Tuesday, 7 July 2020

गुरुकृपा से बन जाती है हर एक बिगड़ी बात

 जो भाग्य में नहीं लिखा होता वह भी मिलने लगता है  
इस प्रतीकात्मक तस्वीर को अभिनव गोस्वामी ने 11 नवम्बर 2015 को सुबह 11:16 पर क्लिक किया
अध्यात्मिक दुनिया: 07 जुलाई 2020: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
सत्य विपरीत रूपों में भी सत्य ही रहता है। कभी कभीं उसके विपरीत ध्रुव या बदले हुए रूप देख कर कन्फ्यूज़न होने लगता है कि आखिर असली सच कौन सा है? लेकिन सच तो सच ही रहता है। उस पर रंग या हालात का असर महसूस होने भी लगे तो भी वे सभी प्रभाव अल्प काल के ही होते हैं। 
यही कहानी जिंदगी और किस्मत के सत्यों पर भी लागू होती है। भले हीं आपके भाग्य में कुछ नहीं लिखा हो पर अगर गुरु की कृपा आप पर हो जाए तो आप वो भी पा सकते है जो आपके भाग्य में नही लिखा था  या नहीं लिखा हैं।
इस प्रतीकात्मक तस्वीर को Khirod Behera ने 07 जून 2020 को
बाद दोपहर 1:00 बजे क्लिक किया 
शायद एक कहानी से आपको यह बात सुगमता से समझ में आ सके। काशी नगर के एक धनी सेठ थे जिनके कोई संतान नही थी। बड़े-बड़े विद्धान ज्योतिषियों से सलाह-मशवरा करने के बाद भी उन्हें कोई लाभ नही मिला। सभी उपायों से निराश होने के बाद सेठ जी को किसी ने सलाह दी कि आप गोस्वामी जी के पास जाइये वे रोज़ रामायण पढ़ते हैं और बहुत ही श्रद्धा और आस्था से पढ़ते हैं। जब वह रामायण पढ़ते हैं तो कहा जाता है कि तब भगवान राम स्वयं उस कथा को सुनने आते हैं। इसलिये उनसे कहना कि भगवान से पूछें कि आपके संतान कब होगी? सेठजी गोस्वामी जी के पास जाते हैं। अपनी समस्या के बारे में भगवान से बात करने को कहते हैं। कथा समाप्त होने के बाद गोस्वामी जी भगवान से पूछते है कि प्रभु वो सेठजी आये थे जो अपनी संतान के बारे में पूछ रहे थे। तब भगवान राम ने कहा कि गोस्वामी जी उन्होंने पिछले जन्मों में अपनी संतान को बहुत दुःख दिए हैं। इस कारण उनके तो सात जन्मो तक संतान नही लिखी हुई हैं। दूसरे दिन गोस्वामी जी, सेठ जी को सारी बात बता देते हैं। सेठ जी मायूस होकर ईश्वर की मर्जी मानकर चले जाते है।
थोड़े दिनों बाद सेठजी के घर एक संत आते हैं और वो भिक्षा मांगते हुए कहते है कि भिक्षा दो फिर जो मांगोगे वो मिलेगा। तब सेठजी की पत्नी संत से बोलती हैं कि गुरूजी मेरे संतान नही हैं तो संत बोले तू एक रोटी देगी तो तेरे एक संतान जरुर होगी। व्यापारी की पत्नी संत जी को दो रोटी दे देती है। उससे प्रसन्न होकर संत जी ये कहकर चले जाते हैं कि जाओ तुम्हारे दो संतान होगी। 
एक वर्ष बाद सेठजी के दो जुड़वां संताने हो जाती है। कुछ समय बाद गोस्वामी जी का उधर से निकलना होता है।व्यापारी के दोनों बच्चे घर के बाहर खेल रहे होते हैं। उन्हें देखकर वे व्यापारी से पूछते है कि ये बच्चे किसके हैं। व्यापारी बोलता है गोस्वामी जी ये बच्चे मेरे ही हैं। आपने तो झूठ बोल दिया कि भगवान ने कहा की मेरे संतान नही होगी। पर ये देखो गोस्वामी जी मेरे दो जुड़वां संताने हुई हैं। गोस्वामी जी यह सुन कर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। फिर व्यापारी उन्हें उस संत के वचन के बारे में बताता हैं। उसकी बात सुनकर गोस्वामी जी चले जाते है।  शाम को गोस्वामीजी कुछ चितिंत मुद्रा में रामायण पढते हैं तो भगवान उनसे पूछते है कि गोस्वामी जी आज क्या बात है? चिन्तित मुद्रा में क्यों हो? तो गोस्वामी जी कहते है की प्रभु आपने मुझे उस व्यापारी के सामने झूठा पटक दिया। आपने तो कहा ना कि व्यापारी के सात जन्म तक कोई संतान नही लिखी है। फिर उसके दो संताने कैसे हो गई? तब भगवान् बोले कि उसके पूर्व जन्म के बुरे कर्मो के कारण में उसे सात जन्म तक संतान नही दे सकता था क्योकि मैं नियमो की मर्यादा में बंधा हूं पर अगर मेरे किसी संत सतगुरु ने उन्हें कह दिया कि तुम्हारे संतान होगी तो उस समय में भी कुछ नही कर सकता गोस्वामी जी क्योकि मैं भी संतों की मर्यादा से बंधा हूं मै पूर्ण संतो के वचनों को काट नही सकता। मुझे संत की बात रखनी पड़ती हैं। इसलिए गोस्वामी जी अगर आप भी उसे कह देते कि जा तेरे संतान हो जायेगी तो मुझे आप जैसे भक्तों के वचनों की रक्षा के लिए भी अपनी मर्यादा को तोड़ कर वह सब कुछ देना पड़ता हैं जो उसके भाग्य मे नही लिखा हैं।

