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Wednesday, 24 April 2024

.... उस समय स्वयं के साथ युद्ध लड़ने जैसी हालत होती है

भ्रम की धुंध में दुविधा और किंकर्तव्यविमूढ़ता जैसी स्थिति बढ़ जाती है 


इस बार लुधियाना से ज्योतिष चर्चा: 23 अप्रैल 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

बहुत बार कहते कहलाते बुद्धिमान लोग भी भ्रम में पड़ जाते हैं। उन्हें दुविधा घेर लेती है। वे अपने गुणों के विपरीत चलते नज़र आने लगते हैं।  हम सभी न तो अर्जुन हैं, न ही हम महाभारत जैसा कोई  बहुत बड़ा धर्मयुद्ध  लड़ रहे हैं और न ही हमारे पास भगवान कृष्ण हैं जो हमें हर कदम पर हमें सही मार्ग दिखा सकें। आम तौर पर हमारी जंग हमारे दायरों और स्वार्थों तक सीमित रहती है। अपने ही मतलब और अपनी ही मजबूरी में सिमटी हुई। वह बड़ी हो कर कभी धर्मयुद्ध नहीं बन पाती। 

इसलिए हमें सहायता या मार्गदर्शन देने भगवान कृष्ण का  विराट रूप भी कहां नसीब होता है! हमारे जीवन के संघर्षों में कौन कौन निभाता है अपनी अपनी भूमिका? कयूं हम भ्रम का शिकार हो कर हार जाते हैं बहुत बार जीती हुई जंग को भी? बनी बनाई बात क्यूं हाथ से निकल जाती है हर बार और समझ भी नहीं आता कि ऐसा क्यूं हुआ? कई बार ऐसा बार बार भी होने लगता है। जब जाग खुलती है और होश आता है तो उस गीत के बोलों की तरह महसूस होने लगता है जिसे कभी जनाब गोपाल दास नीरज जी ने लिखा था नई उम्र की नई फसल नाम की फिल्म के लिए जो 1965 में आई थी। संगीत तैयार किया था जनाब रौशन साहिब ने। गीत के बोल हैं:

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से

लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से

और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे।

कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे। 

यह गीत वास्तव में हम में से  बहुत से लोगों की ज़िंदगी की झलक दिखलाता है। सपने देखना, सपने टूट जाना, कोशिशों का नाकाम हो जाना और सारी की सारी उम्र रेत की तरह हाथ में से निकल जाना। फिर समझ आते हैं इस गीत के बोल--आह तो निकल सकी  न पर उम्र निकल गई! हममें से बहुत से लोगों को भागदौड़ या तो बेकार सी साबित होने लगती है या फिर जिसे हम उपलब्धि समझने लगते हैं वह भी निरथर्क सी लगने लगती है। 

दूसरी तरफ ब्रह्मांड अपने नियमों के मुताबिक चलता रहता है। ग्रह भी अपने नियमों और रफ़्तार से चल रहे हैं। विज्ञान निरंतर इस सम्बन्ध में नई नई खोज करने में जुटा हुआ है। बहुत जल्द ज्योतिष और तन्त्र के वैज्ञानिक पह्लुयों पर चर्चा जरूरी समझी जाएगी। इस तरह की चर्चा के आयोजन में शामिल हो पाना गर्व की बात महसूस की जाएगी। विशेष शुल्क और विशेष समय निकाल कर इस ज्ञान विज्ञान पर बातें हुआ करेंगी।  

ज्योतिष का अध्यन करते हुए किसी किसी के जीवन में एक स्थिति वह भी आती है जब  गुरु राहू चंडाल दोष सामने आता है। यह दोष ज्योतिष और जीवन में कैसे और कितना प्रभावी होता है इस पर बहुत कुछ कहा सुना जा सकता है। इन्सान में उसकी सर्वोच्चता और नीचता स्वयंमेव आमने सामने आ  जाती हैं। उस समय होता है अंतर्मन की अच्छाई और बुराई में संघर्ष। कौन जीत जाए इसका फैसला कठिन होता है लेकिन इन्सान इसे खुद भी कर सकता है। बस थोड़े से उपाय, थोडा सा ध्यान और थोड़ी सी सावधानियां और इन्सान जीत सकता है सारी बाज़ी। 

