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Tuesday, 23 September 2025

मां बह्मचारिणी ने चुना था शिव की तरह कठिन साधना का जीवन

Research and Got on Tuesday 22nd September 2025 at 06:15 PM Regarding 2nd Navratri

उनकी तपस्वी प्रवृत्ति शिव का ध्यान आकर्षित भी करती है

चंडीगढ़: 23 सितंबर 2025: (आराधना टाईम्ज़ डेस्क टीम)::

रास्ते दिखाने और रास्ता बताने वाले बहुत से लोग होते हैं लेकिन सही रास्ता बताने वाला बड़ी किस्मतों से ही मिलता है। हिमालय और देवी मैना की पुत्री को मिले नारद जी और उन्होंने जगा दी मन में शिव की लौ। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और देवी मैना की पुत्री हैं, जिन्होंने नारद मुनि के कहने पर शिव जी की कठोर तपस्या की थी और इसके प्रभाव से उन्होंने शिवजी को पति के रूप में प्राप्त किया था। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है। इस कथा से साफ़ ज़ाहिर है कि जिसे चाहो,जिसकी पूजा करो उसकी तरह होने के प्रयास भी करो। 

मुश्किलों और कठिनाईओं के बावजूद पार्वती अपनी आशा या शिव को जीतने का संकल्प नहीं खोतीं। वह शिव की तरह पहाड़ों में रहने लगती हैं और उन्हीं गतिविधियों में संलग्न हो जाती हैं जो शिव करते हैं, जैसे तप, योग और तपस्या; पार्वती का यही रूप देवी ब्रह्मचारिणी का रूप माना जाता है। उनकी तपस्वी प्रवृत्ति शिव का ध्यान आकर्षित करती है और उनकी रुचि जागृत करती है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि 

इस दिन पूजा शुरू करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

साफ कपड़े पहनें।

इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें।

मां की प्रतिमा का अभिषेक करें।

मां ब्रह्मचारिणी को सफेद या पीले रंग के फूल, जैसे चमेली, गेंदा या गुड़हल आदि चढ़ाएं।

मां ब्रह्मचारिणी को पंचामृत का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा उन्हें चीनी या गुड़ का भोग भी लगाया जा सकता है।

पूजा के साथ साथ ब्रह्मचर्य का पालन करने से मानसिक और शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, और चेहरे पर निखार आ सकता है। इससे एकाग्रता बढ़ती है, और व्यक्ति अधिक केंद्रित और स्थिर महसूस करता है, जिससे कार्य करने की क्षमता में सुधार होता है। हालाँकि, यदि व्यक्ति शारीरिक सुख की इच्छा रखता है, तो उसे अकेलापन या नकारात्मक भावनाएँ महसूस हो सकती हैं। 

मानसिक और शारीरिक लाभ

इस पूजा के दौरान बढ़ी हुई ऊर्जा ब्रह्मचर्य पालन से शरीर ऊर्जावान महसूस करता है, और शारीरिक शक्ति बढ़ती है। 

आत्मविश्वास और मनोबल: आत्मविश्वास और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है, जिससे व्यक्ति किसी भी काम को करने में सक्षम महसूस करता है। 

एकाग्रता और ध्यान: मन शांत और एकाग्र होता है, जिससे फोकस बेहतर होता है और कोई भी चीज़ जल्दी सीखी जा सकती है। 

स्वस्थ त्वचा और आभा: चेहरे पर चमक और त्वचा में निखार आ सकता है, जो एक प्रकार की पवित्रता की आभा को दर्शाता है। 

अन्य लाभ

उत्कृष्ट प्रदर्शन: व्यक्ति अपनी ऊर्जा को काम, पढ़ाई और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में लगाता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 

मानसिक स्वास्थ्य: मानसिक रूप से मजबूत होता है और जीवन के उतार-चढ़ावों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है। 

रोग प्रतिरोधक क्षमता: शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है। 


Thursday, 7 September 2023

बस भगवान कृष्ण का संदेश याद रखिए हर संकट आपसे हार जाएगा

भगवान कृष्ण हर संकट का सामना सहजता से करना सिखाते हैं


लुधियाना
: 6 सितम्बर 2023: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

यूं तो जन्माष्टमी एक हिन्दू त्यौहार के तौर पर ही जाना और मनाया जाता है लेकिन वास्तव में यह सारे  विभाजन हम लोगों ने ही बनाए और मज़बूत किए हैं जबकि वास्तव में धर्म की स्थापना के लिए आने वाले महापुरुषों का उपदेश सभी के लिए फायदेमंद होता है। जीवन की गहराइयां इन्हीं उपदेशों से समझ में आती हैं। धर्म कोई भी हो उसका मर्म बहुत गहरा होता है।   

