Tuesday, 25 October 2022

क्यूं बनी सवाल उठाती फिल्म "सामान"? एक नज़रिया यह भी है!

 क्या हम सचमुच ही हत्यारे हैं?     कैसे हुआ हमारा पत्तन? 


लुधियाना
: 24 अक्टूबर 2022: (मीडिया लिंक रविंद्र//आराधना टाईम्ज़)::  
दिवाली का त्यौहार है तो दिवाली की बात ही करेंगे लेकिन एक सवाल आड़े आ रहा है। सवाल से पहले उस नौजवान की बात जिसने अपनी एक छोटी सी फिल्म के ज़रिए यह सवाल किया है। सम्राट सिंह नाम का यह नौजवान लगातार दिन रात सोचता रहा और मेहनत करता रहा तांकि पूरे समाज को हत्या के पाप से रोका  बचाया जा सके। फिर उसे लगा कि यह समाज कभी सुधरने वाला नहीं। वह निराश भी हुआ लेकिन उसने फिर हिम्मत जुटाई और सोचा चलो जितने लोग बच पाएं उतने ही सही। मैं सूर्य नहीं बन सकता तो दीपक ही सही। लेकिन जहां जितने रास्ते तक रौशनी कर सकूंवहां तक रौशनी तो करनी है।

उसका सवाल भी यही है कि जानेअनजानेहम अपने ही लोगों के हत्यारे तो नहीं बन गए? भगवान राम जी के अयोध्या आगमन की खुशियां मनाते मनाते कहीं हमें किस अज्ञात मायावी ने राक्षस तो नहीं बना दिया? हम खुद ही अपनों के  हत्यारे क्यूं और कैसे बन गए? हम धर्म के नाम पर अधर्म के मार्ग पर कैसे बढ़ने लगे? हमारे हाथ अपनों  से कैसे रंगे गए?  

समाज को झंकझौरने वाला सवाल करती इस फिल्म की मेकिंग की भी एक लम्बी कहानी है लेकिन इसकी चर्चा फिर कभी किसी अलग पोस्ट में जल्दी ही। सबसे पहले आप फिल्म देख लीजिए। शायद आप भविष्य में अब उस तरह की हत्यायें करना बंद कर दें जो हम  सभी मिलजुल कर बड़ी शान  ही जा रहे हैं। 

सम्राट का मानना है कि जिन जिन की हत्याएं भी हमसे हुई हैं उनकी बद दुआएं और उनके श्राप हमारा पीछा कर रहे हैं। हमारी कभी मुक्ति न होगी। हमारी मुक्ति कहीं पर भी न होगी। हमें कभी सुख न मिलेगा। एक ही रास्ता शेष शायद। बस अगर हम अब भी रुक जाएं। अभी  भी हत्या का यह सिलसिला बंद कर दें तो शायद बात बन जाए। अब भी क्षमा मांग लें तो शायद कुछ तर्पण भी हो सके। तर्पण हुए बिना  जन्मांतरों तक की भटकत और बेचैनी बनी रहेगी।  डाक्टर के पास नहीं होगा। खुद  पाप धोने होंगें। 

सारी विस्तृत चर्चा हम बहुत जल्द किसी अलग पोस्ट में करेंगे लेकिन फ़िलहाल आप फिल्म देख लीजिए बस यहां क्लिक करके। फिल्म मेकर सम्राट सिंह धर्म कर्म के साथ साथ इतिहास का भी ज्ञाता है और आधुनिक विज्ञान का भी। इसलिए उसकी फिल्मों और कथाओं में कुछ मिश्रित से प्रभाव भी महसूस होते है। कई बार बात बहुत ही गहरी चली भी जाती है।  उड़ान भी लगता है जैसे क्षितिज के पार चली गई हो। फिर भी उसमें गहरा मकसद  होता है। टीम के साथ उसका सम्पर्क बना रहता है।  वह अपने तन, मन और आत्मा में तारतम्य बनाए रखता है। 

इस ऊंची उड़ान को ज़मीन पर लाना भी तो एक कला है न जिसमें उसका परिवार और टीम पूरा सहयोग करते हैं।इस फिल्म से आपको उसे समझने में  सहायता मिलेगी। उसका संवेदना से भरा मानवीय दृष्टिकोण समझना आसान हो जाएगा। उसकी अन्य फिल्मों को समझना  भी सरल हो जाएगा। जल्द ही हम उसकी अन्य फिल्मों की चर्चा भी करेंगे।