--------इस कहानी से तात्पर्य यही हैं कि भले हीं विधाता ने आपके भाग्य में कुछ ना लिखा हो पर अगर किसी गुरु की आप पर कृपा हो जाये तो आपको वो भी मिल सकता है जो आपके किस्मत में नही।

भाग लिखी मिटे नही, लिखे विधाता लेख
मिल जावे गुरु मेहर तो, लगे लेख पे मेख।

भाग्य में लिखा विधाता का लेख मिट नही सकता पर किसी पर गुरु की मेहरबानी हो जाए तो विधाता का लेख भी दिवार की मेख पर लटका रह जाता है।

सतिनाम श्री वाहिगुरू 

Sunday, 28 June 2020

रूस के लोग अंधविश्वासी नास्तिक हैं-ओशो

 हिंदुस्तान के लोग अंधविश्वासी आस्तिक हैं-ओशो 
सोशल मीडिया//Whats App//28 जून 2020:(आराधना टाईम्ज़ रिसर्च डेस्क)::
ईश्वर को मानने वाला भी अंधविश्वासी हो सकता है, ईश्वर को न मानने वाला भी उतना ही अंधविश्वासी, उतना ही सुपरस्टीशस हो सकता है। अंधविश्वास की परिभाषा समझ लेनी चाहिए। अंधविश्वास का मतलब है, बिना जाने अंधे की तरह जिसने मान लिया हो। रूस के लोग अंधविश्वासी नास्तिक हैं, हिंदुस्तान के लोग अंधविश्वासी आस्तिक हैं। दोनों अंधविश्वासी हैं। न तो रूस के लोगों ने पता लगा लिया है कि ईश्वर नहीं है और तब माना हो, और न हमने पता लगा लिया है कि ईश्वर है और तब माना हो। तो अंधविश्वास सिर्फ आस्तिक का होता है, इस भूल में मत पड़ना। नास्तिक के भी अंधविश्वास होते हैं। बड़ा मजा तो यह है कि साइंटिफिक सुपरस्टीशन जैसी चीज भी होती है, वैज्ञानिक अंधविश्वास जैसी चीज भी होती है। जो कि बड़ा उलटा मालूम पड़ता है कि वैज्ञानिक अंधविश्वास कैसे होगा! वैज्ञानिक अंधविश्वास भी होता है।

अगर आपने युक्लिड की ज्यामेट्री के बाबत कुछ पढ़ा है, तो आप पढ़ेंगे, बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं ज्यामेट्री तो युक्लिड कहता है रेखा उस चीज का नाम है जिसमें लंबाई हो, चौड़ाई नहीं। इससे ज्यादा अंधविश्वास की क्या बात हो सकती है? ऐसी कोई रेखा ही नहीं होती, जिसमें चौड़ाई न हो। बच्चे पढ़ते हैं कि बिंदु उसको कहते हैं जिसमें लंबाई चौड़ाई दोनों न हों। और बड़े से बड़ा वैज्ञानिक भी इसको मानकर चलता है कि बिंदु उसे कहते हैं जिसमें लंबाई  चौड़ाई न हो। जिसमें लंबाई चौड़ाई न हो, वह बिंदु हो सकता है?

