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Thursday, 7 September 2023

बस भगवान कृष्ण का संदेश याद रखिए हर संकट आपसे हार जाएगा

भगवान कृष्ण हर संकट का सामना सहजता से करना सिखाते हैं


लुधियाना
: 6 सितम्बर 2023: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

यूं तो जन्माष्टमी एक हिन्दू त्यौहार के तौर पर ही जाना और मनाया जाता है लेकिन वास्तव में यह सारे  विभाजन हम लोगों ने ही बनाए और मज़बूत किए हैं जबकि वास्तव में धर्म की स्थापना के लिए आने वाले महापुरुषों का उपदेश सभी के लिए फायदेमंद होता है। जीवन की गहराइयां इन्हीं उपदेशों से समझ में आती हैं। धर्म कोई भी हो उसका मर्म बहुत गहरा होता है।   

बहुत से अन्य त्योहारों की तरह जन्माष्टमी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पूरी तरह से विलक्षण भी है। जन्म के साथ ही संघर्षों भरे जीवन के सत्य  है यह त्योहार। केवल जन्माष्टमी के पावन त्यौहार से ही हमें समझ में आता और समरण आने लगता है कि भगवान श्री कृष्ण तो जन्म के समय ही  मुसीबतों से घिरे हुए थे। इन मुश्किलों ने काफी देर तक उनका पीछा भी नहीं छोड़ा लेकिन इसके बावजूद वह हर संकट का सामना मुस्कराते हुए बहादुरी से करते हैं। 

यह ख़ास त्यौहार है जिसके आते और जाने की रात में ही मौसमी तब्दीली शुरू समझी जाती है। गर्मी का प्रकोप भी मंद पड़ना है। कुछ ही दिनों के बाद आने वाली गुलाबी ठंडक एक खास अहसास भी कराएगी। जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मुसीबतें भी मामूली नहीं थी। कंस सगा मामा ही तो था लेकिन हत्या पर उतारू था। आज हमारा कोई अपना अगर ज़रा सा भी हमारे खिलाफ हो जाए तो हम समझते हैं न जाने कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन भगवान् श्री कृष्ण ने बाकायदा एक जंग लड़ी अन्याय के खिलाफ। अत्याचार के खिलाफ। राजशाही के खिलाफ। 

आज हम में से कितने लोग हैं जो अपने बेगानी के रिश्ते को दरकिनार कर के गलत को गलत कहने की हिम्मत जुटा पाते हैं? भगवान श्री कृष्ण का जीवन और उपदेश हमें विपरीत प्रस्थितियों में भी हंसना, मुस्कराना, हिम्मत बनाए रखना और इन विपरीत हालात के साथ पूरी शक्ति से टकराना सिखाता है। 

आसान नहीं है भगवान कृष्ण का भक्त बन जाना। कालिया नाग आज भी ज़हर जैसी खतरनाक मुसीबतों का ही प्रतीक है। तस्वीर बहुत कुछ बताती और सिखाती है। उस कालिया नाग के फन पर नाचना आना चाहिए अगर जीवन जीना है तो।  हालत को अपने वश में करना सीखना होगा। भगवान श्री कृष्ण की हर बात बहुत कुछ सिखाती है। जीवन के गहन सत्यों से रूबरू करवाती है। 

जन्माष्टमी की रात्रि को लोग व्रत और उपवास रखते हैं-इसका भी गहरा अर्थ है। उपवास से ही भक्ति, आस्था, चेतना और हिम्मत का सामंजस्य बना रहता है। इसी से एक शक्ति जगती है। मदहोशी की नींद से जाग कर ही सम्भव हैं भगवान कृष्ण के दर्शन। इस लिए मध्यरात्रि में जब जन्म का समय आता है तो उस वक्त तक पूरी तरह से सतर्कता के साथ जागना, प्रेम के साथ जागना आम तौर पर सभी के लिए सम्भव नहीं रहता। बहुत कठिन होता है कुछ घंटों का ही यह जागरण लेकिन अगर आस्था, श्रद्धा और विधि से कर लिए जाए तो शक्ति की अनुभूति भी देता है। 