बहुत से अन्य त्योहारों की तरह जन्माष्टमी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पूरी तरह से विलक्षण भी है। जन्म के साथ ही संघर्षों भरे जीवन के सत्य  है यह त्योहार। केवल जन्माष्टमी के पावन त्यौहार से ही हमें समझ में आता और समरण आने लगता है कि भगवान श्री कृष्ण तो जन्म के समय ही  मुसीबतों से घिरे हुए थे। इन मुश्किलों ने काफी देर तक उनका पीछा भी नहीं छोड़ा लेकिन इसके बावजूद वह हर संकट का सामना मुस्कराते हुए बहादुरी से करते हैं। 

यह ख़ास त्यौहार है जिसके आते और जाने की रात में ही मौसमी तब्दीली शुरू समझी जाती है। गर्मी का प्रकोप भी मंद पड़ना है। कुछ ही दिनों के बाद आने वाली गुलाबी ठंडक एक खास अहसास भी कराएगी। जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मुसीबतें भी मामूली नहीं थी। कंस सगा मामा ही तो था लेकिन हत्या पर उतारू था। आज हमारा कोई अपना अगर ज़रा सा भी हमारे खिलाफ हो जाए तो हम समझते हैं न जाने कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन भगवान् श्री कृष्ण ने बाकायदा एक जंग लड़ी अन्याय के खिलाफ। अत्याचार के खिलाफ। राजशाही के खिलाफ। 

आज हम में से कितने लोग हैं जो अपने बेगानी के रिश्ते को दरकिनार कर के गलत को गलत कहने की हिम्मत जुटा पाते हैं? भगवान श्री कृष्ण का जीवन और उपदेश हमें विपरीत प्रस्थितियों में भी हंसना, मुस्कराना, हिम्मत बनाए रखना और इन विपरीत हालात के साथ पूरी शक्ति से टकराना सिखाता है। 

आसान नहीं है भगवान कृष्ण का भक्त बन जाना। कालिया नाग आज भी ज़हर जैसी खतरनाक मुसीबतों का ही प्रतीक है। तस्वीर बहुत कुछ बताती और सिखाती है। उस कालिया नाग के फन पर नाचना आना चाहिए अगर जीवन जीना है तो।  हालत को अपने वश में करना सीखना होगा। भगवान श्री कृष्ण की हर बात बहुत कुछ सिखाती है। जीवन के गहन सत्यों से रूबरू करवाती है। 

जन्माष्टमी की रात्रि को लोग व्रत और उपवास रखते हैं-इसका भी गहरा अर्थ है। उपवास से ही भक्ति, आस्था, चेतना और हिम्मत का सामंजस्य बना रहता है। इसी से एक शक्ति जगती है। मदहोशी की नींद से जाग कर ही सम्भव हैं भगवान कृष्ण के दर्शन। इस लिए मध्यरात्रि में जब जन्म का समय आता है तो उस वक्त तक पूरी तरह से सतर्कता के साथ जागना, प्रेम के साथ जागना आम तौर पर सभी के लिए सम्भव नहीं रहता। बहुत कठिन होता है कुछ घंटों का ही यह जागरण लेकिन अगर आस्था, श्रद्धा और विधि से कर लिए जाए तो शक्ति की अनुभूति भी देता है। 

यह परम्परा भी है कि जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, उस समय मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना की जाती है। उस समय घंटियां बहुत मधुरता से सुनाई देती हैं। इस पूजा अर्चना और सेलिब्रेशन का भी बाकायदा एक विज्ञान है। जब अंतर्मन में जाग्रति आती है। किसी महान शक्ति की अनुभूति होती है और विराटता के दर्शन होते हैं तो संगीत सुनाई देने लगता है। घंटियां सी बजने लगती हैं। वास्तव में अगर आस्था और हसरद्दा सच में है तो आपके अंतर्मन में भी वही सब अनुभव होने लगेगा। बेशक आप मंदिर में न भी हों पर अगर वह आस्था और श्रद्धा नहीं है तो फिर मंदिर में बैठ कर भी शायद वो बात न बने। 