हम सब जानते हैं कि एक से नौ तक की गिनती होती है, नौ डिजिट होते हैं, नौ अंक होते’ हैं गणित के। कोई पूछे कि यह अंधविश्वास से ज्यादा है? नौ ही क्यों? कोई वैज्ञानिक दुनिया में नहीं बता सकता कि नौ ही क्यों? सात क्यों नहीं? सात से क्या काम में अड़चन आती है? तीन क्यों नहीं? ऐसे गणितज्ञ हुए हैं। लिबनीत्स एक गणितज्ञ हुआ है जिसने तीन से ही काम चला लिया। है।, उसका ऐसा है कि एक, दो, तीन, फिर आता है दस, ग्‍यारह, बारह, तेरह, फिर आता है बीस, इक्कीस, बाईस, तेईस। बस, ऐसी उसकी संख्या चलती है। काम चल जाता है, कौन सी अड़चन होती है! वह भी गिनती कर लेगा यहां बैठे लोगों की। और वह कहता है कि मेरी गिनती गलत, तुम्हारी सही, कैसे तुम कहते हो २: हम तीन से ही काम चला लेते हैं। वह कहता है, नौ की जरूरत क्या है? नौ कौन कहता है? आइंस्टीन ने बाद में कहा कि तीन भी फिजूल है, दो ही से काम चल जाता है। सिर्फ एक से नहीं चल सकता, बहुत मुश्किल होगी। दो से भी चल सकता है। नाइन डिजिट, नौ आकड़े होने चाहिए गणित में, यह एक वैज्ञानिक अंधविश्वास है। लेकिन गणितज्ञ भी पकडे हुए बैठा है कि इतने ही हो सकते हैं आकड़े। उससे कहो कि सात से काम चलेगा, तो वह भी मुश्किल में पड़ जाएगा। यह भी मान्यता है, इसमें कुछ और ज्यादा मतलब नहीं है।

हजारों चीजें वैज्ञानिक रूप से हम मानते हैं कि ठीक हैं, वे अंधविश्वास ही होती हैं। तो वैज्ञानिक अंधविश्वास भी होते हैं। इस युग में तो धार्मिक अंधविश्वास क्षीण होते जा रहे हैं, वैज्ञानिक अंधविश्वास मजबूत होते चले जा रहे हैं। फर्क इतना होता है कि अगर धार्मिक आदमी से पूछो कि भगवान का तुम्हें कैसे पता चला? तो वह कहेगा कि गीता में लिखा है। और अगर उससे यह पूछो कि तुम यह कह रहे हो कि गणित में नौ आकड़े होते हैं, यह तुम्हें कैसे पता चला है? तो वह कहेगा कि फलां गणितज्ञ की किताब में लिखा हुआ है। फर्क क्या हुआ इन दोनों में? एक गीता बता देता है, एक कुरान बता देता है, एक गणित की किताब बता देता है। फर्क क्या है?

मैं अंधविश्वास के एकदम विरोध में हूं। सब तरह के अंधविश्वास टूटने चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं तोड्ने के लिए अंधविश्वासी हूं कि किसी भी चीज को तोडना चाहिए तो फिर बिना फिकिर उसको तोड्ने में लग जाने की जरूरत है। वह ठीक है या गलत, इसकी फिक्र छोड़ो, तोड़ो पहले, तोडना जरूरी है। फिर यह तोडना भी एक अंधविश्वास हो जाएगा।

इसका मतलब यह हुआ कि हमें समझ लेना चाहिए कि अंधविश्वास, सुपरस्टीशन का मतलब क्या है।

 सुपरस्टीशन का मतलब है कि जिसे हम बिना जाने मान लेते हैं। और हम बहुत सी चीजें मान लेते हैं। और बहुत सी चीजें बिना जाने इनकार कर देते हैं, यह भी अंधविश्वास है।