यह परम्परा भी है कि जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, उस समय मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना की जाती है। उस समय घंटियां बहुत मधुरता से सुनाई देती हैं। इस पूजा अर्चना और सेलिब्रेशन का भी बाकायदा एक विज्ञान है। जब अंतर्मन में जाग्रति आती है। किसी महान शक्ति की अनुभूति होती है और विराटता के दर्शन होते हैं तो संगीत सुनाई देने लगता है। घंटियां सी बजने लगती हैं। वास्तव में अगर आस्था और हसरद्दा सच में है तो आपके अंतर्मन में भी वही सब अनुभव होने लगेगा। बेशक आप मंदिर में न भी हों पर अगर वह आस्था और श्रद्धा नहीं है तो फिर मंदिर में बैठ कर भी शायद वो बात न बने। 

जन्माष्टमी के दिन लोग श्रीकृष्ण की कथाएँ सुनते हैं, भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं। बच्चे श्रीकृष्ण के वेश में सजकर उनकी लीलाओं का अनुकरण करते हैं। यह सब हमारे अंतर्मन में एक सात्विक शख्सियत के निर्माण की प्रक्रिया का ही भाग होता है। इसका असर पूरे समाज के नव निर्माण तक पहुंचता है। इन्हीं छोटे छोटे कदमों से मिलने लगती हैं बड़ी बड़ी उपलब्धियां। 

इसी अवसर पर एक प्रमुख परंपरा 'दही-हांडी' की भी होती है, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है लेकिन अब तो पंजाब में  लोकप्रिय होती जा रही है। इसमें एक ऊंचाई पर दही भरी मटकी (हांडी) टांग दी जाती है और युवक टोलियाँ उसे तोड़ने का प्रयास करते हैं। यह प्रसंग श्रीकृष्ण की माखन चोर लीला को प्रस्तुत करता है। बात केवल माखन चोरी की तो नहीं है। यह भी बेहद महत्वपूर संकट है कि ज़िंदगी में सफलता का माखन आसानी से नीचे बैठे बिठाए नहीं मिलता। उसके लिए संघर्ष की भी ज़रूरत होती है और साथियों के सहयोग की भी। तब बनती है बात। सफलता के लिए संघर्ष का ही संदेश है यह रस्म भी। 

दिलचस्प बात है कि जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति में श्रीकृष्ण के जीवन, उनके संदेश और उनकी लीलाओं की महत्वपूर्णता को प्रकट करता है। यह त्योहार विशेष रूप से भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना के साथ मनाया जाता है। बांसुरी और सुदर्शन चक्र के दरम्यान का समन्यव भगवन कृष्ण की बातों को गहराई से समझ कर ही समझा जा सकता है। ये प्रतीक बेहद अनमोल हैं। 

Tuesday, 31 August 2021

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 2021

Tuesday: 31st August 2021 at 05:01 PM

 दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा–‘संभवामि युगे युगे' 

लुधियाना: 31 अगस्त 2021: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

कोविड वैश्विक महामारी के इस संघर्ष पूर्ण दौर मे, जहां हर ओर लोग आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याओं, मानसिक तनाव अथवा पारिवारिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं , वहां आध्यतामिकता ही मानवता को संतोष व धीरज प्रदान करने का एक मात्र उपाय है। अध्यात्म के द्वारा ही एक  व्यक्ति किसी भी प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों से सहजता से बाहर निकल सकता है। यह एक ऐसा सार्वभौमिक सत्य है जिसे समय-समय पर हमारे संतों महापुरुषों ने मानव जाती को याद कराया है। आज भी , दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी , दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान [DJJS] के संस्थापक एवं संचालक , लोगों को न केवल अध्यात्म के महत्व से परिचित करवा रहे हैं अपितु  इसके सार को मानव के आंतरिक जगत में ‘ब्रह्मज्ञान ‘- आत्म साक्षात्कार का सनातन विज्ञान के द्वारा प्रयोगात्मक ढंग से प्रकट भी कर रहे हैं ।

