Friday, 25 January 2019

भज गोविन्दम के लिए निमंत्रण देने का अभियान जारी

आयोजन 26 जनवरी 2019 को लुधियाना के गुरु नानक भवन में  
लुधियाना:24 जनवरी 2019: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो):: 
बहुत से विरोधों और विवादों के बावजूद दिव्या ज्योति जागृति संस्थान निरंतर सक्रिय है। मामला सतसंग आयोजनों का हो या फिर शिक्षा से सबंधित अन्य क्षेत्रों का। इस संस्थान ने हमेशां इस बात  केंद्रित रखा कि उनका अभियान तेज़ कैसे हो। इस बार तैयारी है भज गोविन्दम भजन संध्या की। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान से स्वामी प्रकाशा नंद ने जिला कांग्रेस के नव नियुक्त जिला प्रधान अश्विनी शर्मा एवं सूरज उद्धोग के मदन लाल बस्सी से एक भेंट करके उन्हें आमंत्रित किया। स्वामी प्रकाशा नंद ने इन दोनों को भज गोविन्दम भजन संध्या का निमंत्रण कार्ड दे कर आयोजन में आने के लिए निमंत्रित किया। स्वामी प्रकाशा नंद ने   बताया कि यह प्रोग्राम 26 जनवरी  को गुरु नानक देव भवन ,भारत नगर चौक में साय 6 से 9 30 बजे तक होगा। इस यादगारी आयोजन में पहुंचने वालों को आध्यत्मिक जागृति के दुर्लभ आनंद के पल प्राप्त होंगें। 

Thursday, 24 January 2019

महिफल साँईया की सजेगी 16 फरवरी को लुधियाना के दरेसी मैदान में

Jan 24, 2019, 5:55 PM
आयोजन के लिए उत्साह की लहर 
लुधियाना: 24 जनवरी 2019: (एस के ए//आराधना टाईम्ज़)::
साँई गुलाम शाह सेवा संघ की और से 16 फरवरी 2019 दिन शनिवार  को दरेसी मैदान में रात्रि 7 बजे से साँई इच्छा तक करवाई जा रही है जिसको लेकर  प्रचार सामग्री जारी की गई उस दौरान शिव सेना पंजाब से  राजीव टंडन,टकसाली नेता संदीप थापर गोरा,युवा भाजपा प्रधान महेश शर्मा, कावड़ संघ के हरीश शर्मा बोबी, भाजपा नेता गोल्डी सभरवाल, जितेंद्र कपूर, सुरिंदर बावा, सुमित धीर, प्रिंस कपूर, कमल बस्सी, सोनू कौशल, साहिल खुराना, नितिन, अंकुर वधवा मौजूद थे।

Wednesday, 14 November 2018

अखिल भारतीय संत समिति में हुए खास ऐलान

धर्मान्तरण तथा लव जेहाद आदि विषयों पर भी हुआ विचार विमर्श 
जालंधर//नई दिल्ली:13 नवम्बर 2018: (राजपाल कौर//आराधना टाईम्ज़)::