ओशो
मैं मृत्यु सिखाता हूँ

Saturday, 6 June 2020

श्री अमरनाथ यात्रा 21 जुलाई से नियमों का पूरा विवरण इस पोस्ट में

 यात्रा के दिन केवल 14 होंगें-स्वास्थ्य नियमों में होगी ज़यादा सख्ती  
जम्मू: 6 जून 2020: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़)::
बाबा अमरनाथ बर्फानी के दर्शन एक ऐसा दिव्या सपना है जो किस्मत वाले लोग ही देखते हैं। इनमें से भी केवल वही खुशनसीब कहे जाते हैं जिनका ह सपना साकार भी हो जाता है। किस्मतवालों को इन दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त होता है वरना ज़िंदगी की मजबूरियां किसी न किसी रूप में आ कर रास्ता रोक ही लेती हैं। ऐसे में दिव्य कृपा ही सहायक होती है। इस बार कोरोना के कहर में ज़िंदगी पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गयी है। स्थानीय धर्म स्थल भी एक लम्बे आरसे के बाद खुलने वाले हैं। ऐसे में कोरोना के कारण इस बार की अमरनाथ यात्रा भी मात्र 14 दिनों की ही होगी। 
इस बार यह यात्रा 21 जुलाई को शुरू हो कर 3 अगस्त तक चलेगी। तीन अगस्त को आ रही श्रावण पूर्णिमा को यह यात्रा समाप्त होगी। इस यात्रा में शिरकत करने वालों के लिए इस बार भी बहुत सी शर्तों का ढेर है। दुर्गम स्थानों की यात्रा के लिए ऐसा करना आवश्यक भी है। 
इनमें मुख्य शर्त यह है कि 14 साल से कम और 55 साल से अधिक आयु वालों को इस यात्रा की अनुमति नहीं होगी जबकि स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के अतिरिक्त कोरोना टेस्ट करवा कर उसका प्रमाणपत्र भी संलग्न करना होगा। इस तरह बहुत से लोग श्रद्धा भावना के बावजूद इस पावन यात्रा से वंचित रह जायेंगे। आज्ञा मिलने के बाद श्रद्धालु बालटाल मार्ग से यात्रा करेंगे लेकिन कितनी संख्या में करेंगे फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है।
यह जानकारी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारी ने बाकायदा अपनी वेबसाईट पर भी दी है। जानकारी के मुताबिक पवित्र गुफा तक के मार्ग से बर्फ हटाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही यह भी ज़रूरी है कि  इस बार यात्रियों के पास कोरोना टेस्ट प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होगा। यह प्रमाण पत्र जम्मू कश्मीर में प्रवेश करने पर जांचे जाएंगे। यात्रा परमिट या एप्लिकेशन फॉर्म के लिए निश्चित परफॉर्मा यहां क्लिक करके देखा जा सकता है। 
बहुत से लोग इस पावन यात्रा को अपने अपने ग्रुप बना कर करते हैं। ग्रुप को पंजीकृत करने की प्रक्रिया अलग से होती है। उसके नियम कुछ अलग हैं। उसकी सावधानियां और ज़िम्मेदारियाँ भी अलग से होती हैं। बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। सुरक्षित यात्रा के लिए ऐसा करना आवश्यक भी है। उन नियमों और प्रक्रिया को देखने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं
 बहुत से लोग अपने अपने तौर पर बैंकों के ज़रिये रजिस्ट्रेशन करवा कर इस यात्रा का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। ऐसी स्थिति में यह पता लगाना भी कई बार कठिन होता है कि किस बैंक की किस शाखा में यह सुविधा है और कहाँ नहीं है? इस दुविधा को दूर करने का प्रयास करते हुए हम यहां विभिन्न राज्यों में स्थित सबंधित बैंकों की सूची भी दे रहे हैं जिसे आप यहां क्लिक करके भी देख सकते हैं। 
 यात्रा के लिए स्वास्थ्य नियमों का पालन बहुत ही कढ़ाई से होता है। इस बार कोरोना के कारण सख्ती और भी ज़्यादा होगी। हैल्थ एडवाईजरी का पालन सभी के हिट में होगा। व्यक्तिगत हित में भी और परिवार बी सामूहिक समाज के हित में भी। ऐसे में श्री अमरनाथ श्राईन बोर्ड ने हैल्थ एडवाईजरी भी जारी की है जिसे आप विस्तार से देख सकते हैं बस यहां क्लिक करके। हम अपनी अन्य पोस्टों में भी इस यात्रा से सबंधित विवरण देते रहेंगे। 