गौरतलब है कि गुरु राहु चंडाल दोष का ज्योतिष और जीवन पर गहन प्रभाव होता ही है। गुरु राहु चंडाल दोष, जिसे गुरु चंडाल योग भी कहा जाता है, ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह तब बनता है जब गुरु और राहु कुंडली में 6, 8, या 12वें भाव में एक साथ होते हैं। इस तरह की स्थितियां कैसे कैसे क्यूं बनती हैं इस पर कभी अलग से भी चर्चा की जाएगी। 

फिलहाल इतना ही कि इस दोष का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और अन्य योगों पर निर्भर भी करता है और प्रभावी भी होता है। जब जब ऐसी स्थिति बनती है तब तब इसके संभावित प्रभाव बहुत सूक्ष्म भी हो सकते हैं बड़े भी। पीड़ित व्यक्ति के नकारात्मक विचारों और भ्रम में वृद्धि होने लगती है। सही गलत की पहचान भी आसान नहीं रहती। हर अच्छी और सकारात्मक बात में भी नेगेटिविटी नज़र आने लगती है। 

इसके साथ ही विभिन्न किस्म की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी होने लगती हैं। जिस्म में कई तरह के दर्द भी उठने लगते हैं। कामकाज के लिए न मन करता है और न ही तन चुस्त रहता है। डाक्टर के पास जाओ तो वहां से कई गंभीर चिंताओं भरी रिपोर्ट मिलने लगती है। सब कुछ बड़ी तेजी से घटित होने लगता है।

स्वास्थ्य के साथ साथ व्यापार में भी बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। कामकाज में रुकावटें तेज़ी से सिर उठाने लगती हैं। मंदीऔर घाटे वाले हालात दिखने लगते हैं। इन्वेस्टमेंट करने पर ऐसा लगता है जैसे सब मिटटी हुआ जा रहा है। अपने ही स्टाफ पर भरोसा नहीं रहता।

इन सभी के साथ शत्रुओं से परेशानी भी बढने लगती है। धोखा, फरेब, गद्दारी जैसी आशंकाएं ज़ोर पकड़ने लगती हैं।  ऐसे नाज़ुक हालात के चलते मानसिक अशांति और डिप्रेशन में वृद्धि होने लगती है। तन मन में बने सुर भंग होने लगते हैं। यूं लगता है जैसे असुर-भावना बढ़ गई है।

इतना कुछ होने पर पारिवारिक कलह भी बढने लगती है। परिवार में आपसी प्रेम और सद्भाव बुरी तरह से टूटने लगता है। यूं लगने लगता है कि किसी की नज़र लग गई हो या फिर किसी ने कुछ कर करा दिया हो।

कैसे मिले इस तरह के हालात से छुटकारा इसकी चर्चा हम किसी अलग पोस्मेंट  बहुत जल्द करेंगे जिसका लिंक यहां भी प्रेषित किया जाएगा। 

Monday, 1 April 2024

गुरु एक शुभ ग्रह है-सात्विक है, साधु है जबकि राहु राक्षसी प्रवृत्ति का ग्रह है

Monday 29th March 2024 08:18 AM

 गुरु राहु चांडाल दोष पर बिल्कुल नवीनतम रिसर्च जिस से आपको मिलेंगे बिलकुल नए तथ्य 

 ज्योतिष की दुनिया से: 31 मार्च 2023: (बिभाष मिश्रा//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::


कल एक बहन ने व्हाट्सएप पर मुझसे संपर्क किया

उनका कहना था कि किसी ज्योतिष ने यह कहा है कि उनके पति की कुंडली में गुरु राहु का चांडाल दोष है ।।।

अब यह सुनकर वह इतना भयभीत हो गई कि अपने पति में ही चांडाल गुण समझने लगी ।।

पर हकीकत में यह जब उन्हें समझाया की चांडाल दोष क्या होता है, और कितना प्रभावित होता है तो वह इतनी खुश हुई कि मुझे सलाह दी कि सर यह पोस्ट फेसबुक पर जरूर कीजिए ताकि मुझ जैसे कितने भ्रमित लोगों का कल्याण हो...

सबके मन का भी भ्रम दूर हो सके... तो आइए चांडाल दोष के concept को समझते हैं ..

गुरु एक शुभ ग्रह है गुरु सात्विक है, साधु है, और राहु एक राक्षसी प्रवृत्ति का ग्रह है, तामसिक ग्रह है ..

