधार पर उन्होंने बहुत से भजन भी लिखे और अन्य धार्मिक रचनाएं भी। बहुत सी रचनाओं के लिए उन्होंने गहन  खोज भी की। उनकी रचनाएं बहुत लोकप्रिय भी हुईं। 

वह एक ऐसी शख्सियत थे जो रमेश जी की नास्तिक सोच, विचारक स्वतंत्रता का सम्मान भी करते थे और स्वयं बिलकुल ही दुसरे ध्रुव पर खड़े हो कर अपने विचारों की रक्षा भी करते थे। कहा जा सकता है कि वह आस्तिकता और नास्तिकता के दरम्यान एक पल की तरह था। उनके पास बैठते हुए कभी पता न चलता कि कहां से नास्तिकता शुरू होती और कहां पर आस्तिकता अपना प्रभाव दिखाने लगती। रोज़ी रोटी के लिए उन्होंने अध्यापन के क्षेत्र को चुना था। वह हैड मास्टर के तौर पर रिटायर हुए थे। 

इसी तरह उम्र के 87 बरस गुज़र गए। बिंद्राबन रोड पर इस्कॉन मंदिर के बिलकुल नज़दीक से निकलती हुई भंडारी स्ट्रीट का ज़रा सा ख्याल भी आता मन चाहता उनसे मिल कर चलें। रमेश जी की तरह हमें उनसे भी मित्रता भरा प्रेम हो ही गया था। दोनों भाईओं में प्रेम और भाईचारा लम्बे समय तक एक हकीकत की तरह रहा। जब रमेश कौशल ने सीपीआई से जुडी सक्रिय महिला नेता जीत कुमारी से विवाह किया तो उसका विरोध करने वालों में रमेश जी का परिवार भी शामिल था लेकिन भाई मनमोहन जी ने रमेश जी का साथ दिया। कामरेड जीत कुमारी को अपने जेठ मनमोहन कौशल जी की सब बातें आज भी याद हैं। आज भी जीत कुमारी की ऑंखें उन्हें याद करते हुए भीग जाती हैं। 

फिर एक ऐसा समय भी आया जब मतभेद ज़्यादा उभरने लगे। कभी कभी ऐसा कुछ तकरीबन सभी घरों में होने लगता है सो कौशल परिवार में भी हुआ। घर में एक दीवार खड़ी हो गई। घर के बड़े गेट की बजाए दो दरवाज़े रमेश जी भी उदास थे और मनमोहन जी भी। दीवार होने के बाद हम लोगों का आना जाना भी कम होता गया। हम रमेश जी से  मिलते और लौट पड़ते। कभी सोच भी न पाए कि मनमोहन जी एक दिन अदृश्य हो जाएंगे। केवल उनकी यादें ही शेष रह जाएंगी। 

अब जबकि मनमोहन जी नहीं रहे तो यह उदास खबर भी साथी रमेश कौशल जी से ही मिली। वह भी देर तक मनमोहन जी की ज़िंदगी के पड़ावों को याद करते रहे-याद दिलाते रहे। वास्तव में ऐसे लोग केवल परिवार ही नहीं समाज के लिए भी एक लोह स्तंभ की तरह होते हैं जिन पर हमारा सिस्टम स्थिरता से टिका भी रहता है और सुचारु रूप से चलता भी रहता है। जब इस तरह का कोई स्तंभ गिरता है तो क्षति किसी एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की होती है। 

उनकी स्मृति में रस्म क्रिया और श्रद्धांजलि आयोजन सात मई को कैलाश सिनेमा चौक के नज़दीक पिंडी दयाल धर्मशाला में दोपहर को एक से दो बजे तक होना है। पिंडी दयाल धर्मशाला को कपूर धर्मशाला के तौर पर भी जाना जाता है। उनकी स्मृति में एकत्र होने वाले उनक यादों को फिर से तय करेंगें जिससे परिवार को उनके बिछड़ने का गम सहन करने में सहायता मिलेगी। आप भी ज़रूर आइए। इससे उनकी गैरमौजूदगी में उनकी मौजूदगी का अहसास और भी शिद्दत से महसूस होगा। 

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Monday, 10 April 2023

क्या आर्थिक बराबरी के बिना कारगर होंगें आनंद उत्सव के गुर?

श्री दुर्गा माता मंदिर में बताए गए आनंद के गुर और रास्ते 
लुधियाना: 10 अप्रैल 2023: (रेक्टर कथूरिया//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::
महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, अमन कानून इत्यादि बहुत सी समस्याएं हैं जिनके चलते आम इंसान का जीना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। गरीब और माध्यम वर्ग सबसे अधिक दुःख में है। खर्चे बढ़ते जा रहे हैं और आमदन काम होती जा रही है। इनकी मुसीबतों का अनुमान लगाना बेहद नामुमकिन जैसा ही है। मल्टीनेशनल  कंपनीओं के माया जाल ने इन लोगों को बुरी तरह चक्रव्यूह में फांस रखा है। शायद ही कोई घर परिवार हो जिसने कर्ज़ा न ले रखा हो। क़र्ज़ की किस्तों, कारोबार के झमेलों और परिवार की ज़िम्मेदारियों तले दबे हुए इन लोगों के लिए सुख सुविधा और आनंद एक सपने की बात बन कर रह गए हैं। ज़िंदगी बोझ और सज़ा लगती है। पूछने पर ऑंखें भर आती हैं और कहते हैं किसी तरह जून कट जाए। कृष्ण बिहारी नूर साहिब की पंक्तियाँ याद आती हैं:
ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं:और क्या जुर्म है पता ही नहीं! 

