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Monday, 11 December 2023

बेहद क्रूर है केतु और उसकी महादशा--बिभाष मिश्रा

11th दिसंबर 2023 at 03:54 PM

7 वर्षीय केतु की महादशा बेहद कष्टकारी मानी जाती है


अचानक कभी कभी लगता है हम मज़बूत हो गए। कभी कभी लगता है हम टूट गए। बहाना कोई इंसान  है और कोई हालात भी लेकिन यह  सब ग्रह दशा के चलते हो रहा होता है। इस बार बिभाष मिश्रा जी ने अपनी रचना में केतु के संबंध में बेहद सादगी  भरे शब्दों के साथ बताया है। इसमें दी गई जानकारी आपसभी के लिए फायदेमंद हो सकती है अगर आप इसका फायदा उठाना चाहें तो? केतु की महादशा और इसके प्रभाव की जानकारी है इस विवेचन में।- कार्तिका कल्याणी सिंह (समन्वय संपादक)

ज्योतिष की दुनिया से: 11 दिसंबर 2023: (बिभाष मिश्रा//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

आमतौर पर जब महादशा की बात आती है तो क्रूर ग्रह की महादशा जैसे शनि की महादशा ...और राहु की महादशा ...कष्ट देने वाली होती है ।।।  

 पर अनुभव में यह हमने पाया कि सबसे ज्यादा कष्ट देने वाली अगर कोई महादशा है तो वह केतु की महादशा होती है,  जो अच्छे-अच्छे इंसान की जड़े हिला देती है ।।।

एक चट्टान और बरगद के पेड़ के समान व्यक्तित्व भी जो बुद्ध की महादशा में फल फूल रहा हो ...केतु की महादशा में उसकी जड़ हिल जाती है...

इसलिए 7 वर्षीय केतु की महादशा बेहद कष्टकारी मानी जाती है ।।।

हम आज की इस पोस्ट में केतु को समझने की कोशिश करेंगे जैसा कि हम सभी जानते हैं की सर वाला भाग राहु है और धर वाला भाग केतु है ।।।

यह जानकर आश्चर्य होता है कि सूर्य और चंद्रमा के ग्रहण का कारण बनने वाले राहु-केतु दोनों का जन्म वास्तव में महाकाल की नगरी उज्जैन में हुआ था।।।।

जब विष्णु मोहिनी रूप धारण करके देवताओं में अमृत बांट रहे थे, तो राहु भी छल से देवताओं की श्रेणी में जा बैठा ...और  अमृत का पान कर लिया, तो सूर्य और चंद्र के संकेत से नारायण के चक्र ने  राहु-केतु का सिर धड़ से अलग कर दिया ।।।

अमृत ग्रहण करने के कारण शरीर के दोनों हिस्से जीवित ही रहे और राहु और केतु के नाम से जाने जाने लगे ।।

राहु-केतु के जन्म की कथा स्कंद पुराण में मिलती है, वैदिक और पौराणिक शोध के आधार पर कहा जाता है कि स्कंद पुराण के अवंती खंड के अनुसार, उज्जैन राहु और केतु की जन्मस्थली है।।।

सूर्य और चंद्र ग्रहण का कारण बनने वाले ये दो छाया ग्रह विशेष रूप से उज्जैन में पैदा हुए थे।।।

अमृत ​​वितरण के समय राहु और केतु का जन्म हुआ, अवंती खंड कथा के अनुसार समुद्र मंथन से निकला अमृत महाकाल वन में वितरित हुआ था। ।।

इसी वन में भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया था। ।।

हालाँकि देवता के वेश में एक राक्षस ने अमृत पी लिया।।। 

परिणाम स्वरूप भगवान विष्णु ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। अमृत ​​पीने से उनके शरीर के दोनों हिस्से जीवित रहे, और उन्हें राहु और केतु के नाम से जाना जाने लगा।।।

केतु का सिर नहीं है, जबकि राहु का धड़ नहीं है...