विश्व भर के असंख्य लोगों की आध्यात्मिक तृप्ति हेतु, डी.जे.जे.एस. ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2021 के शुभ अवसर पर ‘संभावमी युगे युगे’ विषय पर आधारित एक विशेष सामाजिक-सांस्कृतिक-आध्यात्मिक वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन किया। उक्त विषय श्रीमद् भगवत गीता मे बताए गए भगवान श्री कृष्ण के सार्वभौमिक उद्घोष- ‘पवित्र आत्माओं के कल्याण व अधर्मियों के विनाश हेतु मैं धरती पर अवतार लूँगा’ पर आधारित था। इस भव्य ऑनलाइन कार्यक्रम का प्रसारण डी.जे.जे.एस. यूट्यूब चैनल के माध्यम से 29 और 30 अगस्त को क्रमशः दो एपिसोडों - भाग 1 और भाग 2 मे किया गया एवं सम्पूर्ण कार्यक्रम का पुनः प्रसारण जन्माष्टमी की रात्री यानि 30 अगस्त, 2021 को रात 9 बजे से मध्यरात्रि 12 [IST] तक किया गया। करोड़ों लोगों ने यूट्यूब के माध्यम से घर बैठे ही इस दिव्य कार्यक्रम का लाभ उठाया। साथ ही इन दो दिनों मे दिन मे कई कई बार सोशल मीडिया ऐप ट्विटर पर #DJJSJamashtami व #SambhavamiYugeYuge  हैशटेग ट्रेंडिंग में रहे। संस्थान के मन्त्रमुग्ध कर देने वाले संगीत व नृत्यनाटिकाओं को इंस्टाग्राम रील्स मे भी खूब सराहा गया।           

इस आयोजन में न केवल श्री कृष्ण को लेकर समाज में फैली मनगढ़ंत धारणाओं और भ्रांतियों को दूर किया गया बल्कि यह भी समझाया गया कि जन्माष्टमी का पर्व केवल दही-हांडी, उपवास या सजावटी झांकी तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह भगवान कृष्ण की दिव्य शिक्षाओं को आत्मसात करने और उनके दिखाए आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का पर्व है। क्यों श्री कृष्ण का अवतार लेना एक उत्सव है? श्री कृष्ण की शाश्वत चेतना आज भी आपके जीवन को किस प्रकार दिव्य बना सकती हैं ? क्या आप केवल श्रीकृष्ण में विश्वास करते हैं या उनकी आज्ञा भी मानते हैं ? जन्माष्टमी के मूल पहलुओं को उजागर करते हुए इन सभी प्रश्नों के उत्तरों को विभिन्न माध्यमों से दिया गया। कार्यक्रम में जगतगुरु भगवान श्री कृष्ण को भक्तिमय वंदन अर्पित किया गया। श्रीमद्भगवत गीता में निहित आध्यात्मिक रत्नों को प्रस्तुत किया गया। श्री कृष्ण की जीवन गाथाओं को ज्ञानवर्धक नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से रखा गया एवं विद्वान प्रचारकों के द्वारा श्रीकृष्ण की लीलाओं का विश्लेषण किया गया।

भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को प्रदत्त ‘गीता-ज्ञान’; भगवान विष्णु के दो द्वार पाल ‘जय-विजय’ की गाथा जिन्हें अहंकार के वशीभूत धर्म पथ को त्यागने के कारण शाप मिला; मीराबाई जी की भक्ति को दर्शाती ‘प्यारे दर्शन दीजो’ आदि रोमांचक नाट्य कार्यशालाएं; ‘केशव माधव’ व ‘गुरु वंदना’ पर नृत्य नाटिकाएँ अथवा श्री कृष्ण की मंगल आरती इस भव्य कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे। इन सभी प्रस्तुतियों का सबसे  विशेष पक्ष इनमे निहित सेवा भावना थी। गौरतलब है कि इस कार्यक्रम मे भाग लेने वाले सभी कलाकारों में कोई भी इस कला मे पारंगत, नाम, प्रसिद्धि व पैसे के लिए काम करने वाला पेड-प्रॉफेश्नल नहीं था अपितु ये सभी युवा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के निस्वार्थ, समर्पित, जागृत ब्रह्मज्ञानी शिष्य थे; जिन्होंने समाज कल्याण की भावना से प्रेरित होकर इस कार्यक्रम मे अपना सर्वस्व लगाया। प्रत्येक प्रस्तुति दिव्य उत्साह व ऊर्जा से परिपूर्ण रही क्योंकि प्रस्तुति के पहले सभी कलाकार ब्रह्मज्ञान आधारित ध्यान साधना करते। इस कार्यक्रम में मंच पर एक उच्च दर्जे का अनुशासन देखा गया, युगल प्रस्तुतियों में जो युगल [couples] इन नाट्य प्रस्तुतियों में देखे गए वो वास्तविक जीवन में भी  विवाहित हैं।

यह कार्यक्रम जिसे विश्व भर से असंख्य दर्शकों ने घर बैठे ही देखा, इसे व्यापक मीडिया कवरेज और सभी से सराहना प्राप्त हुई।

यद्यपि संस्थान तीन दशकों से अधिक समय से बड़े पैमाने पर जन्माष्टमी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है परंतु यह कार्यक्रम सबसे खास और अनूठा था क्यूँकि डी.जे.जे.एस. की 350 से अधिक विश्वव्यापी शाखाओं से दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के सभी आयु वर्ग के हजारों शिष्य, अपने घरों से बाहर आए और स्कूलों, कॉलेजों, विश्व विद्यालयों, मंदिरों, मॉल, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में, COVID प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, इस कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार किया गया। इस दिव्य कार्यक्रम  ने न केवल 'वसुदेव कुटुम्बकम’ की भावना को जागृत किया बल्कि इसे वास्तविक रूप मे साकार भी कर दिखाया । सुप्रसिद्ध कॉफी शॉप चेंन कैफे कॉफ़ी डे [सी.सी.डी] के देश भर मे लगभग 75 सेंटर्स मे बढ़ चढ़ कर कार्यक्रम का डिजिटल विज्ञापनों द्वारा प्रचार हुआ। इतना ही नहीं, दुनिया भर के स्थानीय मीडिया ने भी अपने संबंधित समाचार चैनलों और समाचार पत्रों के माध्यम से इस कार्यक्रम का प्रचार किया। इसके साथ साथ, अहमदाबाद के सुप्रषिद्ध कर्णावती क्लब व राजपथ क्लब और साथ ही बिहार, उत्तरप्रदेश और उड़ीसा के ग्रामीण क्षेत्रों और दूर दराज़ के इलाकों में कार्यक्रम की सामुदायिक डिजिटल स्क्रीनिंग भी की गयी।

बड़ी संख्या में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रभावशाली और दिग्गज व्यक्तित्व जैसे कि बॉलीवुड अभिनेता और प्रसिद्ध हस्ति - श्री अखिलेंद्र मिश्र जिन्हें क्रूर सिंह के रूप में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है; नेशनल सिंगिंग रियलिटी शो 'वॉयस ऑफ इंडिया किड्स' विजेता - सुश्री निष्ठा शर्मा; श्री संजय तलवार जी (एम एल ए लुधियाना), श्री श्याम सुंदर मल्होत्रा जी (सीनियर डिप्टी मेयर लुधियाना), श्री कमल चेटली लुधियाना (नेशनल वाईस प्रेजिडेंट शिरोमणि अकाली दल), श्री प्रवीण डंग जी (प्रेजिडेंट हिन्दू न्याय पीठ पंजाब), श्री रजनीश धीमान जी (एग्जीक्यूटिव मेंबर बीजेपी पंजाब), श्री मदन लाल चोपड़ा जी (चेयरमैन सनातन धर्म महोत्सव कमेटी लुधियाना), श्री दिनेश मरवाहा जी (प्रेजिडेंट श्री राम लीला कमेटी दरेसी ग्राउंड लुधियाना); प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार- श्री संदीप देव; प्रसिद्ध हास्य कलाकार श्री दीपक राजा और श्री मणि लहरी; भारतीय टेलीविजन अभिनेत्री सुश्री स्मृति कश्यप; डब्लू.डब्लू.ई. चैंपियन द ग्रेट खली; मंत्री पंजाब श्री बलबीर सिंह सिद्धू; कई अन्य लोगों ने डी.जे.जे.एस. जन्माष्टमी को अपने सोशल मीडिया हैंडल के साथ-साथ वीडियो संदेश द्वारा बढ़ावा दिया और आयोजन को एक शानदार सफलता दिलाई।