 गुरु सात्विक है, राहु मांस मदिरा यह सब पसंद करने वाला है ।।

अब आप ही सोचो जब जब एक सात्विक रूपी गुरु के ऊपर एक मांस मदिरा चरित्रहीन रूपी राहु का प्रभाव आए तो गुरु का  चांडाल के साथ होना ही गुरु चांडाल दोष कहलाता है ।।

उदाहरण के तौर पर जब भी कोई संत को आप देखते हैं तो आपके मन में उनके प्रति 1 दैविय भावना उत्पन्न होती है, पर जब आपको यह समझ में आए या दिखे की वह संत कहीं शराब का सेवन कर रहे हैं, मांस का सेवन कर रहे हैं, या उनके चरित्र में थोड़ी भी खराबी है तो आपके मन में उनके प्रति जो दिव्य भावना है वह एकदम से टूट जाएगी ।।   

वह गुरु चांडाल स्वरूपी होकर इसी को चांडाल दोष कहते हैं ।।

मतलब कि गुरु के ऊपर जब भी अधर्म और चांडाल का साया हो तो इसे ही चांडाल दोष कहते हैं ।।

यही कारण है कि कुंडली में कहीं पर भी गुरु के साथ राहु आ जाए तो यहां पर गुरु अपने आप को असहज महसूस करता है और वह गुरु की पवित्रता कम हो जाती है जिसके कारण से हम उसको चांडाल दोष कहते हैं ।।।

यह तो एक उदाहरण हुआ कि गुरु कितना कमजोर है, अगर गुरु के अंदर की शक्ति कमजोर है तो हो सके गुरु किसी सुंदर स्त्री को देखकर अपना ब्रह्मचर्य को खराब कर ले ।।

पर वही अगर वह गुरु बहुत मजबूत हुआ तो उसी स्त्री को अपनी बहन या बेटी बना लेगा या उसी चांडाल को अपना शिष्य बना लेगा ।।।

उदाहरण के तौर पर एक कहानी सुनते हैं

बचपन में एक कहानी हम पढ़ते थे तोड़ो नहीं जोड़ो ...

अंगुलिमाल नाम का एक बहुत बड़ा डाकू था। वह लोगों को मारकर उनकी उंगलियां काट लेता था और उनकी माला बनाकर पहनता था। इसी कारण उसका यह नाम पड़ा था। मुसाफिरों को लूट लेना उनकी जान ले लेना, उसके बाएं हाथ का खेल था। लोग उससे बहुत डरते थे। उसका नाम सुनते ही उनके प्राण सूख जाते थे।  

संयोग से एक बार भगवान बुद्ध उपदेश देते हुए उधर आ निकले। लोगों ने उनसे प्रार्थना की कि वे वहां से चले जाएं। अंगुलिमाल ऐसा डाकू है, जो किसी के भी आगे नहीं झुकता। 

बुद्ध ने लोगों की बात सुनी, पर उन्होंने अपना इरादा नहीं बदला| वे बेधड़क वन में घूमने लगे। 

जब अंगुलिमाल को इसका पता चला तो वह झुंझलाकर बुद्ध के पास आया। वह उन्हें मार डालना चाहता था, लेकिन जब उसने बुद्ध को मुस्कराकर प्यार से उसका स्वागत करते देखा तो उसका पत्थर का दिल कुछ मुलायम हो गया। 

बुद्ध ने उससे कहा-"सुनो भाई, सामने के पेड़ से चार पत्ते तोड़ लाओगे?"

 अंगुलिमाल के लिए यह क्या मुश्किल था! वह दौड़कर गया और जरा-सी देर में पत्ते तोड़कर ले आया। 

 बुद्ध ने कहा -"अब एक काम और करो| जहां से इन पत्तों को तोड़कर लाए हो, वहीं इन्हें लगा आओ।"    

 अंगुलिमाल बोला -"यह कैसे हो सकता है?"

 बुद्ध ने कहा-"भैया! जब तुम जानते हो कि टूटा जुड़ता नहीं तो फिर तोड़ने का काम क्यों करते हो?"