ज्योतिष में ये खगोलीय पिंड जिन्हें छाया ग्रह के रूप में जाना जाता है, दोनों एक ही राक्षस के शरीर से प्राप्त हुए हैं।।। 

राहु राक्षस के सिर वाले हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि केतु धड़ का प्रतिनिधित्व करता है। ।।

केतु मोक्ष प्रदाता ग्रह है, चुकी अमृत वाला भाग केतु को प्राप्त हुआ इसलिए इससे आध्यात्मिक सुख भी देखी जाती है ।।

चूं कि कुंडली का बारहवां भाग मोक्ष का है, और केतु भी मोक्ष प्रदाता ग्रह है , इसलिए कुंडली के द्वादश भाव में बैठकर यह मोक्ष देता है ।।

आमतौर पर केतु अलगाववादी ग्रह है, या तो यह स्थिति को शून्य करता है या इतना देता है कि जातक तृप्त हो जाए क्योंकि केतु तृप्ति का कारक है ।।

उदाहरण स्वरूप किसी की जन्म कुंडली में द्वितीय भाव में केतु बैठा है तो शोध में हमने देखा कि ऐसे जातक को जबर्दस्त आर्थिक तंगी होती है.. या ऐसे जातक के पास इतना धन होता है ...इतना धन होता है.. कि उसे धन के प्रति मोह ही खत्म हो जाता है ।।

इसी प्रकार अगर पंचम भाव में केतु हो, तो यह संतान की हानि कराता है, गर्भ हानि कराता है , या फिर चार-पांच संतान का पूर्ण सुख देता है ।।

कुंडली के नवम भाव और दशम भाव दोनों से पिता की सुख देखी जाती है, यहां पर बैठकर केतु या तो पिता का बिल्कुल सुख नहीं देता या पिता पूर्ण दीर्घायु होते हैं ।।।

बाकी घर के  बारे में भी ऐसा ही फलादेश समझे ।।

यानी केतु की अशुभ स्थिति फल में शुन्यता देगी और शुभ स्थिति प्रचुरता देगी ।।।

कुंडली में केतु अगर उच्च का बैठा हो,  खुद के नक्षत्र में बैठा हो तो ऐसी स्थिति में केतु को शुभ माना जाएगा ।।

वही केतु अगर कुंडली में नीच का बैठा हो,  या फिर षष्ठेश , अष्टमेश या द्वादशेश के नक्षत्र में बैठा हो तो यह अशुभ फल देने वाला माना जाएगा ।।

केतु वैराग का भी कारक है, एकांत मोक्ष का भी कारक है ।।

7 वर्षीय केतु की महादशा जीवन के वह रंग को दिखाती है जिसे जातक और किसी महादशा में नहीं सीख पाता ।।

द्वितीय धान भाव में अगर केतु बैठा हो और केतु की महादशा चल तो बड़े से बड़े खजाने में खाली हो जाते हैं और जातक के पास धन का भयंकर अभाव हो जाता है ।।

ज्‍योत‍िष शास्‍त्र के अनुसार कुंडली में केतु खराब होने पर जातक के बाल झड़ने लगते हैं, नसों में कमजोरी, पथरी की समस्‍या, जोड़ों में दर्द, स्किन प्राब्‍लम जैसी समस्‍याएं होती हैं. जातक की सुनने की क्षमता कम हो जाती है. संतान उत्‍पत्ति में समस्‍या होना, यूरिन संबंधी परेशानी होना भी शामिल है ।।।

गणेश जी को केतु का कारक देवता माना गया है। बुधवार के दिन गणेश पूजा, घी और दूर्वा से गणेश जी का हवन करने से केतु के दुष्प्रभाव को दूर किया जा सकता है। 

केतु दोष से मुक्ति के लिए शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना भी लाभकारी माना जाता है ।।

नीम के पेड़ से केतु का बड़ा गहरा संबंध है, नीम की लकड़ी से दातुन करना, नीम की लकड़ी से कंघी करना और अपने हाथों से नीम का पेड़ लगाना केतु को शुभ करने का उपाय है ।।

नेत्रहीन कोढ़ी अपंग के ऊपर केतु का प्रभाव है, इनको यथासंभव मदद कीजिए

हाथी, चींटी, मछली के ऊपर केतु का प्रभाव है।।

चींटी और मछली को चारा देना और हाथी दांत से बनी चीजों को व्यवहार में लाना केतु को शांति देने का उपाय है ।।  

Er. Bibhash Mishra

Research Scholar

Astrologer Consultant

+91 99559 57433

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Thursday, 7 December 2023

कौन कौन सा उपवास हो सकता है फायदेमंद?

गुरु को बलवान करने के लिए क्या क्या करना आवश्यक है?