दूसरी तरफ अमीर वर्ग के भी अपने दुःख हैं। तिजोरियां कैसे और भरी जाएं। पर्तिस्पर्धा में दूसरों के कारोबारी संतानों का टेकओवर कैसे किया जाए जैसी बहुत सी चिंताएं उन्हें भी घेरि रखती हैं। नई फैक्ट्रियां कैसे खोली जाएं? नई ज़मीनें और बंगले कैसे बनाए जाएं? मीडिया में एक विवरण आया था कि एक बहुत बड़े अमीर की टॉयलेट सीट भी सोने की बानी हुई है लेकिन फिर भी उसे पैसे कमाने की होड़ से फ़ुरसत नहीं है। इस तरह इन अमीर लोगों के पास हर सुख सुविधा तो है लेकिन आनंद  बिलकुल भी नहीं है। इनको सपने भी केवल पैसा कमाने के ही आते हैं। पैसा कमाने की दौड़ ने इन्हें पागल कर रखा है। अमीर, गरीब और मध्यवर्ग से सबंधित इन तीनों वर्गों के इलावा राजनीति से जुड़े लोगों का भी एक वर्ग है जिसे इन सबसे अधिक चिंताएं हैं। अनगिनत किस्म के जोड़तोड़ हर पर दिल दिमाग में घुमते रहते हैं। 

धर्मकर्म से जुड़े वर्ग भी अपनी चिंताओं में हैं। सोशल मीडिया में अधिक से अधिक चर्चा और चढ़ावे  की बातें उनकी शांति को भी भंग किए रखती हैं। इससे से भी अधिक शोषित और चींटी वर्ग मीडिया से जुड़े लोगों का है। हर पल देश और दुनिया की चिंता जिस के चक्कर में अपने घर बार की दाल रोटी का प्रबंध भी भूल जाता है। कुल मिलकर हर वर्ग दुःख की चक्की में पिस रहा है। 

इस तरह बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास सब कुछ है लेकिन आनंद की ज़रा से भी झलक नहीं हैं। ऐसे लोगों को आनंद का रास्ता बताने के लिए एक विशेष आयोजन जगराओं पुल  लुधियाना के नज़दीक स्थित श्री दुर्गा माता मंदिर में हुआ।

इन सभी की चिंता की जानेमाने समाज सेवी कुंवर रंजन सिंह ने जो किसी समय थिएटर और फिल्म जगत से भी जुड़े रहे। बाद में खुल कर सियासत में आ गए। बहुत देर वाम और कांग्रेस के साथ भी रहे। एना हज़ारे आंदोलन को भी बहुत सक्रिय हो कर नज़दीक से देखा। फिर इन्हें लगा कि बेचारे आम लोगों को नारेबाजी के सिवा कुछ नहीं  मिल रहा। मिल तो कुछ वहीं से सकता है जिसके खज़ाने में कुछ हो। कुछ हिम्मत की नाज़ा सोचा। कुछ बातें भी तय हुई और खुल कर बी जे पी के हो गए। वाम वालों के साथ रह कर भी कुंवर रंजन साहिब को धर्मकर्म याद था और अब उसकी यादें और शिद्द्त से आने लगी हैं। कला और साहित्य पर उनकी कमांड पहले से ही है। 

श्री दुर्गा माता मंदिर में हुए आयोजन के सबसे अधिक सक्रिय और गतिशील प्रबंधक कुंवर रंजन ही थे। बीजेपी से जुडी नेत्री राशि अग्रवाल भी वहां मौजूद रहीं और हर वक्त का एक एक शब्द बहुत ध्यान से सुना। भारती सचदेवा सहित कुछ और वक्त भी थे जिन्होंने बहुत ही मधुर अंदाज़ में अपने विचार रखे और वहां मौजूद श्रोतायों//दर्शकों को आनंद लेने के गुर भी समझाए। हाल में मंदिर की घंटियां बीच बीच में बज उठतीं थी और कभी कभी शंख की आवाज़ भी गूंजने लगती लेकिन कुल मिलकर आनंद के सूत्र बहुत गहनता से समझे जा रहे थे। मंच से जानीमानी एंकर कमलेश गुप्ता इस सारे आयोजन का संचालन बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में कर रहीं थी। रेडियों और टीवी की दुनिया का अनुभव उनके अंदाज़ को हरा आयोजन में एक नया रूप देता है। आनंदमय जीवन के गुर बताने वाले इस आयोजन में कई प्रमुख वक्त थे और उनकी अनमोल बातें भी। 

"आनन्दमय जीवन की और .. " दो दिवसीय सेमिनार ने छोड़ा श्रोताओं के दिलो दिमाग पर अमिट छाप।श्री दुर्गा माता मन्दिर ट्रस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार भारी उत्साह एवं सकारात्मकता के फ़ैलाव के साथ सम्पन्न हुआ. शहर के प्रबुद्ध जनों मे चारों ओर इसकी चर्चा आम हो रही है. सभी वक्ताओं ने सेमिनार के मुख्य बिन्दु  स्वस्थ्य शरीर, सकारात्मक विचार, सद्कर्म एवं परमात्मा से जुड़ाव पर गहन चर्चा की.