 इतना सुनते ही अंगुलिमाल को बोध हो गया और वह उस दिन से अपना धंधा छोड़कर बुद्ध की शरण में आ गया|

अब कहानी वही है पर यहां पर गुरु बलवान है

कहने का मतलब यहां पर कुंडली में अगर गुरु भगवान बुध का रूप धारण किए हो तो राहु रुपी उंगलीमाल भी गुरु रूपी गौतम बुध का शिष्य बन जाएगा ।।

और गुरु चांडाल दोष कभी नहीं लगेगा ।।

कहने का तात्पर्य कुंडली में जब भी गुरु धनु राशि, मीन राशि या कर्क राशि का बैठा हो, तो वहां पर आपकी कुंडली में उपस्थित गुरु भगवान बुध की तरह और स्वामी विवेकानंद की तरह होगा।।

और ऐसी स्थिति में अगर राहु गुरु के साथ युति भी करे तो भी राहु रूपी उंगलीमाल, उच्च के यानी धनु ,मीन ,कर्क के वृहस्पति रूपी गौतम बुध का शिष्य बन जाएगा ...

और कुंडली में वह आपका चांडाल दोष गुरु राहु की युति होने के बावजूद भी फलित नहीं होगा ।।

एक महिला ने स्वामी विवेकानंद से कहा मुझे आप से ही विवाह करना है ताकि आपका जैसा ही तेजस्वी पुत्र मुझे प्राप्त हो ।।

स्वामी विवेकानंद जी का जवाब सुनिए ..

उन्होंने कहा बहन मेरे द्वारा आप एक पुत्र की उत्पत्ति करेंगे, अब पुत्र होगा कि नहीं होगा क्या पता ..बाद की बात है ।।

आप मुझे ही अपना पुत्र समझ लें और आज से मुझे ही अपना पुत्र माने ।।

अब यहां स्वामी विवेकानंद रुपी उच्च के गुरु ने स्त्री को क्या जवाब दिया ..

मतलब स्वामी विवेकानंद रूपी गुरु के पास भी चांडाल रूपी ऑफर मिला जबकि यहां चांडाल दोष संपन्न नहीं हुआ ।।

अगर गुरु नीच का होता मकर राशि का, और यह स्वामी विवेकानंद के जगह कोई सामान्य गुरु होते,  जिन्हें यह ऑफर अगर कोई महिला देती तो शायद यह ऑफर गुरु स्वीकार कर लेते और यहीं पर गुरु राहु का चांडाल दोष संपन्न होता ।।।

कहने का मतलब है सिर्फ कुंडली में गुरु और राहु की युति देख लेना और यह कह देना कि चांडाल दोष है यह उचित नहीं ।।

हां अगर गुरू कुंडली में मकर राशि का हो अस्त हो कमजोर हो और वहां पर राहु की युति हो तो यहां पर चांडाल दोष पूर्ण फलित होगा ।।

और गुरु भी चांडाल के रूप रंग में आकर शराब मांस मदिरा और चरित्र को खराब कर लेंगे ।।

पर वही अगर गुरु बलवान हो तो वह गुरु गौतम बुद्ध और स्वामी विवेकानंद की तरह अडिग रहेंगे, और अपने पास आने वाले चांडाल रुपी राहु को भी अपना शिष्य बना लेंगे और यहां चांडाल दोष फलित नहीं होगा ।।।

महिला के पति की कुंडली में मीन का गुरु, राहु के साथ है, जब हमने यह कांसेप्ट समझाया तो इतनी खुश हुई कि क्या कहना..

 कल की कहानी हमने आज आपलोगो के साथ शेयर किया ताकि आप सब लोगो का कांसेप्ट क्लियर हो सके ।।

और हमारे अथक रिसर्च का लाभ उठा सकें

Er. Bibhash Mishra-Research Scholar and Astrologer Consultant

+91 99559 57433

Saturday, 18 November 2023

राहू बना सकता है रंक से राजा

18 नवंबर 2023 सुबह 08:25 बजे व्हाट्सएप 

राहू की माया और रहस्यों की चर्चा कर रहे हैं बिभाष मिश्रा 

जमशेदपुर: (झारखंड): 18 नवंबर 2023: (आराधना टाइम्स ज्योतिष डेस्क)::