गुरु बृहस्पति और अध्यात्म पर बहुत कुछ बता रहे हैं बिभाष मिश्रा 


किसी भी इंसान के जीवन को ऊपरी नज़र से भी देखें तो आपको अहसास होने लगेगा कि इस व्यक्ति पर किस ग्रह का प्रभाव चल रहा है किसकी महादशा चल रही है। इस पोस्ट को पढ़ कर ज़रा ध्यान से देखना और सोचना कि आपके सर्किल में कौन है ऐसा व्यक्ति? बिभाष मिश्रा जी ने अपनी रचना में इस बार गुरु बृहस्तपति के संबंध  सादगी के साथ बताया है। इसमें दी गई जानकारी आपसभी के लिए फायदेमंद हो सकती है अगर आप इसका फायदा उठाना चाहें तो? - कार्तिका कल्याणी सिंह (समन्वय संपादक)

बृहस्पति-वह चिराग जो खुद जलकर भी सभी को रौशनी ही देता है

गुरु बृहस्पति धाम मंदिर के प्रोफ़ाइल पेज से साभार तस्वीर 
नवग्रह में बृहस्पति को देवगुरु की उपाधि दी गई है... सूर्य अगर राजा है ..मंगल अगर मंत्री है. तो वहीं गुरु राजपुरोहित है ।।।

गुरु ग्रह को सलाहकार की उपाधि दी गई है.. यानी गुरु से बेहतर तजुर्बा किसी दूसरे ग्रह के पास नहीं होता है ,  इसी वजह से गुरु को एक अच्छा सलाहकार माना जाता है ।।

ज्योतिष में गुरु को चिराग की उपाधि दी गई है, वह चिराग जो खुद जलकर भी जहां बैठता है अपने आसपास को रोशन करता है भले ही उसके धरातल पर ही अंधेरा क्यों ना हो ।।।

गुरु एक जिम्मेदारी है इसलिए जिस व्यक्ति का गुरु बलवान होता है वह परिवार का सबसे जिम्मेदार सदस्य होता है, या यू कहिए कम उम्र में ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसे पर थोप दी जाती है ।।

गुरु में गंभीरता है, भारीपन है.. स्थिरता है, चंचलता तो नाम मात्र भी नहीं है ।।

गुरु त्याग है, बलिदान है, आध्यात्मिक सुख है, भौतिक सुख से दूर करता है ।।

शायद इसी वजह से गुरु की महादशा चल रही हो तो वैवाहिक सुख में कमी देखी जाती है ।।

जातक अध्यात्म की ओर जुड़ जाता है क्योंकि बृहस्पति से हम आध्यात्मिक सुख को देखते हैं ।।

बृहस्पति मोटापा का भी कारक है तो बहुत बार हमने यह भी देखा है कि बृहस्पति की महादशा चल रही है तो जातक का वजन तेजी से बढ़ता है खासकर कमर वाले हिस्से में ।। 

गुरु को बलवान करने के लिए शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए क्योंकि घी के ऊपर बृहस्पति का जबरदस्त प्रभाव है ।।

शोध में हमने यह भी देखा कि जिन लोगों की गुरु की महादशा चल रही है, उनकी संगत हमेशा उनसे बड़ी उम्र वालों के साथ होते हैं 

उदाहरण के तौर पर अगर आप 30 वर्ष के हैं तो निश्चित तौर पर आप जिसके साथ उठते बैठते हैं वह एक तजुर्बेकार इंसान होगा, शायद कोई बुजुर्ग... या फिर कोई अधेड़ उम्र का जिससे आपको ज्यादा से ज्यादा अनुभव मिल रहा हो ।।।

गुरु ग्रह श्री हरि यानी नारायण रूपी विष्णु को दर्शाते हैं ।।

बृहस्पतिवार का उपवास...एकादशी का उपवास ...श्री सत्यनारायण की कथा इन सब के ऊपर गुरु ग्रह का प्रभाव है

नारायण का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपरोक्त किसी भी उपवास को आप कर सकते हैं, साप्ताहिक गुरुवार का उपवास ...मासिक एकादशी का उपवास ...और हर पूर्णिमा के दिन श्री सत्यनारायण का कथा गुरु ग्रह को बलवान करने का बेहतरीन उपाय है ।।।

नाभि में चंदन और केसर के इत्र को लगाना भी गुरु को बलवान करने का उपाय है ।।

श्री हरि को सुगंध, श्रृंगार और दर्पण बेहद पसंद है ...