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Tuesday, 18 October 2022

वार्षिक जप-प्रयोग तथा अस्सू का मेला श्रद्धा और आस्था से लगा

होती रही प्रेम, ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिकता के रंगों की अमृत वर्षा 

सतगुरु दलीप सिंह जी  गुरु के अवतरण की ज़रूरत और अहमियत 

*जब तक गुरु अवतार धारण करके नहीं आते तब तक मार्गदर्शन भी नहीं 

*तब तक गुरुवाणी को भी समझा नहीं जा सकता  

श्री गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब, डेरा बाबा तरसेम सिंह में  दीवान 


डेरा कार सेवा बाबा तरसेम सिंह/उत्तराखंड: 17  अक्टूबर 2022:(गुरमीत सग्गु//आराधना टाईम्ज़)::  

प्रत्येक बरस की तरह इस वर्ष भी सतगुरु दलीप सिंह जी की छत्रछाया में नामधारी संगत द्वारा रखे गए  40 दिन के वार्षिक जप-प्रयोग (सिमरन साधना) के उपरांत दो दिनों का अस्सू का मेला; आपसी एकता, प्रेम, ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिकता के रंग बिखेरता हुआ सम्पन्न हुआ। 
इस दौरान अनुशासन के नियमों का भी पूरी तरह से पालन किया गया और प्रत्येक प्रोग्राम को लाइव टेलेकास्ट कर, दूर बैठी संगतों तक संचारित किया गया। वर्णनयोग्य है कि नामधारी पंथ के सृजनहार सतगुरु राम सिंह जी द्वारा दर्शाये गए दिशा-निर्देश अनुसार चलते हुए, नामधारी सिक्ख प्रत्येक वर्ष जप-प्रयोग के आयोजन द्वारा अपने जीवन को गुरु वाणी अनुसार जीने तथा इस पर दृढ रहने का अभ्यास करते हैं। इस दौरान अमृत वेले से लेकर शाम तक लगभग  8-9 घण्टे परमात्मा के साथ जुड़कर, एकाग्रचित हो कर सेवा-सिमरन, कथा-कीर्तन, गुरु इतिहास की जानकारी लेते हुए एक आदर्श जीवन जीने के गुण सीखते हैं। इस समागम में विशेष रूप से सतगुरु दलीप सिंह जी ने विदेश से लाईव दर्शन देकर अपने प्रवचनों से निहाल किया। आपने संगत को गुरुवाणी आशय अनुसार चलते हुए अपने परिवारिक व समाजिक जीवन सुखी रखने एवं आदर्श जीवन जीने के तरीके बताते हुए एक दूसरे से मीठा बोलने, क्षमा करने, विनम्रता जैसे गुण धारण करने, किसी को बुरा न कहने एवं स्त्रियों को मंदा न कहने भाव शुभ कर्म करने की भी शिक्षा दी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सतगुरु नानक देव जी ने "आसा की वार" में लिखा है कि जीवन में पूर्ण सतगुरु बड़े सौभाग्य से मिलते हैं और सतगुरु ही हमारे जीवन में अज्ञान का अँधेरा दूर कर सकता है तथा सतगुरु के चरण कमलों से जुड़ कर जीवन का पार उतारा हो सकता है। आपने गुरुवाणी और गुरु को भिन्न बताया और कहा कि जब तक गुरु अवतार धारण करके नहीं आते, गुरुवाणी को समझा नहीं समझा जा सकता, क्योंकि गुरुवाणी तो गुरु जी के मुखवाक से उच्चारी हुई है। इसके साथ ही आपने कहा कि नामधारी सतगुरु राम सिंह जी को हमेशा याद रखने को कहा क्योंकि उन्होंने हमें गुरुवाणी के साथ जोड़ा एवं शुभ कर्म करने लगाया। 