जन्माष्टमी के दिन लोग श्रीकृष्ण की कथाएँ सुनते हैं, भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं। बच्चे श्रीकृष्ण के वेश में सजकर उनकी लीलाओं का अनुकरण करते हैं। यह सब हमारे अंतर्मन में एक सात्विक शख्सियत के निर्माण की प्रक्रिया का ही भाग होता है। इसका असर पूरे समाज के नव निर्माण तक पहुंचता है। इन्हीं छोटे छोटे कदमों से मिलने लगती हैं बड़ी बड़ी उपलब्धियां। 

इसी अवसर पर एक प्रमुख परंपरा 'दही-हांडी' की भी होती है, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है लेकिन अब तो पंजाब में  लोकप्रिय होती जा रही है। इसमें एक ऊंचाई पर दही भरी मटकी (हांडी) टांग दी जाती है और युवक टोलियाँ उसे तोड़ने का प्रयास करते हैं। यह प्रसंग श्रीकृष्ण की माखन चोर लीला को प्रस्तुत करता है। बात केवल माखन चोरी की तो नहीं है। यह भी बेहद महत्वपूर संकट है कि ज़िंदगी में सफलता का माखन आसानी से नीचे बैठे बिठाए नहीं मिलता। उसके लिए संघर्ष की भी ज़रूरत होती है और साथियों के सहयोग की भी। तब बनती है बात। सफलता के लिए संघर्ष का ही संदेश है यह रस्म भी। 

दिलचस्प बात है कि जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति में श्रीकृष्ण के जीवन, उनके संदेश और उनकी लीलाओं की महत्वपूर्णता को प्रकट करता है। यह त्योहार विशेष रूप से भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना के साथ मनाया जाता है। बांसुरी और सुदर्शन चक्र के दरम्यान का समन्यव भगवन कृष्ण की बातों को गहराई से समझ कर ही समझा जा सकता है। ये प्रतीक बेहद अनमोल हैं। 

Friday, 14 January 2022

मकर सक्रांति पर हवन का आयोजन

 14th January 2022 at 3:36 PM

राज्यपाल ने लोगों की समृद्धि,उन्नति व उत्तम स्वास्थ्य की कामना की  


शिमला
: 14 जनवरी, 2022: (देवभूमि स्क्रीन//आराधना टाईम्ज़)

राज्यपाल ने मकर सक्रांति पर हवन का आयोजन किया

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज यहां मकर सक्रांति के पावन अवसर पर हवन का आयोजन किया।

 मकर सक्रांति पर अपने शुभकामना संदेश में राज्यपाल ने प्रदेश की समृद्धि व उन्नति और प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है।

Saturday, 6 November 2021

भगवान परशुराम मंदिर में गोवर्धन पूजा पूरी आस्था से हुई

विश्वकर्मा दिवस भी पूरी श्रद्वा-भावना एवं उत्साहपूर्वक मनाया गया


मोहाली
: 6 नवंबर 2021: (गुरजीत सिंह बिल्ला//आराधना टाईम्ज़)::