Tuesday, 12 May 2020

पुरानी कहानियां भी दे रही हैं नए नए संदेश

उनमें छुपे शाश्वत सत्यों को समझिये और जीवन में उतारिये 
लुधियाना12 मई 2020: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़)::
वक्त बदला तो कहानियां भी बदल रही हैं। लॉक डाउन ने बहुत कुछ नया सोचने का वक्त भी दिया है। लॉक डाउन से सन्नाटा छाया मोर भी बाहर आ गये और एनी पक्षी भी। कछुए ने फिर खरगोश को ललकारा तो खरगोश बोला चलो अभी दौड़ते हैं। खरगोश इस बार स्मार्ट निकला। रास्ते में कहीं नहीं रुका और मिनटों में ही मंज़िल पर अपनी जीत का ध्वज लहरा कर लौट आया। इधर कछुआ तो धेरे धीरे सरक ही रहा था। खरगोश बोला मित्र हर युग की बात हर युग में नहीं चलती। मैंने अपनी हार से सबक सीख लिया था। 
इसी तरह एक और पुरानी कथा भी इस समय के लिए आज भी बहुत ही प्रसांगिक है।
एक राजा को राज भोगते काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया। ...✍
Admin: रमन गोयल 
राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी। नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है, वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे।... तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक  दोहा पढ़ा -
"बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताई।
एक पल के कारने, ना कलंक लग जाए ।"
अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला। तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा।
जब यह दोहा  गुरु जी ने सुना और गुरु जी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को  अर्पण कर  दीं।
दोहा सुनते ही राजा की लड़की ने  भी अपना नौलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया।
दोहा सुनते ही राजा के पुत्र युवराज ने भी अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया।
राजा बहुत ही अचिम्भित हो गया।
सोचने लगा रात भर से नृत्य चल रहा है पर यह क्या! अचानक एक दोहे से सब  अपनी मूल्यवान वस्तु बहुत ही ख़ुश हो कर नर्तिकी को समर्पित कर रहें हैं,
 राजा सिंहासन से उठा और नर्तकी को बोला *एक दोहे* द्वारा एक सामान्य नर्तिका  होकर तुमने सबको लूट लिया ।"

जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरु जी कहने लगे-"राजा! इसको नीच नर्तिकी  मत कह, ये अब मेरी गुरु बन गयी है क्योंकि इसने दोहे से मेरी आँखें खोल दी हैं। दोहे से यह कह रही है कि मैं सारी उम्र जंगलों में भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई! मैं तो चला।" यह कहकर गुरु जी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े।
राजा की लड़की ने कहा-पिता जी! मैं जवान हो गयी हूँ। आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरी शादी नहीं कर रहे थे और आज रात मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था। लेकिन इस नर्तकी के दोहे ने मुझे सुमति दी है कि जल्दबाजी मत कर कभी तो तेरी शादी होगी ही। क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है?"
युवराज ने कहा- "पिता जी ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे। मैंने आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपका कत्ल करवा देना था। लेकिन इस नर्तकी के दोहे ने समझाया कि पगले! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है। धैर्य रख।"
जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया। राजा के मन में वैराग्य आ गया। राजा ने तुरन्त फैंसला लिया- "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ। फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा-पुत्री! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं। तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो। राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया।
यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा-"मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी? उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया। उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना बुरा नृत्य  बन्द करती हूं और कहा कि "हे प्रभु! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना। बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी ।"
वही कुछ अब लॉक डाउन के दौर में हमारी जिंदगी में भी घटित हो रहा है।
"बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताई।
एक पल के कारने, ना कलंक लग जाए ।"
 आज हम इस दोहे को यदि हम  कोरोना को लेकर अपनी समीक्षा करके देखे तो हमने पिछले 22 तारीख से जो संयम बरता, परेशानियां झेली ऐसा न हो हमारी कि अंतिम क्षण में एक छोटी सी भूल, हमारी लापरवाही, हमारे साथ पूरे समाज को न ले बैठे।
आओ हम सब मिलकर कोरोना से संघर्ष करे,  घर पर रह सुरक्षित रहे व सावधानियों का विशेष ध्यान रखें।
                                                                                                     --जय सिंह
आप इस लोकप्रिय कथा-कहानी को
फेसबुक पर भी देख सकते हैं अन्धविश्वास की कैद... ग्रुप में बस यहां क्लिक के।
(Whats App के Helping Hands Club NGO में  +919569360200 ने फारवर्ड किया)