40 दिन लगातार चलता हुआ यह कार्यक्रम प्रतिदिन आनन्द और सकारात्मक-ऊर्जा प्रदान करता रहा।  इन दिनों में वातावरण को शुद्ध करने लिए हवन आदि भी मर्यादा अनुसार किए गए। इस अवसर पर गुरमत मर्यादा अनुसार,  गुरुवाणी के पाठों के भोग डाले गए एवं गुरु का अतूट लंगर वितरित किया। इस शुभ अवसर पर कथा- कीर्तन एवं नाम-वाणी का प्रवाह चला। यह सारा कार्यक्रम गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब, डेरा कार सेवा बाबा तरसेम सिंह / उत्तराखंड कमेटी के सहयोग से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सूबा भगत सिंह जी बहेड़ी, जथेदार  कवि पंजाब सिंह पंजाब, सूबा तरसेम सिंह जी इंग्लैंड, सूबा रतन सिंह जी, सूबा अमरीक  सिंह जी, जत्थेदार संत करतार सिंह नशहरे वाले, जत्थेदार अमरीक सिंह, जत्थेदार अवतार सिंह, जत्थेदार गोपाल सिंह, जत्थेदार कृपा सिंह, सूबा दर्शन सिंह जी, गुरमीत सग्गु दिल्ली, जत्थेदार मनमोहन सिंह जी,  ब्लॉक प्रमुख खटीमा रणजीत सिंह नामधारी, साधु सिंह नामधारी, संत कुलतार सिंह नामधारी, सुरेंदर सिंह नामधारी, राजपाल जी उपाध्यक्ष किसान आयोग उत्तराखण्ड, सरदार सुखदेव सिंह नामधारी बाजपुर, बलदेव सिंह नामधारी बाजपुर, एवं उनका जथा एवं कुछ खास शख्सियतों ने शामूलियत की

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Wednesday, 5 October 2022

लुधियाना में भी धूमधाम से मनाया गया दशहरा

 Wednesday 5th October 2022 at 08:31 PM

 पुड्डा ग्राउंड में हुआ दशहरे का यादगारी उत्सव  

श्री राम लीला कमेटी सिविल लाइन की ओर से किए गए थे विशेष प्रबंध 


लुधियाना
: 5 अक्टूबर 2022: (संजय//आराधना टाईम्ज़)::

लोगों की अपेक्षायों और उम्मीदों पर पूरा उतरते हुए इस बार भी श्री राम लीला कमेटी रजि सिविल लाइन और श्री शिव शक्ति मंदिर वृंदावन रोड द्वारा दशहरे के सुअवसर पर विशेष प्रबंध किए गए थे। हर बारीकी की तरफ ध्यान दिया गया था। सुरक्षा और ट्रैफिक सहित सब कुछ बहुत अच्छा रहा। 

दशहरा उत्सव  पुरानी कचहरी वाली जगह पुड्डा  ग्राउंड में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। दशहरा उत्सव का शुभारंभ  श्री शिव शक्ति मंदिर वृंदावन रोड से प्रभु राम जी की भव्य रथ यात्रा के साथ हुआ। यह रथ यात्रा श्री शिव शक्ति मंदिर से शुरू होकर कैलाश सिनेमा चौक, दमोरिया पुल से होती हुई पुड्डा ग्राउंड जाकर समाप्त हुई। इस रथयात्रा में राम सेना, रावण सेना, हनुमान सेना और शूर्पणखा की झांकी देखने योग्य थी। 

इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर दंडी स्वामी देवा दित्यानंद सरस्वती जी महाराज, राम शरणम राम पार्क के प्रमुख  अश्विनी बेदी, ड्रीमलैंड कॉलोनी हैबोवाल से बाबा मीना शाह, विधायक मदन लाल बग्गा, सरदार दलजीत सिंह ग्रेवाल, मेयर सरदार बलकार सिंह संधू, डिप्टी मेयर शाम सुंदर मल्होत्रा, शाम लाल सपरा, बलवीर गुप्ता, पूर्व पार्षद हेमराज अग्रवाल, पंजाब प्रभारी जीवन गुप्ता, प्रवीण बांसल, अनिल सरीन, एडवोकेट वीरेंद्र शर्मा बाँबी, राकेश कपूर, बॉबी जिंदल, सैंचूरी निट से राजेश ढ़ाड़ा, विक्रम सिद्धू , पुष्पेंद्र सिंगल, संवेदना ट्रस्ट से हेमंत सूद, कानतेंदु शर्मा, रजत सूद, पवन शर्मा, ओम प्रकाश त्रिपाठी, जीवन धवन, शहीद सुखदेव थापर से के परिवार से  अशोक थापर, समाज सेवक के के सूरी, संजय सूरी, संजय थापर, गोल्डी सभरवाल, बी जे पी नेता गुरदीप सिंह गोशा, डॉक्टर शिवा, मुकेश चढ्ढा, भाजपा नेत्री नीरू मित्तल, विरेश विज, अभिषेक मरवाहा, एस के गर्ग, संजय गुप्ता, आदि उपस्थित हुए। आए हुए सभी मुख्य मेहमानों को श्री राम लीला कमेटी द्वारा सम्मानित किया गया। 