श्री कृष्ण की सेवा ..या घर में लड्डू गोपाल की सेवा... हरि को सुंदर वस्त्र पहनाना ..इत्र लगाना... और दर्पण दिखाना उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का सहज उपाय है ।।।

गुरु से धन की स्थिति देखी जाती है... क्योंकि जहां नारायण है वहां लक्ष्मी का वास आवश्यक होता है ।।।

जितने भी प्रकार की पुरानी वस्तुएं हैं, पुरानी रीति रिवाज,  पुराना प्रचलन, पुराना रहन-सहन के ऊपर गुरु का प्रभाव है ।।।

एक सज्जन को देखा कि बेहद उच्च पद पर होने के बावजूद आज के अत्यधिक युग में भी रेडियो रखे हैं , और उसपर ही समाचार और गाना सुनते हैं ।।

छोटी मोटी कार्य साइकिल से किया करते हैं ।।

और फुर्सत के क्षण में अपने पैतृक निवास में खेतों के बीच खटिया में बैठकर और पुराने दोस्तों से बचपन की बात किया करते हैं ।।

आज से लगभग 50 वर्ष पीछे जाइए, और देखिए कि उसे जमाने में लोगों का खानपान क्या था, उनका रहन-सहन क्या था ..

आपके परिवार में बैठा सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बृहस्पति है उससे पूछिए कि उन ज़माने में लोग सुबह से रात अपनी दिनचर्या कैसे बिताते थे...

आज के वक्त एक सेकंड भी मोबाइल के बगैर कार्य नहीं हो सकता हम इलेक्ट्रॉनिक युग से इतनी घिर चुके हैं

उस जमाने में अंतर्देशी और पोस्टकार्ड हुआ करता था और उस माध्यम से ही हम समाचार का आदान-प्रदान करते थे ।।

लोग शारीरिक श्रम करते थे, और सेहत मजबूत रहती थी, खाने के नाम पर घर के खेत का ही गेहूं.. खेत की ही सब्जिया..और खेत की ही सरसों की तेल हुआ करते थे यानी मिलावट में शुन्यता ।।

रिश्ते भी बड़ा मजबूत हुआ करते थे क्योंकि हाथों में मोबाइल नहीं था और एक दूसरे की शिकायत वाला मामला नहीं था ।।

वे  लोगों तन और मन दोनों से स्वस्थ थे, और यही वजह उनके दीर्घायु जीवन का राज था ।।

आज के इस  कलयुगी माहौल में तमाम चीज नकली है, चाहे वह खान-पान हो चाहे रिश्ते...

 जिससे जातक बुरी तरह घिर चुका है ...और हालात यह है कि वह हर दिन अपने आप को खोता जा रहा है ।।

या यूं  कहिए गुरु की शुद्धता इस कलियुग में शून्य हो गई है ।।

शायद इस वजह से सभी सज्जनों को यह मलाल है कि गुरु की महादशा बेहद कष्टकारी व्यतीत हो रही है ।।।

जय श्री कृष्णा ...जय श्री हरि.. 

अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं

Er. Bibhash Mishra

Research Scholar and  Astrologer Consultant

+91 99559 57433  

Wednesday, 6 December 2023

शमशान से बड़ा कोई तीर्थ नहीं

मृत्यु का कारक शनि है और शमशान का कारक राहु है

ज्योतिष की दुनिया से (आराधना टाइम्स ज्योतिष डेस्क)::


शनि, राहु, केतु, जीवन, मृत्यु. सफलता और असफलता जैसे कई मुद्दों को लेकर लोग परेशान रहते हैं।  रहस्यों को इस बार भी सुलझा रहे हैं माननीय बिभाष मिश्रा। इस क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले जिज्ञासुयों के लिए उनके विचार आप तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचाने की पूरी कोशिश करते हैं। इस बार हम बात कर रहे हैं शनि,राहु और कर्म बोध की। कर्म बोध के आधार और विज्ञान के संबंध में पते की और गहरी बातें कर रहे हैं  जमशेदपुर (झारखंड)
 के प्रसिद्ध ज्योतिष विशेषज्ञ बिभाष मिश्रा।  उनका का यह विशेष लेख इस संबंध में कई नै जानकारियां। ज्योतिष में रुचि रखने वालों के लिए इस बार की चर्चा भी अत्यंत ज्ञानवर्धक होगी।         ---कार्तिका कल्याणी सिंह (समन्वय संपादक)