मोहाली के फेस-9 औद्योगिक क्षेत्र में उपस्थित  श्री भगवान परशुराम मंदिर एवम धर्मशाला में मंदिर के प्रबंधकों और श्रद्वालुओं की ओर से शुक्रवार को गोवर्धन पूजा और विश्वकर्मा दिवस बड़ी श्रद्वा-भावना एवम उत्साहपूवर्क मनाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में एक विशाल धार्मिक कार्यक्र म का आयोजन किया गया जिसमें भारी संख्या में श्रद्वालुओं और मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और पूजा-अर्चना भी की। कार्यक्रम के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए मंदिर के प्रमुख्य सेवादार और श्री ब्रहामण सभा मोहाली के प्रधान रिटायर्ड एसपी वी.के. वैद, सरप्रस्त रोमेश दत्त, सरप्रस्त शिव शरन कुमार,उपाध्यक्ष जसविंदर सिंह शर्मा ने बताया कि मंदिर में यह पहली बार हुआ है कि एक कार्यक्रम दो साथ करवाए गए। उन्होंने बताया कि मंदिर में आज गोवर्धन पूजा भी की गई और बाद में विश्वकर्मा दिवस भी मनाया गया। उन्होंने बताया कि जब से मंदिर में विश्वकर्मा जी की मूर्ति स्थापित की गई तब से आज यह बाबा विश्वकर्मा का पहला कार्यक्रम था जिसको लेकर श्रद्वालुओं और मंदिर कमेटी पदाधिकारियों में काफी उत्साह था। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में सुबह पहले पूजा-अर्चना की गई उसके बाद विशाल हवन यज्ञ तैयार करवाया गया जिसमें सभी श्रद्वालुओं ने मंदिर के मुख्य पुजारियों के मंत्रोच्चारण के साथ हवन भी किया। वी.के वैद ने बताया कि इसके बाद सभी श्रद्वालुओं को चाय पकौड़े का लंगर वितरित किया गया और उसके बाद कढ़ी-चावल का अटूट लंगर लगाया गया। कार्यक्रम में इस दौरान गोपाल कृष्ण,चेयरमैन राजीव दत्त, केके छिब्बर, पार्षद जसवीर सिंह मणकू,पार्षद प्रमोद मित्रा, मनमोहन दादा, बलदेव राज वशिष्ट, यशपाल अगिनहोत्री, श्री ब्रहामण सभा मोहाली महिला संकीर्तन मंडल अध्यक्ष मैडम हेमा गैरोला, कमलेश राज, वरिंदर शर्मा, प्रवीन शर्मा, अरूण वैद, कृष्ण शर्मा,गुरमीत सिंह चेयरमैन बीसी सेल, विनोद वैद,कृष्ण कुमार कंबाला, कृष्ण कुमार सैक्टर-66, नवल किशोर शर्मा,हनीत,टोनी, ओम प्रकाश, गुरमीत सिंह सियाण, बॉबी शंकर, राजेश कुमार अपने परिवार सहित  और मंदिर के पुजारी अमित मिश्रा,अशोक कुमार भाट,ऊमेश द्विवेदी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

महिला मंडल के  कीर्तन से मंदिर हुआ भक्तिभोर

मोहाली: उक्त कार्यक्रम के दौरान मंहिला मंडल संर्कीतन मडली की ओर से मंडल अध्यक्षता मैडम हेमा गौरोला की देख-रेख में कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें पूरा मंदिर भक्तिभोर हो गया और संगतों को गुणगान करके निहाल किया गया है। इस दौरान मैडम हेमा गैरोला ने बताया कि मंदिर में संकीर्तन के दौरान पुष्पा शर्मा,सुधा,गीतांश, कुसुमा,सुशीला, वेद बाला, लीला शर्मा, गीता शर्मा, पूनम शर्मा,मुस्कान वैद ,साधना वैद,मालती देवी,ममता शर्मा,लता,खुश्बू सहित अन्य महिला श्रद्वालुओं ने शिरकत किया।

7 नवंबर को लगेगा मुफ्त मंदिर में कैंप

मोहाली। मंदिर प्रबंधकों ने बताया कि 7 नवंबर यानि कल रविवार को श्री भगवान परशुराम मंदिर में रीढ़ की हड्डी और सरवाईकल के माहिर डाक्टर की ओर से मुफ्त कैंप का आयोजन किया जा रहा है जो कि सुबह 1० बजे से लेकर शाम 4 बजे तक चलेगा। उन्होंने बताया कि कैंप का उद्घाटन पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्वू करेंगें।  


फोटो कैप्शन: मंदिर में आयोजित गौवर्धन पूजा, विश्वकर्मा पूजा में शिरकत करते श्रद्वालु एवम मंदिर कमेटी के पदाधिकारी ।

Wednesday, 4 August 2021

प्रेम हो, शायरी हो या भक्ति--सावन बहुत गहरे अर्थ रखता है

 बहुत महत्वपूर्ण हैं सावन के सोमवार और दिन त्यौहार 


लुधियाना: 4 अगस्त 2021: (मीडिया लिंक रविंद्र//आराधना टाईम्ज़)::

आप ने कभी ध्यान दिया कि प्रेम करने वाले लोग और शायरी में डूबे रहने वाले शायर वर्ग से जुड़े लोग सावन के महीने को इतना महत्व क्यूं देते हैं। शायद ही कोई शायर या शायरा हो जिसे सावन पर कुछ न लिखा हो। शायद ही को हो जिसने सावन में झूम के न देखा हो। "आया सावन झूम" के नाम की फिल्म आई थी सन 1969 में। बहुत से नाज़ुक मोड़ों से भरी हुई फिल्म ज़िंदगी की झलक दिखती है। धर्मेंद्र और आशा पारेख की जोड़ी पर फिल्माई गई इस फिल्म का टाईटल सांग था बेहद लोकप्रिय हुआ गीत आया सावन झूम के... इस गीत के बोल सावन का दृश्य सामने ला देते हैं मौसम का भी, तन का भी और मन का भी। देखिए ज़रा गीत की एक झलक:

बदरा छाए के झूले पड़ गए हाए

के मेले लग गये मच गई धूम रे

के आया सावन हो ओ ओ झूमके

इसी गीत की कुछ पंक्तियाँ हैं:हैं जो बिरहा की बात भी बहुत ही खूबसूरती से करती हैं। देखिए इनका भी एक रंग:

जाने किसको किसकी

याद आई के चली पुरवाई 

गीत में इन दोनों छोटी सी पंक्तियों को कम से कम दो बार बोलै जाता है जिससे इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और सुनने वाले को याद और पुरवाई का संबंध भी कुछ कुछ समझ आने लगता है। इसे समझ क्र सावन महीने के जादू का अहसास होना शुरू होता है। आगे की पंक्तियाँ भी देखिए:

जाने किस बिरहन का

मन तरसा के पानी बरसा

हो ओ हो ओ

जब मन में बिरहा का दर्द महसूस होने लगता है तब वो धीरे धीर जा कर एक गहरी पीड़ा में महसूस होता है। एक तड़प से उठने लगती है। उस तड़प के चलते ही मन सोचता है बस एक  झलक मिल जाए उसकी। इधर गर्मी के बुरे हाल में तन भी तड़पता है-काश बरसात आ जाए। काश कुछ बूँदें धरती पर आ गिरें। उस वट फुहार मिल जाए तो लगता है बेहद आनंद मिल गया। यही तड़प और यही आनंद बन जाता है जब और गहरा तब बात चलती है भगवान की तरफ। साडी तड़पन तब उस भगवान की तरफ रुख कर लेती है। ऐसे में शिव शंकर भोलेनाथ मन को तीव्रता से लुभाते हैं। जब कोई आश्रय नज़र नहीं आता तब भोले शंकर  की आशा ही मन में जागती है। कहते हैं जिसने सावन के महीने में इस तड़पन को गले लगा लिया उस ने बहुत हद तक भगवान शिव शंकर की नज़दीकियों के अनुभव को भी पा लिया। ज़िंदगी में हर कदम पर मुश्किलें हैं, मुसीबतें हैं यह बात शिव शंकर के गले में पड़े सांप ध्यान से बार बार देख कर ही समझ आ सकती है। जीवन विष से भरा है इस सत्य का अहसास नीलकंठ के नज़दीक हो कर ही मन में उतरेगा। यह भस्म ही सिंगार है इसका पता भी शिव पूजा से ही चलता है। शिव की पूजा ज़िन्दगी के जिस गहरे ज्ञान को देती है उसे किताबों से नहीं पाया जा सकता। 

नटराज का पूजन कलाकार भी यूं ही नहीं करते। बहुत गहरे अर्थ हैं इसके भी। प्रेम प्यार और शायरी का रंग भी शिव पूजा से ही समझ आता है। इसी तरह इस महीने का अर्थात सावन का आध्यात्मिक रंग भी बहुत गहरा है। केवल धर्म कर्म की बात नहीं इसके वैज्ञानिक पहलु भी काफी हैं। फ़िलहाल चर्चा करते हैं धार्मिक क्षेत्र की। 

सावन का महीना पंचांग के अनुसार इस बरस 25 जुलाई 2021 को आरंभ हुआ था। बहुत इंतज़ार के बाद 26 जुलाई 2021 को सावन का पहला सोमवार था। लोग इसकी इंतज़ार बहुत शिद्द्त से करते हैं। पंचांग की गणना के अनुसार सावन के महीने का समापन 22 अगस्त 2021 को हो जाएगा। इस लिए बहुत कम दिन बाकी हैं इस ख़ास महीने के। क्र लो पूजा पथ दिल से। बहुत से लोगों के मन की मुरादें पूरी करते हुए यह महीना समाप्त होने की तरफ बढ़ रहा है। । दिलचस्प है कि इस दिन रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा का पर्व भी होगा।