राहु, केतु, साढ़ेसाती  जैसे कई मुद्दों को लेकर लोग परेशान हैं। आख़िर ये पूरा मामला क्या है? इन मुद्दों का वैज्ञानिक पहलू एवं समुचित समाधान कैसे संभव है? कुछ लोग इन बातों पर खुलेआम विश्वास करते हैं तो कुछ लोग छुपकर।इस क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले जिज्ञासुयों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण यह क्षेत्र एक बड़ा उद्योग बन गया है। हम आप तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे। इस प्रायोजन के लिए इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से नियमित रूप से परामर्श लिया जाता है। इस बार हम बात कर रहे हैं राहु की. राहु को लेकर लोगों के मन में बहुत डर, भ्रम और भ्रांति है जबकि वास्तविकता के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस बार हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं झारखंड के प्रसिद्ध ज्योतिष विशेषज्ञ बिभाष मिश्रा का एक विशेष लेख जिसमें राहु के बारे में कई गलतफहमियां दूर की गई हैं। ज्योतिष में रुचि रखने वालों के लिए राहू की अत्यंत सार्थक व्याख्या अत्यंत ज्ञानवर्धक होगी।                                                                                                                                       -कार्तिका कल्याणी सिंह (समन्वय संपादक)


राहु की उड़ान कितनी महत्वपूर्ण है इसका कुछ कुछ अनुमान शायद आपको यह पोस्ट पढ़ कर हो सके। 

आज की इस पोस्ट में हम राहु ग्रह के गति के बारे में चर्चा करेंगे

इसका मिसाल को हम ऐसे समझते हैं

मान के चलिए आपके पास डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ कार है सारा फंक्शन ऑटोमेटिक है और तमाम सुख सुविधा से लैस...

इसके साथ-साथ आपके पास एक प्राइवेट प्लेन भी है.. सीट फटी हुई है ,सीटों में खटमल लगी है , जेट का पेंट भी उखड़ा हुआ है... यानी पूरी पुरानी अवस्था में है ...सिर्फ इंजन ही सही से काम करता है ॥

अब यह बताइए कि गंतव्य तक पहुंचना हो तो डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ काम करेगी या पुरानी प्राइवेट प्लेन ॥

मर्सिडीज़ कितनी भी महंगी हो, पर चलना उसे सड़क में ही है....

और सड़क पर चलने के क्रम में अगर ट्रैफिक जाम हो जाए तो मर्सिडीज़ आसमान में उड़ नहीं सकती ...

 या अगर गड्ढे और उबर खाबड़ आए तो मर्सिडीज़ का टायर कितना भी अच्छे कंपनी का हो वह जर्किंग करेगा ही...

और अगर जबरदस्त ट्रैफिक हो तो वही खड़ी रहेगी आपकी डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़...

आप कितना भी रो ले ..चिल्ला ले.. कि आपके पास डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ है.. आपको पहले जाने दिया जाए .. 

फिर भी कोई सुनवाई नहीं.. और ट्रैफिक जाम में आपके ठीक आगे एक ठेला या ऑटो रिक्शा ही क्यों न खड़ा हो आपको कतार में उसके पीछे ही खड़ा रहना पड़ेगा ॥।

क्योंकि मर्सिडीज़ कितनी भी महंगी क्यों ना हो चलना उसे सड़क पर ही है ...

और हवाई जहाज कितना भी पुराना क्यों न हो उसे उड़ना आसमान में है ....

जहां ना तो कोई ट्रैफिक है... ना उबड़-खाबड़ भरी सड़क...

आसमान को चीरता हुआ अकेला बेताज बादशाह...

अब उपरोक्त उदाहरण को ग्रह से समझने की कोशिश करते हैं

आपके पास कोई ग्रह कितना ही क्यों ना बली हो चाहे वह शुक्र हो चाहे गुरु हो चाहे बुद्ध हो.... और उसकी महादशा चल रही हो तो वह आपके पास शोभा रूपी डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज़ ही है...

जो केवल शोभा रूपी खूबसूरत है... पर चलेगी वह सड़क पर और एक बार ट्रैफिक जाम लग गया तो उसे वहां रुकना पड़ेगा...

यानी उसे बड़े-बड़े ग्रहों की अपनी एक सीमा है...

और आपकी कुंडली में पड़ा एकांत में राहु... कितनी भी फटे हालत में क्यों ना हो पर याद रखें उसे उड़ना आसमान में है...

लेखक जानेमाने ज्योतिष विशेषज्ञ बिभाष मिश्रा
राहु को न ट्रैफिक की चिंता है ना कोई सड़कों पर भीड़ की...

उसे तो आजाद पंछी की तरह खुले आसमान को चीरता हुआ आपकी मंजिल को पहुंचाना है...