जमशेदपुर (झारखंड): 6 दिसंबर 2023: (बिभाष मिश्रा//(आराधना टाइम्स ज्योतिष डेस्क)::

कर्म बोध और शनि पर बिभाष मिश्र जी  विशेष चर्चा करते हुए बता रहे हैं ज्योतिष  के जहां रहस्य जो आपके जीवन  की सफलता और हालात के साथ भी जुड़े हुए। इन्हीं में छुपा है सफकता प्राप्ति का मार्ग और मन्त्र। 

आज की इस पोस्ट में शनि और मानव के द्वारा किए गए कर्मों की चर्चा है। 

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शनि आपके कर्म फल को निर्धारित करने वाला ग्रह है

इंसान जो कुछ भी आज प्राप्त कर रहा है चाहे वह सुख हो चाहे दुख वह उसके ही किए गए कर्मों का फल होता है। इस रहस्य को समझ लेना ही इस विज्ञान को समझने के रस्ते पर पहला महत्वपूर्ण कदम है। 

शायद इसी के लिए कहा गया है कि कर्म फल को भोगना पड़ता है

और कर्म फल की बात हो और चर्चा शनि की ना हो या हो ही नहीं सकता है.....!

नवग्रह में सबसे धीरे चलने वाला ग्रह शनि है, और कुंडली में चंद्रमा आपका मन है, और जब उस मन रूपी चंद्रमा पर शनि का गोचर हो तो उसे हम शनि के साढेसाती कहते हैं, क्योंकि शनि सबसे धीरे चलता है इसलिए शनि की महादशा या साढेसाती में आपका मन स्थिर, शिथिल निराश हो जाता है ..

नवग्रह में शनि को न्यायाधीश की उपाधि दी गई है

हमने देखा है अपनी ज्योतिषीय यात्रा में कई लोग जो शनि की साढ़ेसाती में जबरदस्त उन्नति में रहते हैं, और कई लोग साढेसाती ना हो तब भी दुखी रहते हैं इसे अपने किए गए पूर्व और संचित कर्म ही कहेंगे ना ॥।

जीवन एक चक्र है जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह प्रसव पीड़ा के दौरान काफी संघर्ष में उसकी उत्पत्ति होती है..  जीवन के संघर्षों का यही चक्र बेहद  है। 

उसके बाद प्रारंभिक पढ़ाई करता है, तो पढ़ाई के वक्त भी उसे काफी कुछ सीखना होता है पेंसिल पकड़ना और बाकी चीज लिखना वह भी एक संघर्ष है ...

उसके बाद शिक्षा काल में उसकी 12वीं तक की पढ़ाई होती है जिसमें हर वर्ष व प्रतिस्पर्धा करता है और एक संघर्ष हासिल करता है

तत्पश्चात उसको उच्च शिक्षा हेतु भी संघर्ष करना पड़ता है

उसके बाद नौकरी प्राप्ति हेतु उसे जबरदस्त संघर्ष या प्रतियोगिता परीक्षा में प्रतिस्पर्धा करना पड़ता है

उसके बाद उसका विवाह होता है और विवाह के बाद तो ऐसी प्रतिस्पर्धा की क्या कहना...

 फिर उसके बच्चे होते हैं... फिर बच्चे बड़े होते हैं... फिर उनका विवाह ...

और फिर एक वक्त  बुढ़ापा दस्तक देती है...!

यानी बचपन से लेकर बुढ़ापे तक वह सिर्फ संघर्ष करता है और शनि इसी संघर्ष का परिचायक है...

कहने का तात्पर्य जातक जन्म से लेकर बुढ़ापे तक शनि के ही सीसीटीवी पर रहता है...

और अपने ही कर्म फल को भोगता रहता है...

एक जातक बड़ी आसानी से पराई स्त्री को गंदी नजर से देख लेता है....  उसे यह पता भी नहीं रहता कि उसके घर में भी एक स्त्री है उसकी बहन रूपी... उसकी बेटी रुपी...

और जब यही प्रारब्ध लौटता है तो वह दुखी हो जाता है...

हर आदमी यही चाहता है कि हम परस्त्री को तो भले देख ले पर हमारी बहन और हमारी बीवी को कोई गंदी नजर से ना देखें...

पर सदैव ध्यान रखें शनि सब देखता है...