गौरतलब है कि भगवान शिव शंभू के प्रिय मास श्रावण या सावन का वक़्त गुज़रता जा रहा है। पावन श्रावण मास में भगवान शिव और उनके परिवार की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धर्म शास्त्रों के मुताबिक हर वर्ष सावन माह में भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत ही फलदायी होता है , इसके बहुत से गहरे लाभ मिलते हैं। शायद यही कारण है कि सावन में अधिकतर लोग रुद्राभिषेक कराते हैं। उल्लेखनीय है कि सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माह माना जाता है। आज हम आपको संक्षिप्त में कुछ रहस्य बताने जा रहे हैं कि और क्या क्या खूबियां हैं इस सावन महीने में। 

जैसा कि आप जानते ही होंगें कि हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, श्रावण मास का प्रारंभ आषाढ़ पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के समापन के साथ होता है। कैलेंडर की गणना बहुत वैज्ञानिक होती है। इसके गहरे अर्थ होते हैं। इसी कैलेंडर पद्धति और प्रणाली के मुताबिक सावन माह इस का 5वां महीना होता है। इस वर्ष सावन का महीना 25 जुलाई दिन रविवार को प्रारंभ हुआ। इसका समापन अब 22 अगस्त दिन रविवार को होगा। 

सावन सोमवार व्रत  इस वर्ष अर्थात 2021 में भी विधिवत रखे जाएंगे। किस्मत वाले ही रख पाते हैं इस उपवास को। सभी को इसका महत्व भी समझ में नहीं आता या कोई न कोई समस्या खड़ी हो जाती है। उपवास का संकल्प पूरा हो इसके लिए  चाहिए साथ ही शिव  भी। अकेला संकल्प अहंकार भी उतपन्न क्र सकता है। 

सावन महीने में हर दिन पावन माना जाता है लेकिन सोमवार का दिन विशेष होता है। सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इस वार सावन में 04 सोमवार व्रत पड़ रहे हैं। पहला सावन सोमवार व्रत 26 जुलाई को, दूसरा सावन सोमवार व्रत 02 अगस्त को, तीसरा सावन सोमवार व्रत 09 अगस्त को और चौथा सावन सोमवार व्रत 16 अगस्त को है। तारीखें आपको बता दिन हैं अब आपका मन इस तरफ आए यह भगवान् शिव की इच्छा से ही होगा। उसका पूजन ही लाभ देगा। 

इसी तरह  इस वर्ष मंगला गौरी व्रत भी रखे जाने हैं। इनका भी बहुत लाभ मिलता है। 

पहला मंगला गौरी व्रत: 27 जुलाई

दूसरा मंगला गौरी व्रत: 03 अगस्त

तीसरा मंगला गौरी व्रत: 10 अगस्त

चौथा मंगला गौरी व्रत: 17 अगस्त

सावन मास की अमावस्या या श्रावण अमावस्या-2021 इस बार 08 अगस्त, दिन रविवार को आ रही है। इसी तरह  सावन मास की पूर्णिमा या श्रावण पूर्णिमा 2021 इस  बार 22 अगस्त, रविवार को आएगी। आपके जीबन में यह महीना हरियाली भी लाए, खुशहाली भी लाए। यही कामना है। ॐ नमः शिवाय। 

Thursday, 11 March 2021

योगी आदित्यनाथ ने की महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा

 गोरखनाथ मंदिर और पीतेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक किया 


गोरखपुर
(यूपी): 11 मार्च 2021: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में धर्मकर्म  सरगर्मियों  तेज़ी है। शिवरात्रि के शुभ अवसर पर आज देश और दुनिया के अन्य भागों की तरह यूपी में भी मेले जैसा माहौल रहा। हर तरफ रौनक नज़र आती रही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को महाशिवरात्रि के मौके पर गोरखनाथ मंदिर और पीतेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक किया। इस अवसर मौजूद लोगों के साथ साथ पूजा पाठ में आस्था रखने वाले कई लोग मौजूद रहे। 

प्रबंधकों के साथ साथ आम जनता को भी मुख्यमंत्री की इंतज़ार जारी थी। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर दोपहर में पीपीगंज स्थित बापू पीजी कॉलेज मैदान में उतरा। उसके बाद वहां से मुख्यमंत्री पीतेश्वर नाथ मंदिर गए और जलाभिषेक तथा पूजा की। इससे माहौल  धार्मिक सा बन गया। 

मुख्यमंत्री ने पीतेश्वर नाथ मंदिर परिसर में स्थित गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ में हो रहे कक्षों के निर्माण कार्य का जायज़ा भी लिया। इससे मंदिर की प्रबंधक कमेटी के सभी सदस्यों का उत्साह बढ़ गया। परिसर में मौजूद आम लोग भी बहुत ही खुश दिखे। 