Sunday, 3 May 2020

पूज्य श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 99 वां आनंद पूर्णिमा दिवस 7 मई को

लॉक डाउन के चलते सभी मार्गी घरों में मनाएंगे जन्मोत्सव 
पुरुलिया: 2 मई 2020: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
आनंद मार्ग के सौजन्य से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बार पूज्य गुरुदेव भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 99 वां आनंद पूर्णिमा दिवस 7 मई 2020 को सभी मार्गी अपने अपने घर में मनाएंगे। यह फैसला कोरोना के चलते लॉक डाउन को देखते हुए लिया गया है। इस संबंध में पुरुलिया स्थित  केन्द्रीय कार्यालय:-आनन्द नगर प.बंगाल से आनंद मार्ग प्रचारक संघ ने सभी मार्गियों के नाम एक अपील भी जारी की है। इस अपील में कहा गया है:
प्रिय मार्गी भाइयों एवं बहनों 
नमस्कार।
आशा करता हूं बाबा के कृपा से आप सपरिवार स्वस्थ होंगे।
वर्तमान वैश्विक संकट कोरोनावायरस के कारण उत्पन्न महामारी से निजात पाने के लिए जो लॉक डाउन लगाया गया उसी के मध्य नजर पूज्य गुरुदेव भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 99 वां आनंद पूर्णिमा दिवस 7 मई 2020  को सभी मार्गी अपने अपने घर में ही मनाएंगे।
6 मई को ही संध्या में साधना स्थल को सजा लेंगे।
 कार्यक्रम इस प्रकार है :____ 
 सुबह 4:00 जाग जायें। 
  गुरु सकाश, शपथ स्मरण, उत्क्षेप मुद्रा, नित्य क्रिया, स्नान एवं सज-धज कर पोशाक पहनकर

 4 बजकर 50 मिनट तक अपने घर में जहाँ साधनास्थल तय किया है वहां पर ही परिवार के सभी सदस्य गण बैठकर प्रेम और निष्ठा से 

5:00 बजे 5:35 तक पाञ्चजन्य करें ।
पाञ्चजन्य के उपरांत 

5 बजकर 35 मिनट से लेकर 6:00 बजकर 7 मिनट तक आविर्भाव,  व आगमन के सम्बन्धित प्रभात संगीत गायन करें । 
जो लोग प्रभात संगीत नहीं जानते हैं वे 5 बजकर 35 मिनट से 6 बजकर 7 मिनट तक 
कीर्तन करते रहें। 

6 बजकर 7 में शंख ध्वनि करें और जहां शंख नहीं है वहां कोई भी वाद्य यंत्र जैसे थाली, ताली , झाल बजाकर जयघोष करें ।

 6:10 से 6: 20 तक प्रभात संगीत:- 1. तुमि जे एसे छो आज व्यथित जनेर कथा भाविते, 
2. तुमि एसे छो भालोबेसेछो मोरे विश्वे तोमार नय कोनो तुलना 3.आये हो तुम,आये हो तुम युगों के बाद प्यारे का गायन करें :

 तदोपरांत कीर्तन 6:20 से 6:35 तक और 

6:35 से 7:05 बजे तक आधे घंटे का सामूहिक साधना करें 

7:05 से 7:30 तक आनन्द वाणी पाठ और व्याख्या करें । आनंद वाणी पाठ के बाद सामूहिक रूप से आसन, कौशिकी एवं तांडव करने के बाद प्रसाद वितरण करें। हर्ष उल्लास के साथ स्वादिष्ट भोजन बनाकर पूरे परिवार मिलजुल कर भोजन करें। सेवा के रूप में कम से कम एक आदमी का भोजन(50रूपये) ,अधिक आपकी क्षमता पर निर्भर करता है, कोरोना रिलीफ ऑपरेशन चला रहे अपने भुक्ति कमिटी को 
सुपुर्द करें।
नाश्ता के उपरांत जीवन वेद एवं चर्याचर्य प्रथम भाग द्वितीय भाग एवं तृतीय भाग से प्रश्नोत्तरी का कार्यक्रम अवश्य करें।
दोपहर में सामूहिक साधना करने के बाद मिलित भोजन ग्रहण करें।

विशेष द्रष्टव्य :--- किन्हीं के परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक है या दृढ़ संकल्प शक्ति है तो तो वे 3 घंटे 6 घंटे का अखंड कीर्तन करने के लिए स्वतंत्र हैं।