डी.जे.जे.एस. एक अलाभकारी सामाजिक-आध्यात्मिक संगठन है जो विश्व स्तर पर नौ-आयामी सामाजिक सुधार और कल्याण कार्यक्रमों – लिंग समानता, शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य, नशीली दवाओं के दुरुपयोग उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय गाय नस्ल सुधार और संरक्षण, आपदा प्रबंधन, विकलांगों और कैदियों के सशक्तिकरण के साथ-साथ कॉर्पोरेट क्षेत्र और युवाओं के सशक्तिकरण, के माध्यम से सार्वभौमिक भाईचारे और शांति की स्थापना के लिए काम कर रहा है। 

जन्माष्टमी पर परिवहन मंत्री राजपूत ने मंदिर ट्रस्ट को दी 5 लाख की राशि

 Tuesday: 31st August 2021 at 15:19 PM

 जन्माष्टमी के पावन अवसर पर परिवहन मंत्री ने दी शुभकामनाएँ 


भोपाल
: मंगलवार: 31 अगस्त 2021: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

राजस्व एवं परिवहन मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर में श्री गोवर्धन मंदिर पहुँचकर यादव समुदाय द्वारा आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया और उपस्थित जन-समुदाय को अपनी शुभकामनाएँ दीं। अपने जन्मोत्सव की बधाई लेते हुए उन्होंने कहा कि मेरा नाम भी गोविंद शायद इसीलिए रखा गया कि मेरा जन्म भी जन्माष्टमी के दिन हुआ था। इस अवसर पर उन्होंने श्री गोवर्धन मंदिर ट्रस्ट को 5 लाख रूपये की राशि मंदिर के सौन्दर्यीकरण के लिए भेंट स्वरूप प्रदान की।

बच्चों को बांटे फल व खिलौने

राजस्व एवं परिवहन मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत जन्मदिन के अवसर पर घरौंदा आश्रम पहुँचे जहाँ उन्होंने बच्चों को फल मिठाईयाँ, खिलौने तथा चॉकलेट वितरित किया।

बुंदेली परंपरा से हुआ भव्य स्वागत

राजस्व एवं परिवहन मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत का जन्मदिन बुंदेली परंपरा से मनाया गया। मंत्री श्री राजपूत ने उन सभी लागों के प्रति आभाग माना, जो जन्माष्टमी कार्यक्रम और उनके जन्मदिन पर शामिल हुए। इस अवसर पर बुंदेली नृत्य आकर्षक प्रस्तुति हुई।

Saturday, 27 August 2016

एक ऊँगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्रपर भरोसा कर लिया

और दसों उँगलियों पर चलने वाळी बांसुरी को भूल गए ?
                                                                                                                                                                           साभार चित्र 
यह रचना हमें सोशल मीडिया ले ज़रिये प्राप्त हुई है जिसे कई लोगों ने भेजा है। इस लिए इसका वास्तविक लेखक कौन है इसका पता बहुत प्रयासों के बाद भी नहीं चल सका। इस लिए इसे यहाँ बिना नाम के ही छपा जा रहा है। इसमें छुपे गहन सन्देश को पहचानिये जिसे जन जन तक पहुँचाने की ज़रूरत जितनी आज है उतनी शायद पहले कभी नहीं थी। 
विचलित से कृष्ण ,प्रसन्नचित सी