गत दिवस दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अखिल भारतीय संत समिति का विशाल आयोजन किया गया।इस समागम में विशेष रूप से समस्त भारत से आये हुए महामण्डलेश्वर ,शंकराचार्य तथा समूह साधु-संतों में ,नामधारी प्रमुख सतगुरु दलीप सिंह जी के अनुयायी भी काफी संख्या में हाजिर हुए। इस समागम में मुख्य रूप से 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद मारे जाने वाले सिक्खों और 7 नवम्बर 1986 को दिल्ली के रामलीला मैदान में गौवध को रोकने के लिए शहीद हुए संतों एवं गौभक्तों व श्री राम जन्म भूमि के कार सेवकों को श्रद्धांजली भेंट की गई। गौरतलब है कि ये लोग 30 अक्टूबर  और 2 नवम्बर 1990 को अयोध्या में मारे गए थे। इसके अलावा श्री राम जन्म भूमि पर भव्य मन्दिर के निर्माण तथा हमारे समाज में हो रहे धर्मान्तरण तथा लव जेहाद आदि विषयों पर विचार विमर्श किए गए। इस समिति की बैठक मेंखास तौर पर सतगुरु दलीप सिंह जी द्वारा भेजा गया संदेश श्री जयप्रकाश गोयल जी ने पढ़ कर सुनाया जो कि पवित्र गुरबाणी के अनुसार आपसी एकता और विशेष रूप से हिन्दु-सिक्ख एकता को और मजबूत करने वाला था, जिसमें अन्य त्योहारों को मिलकर मनाने के इलावा इस साल सांझीवालता व परस्पर प्रेम के प्रवर्तक सतगुरु नानक देव जी का 550 वां प्रकाश उत्सव गुरद्वारों के इलावा मंदिरों में भी धूमधाम से मनाने का सुझाव रखा। इस महान संदेश के समर्थन में सारा हॉल जो बोले सो निहाल तथा जय श्री राम के जयकारों से गूँज उठा।इस आयोजन के अध्यक्ष जगद्गुरु हंसादेव आचार्या जी ने नामधारी सतगुरु, ठाकुर दलीप सिंह जी के समाज कल्याण के कार्यो की चर्चा और प्रशंसा भी की। आप जी ने इस महान सभा में इस बात की भी बड़े गर्व से घोषणा की तथा वचन दिया कि अखिल भारतीय संत समिति और सारा संत समाज हमेशा सतगुरु, ठाकुर दलीप सिंह जी के साथ खड़ा है। इसके साथ ही आप जी ने यह भी बताया कि संघ तथा विश्व हिन्दु परिषद भी आपसे पूरी तरह जुड़े हैं तो हम भिन्न कैसे हो सकते हैं। इस अवसर पर महान संत, महन्त ज्ञानदेव जी, श्री श्री रविशंकर जी, शंकराचार्य वासुदेव जी, ब्रह्मचारी वागीश स्वरूप जी तथा तथा नामधारी पंथ के सूबा भगत सिंह जी महद्दीपुर, सूबा भगत सिंह जी यू.पी., सूबा अमरीक सिंह जी, तजिन्दर सिंह जी (विश्व हिन्दू परिषद के प्रान्त प्रधान), वकील नरिंदर सिंह जी, हरभजन सिंह फोरमैन, मलकीत सिंह बीड़, अरविंदर सिंह दिल्ली ,पलविंदर सिंह कूकी,प्रभजिंदर सिंह,गुरदेव सिंह आदि हाजिर थे।    

Wednesday, 17 October 2018

FIB और बेलन ब्रिगेड ने भी की लुधियाना में दुर्गा पूजा

शिंगार सिनेमा के नज़दीक हुआ विशेष आयोजन 
लुधियाना: 16 अक्टूबर 2018: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
ज़िन्दगी खुशियों से भरी है, आनन्द से भरी है, बहुत ही मजेदार भी है लेकिन आसान नहीं है। खुशियों पर झपट रहे गिद्ध बार बार बेचैन करते हैं। कदम कदम पर आती मुसीबतें हताश करती हैं। गिरगिट की तरह रंग बदलते अपने ही लोग निराश करते हैं। किसी गीत में बहुत अच्छा कहा गया था-ज़िंदगी हर कदम इक नई जंग है। निरंतर संघर्ष, कभी विजय-कभी पराजय---इन मिले जुले अनुभवों से ही मिलता है ज़िंदगी का वस्तविक आनंद। कभी रिश्ते और संबंध बचने के लिए क्षमा मांगनी होती है, कभी क्षमा करना होता है इसी से समाज बचता भी है और विकास भी करता है। लेकिन कभी कभी दुष्टों को दंड देना भी आवश्यक होता है। नवरात्र की पूजा ज़िंदगी के इन नौ रंगों का बहुत ही समीप से अनुभव करवाती है। मन और तन की कमज़ोरी को दूर करके शक्ति संचय करने का त्यौहार है नवरात्र। 
दूर्गा पूजा; जिसे दुर्गोत्सव या "दुर्गा का उत्सव" के नाम से भी जाना जाता है।  