स्वामी पुनीत जी, भाई अनिल भारती जी, कुंवर रंजन जी, रोशन लाल आर्यों जी, डा.लोकेश जी सुनील त्रिखा जी, विवेक श्रिवास्तव जी और रचना गुप्ता जी से अनंत बहूमूल्य विचार सुनने को मिले। सभी के मन के सुर मंच से मिले हुए the .उनके दिल कीबातें जो हो रहीं थी .सभी के चेहरे पर एक असीम शांति भी थी।  

सभी  श्रोताओं ने सभी वक्ताओं के विचार को बहुत ध्यान से सुना और संतुष्ट जीवन जीने के लिए बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया.इस कार्यक्रम मे सैकड़ों की संख्या मे लुधियानावासी शामिल होकर भरपुर आनंद उठाया एवं मंदिर कमिटी से आगे भी ऐसे आयोजन कराते रहने की अपील की.ट्रस्ट के वाईस चेयरमैन श्री वरिन्दर मित्तल जी ने आये हुये गण मान्यों का धन्यवाद किया .इस कार्यक्रम का मंच संचालिका श्री मति कमलेश गुप्ता जी ने की. इस मौके पर बहुत से  प्रमुख व्यक्ति मौजूद रहे। 

इस सारे आयोजन में सबसे अधिक महत्मवपूर्हण भूमिका श्री दुर्गा माता मन्दिर ट्रस्ट के वाईस चेयरमैन श्री वरिन्दर मित्तल जी की रही। उन्होंने ही इस सारे आयोजन की सफलता के लिए इतनी बड़ी टीम को जोड़ा और इसे सफल करके भी दिखाया। सेमिनार के अंत में सभी लोग चाह रहे थे कि अब इसी तरह का आयोजन जल्दी हो। सुश्री राशी अग्रवाल ने तो सुझाव भी दिया कि हर महीने ऐसे आयोजन हों तो और भी अच्छा हूँ। 

इस आयोजन में शायरी का रंग भी था, भक्ति रस भी और जीवन जीने के फलसफे का रंग भी। सुश्री राशि अग्रवाल, भारती  सचदेवा के साथ  कुंवर रंजन ने इस सरे कार्यक्रम को एक सूत्र में बांधे रखा। कार्यक्रम में पूनम सपरा जैसी वशिष्ठ प्रोफेसर भी मौजूद रहीं। आयोजन में महिलाओं की मौजूदगी शायद पुरुषों से अधिक थी। केवल मौजूदगी ही नहीं थी बल्कि यह मौजूदगी पूरी तरह से सतर्क ध्यान वाली थी। इस यादगारी आयोजन ने सभी के दिलों पर एक अमित छाप छोड़ी खबर के साथ आप एक संक्षिप्त सी कैमरा रिपोर्ट भी देख सकते हैं।  

लेकिन यह  सवाल फिर भी कायम है कि क्या आर्थिक खुशहाली और आर्थिक बराबरी के बिना केवल उपदेश से आनंद का उत्सव हर किसी के लिए सम्भव हो भी सकेगा?
बहुत से लोग हैं जिन के पास दो वक्त की रोटी का प्रबंध भी नहीं हो पाता। परिवार का निर्बाह और कई बार तो अकेले अपना निर्बाह भी आज के युग में बहुत कठिन हो गया है। 

दूसरी तरफ बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिनके पास बेशुमार दौलत है लेकिन इसके बावजूद वे परेशान हैं। वे और अधिक पैसा कमाने की दौड़ में दिन रात पागल हुए रहते हैं। 

इस तरह की जीवन शैली ने बहुत सी समस्याएं पैदा कर दी हैं जिनके परिणाम स्वरूप अलग अलग बीमारियों का भयानक रूप सामने आ रहा है। 

इस तरह के सभी लोगों को ज़रूरत है आनंदमय जीवन के कुछ कारगर सूत्र बताने की। इसी तरह के विशेष सूत्र बताने के लिए ही आयोजित हुआ श्री दुर्गा माता मंदिर में एक विशेष आयोजन। देखिए एक कैमरा रिपोर्ट और इस सेमिनार में हुई चर्चा की विस्तृत स्टोरी पढ़ने के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं। https://aradhanatimes.blogspot.com/2023/04/blog-post.html



पूजा, अर्चना और भक्ति मार्ग से जुड़े सभी मित्रों से निवेदन है कि आराधना टाईमज़ से जुडीए और अपने आयोजनों की कवरेज को दूर दराज के स्थानों पर  बैठे अन्य लोगों तक पहुंचाइये ---