कलयुग में लोग नाना प्रकार का मांस भक्षण कर रहे हैं, पर स्त्री गमन कर रहे हैं, और तमाम प्रकार का वह काम कर रहे हैं जो उन्हें हर दिन काल के गाल में भेज रही है फिर भी वह मदमस्त हैं...

यह सभी कर्म आहिस्ता आहिस्ता संचित होते हैं, और शनि की साढ़ेसाती में रौद्र रूप धारण कर लेते हैं...

शनि यथार्थ का कारक है, वह बताता है कि तमाम प्रकार के रिश्ते सगे संबंधी सभी महज दिखावे हैं, और यह तभी है जब तक आपके पास धन पद प्रतिष्ठा है...  धन पद प्रतिष्ठा अपने पास गिरवी रखकर शनि आपको आपके ही समाज के हकीकत को दर्शाता है...

और साढेसाती या महादशा खत्म होने के बाद वह पद प्रतिष्ठा जो अपने पास गिरवी रखा था वह आपको वापस लौटा देता है ...

आपकी जीभ को करेला कतई पसंद नहीं है...जबकि वह शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है , जबकि आपके जीभ को जलेबी पसंद है जबकि वह आपके शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है ..

शनि वही नीम है... करेला है... जो आपके शरीर को कुंदन बनाता है ॥।

प्रारब्ध का बोध... कर्म का बोध शनि कराता है...

 और अपनी महादशा या साढेसाती में इतना दुख देता है की जातक के आंखों का आंसू उसे कुंदन बना देता है...

सारे रिश्ते तार-तार हो जाते हैं ...जमीन और आसमान एक हो जाते हैं वह यथार्थ शनि दिखाता है..

और यहां जब शनि की मित्रता या साथ राहु के संग हो जाए तो जरा सोचे के जातक की क्या हालत होती है ...

क्योंकि कर्म फल के मामले में शनि और राहु दोनों सगे मित्र हैं

शायद इसलिए कहा जाता है कि मृत्यु से बड़ा कोई उत्सव नहीं... और शमशान से बड़ा कोई तीर्थ नहीं ॥

यहां मृत्यु से तात्पर्य जातक के खुद की मृत्यु से है, मृत्यु के नाम से सांसारिक  लोग भय पाते हैं, जबकि साधु आनंद मनाते हैं...

उन्हें मालूम भी नहीं उनकी खुद की मृत्यु से बड़ा कोई उत्सव भी नहीं और यह परम आनंद है और इस संसार के दुष्चक्र से उसकी मुक्ति है...

और उस मृत्यु का कारक शनि है॥

और शमशान से बड़ा कोई तीर्थ नहीं॥

जो एक कड़वी सच्चाई है इसलिए जरूरत ना भी हो तो शमशान की पवित्र भूमि को महीने में एक बार स्पर्श जरूर करना चाहिए,  कि जीवन की एकमात्र वह सच्चाई है ॥

आप जीवन में करोड़पति बनेंगे... आपके पास तीन मंजिला मकान होगा... आप सुखी होंगे... इसमें संचय है, पर शमशान एक दिन जाना है यह परम सत्य है ॥

और उसे शमशान का कारक राहु है ॥।

जिस दिन पाठकगण आपने शनि और राहु को अपना दायी और बायी भुजा , और अपना अस्त्र और शास्त्र मान लिया , मानो जीवन में आपने परम विजय और दीर्घायु जीवन को प्राप्त कर लिया॥।

Er. Bibhash Mishra

Research Scholar and Astrologer Consultant

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Saturday, 18 November 2023

राहू बना सकता है रंक से राजा

18 नवंबर 2023 सुबह 08:25 बजे व्हाट्सएप 

राहू की माया और रहस्यों की चर्चा कर रहे हैं बिभाष मिश्रा 

जमशेदपुर: (झारखंड): 18 नवंबर 2023: (आराधना टाइम्स ज्योतिष डेस्क)::