शायद इसलिए कहा जाता है कि बाकी के ग्रह अपनी महादशा में जो काम करने की सोचेंगे... तब तक राहु उसे अपनी महादशा में करके बैठ चुका रहेगा। ॥।

हमने बड़े-बड़े प्रसिद्ध संगीतकार, क्रिकेटर ...सरकारी पद पर उच्च अधिकारी की कुंडलिया देखी है... सभी ने अपनी सफलता राहु की महादशा में ही हासिल की है ॥।

वह काम जो आपकी सोच से पड़े हैं वह असंभव सा काम राहु है...

एक छैनी और एक हथौड़ी लेकर 22 साल तक बड़े पहाड़ को तोड़कर रास्ता बना देना राहु है...

पेड़ से सेब का जमीन पर गिरना... और उसे पर शोध करके गुरुत्वाकर्षण की खोज करना राहु है ॥।

ऐसी सुख जिसकी आपने कल्पना भी ना कि हो राहु है...

ग्लैमर से भरा जबरदस्त लाइफस्टाइल बड़े-बड़े क्रिकेटरों का लाइफस्टाइल 100% राहु है ॥।

एक क्रिकेटर मंगल की महादशा में क्रिकेट खेलना शुरू करता है मंगल खेल का कारक है

राहु की 18 वर्ष की महादशा में वह चरम स्थिति पर होता है राहु प्रसिद्धि और ग्लैमर का कारक है

राहु की महादशा के अंत चरण में वह रिटायरमेंट लेता है

चंद वर्षों में वह कोच और प्रशिक्षण पद पर नियुक्त होता है जब उसकी गुरु की महादशा चल रही होती है गुरु सभी प्रकार के प्रशिक्षण का कोचिंग का कारक है ॥।

कभी-कभी उसे राजनीति का भी अवसर प्राप्त होता है और वह बदनामी , हार या बाकी चीजों को भी उसे झेलना पड़ता है जब उसकी शनि की महादशा चल रही होती है ॥

इस प्रकार भिन्न-भिन्न महादशा में अलग-अलग किरदार के रूप में वह अपने किरदार को बखूबी से निभाता है

पर तमाम किरदारों में जो  उसका स्वर्णिम युग रहा होता है.. वह राहु की महादशा होती है... यानी राहु व प्लेटफार्म सेट करता है जिसका फायदा उसे बाकी की महादशा में मिलता है

आपके जीवन में वह घटना जो अचानक घटती है.. चाहे वह अच्छी हो चाहे बुरी हो... वह घटना जो आपके जीवन को पूरी तरीका से पलट कर रख दे, का कारक राहु है ॥।

अब बात यह आती है कि राहु की राजयोग कारक की स्थिति सबसे अच्छी कब बनती है

जब आपकी कुंडली में राहु तृतीय भाव में हो या आपकी कुंडली में राहु एकादश भाव में हो...

और राहु की सबसे राजयोगी स्थिति तब होती है जब राहु अपने खुद के नक्षत्र आर्द्रा.. शतभिषा .. स्वाति का बैठा हो 

तीनों नक्षत्र ही राहु के अपने हैं ...पर इसमें शतभिषा में तो कमाल का प्रभाव दिखाता है ॥।

तीनों नक्षत्र में शतभिषा उसकी धर्मपत्नी के स्वरूप है, आद्रा उसका पुत्र जबकि स्वाति उसकी पुत्री स्वरूप है...

जाहिर  है कोई भोगी व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ बेहद खुश रहता है... इसलिए राहु भी अगर शतभिषा का हो तो कमाल का प्रभाव दिखाता है..

यह बहुत मायने में नहीं है कि राहु किस राशि में बैठा हो या बेहद महत्वपूर्ण है कि राहु किस नक्षत्र में बैठा है...

अगर इसका संबंध लग्नेश के नक्षत्र के साथ हो... धनेश और लाभेश के नक्षत्र के साथ हो... पंचमेश और भाग्येश के नक्षत्र के साथ हो...

या कुंडली के तृतीय भाव या एकादश भाव में बैठा हो..

 साथ में शतभिषा आद्रा या स्वाति नक्षत्र में बैठ जाए तब जरा देखें अपनी महादशा में यह क्या करके दिखाता है ॥।

राहु धैर्य के परिचय का कारक है..

सिर्फ दांत में दांत दबा के धैर्य के साथ टिके रहे... फिर देखे राहू  अपनी महादशा में इतिहास रचा देगा ॥।

Er. Bibhash Mishra 

Research Scholar

Astrologer Consultant