इस मौके पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी जलाए गए। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के चेयरमैन विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी, वाइस चेयरमैन सुभाष गुप्ता, प्रधान कीमत राय सिकरी, सचिव सुमन गुप्ता, सीनियर उपप्रधान हरीश सग्गड़, वाइस चेयरमैन राजेश कश्यप,  महासचिव डॉक्टर एम एस चौहान, सचिव चंद्रमोहन खुराना, वित्त सचिव विश्वजीत सेठी, महासचिव सुनील मेहरा, सलाहकार संत कुमार अनेजा,  सचिव राजेश भनोट, चार्टर्ड अकाउंटेंट अनिल खन्ना,  कैशियर राजेंद्र शर्मा, सचिव प्रवीण शर्मा, विकास जिंदल, राजीव शर्मा, संगठन मंत्री अश्विनी महाजन, आशु शर्मा, गुरदीप सिंह भोगल, उप प्रधान संजीव सिंगला, हरकेश मित्तल, डिंपी मक्कड़ , योगेश मैनी , पंकज सेठी , आयुष अग्रवाल , प्रिंस शर्मा , राजीव कांसल , सचिव व  प्रेस प्रवीण शर्मा , राजन, सनी वासन, करण कपूर, सुमन वर्मा, नरेश जेठी,  कपिश बांसल, तजिंदर वशिष्ठ,  विक्रम आनंद, प्रवीण गोयल, अमित गुप्ता, अभय सहोता, राजन बांसल, अंकुर सग्गड़, रंजन धीर, बृज भूषण शर्मा, मेला प्रमुख गौरव कालिया, सम्राट शर्मा, करण मेहरा, अजय सोंधी, राजपाल दिवाकर, विकास टुहान, पवन खरबंदा, मुकेश कुमार आदि उपस्थित थे। 

कुल मिलाकर आयोजन इस बार भी यादगारी रहा। इसके साथ ही अगले वर्ष के आयोजन को और अविकसित करने के लिए भी विचार विमर्श हुआ। 

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Tuesday, 4 October 2022

सज गया है आस्था का केंद्र भगवान महाकालेश्वर का आंगन

Tuesday 4th October 2022 at 08:32 PM

अभिभूत होगी भक्त जनता, बनेगा एक नया गौरवशाली इतिहास

*इस विशेष लेख में है विस्तृत जानकारी मंदिर के भव्य दर्शन पर 

*प्रधानमंत्री 11 अक्टूबर को करेंगे ‘महाकाल लोक’ का लोकार्पण, 

*‘महाकाल लोक’ में हैं 190 मूर्तियां 

*सबसे लम्बी चित्रित दीवार कराती है अलौकिक सी अनुभूति 

*भगवान शिव से जुड़ी कथाओं का मिलेगा अभूतपूर्व वर्णन  


उज्जैन: 04 अक्टूबर 2022: (आराधना टाईम्ज़ डेस्क):: 

श्री महाकालेश्वर मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। लाखों भक्त  यहां पहुंच कर दर्शन पाना अपना सौभाग्य समझते हैं। बिना महाकाल की कृपा यहाँ पहुंचना है भी नामुमकिन सा ही। इस मंदिर का एक नया रूप बन कर अब तैयार है। इस नए रूप से मंदिर का एक एक पहलू देखने वाला बन जाएगा। 

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल भगवान महाकालेश्वर न केवल देश-प्रदेश, बल्कि विश्व में प्रसिद्ध हैं। लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष भगवान महाकालेश्वर की एक झलक पाने के लिये एकत्रित होते हैं। मोक्षदायी सप्तपुरियों में से एक अवन्तिका में विराजित हैं भगवान महाकाल। भगवान शिव से जुड़ी कथाओं, ज्ञान, भक्तिभाव और तन-मन शिवमय हो सके, इसके लिये ही बनाया गया है ‘महाकाल लोक’।

शासन द्वारा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिये हर तरह की सुविधा का बंदोबस्त किया गया है। महाकाल लोक का लोकार्पण देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 11 अक्टूबर को किया जायेगा।

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बनारस के कॉरिडोर की तर्ज पर उज्जैन में भी इसी तरह का विकास करने के बारे में संकल्प लिया और यह संकल्प अब पूर्ण हो चुका है। महाकाल लोक श्री महाकाल महाराज विकास योजना के प्रथम चरण के अन्तर्गत निर्मित हुआ है। वर्ष 2023 तक इस प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण के कार्य भी पूर्ण हो जाने की पूरी-पूरी संभावना है। आगामी 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री द्वारा महाकाल लोक आम श्रद्धालुओं के लिये खोल दिया जायेगा।