राहु, केतु, साढ़ेसाती  जैसे कई मुद्दों को लेकर लोग परेशान हैं। आख़िर ये पूरा मामला क्या है? इन मुद्दों का वैज्ञानिक पहलू एवं समुचित समाधान कैसे संभव है? कुछ लोग इन बातों पर खुलेआम विश्वास करते हैं तो कुछ लोग छुपकर।इस क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले जिज्ञासुयों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण यह क्षेत्र एक बड़ा उद्योग बन गया है। हम आप तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे। इस प्रायोजन के लिए इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से नियमित रूप से परामर्श लिया जाता है। इस बार हम बात कर रहे हैं राहु की. राहु को लेकर लोगों के मन में बहुत डर, भ्रम और भ्रांति है जबकि वास्तविकता के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस बार हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं झारखंड के प्रसिद्ध ज्योतिष विशेषज्ञ बिभाष मिश्रा का एक विशेष लेख जिसमें राहु के बारे में कई गलतफहमियां दूर की गई हैं। ज्योतिष में रुचि रखने वालों के लिए राहू की अत्यंत सार्थक व्याख्या अत्यंत ज्ञानवर्धक होगी।                                                                                                                                       -कार्तिका कल्याणी सिंह (समन्वय संपादक)


राहु की उड़ान कितनी महत्वपूर्ण है इसका कुछ कुछ अनुमान शायद आपको यह पोस्ट पढ़ कर हो सके। 

आज की इस पोस्ट में हम राहु ग्रह के गति के बारे में चर्चा करेंगे

इसका मिसाल को हम ऐसे समझते हैं

मान के चलिए आपके पास डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ कार है सारा फंक्शन ऑटोमेटिक है और तमाम सुख सुविधा से लैस...

इसके साथ-साथ आपके पास एक प्राइवेट प्लेन भी है.. सीट फटी हुई है ,सीटों में खटमल लगी है , जेट का पेंट भी उखड़ा हुआ है... यानी पूरी पुरानी अवस्था में है ...सिर्फ इंजन ही सही से काम करता है ॥

अब यह बताइए कि गंतव्य तक पहुंचना हो तो डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ काम करेगी या पुरानी प्राइवेट प्लेन ॥

मर्सिडीज़ कितनी भी महंगी हो, पर चलना उसे सड़क में ही है....

और सड़क पर चलने के क्रम में अगर ट्रैफिक जाम हो जाए तो मर्सिडीज़ आसमान में उड़ नहीं सकती ...

 या अगर गड्ढे और उबर खाबड़ आए तो मर्सिडीज़ का टायर कितना भी अच्छे कंपनी का हो वह जर्किंग करेगा ही...

और अगर जबरदस्त ट्रैफिक हो तो वही खड़ी रहेगी आपकी डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़...

आप कितना भी रो ले ..चिल्ला ले.. कि आपके पास डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ है.. आपको पहले जाने दिया जाए .. 

फिर भी कोई सुनवाई नहीं.. और ट्रैफिक जाम में आपके ठीक आगे एक ठेला या ऑटो रिक्शा ही क्यों न खड़ा हो आपको कतार में उसके पीछे ही खड़ा रहना पड़ेगा ॥।

क्योंकि मर्सिडीज़ कितनी भी महंगी क्यों ना हो चलना उसे सड़क पर ही है ...

और हवाई जहाज कितना भी पुराना क्यों न हो उसे उड़ना आसमान में है ....

जहां ना तो कोई ट्रैफिक है... ना उबड़-खाबड़ भरी सड़क...

आसमान को चीरता हुआ अकेला बेताज बादशाह...

अब उपरोक्त उदाहरण को ग्रह से समझने की कोशिश करते हैं

आपके पास कोई ग्रह कितना ही क्यों ना बली हो चाहे वह शुक्र हो चाहे गुरु हो चाहे बुद्ध हो.... और उसकी महादशा चल रही हो तो वह आपके पास शोभा रूपी डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ ही है...

जो केवल शोभा रूपी खूबसूरत है... पर चलेगी वह सड़क पर और एक बार ट्रैफिक जाम लग गया तो उसे वहां रुकना पड़ेगा...

यानी उसे बड़े-बड़े ग्रहों की अपनी एक सीमा है...

और आपकी कुंडली में पड़ा एकांत में राहु... कितनी भी फटे हालत में क्यों ना हो पर याद रखें उसे उड़ना आसमान में है...

लेखक जानेमाने ज्योतिष विशेषज्ञ बिभाष मिश्रा
राहु को न ट्रैफिक की चिंता है ना कोई सड़कों पर भीड़ की...

उसे तो आजाद पंछी की तरह खुले आसमान को चीरता हुआ आपकी मंजिल को पहुंचाना है...