            आपका ही
आचार्य सत्याश्रयानंद अवधूत
 केंद्रीय धर्म प्रचार सचिव
 आनंद मार्ग प्रचारक संघ

Monday, 13 April 2020

कोरोना के कहर में फंसे लोगों का दर्द सुना ठाकुर दलीप सिंह ने

कुलदीप कौर की टीम को भेजा ज़रूरतमंद घरों तक ज़रूरी सामान के साथ 
पटियाला: 13 अप्रैल 2020: (कार्तिका सिंह//आरधना टाईम्ज़)::
कोरोना का कहर टूटा तो सबसे अधिक दिक्कत आई उन लोगों को जो हर रोज़ दिहाड़ी करके कमाते थे और उसी से उनका घर चलता था।  इसके साथ ही वे लोग भी थे मध्यवर्गों से सबंधित थे। जब मार्च के अंत में लॉक डाउन शुरू हुआ तो  उनके घरों का राशन भी समाप्त हो चुका था और वेतन अभी मिला नहीं था। साथ ही गली मौहल्लों के वो दुकानदार भी इसी संकट का शिकार हुए जिनकी दुकानें कर्फ्यू के कारण बंद करा दी गईं थीं। छोले-भटूरे, टिक्की-समोसा, भुजे हुए चने इत्यादि और चाय बेचने वालों का भी यही हाल हुआ। इन लोगों ने कभी ज़िंदगी में हाथ नहीं फैलाया था। हमेशां अपना कमाते और जो कमाई होती उसी में खुश रहते हुए ज़िंदगी काटते। कोरोना के संकट की बात तो किसी की कल्पना में भी नहीं थी। सबसे ज़्यादा  दिक्क्त समाज के इन्हीं वर्गों से सबंधित लोगों को आई। न तो ये लोग गरीबों के लिए बनी राशन वितरण लाइनों में जा कर खड़े हो सकते थे और न ही किसी और के पास जा सकते थे। ऐसे लोगों की आवाज़ नामधारी प्रमुख ठाकुर दलीप सिंह ने सुनी और वह भी इन लोगों के बोले बिना। ठाकुर दलीप सिंह ने विदेश की धरती से ही अपने पैरोकारों से कहा कि इस तरह के सभी वर्गों का पता लगाएं और बिना कोई शोर या प्रचार किये इन लोगों तक सहायता पहुंचाएं। 
आदेश का पालन भी तुरंत शुरू हुआ। घरों की रसोई के लिए आवश्यक सामान को छोटे छोटे पैकटों में बंद कराया गया। उनकी किट अर्थात गठड़ियाँ बनवायीं गईं। हर ज़रूरतमंद के घर तक यह सब सामान पहुंचा दिया गया। साथ ही दवाई और दूध जैसे ज़रूरी खर्चों के लिए एक निश्चित अमाउंट के पैसे भी सभी घरों तक पहुंचाए गए। हर घर का पता लगाना।  फिर बिना किसी को बताए चुपके से अचानक जा कर उनका दरवाज़ा खटखटाना और जब दरवाज़ा खुलना तो बहुत ही स्नेह और सम्मान के साथ उनको वह राशन की किट भी पकड़ा देनी और साथ ही पैसे भी। देश भर के बहुत से राज्यों में यह सिलसिला शुरू हुआ और अब तक जारी है। ठाकुर दलीप सिंह के सेवक पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार, राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों के पिछड़े इलाकों तक भी तेज़ी से पहुंचे। ख़ामोशी के साथ सेवा का यह बिलकुल ही नया अध्याय बना। 
पटियाला में इसकी कमान संभाली महिला वैलफेयर सोसायटी की प्रमुख कुलदीप कौर और उनकी टीम ने। इस टीम ने कच्चा राशन भी ज़रूरतमंद लोगों के घरों तक पहुंचाया और पका हुआ लंगर भी। इस मकसद के लिए इन्होने अपनी चिर परिचित वैन का सदुपयोग किया जिसे आप तस्वीर में भी देख सकते हैं।   
टीम की अध्यक्षा कुलदीप कौर के साथ महासचिव-बीमा सेन, कोषाधिकारी-मनप्रीत कौर और जसबीर कर सहित अन्य पदाधिकारी भी साथ रहे। पुरुष सहयोगियों में से हरमीत सिंह, चरणजीत सिंह मंगा और रवनीत सिंह ने भी सक्रिय हो कर इस टीम का साथ दिया।
यह भी पढ़िए बस यहां नीचे दिए गए  नीले लिंक पर क्लिक करके 
 नामधारी संगत के साथ शहीद सरबजीत की बहन ने भी बांटा राशन 