शरदोत्सव दक्षिण एशिया में मनाया जाने वाला एक वार्षिक हिन्दू पर्व है जिसमें हिन्दू देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। इसमें छः दिनों को महालय, षष्ठी, महा सप्तमी, महा अष्टमी, महा नवमी और विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। दुर्गा पूजा को मनाये जाने की तिथियाँ पारम्परिक हिन्दू पंचांग के अनुसार आता है तथा इस पर्व से सम्बंधित पखवाड़े को देवी पक्ष, देवी पखवाड़ा के नाम से जाना जाता है। इसका हर दिन ज़िंदगी के जहां रहस्यों की जानकारी देता है। प्रकृति के छुपे हुए रहस्यों से अवगत करवाता है। 
ज़िंदगी में खलल डालने वाली आसुरी शक्तियों के खिलाफ शुभ शक्तियों का निरंतर संग्राम करने की शक्ति विकसित करता है। गौरतलब है कि दुर्गा पूजा का पर्व हिन्दू देवी दुर्गा की बुराई के प्रतीक राक्षस महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। अतः दुर्गा पूजा का पर्व बुराई पर भलाई की विजय के रूप में भी माना जाता है। लोग बहुत उत्साह से इसे मनाते हैं। 
देश के हर कोने में इसे हर्षोल्लास से मनाया जाता है। दुर्गा पूजा भारतीय राज्यों असम, बिहार, झारखण्ड, मणिपुर, ओडिशा, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से मनाया जाता है जहाँ इस समय पांच-दिन की वार्षिक छुट्टी रहती है। बंगाली हिन्दू और आसामी हिन्दुओं का बाहुल्य वाले क्षेत्रों पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा में यह वर्ष का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। यह न केवल सबसे बड़ा हिन्दू उत्सव है बल्कि यह बंगाली हिन्दू समाज में सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से सबसे महत्त्वपूर्ण उत्सव भी है। पश्चिमी भारत के अतिरिक्त दुर्गा पूजा का उत्सव दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, कश्मीर, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में भी मनाया जाता है। दुर्गा पूजा का उत्सव 91% हिन्दू आबादी वाले नेपाल और 8% हिन्दू आबादी वाले बांग्लादेश में भी बड़े त्यौंहार के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान में विभिन्न प्रवासी आसामी और बंगाली सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राज्य अमेरीका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैण्ड, सिंगापुर और कुवैत सहित विभिन्न देशों में आयोजित करवाते हैं। वर्ष 2006 में ब्रिटिश संग्रहालय में विश्वाल दुर्गापूजा का उत्सव आयोजित किया गया।
उल्लेखनीय है कि दुर्गा पूजा की ख्याति ब्रिटिश राज में बंगाल और भूतपूर्व असम में धीरे-धीरे बढ़ी। हिन्दू सुधारकों ने दुर्गा को भारत में पहचान दिलाई और इसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों का प्रतीक भी बनाया। अब पंजाब में भी इस त्यौहार को बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है। घर घर में पूजा जैसा माहौल बन जाता है। 
"फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो" की देख रेख में कुछ स्थानीय संगठनों ने भी इसे बहुत ही उत्साह से मनाया। लगातार 9 अक्टूबर से पूजापाठ का सिलसिला बहुत ही श्रद्धा और उत्साह से जारी है। मां का अटूट लंगर भी चला। 
बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा ने भी इस अवसर पर अपनी हाज़िरी लगवाई और लोगों से अपील की कि नशा मुक्त समाज की स्थापना में बेलन ब्रिगेड का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि हर नारी में दुर्गा शक्ति जगाना ही हमारा मुख्य मकसद है। अब भी जो लोग नारी को अबला समझते हैं उनको मां  दुर्गा सदबुद्धि दे। उन्होंने कहा कि जल्द ही बेलन ब्रिगेड का अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप आपके आमने आने वाला है जो मां की कृपा से सम्भव हो पायेगा। 
फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एफ आई बी) के प्रमुख डाक्टर भारत ने दिव्य शक्तियों की चर्चा करते हुए कहा कि आयोजकों को इस पूजा का शुभ फल जल्द मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज समाज में एक बार फिर असुरक्षा का माहौल है। देश और समाज के दुश्मन अपनी साज़िशों चालों से बाज़ नहीं आ रहे। इसलिए आज फिर मां दुर्गा की शक्ति को जगा कर ही हम देश और समाज को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा की देश और समाज के लिए बिना कोई शोर मचाये बहुत ही सार्थक कार्य कर रहे लोगों को एफ आई बी की तरफ से बहुत जल्द सम्मानित किया जायेगा। 
एफ आई बी के ही एक और प्रमुख पदाधिकारी ओंकार सिंह पूरी ने भी मां के दरबार में अपनी हाज़िरी लगवाई और अपना संकल्प दोहराया कि देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के खिलाफ हमारा गुप्त अभियान जारी रहेगा। हम आतंकियों और गद्दारों को कभी भी कामयाब नहीं होने देंगें। 
इस अवसर पर चंद्रशेखर रामू, एडवोकेट रमन, धनंजय पण्डे, गुडडू व अन्य कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। 