शायद इसलिए कहा जाता है कि बाकी के ग्रह अपनी महादशा में जो काम करने की सोचेंगे... तब तक राहु उसे अपनी महादशा में करके बैठ चुका रहेगा। ॥।

हमने बड़े-बड़े प्रसिद्ध संगीतकार, क्रिकेटर ...सरकारी पद पर उच्च अधिकारी की कुंडलिया देखी है... सभी ने अपनी सफलता राहु की महादशा में ही हासिल की है ॥।

वह काम जो आपकी सोच से पड़े हैं वह असंभव सा काम राहु है...

एक छैनी और एक हथौड़ी लेकर 22 साल तक बड़े पहाड़ को तोड़कर रास्ता बना देना राहु है...

पेड़ से सेब का जमीन पर गिरना... और उसे पर शोध करके गुरुत्वाकर्षण की खोज करना राहु है ॥।

ऐसी सुख जिसकी आपने कल्पना भी ना कि हो राहु है...

ग्लैमर से भरा जबरदस्त लाइफस्टाइल बड़े-बड़े क्रिकेटरों का लाइफस्टाइल 100% राहु है ॥।

एक क्रिकेटर मंगल की महादशा में क्रिकेट खेलना शुरू करता है मंगल खेल का कारक है

राहु की 18 वर्ष की महादशा में वह चरम स्थिति पर होता है राहु प्रसिद्धि और ग्लैमर का कारक है

राहु की महादशा के अंत चरण में वह रिटायरमेंट लेता है

चंद वर्षों में वह कोच और प्रशिक्षण पद पर नियुक्त होता है जब उसकी गुरु की महादशा चल रही होती है गुरु सभी प्रकार के प्रशिक्षण का कोचिंग का कारक है ॥।

कभी-कभी उसे राजनीति का भी अवसर प्राप्त होता है और वह बदनामी , हार या बाकी चीजों को भी उसे झेलना पड़ता है जब उसकी शनि की महादशा चल रही होती है ॥

इस प्रकार भिन्न-भिन्न महादशा में अलग-अलग किरदार के रूप में वह अपने किरदार को बखूबी से निभाता है

पर तमाम किरदारों में जो  उसका स्वर्णिम युग रहा होता है.. वह राहु की महादशा होती है... यानी राहु व प्लेटफार्म सेट करता है जिसका फायदा उसे बाकी की महादशा में मिलता है

आपके जीवन में वह घटना जो अचानक घटती है.. चाहे वह अच्छी हो चाहे बुरी हो... वह घटना जो आपके जीवन को पूरी तरीका से पलट कर रख दे, का कारक राहु है ॥।

अब बात यह आती है कि राहु की राजयोग कारक की स्थिति सबसे अच्छी कब बनती है

जब आपकी कुंडली में राहु तृतीय भाव में हो या आपकी कुंडली में राहु एकादश भाव में हो...

और राहु की सबसे राजयोगी स्थिति तब होती है जब राहु अपने खुद के नक्षत्र आर्द्रा.. शतभिषा .. स्वाति का बैठा हो 

तीनों नक्षत्र ही राहु के अपने हैं ...पर इसमें शतभिषा में तो कमाल का प्रभाव दिखाता है ॥।

तीनों नक्षत्र में शतभिषा उसकी धर्मपत्नी के स्वरूप है, आद्रा उसका पुत्र जबकि स्वाति उसकी पुत्री स्वरूप है...

जाहिर  है कोई भोगी व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ बेहद खुश रहता है... इसलिए राहु भी अगर शतभिषा का हो तो कमाल का प्रभाव दिखाता है..

यह बहुत मायने में नहीं है कि राहु किस राशि में बैठा हो या बेहद महत्वपूर्ण है कि राहु किस नक्षत्र में बैठा है...

अगर इसका संबंध लग्नेश के नक्षत्र के साथ हो... धनेश और लाभेश के नक्षत्र के साथ हो... पंचमेश और भाग्येश के नक्षत्र के साथ हो...

या कुंडली के तृतीय भाव या एकादश भाव में बैठा हो..

 साथ में शतभिषा आद्रा या स्वाति नक्षत्र में बैठ जाए तब जरा देखें अपनी महादशा में यह क्या करके दिखाता है ॥।

राहु धैर्य के परिचय का कारक है..

सिर्फ दांत में दांत दबा के धैर्य के साथ टिके रहे... फिर देखे राहू  अपनी महादशा में इतिहास रचा देगा ॥।

Er. Bibhash Mishra 

Research Scholar

Astrologer Consultant