Monday, 30 March 2020

कोरोना और कर्फ्यू:बहुत जल्द सब ठीक हो जायेगा-लेकिन ध्यान रखिये

तब तक तन और मन दोनों की शक्ति बढ़ाते रहिये 
मोहाली: 30 मार्च 2020: (पुष्पिंदर कौर//आराधना टाईम्ज़)::
लुधियाना:पुराने डीएमसी अस्पताल के निकट लाडी शाह जी के दरबार की तस्वीर
जब मन बेबस सा हो जाये तो भगवान याद आते हैं। धर्म स्थल भी बंद हैं लेकिन फिर भी आजकल लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है। बहुत से लोगों से पूछा आज कल क्या कर रहे हो घर बैठे तो ज़यादातर लोगों का जवाब था पाठ कर रहे हैं। शायद कभी भी ऐसा समय पहले नहीं आया कि नवरात्र में मंदिर बंद हो गए हों। शहीद भगत सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करने हों तो आसपास के शहीदी स्मारक बंद नज़र आएं। एक बारगी तो कोरोना ने सभी एक दुसरे के बराबर कर दिए है। सभी को कोरोना डर पूरो शिद्द्त से शता रहा है। जिनकी कहीं न कहीं आस्था है वे लोग फिर भी काफी शांत हैं। उनको यकीन है कि जल्द ही भगवान कोई करिश्मा दिखाएंगे। कोरोना का कहर जल्द ही शांत होगा। जैसे पर्यावरण का प्रदूषण हट गया है वैसे ही दिल, दिमाग और मन के प्रदूषण भी हट जायेंगे। कोरोना ने सभी को इतना अकेला ज़रूर कर दिया है की सब खुद के अंदर झाँक सकें। खुद के बारे में खुद की बात कर सकें। 
अकेलापन शायद बुरा भी हो सकता है लेकिन एकांत तो बहुत ही रचनत्मक बना देती है।  कुछ ऐसा ही हुआ लगता है लुधियाना स्थित पत्रकार और शायर रेक्टर कथूरिया के साथ। फोन करके पूछा तो पता चला कि हाल ही में कुछ तस्वीरें खींचने के लिए बाहर निकले थे। फिर घर में बैठे शायरी करने लगे। कुछ किताबें भी पढ़ीं। जिन्हें आप देख रहे हैं यह हाल ही की तस्वीरें हैं और शेयर भी ताज़ा ही लिखा है। 
एक तस्वीर है लुधियाना के पुराने डीएमसी अस्पताल के नज़दीक स्थित लाडी शाह जी के दरबार की जहां लोग अपने मन की मुरादें पूरी कराने के लिए मन्नतें मांगते हैं। लोगों का कहना है कि उनकी मुरादें पूरी भी होती हैं। नंगे पाँव आते है युवा लड़के और लड़कियां। नव विवाहित जोड़े। दरबार में आ कर लम्बे समय तक आँखें बंद करके बैठते हैं। उस वक़्त उनके चेहरे पर एक अलग किस्म का सकून नज़र आता है। यह तस्वीर 19 मार्च 2020 को खुद रेक्टर कथूरिया ने ही क्लिक की। 
इसके बाद शुरू हुआ लॉक डाउन का सिलसिला और फिर कर्फ्यू।  रेलवे स्टेशन के एक नंबर प्लेटफार्म और ान प्लेटफार्मों को जोड़ने वाले पुल की तस्वीरें भी आज के समय की उदासी और बेबसी को दर्शाती हैं। आजकल का ज़्यादा समय किताबें पढ़ने और ब्लॉग लिखने में गुज़रता है। ज़रूरी लगे तो कभी कभार कवरेज के लिए भी निकलना पढ़ता है लेकिन बहुत ही आवश्यक हो तो। उनका भी कहना है कि सरकार का कहा मानने में ही भलाई है हम सभी की। कोरोना से बचने का यही एक तरीका है। घर में रहना आवश्यक हो गया है। जो घरों में रहेंगे वही बचेंगे।