Saturday, 13 October 2018

वार्षिक जप-प्रयोग अमिट यादों के साथ सम्पन्न

जप प्रयोग में दृढ़ करवाई जाती है आध्यात्मिक साधना
जालंधर//दसूहा: 12 अक्टूबर 2018:(राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
प्रत्येक साल की तरह इस साल भी सतगुरु दलीप सिंह जी की छत्रछाया में नामधारी संगत द्वारा शुरू किया गया वार्षिक जप-प्रयोग, आपसी एकता ,प्रेम और भाईचारे के संदेशों द्वारा अमिट छाप छोड़ता हुआ  आज सम्पन्न हुआ। आज से अस्सू के मेला बड़े उत्साह व उल्लास से शुरू हो गया है। सतगुरु राम सिंह जी द्धारा दर्शाये गए दिशा-निर्देश अनुसार चलते हुए, नामधारी सिक्ख जप-प्रयोग के आयोजन द्धारा अपने जीवन को गुरबाणी अनुसार जीने तथा इस पर दृढ रहने का अभ्यास करते हैं। इस दौरान अमृत वेले से लेकर शाम तक तकरीबन 8-9 घण्टे परमात्मा के साथ जुड़कर, एकाग्रचित हो कर सिमरन-साधना का अभ्यास, कथा-कीर्तन, गुरु इतिहास की जानकारी लेते हुए एक आदर्श जीवन जीने के गुण सीखते हैं। इस के इलावा भावी पीढ़ी को सेवा-सिमरन जैसे गुरसिक्खी आचरण बताते हुए उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का भी मौका दिया जाता है। इस जप-प्रयोग की विशेष बात यह है कि यह आयोजन श्री सतगुरु दलीप सिंह जी की आज्ञा से विशेष रूप से सरोवर अर्थात जल के पास ही करवाया जाता है क्योंकि गुरबाणी के अनुसार जल के पास बैठकर नाम सिमरन करने का बहुत महत्व माना गया है जैसे कि हम देखते हैं की गुरु साहबानों द्वारा कई धार्मिक स्थल सरोवर के किनारे ही स्थापित किये गए हैं। इस लिए सतगुरु जी की आज्ञा से यह आयोजन ,सतगुरु प्रताप सिंह सरोवर ,श्री जीवन नगर और प्राचीन पांडव तालाब मन्दिर,दसूहा जैसे पावन स्थानों पर होना नियत किया गया। चालीस दिन लगातार चलता हुआ यह कार्यक्रम प्रतिदिन आनन्द और सकारात्मक-ऊर्जा प्रदान करता रहा। संगत ने भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया और आनन्द की प्राप्ति की। 
               आज इस जप-प्रयोग की समाप्ति अमृत वेले आसा की वार के अमृतमयी कीर्तन और शाम के समय संत तेजा सिंह जी (खुड्डा वाले)की मनोहर और आनंदमयी कथा के साथ हुआ। उन्होंने संगत को नाम-बानी और जीवन में गुरु का महत्व बताया। आप जी ने बताया कि परमात्मा का वास हमारे अंदर ही है ,हम उसे बाहर ढूंढते रहते हैं। संत जी ने सतगुरु दलीप सिंह जी की कृपा से चल रहे इस शुभ कार्यक्रम की प्रशंसा की तथा आपस में मिल-जल कर रहने का सन्देश दिया। इस के साथ ही संगत को अस्सू का मेला शुरू होने की बधाइयाँ भी दी। 
   अंत में संत तेजा सिंह जी को नामधारी संगत द्वारा सम्मानित कर उनके कीमती समय निकलने का आभार भी प्रकट किया। इस अवसर पर प्रधान बलविंदर सिंह डुगरी,जागीर सिंह ,सुखविंदर सिंह ,बूटा सिंह,पलविंदर सिंह ,महिंदर सिंह ,रघबीर सिंह पटवारी ,प्रिंसिपल हरमनप्रीत सिंह काहलों ,सरपंच जोगिन्दर सिंह ,दर्शन सिंह मल्ली ,मास्टर इक़बाल सिंह ,रणजीत सिंह ,गुरदीप सिंह और विशाल संगत हाज़िर हुई।