राधा…
कृष्ण सकपकाए, राधा मुस्काई
इससे पहले कृष्ण कुछ कहते राधा बोल
उठी
कैसे हो द्धारकाधीश ? 
जो राधा उन्हें कान्हा कान्हा कह
के बुलाती थी
उसके मुख से द्धारकाधीश का संबोधन
कृष्ण को भीतर तक घायल कर गया
फिर भी किसी तरह अपने आप को
संभाल लिया
और बोले राधा से ………
मै तो तुम्हारे लिए आज भी कान्हा हूँ
तुम तो द्धारकाधीश मत कहो!
आओ बैठते है ….
कुछ मै अपनी कहता हूँ कुछ तुम अपनी
कहो
सच कहूँ राधा जब जब भी तुम्हारी
याद आती थी
इन आँखों से आँसुओं की बुँदे निकल
आती थी 
बोली राधा, मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं 
हुआ
ना तुम्हारी याद आई ना कोई आंसू
बहा
क्यूंकि हम तुम्हे कभी भूले ही कहाँ थे
जो तुम याद आते
इन आँखों में सदा तुम रहते थे
कहीं आँसुओं के साथ निकल ना जाओ
इसलिए रोते भी नहीं थे
प्रेम के अलग होने पर तुमने क्या खोया
इसका इक आइना दिखाऊं आपको ?
कुछ कडवे सच, प्रश्न सुन पाओ तो
सुनाऊ आपको ?
कभी सोचा इस तरक्की में तुम कितने
पिछड़ गए
यमुना के मीठे पानी से जिंदगी शुरू
की
और समुन्द्र के खारे पानी तक पहुच
गए ?
एक ऊँगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्रपर
भरोसा कर लिया और
दसों उँगलियों पर चलने वाळी
बांसुरी को भूल गए ?
कान्हा जब तुम प्रेम से जुड़े थे तो ….
जो ऊँगली गोवर्धन पर्वत उठाकर
लोगों को विनाश से बचाती थी
प्रेम से अलग होने पर वही ऊँगली
क्या क्या रंग दिखाने लगी
सुदर्शन चक्र उठाकर विनाश के काम
आने लगी
कान्हा और द्धारकाधीश में
क्या फर्क होता है बताऊँ
कान्हा होते तो तुम सुदामा के घर
जाते
सुदामा तुम्हारे घर नहीं आता
युद्ध में और प्रेम में यही तो फर्क होता
है
युद्ध में आप मिटाकर जीतते हैं
और प्रेम में आप मिटकर जीतते हैं
कान्हा प्रेम में डूबा हुआ आदमी
दुखी तो रह सकता है
पर किसी को दुःख नहीं देता
आप तो कई कलाओं के स्वामी हो
स्वप्न दूर द्रष्टा हो
गीता जैसे ग्रन्थ के दाता हो
पर आपने क्या निर्णय किया
अपनी पूरी सेना कौरवों को सौंप
दी?
और अपने आपको पांडवों के साथ कर
लिया
सेना तो आपकी प्रजा थी
राजा तो पालाक होता है
उसका रक्षक होता है
आप जैसा महा ज्ञानी
उस रथ को चला रहा था जिस पर
बैठा अर्जुन
आपकी प्रजा को ही मार रहा था
आपनी प्रजा को मरते देख
आपमें करूणा नहीं जगी
क्यूंकि आप प्रेम से शून्य हो चुके थे
आज भी धरती पर जाकर देखो
अपनी द्धारकाधीश वाळी छवि
को
ढूंढते रह जाओगे हर घर हर मंदिर में
मेरे साथ ही खड़े नजर आओगे
आज भी मै मानती हूँ
लोग गीता के ज्ञान की बात करते हैं
उनके महत्व की बात करते है
मगर धरती के लोग
युद्ध वाले द्धारकाधीश पर नहीं
प्रेम वाले कान्हा पर भरोसा करते हैं
गीता में मेरा दूर दूर तक नाम भी नहीं
है
पर आज भी लोग उसके समापन पर
” राधे राधे” करते है”