शिवरात्रि के पावन त्यौहार पर अपनी इस मंदिर फेरी के अवसर पर मुख्यमंत्री करीब 200 स्थानीय लोगों से मिले और उन्हें महाशिवरात्रि की बधाई दी। उसके बाद वह रुद्राभिषेक करने के लिए गोरखनाथ मंदिर रवाना हो गए। रुद्राभिषेक बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री गोरक्ष पीठ के महंत हैं और वह हर साल महाशिवरात्रि पर गोरखनाथ मंदिर में पूजा और रुद्राभिषेक करते हैं।

गुरु गोरखनाथ को नाथ संप्रदाय में भगवान शिव का अवतार माना जाता है और इस संप्रदाय के लिए महाशिवरात्रि का त्यौहार बेहद महत्वपूर्ण है। 

आप भी अपने इलाके से धर्मकर्म और समाजसेवा से सबंधित खबरें, तस्वीरें, रिपोर्टें और वीडिओज़ भी  प्रकाशनार्थ भेज सकते हैं। आप किसी विशेष आयोजन की विशेष कवरेज के लिए भी सम्पर्क कर सकते हैं। इस ऑनलाइन पत्रिका आराधना टाईम्ज़ से जुड़ने के इच्छुक भी सम्पर्क करें। 

ईमेल का पता है: aradhanatimesmedia@gmail.com


Tuesday, 20 October 2020

बीजेपी टीम ने मंदिर जा कर लिया आशीर्वाद

20th October 2020 at 6:21 PM

 कैलाश नगर मंडल की नवनियुक्त टीम हुई नतमस्तक  


लुधियाना
: 20 अक्टूबर 2020: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़)::
तेज़ी से बढ़ रही नास्तिकता और स्वार्थपूर्ण जीवन शैली के बावजूद अभी भी बहुत से लोग और बहुत वर्ग हैं जो अपने कर्मों लिए भगवान का आशीर्वाद आवश्यक समझते हैं। इन्हीं आस्तिक वर्गों में शामिल हैं भारतीय जनता पार्टी के कई लोग। इस तरह के गिनेचुने धार्मिक लोगों की आस्था आज भी यही है कि सच्ची शक्ति और सच्ची सत्ता केवल भगवान हैं। भगवत कृपा के बिना कुछ भी कर सकना सम्भव ही नहीं।  इसी विश्वास को ले कर वे लोग भगवान का आशीर्वाद लेना बेहद आवश्यक समझते हैं। 
भाजपा कैलाश नगर मंडल की एक बैठक मंडल के प्रधान रोमी मल्होत्रा की अध्यक्षता में नूरवाला रोड पर रोमी मल्होत्रा के दफ्तर में हुयी ! इस बैठक में मंडल प्रभारी जिला उपाध्यक्ष योगेंद्र मकोल,भाजपा के सीनियर नेता डा. सतीश कुमार व शिव पूरी मंडल के प्रभारी, नर्गेश्वर महादेव मंदिर के प्रधान लकी शर्मा विशेष रूप से शामिल हुए। कैलाश नगर मंडल की नवनियुक्त टीम ने मंडल के प्रधान रोमी मल्होत्रा के नेतृत्व में नर्गेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने के बाद नर्गेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य स्वामी शिवानंद जी महाराज जी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लियाऔर मंडल की टीम ने नतमस्तक होकर जीवन में श्रेष्ठ कामना को लेकर आशीवार्द लिया। नर्गेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य स्वामी शिवानंद जी महाराज जी ने योगेंद्र मकोल, डॉ सतीश कुमार, लकी शर्मा, रोमी मल्होत्रा व नवनियुक्त पूरी मंडल की टीम को सन्मानित किया।  
  इस मौके पर नवनियुक्त मंडल महामंत्री-राकेश नागपाल, रंजीत सिंह नीटा, उपाध्यक्ष-रवि अग्रवाल, प्रेम सिंह खेड़ा, हरविंदर लाली,रमन शोरी, सचिव जय प्रकाश,नीलम टंडन, पवन अरोड़ा, यस कुमर, विनीत तिवारी, मंजीत कौर, संतोष कुमार, परवीन कुमारी, गोविंद द्रिवेदी, सूरत जैन  इत्यादि भी बैठक में उपस्थित रहे।