महाकाल लोक की अनुमानित लागत 800 करोड़ रुपये है। महाकाल लोक पहुंचने के लिये चार भुजाओं वाले महाकाल ओवर ब्रिज से होकर त्रिवेणी संग्रहालय जाना होता है। संग्रहालय के ठीक सामने लगभग 450 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। पार्किंग शेड के ऊपर सोलर पैनल लगाये गये हैं।

पार्किंग के ठीक सामने पिनाक द्वार है और उसके समीप स्थित है त्रिवेणी संग्रहालय। महाकाल लोक में प्रवेश करने के पहले नन्दी द्वार बनाया गया है। द्वार के बाहरी हिस्से में भगवान गणेश के दर्शन होते हैं। प्रवेश द्वार पर विशाल नन्दी की प्रतिमा बनाई गई है, जो कि अत्यन्त आकर्षक लगती है। इन्हें निहारते हुए महाकाल लोक में प्रवेश होता है। उल्लेखनीय है कि महाकाल लोक 900 मीटर लम्बे क्षेत्र में निर्मित किया गया है। महाकाल लोक के दाहिनी तरफ कमल ताल, शिव स्तंभ, सप्तऋषि परिसर, पब्लिक प्लाजा और नवग्रह परिसर बनाये गये हैं। यहां पर बैठक व्यवस्था की गई है। पास ही में कमल ताल है, जहां 25 फीट ऊंची शिव की प्रतिमा बनाई गई है। 

लोटस पोंड, ओपन एयर थिएटर तथा लेकफ्रंट एरिया और ई-रिक्शा व आकस्मिक वाहनों हेतु मार्ग भी पूर्ण हो चुका है। बड़े रूद्र सागर की झील में स्वच्छ पानी भरा जायेगा और यह सुनिश्चित किया गया है कि इस झील में गन्दा पानी बिल्कुल न मिलने पाये।

महाकाल लोक में बनी प्रतिमाएं, फव्वारे और आसपास की हरियाली आकर्षित करती है। कोबल्ड स्टोन की रोड क्रॉसिंग के जरिये पदयात्रियों की कनेक्टिविटी विकसित की गई है। पैदल चलते हुए शिव, देवी और श्रीकृष्ण से जुड़ी प्रतिमाएं नजर आती हैं। चित्रों के नीचे सम्बन्धित कथाएं भी अंकित की गई हैं। क्यूआर कोर्ड भी बनाये गये हैं, जिन्हें मोबाइल से स्केन कर कथा सुनी जा सकती है। इनमें शिव बारात का आकर्षक चित्रण किया गया है। एक शिल्प में कैलाश पर्वत को रावण ने उठा रखा है। कैलाश पर शिव परिवार भी विराजित है। एक शिल्प में देवी की नृत्य मुद्रा बनाई गई है।

सप्तऋषि परिसर में ऋषियों की विशाल प्रतिमाओं के दर्शन के साथ उनके बारे में आवश्यक जानकारी दी गई है। त्रिपुरासुर वध का चित्रण विशाल शिल्प में किया गया है। यहां रथ पर सवार भगवान शिव त्रिपुरासुर का वध कर रहे हैं।

पिनाक द्वार उनके लिये है जो सीधे मन्दिर में प्रवेश करना चाहते हैं। यह पौराणिक रूद्र सागर का घाट है। रूद्र सागर में लाईट एण्ड साउण्ड शो, लेजर शो और वाटर कर्टन शो दिखाये जायेंगे।

पूरे कॉरिडोर में देश की सबसे लम्बी भित्ति चित्र वाली दीवार है। इस दीवार पर पत्थरों पर शिव कथाएं उकेरी गई हैं। महाकाल लोक दो हिस्सों में बना है। एक तरफ पैदल पथ और दूसरी तरफ ईकार्ट पथ। बच्चे, वृद्ध, दिव्यांग और महिलाओं के लिये ईकार्ट की व्यवस्था नि:शुल्क की गई है। दोनों पथ के बीच 108 शिवस्तंभ शिव की विभिन्न मुद्राओं सहित निर्मित हैं, जो अलग ही छटा बिखेर रहे हैं। यह स्तंभ साधारण नहीं है, हर स्तंभ पर शिव की नृत्य मुद्रा अंकित है। इन्हीं पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाये गये हैं।

महाकाल लोक में शॉपिंग कॉम्पलेक्स भी बनाया गया है, जहां फूल, प्रसाद से लेकर धर्म और संस्कृति से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं की दुकानें हैं। कॉम्पलेक्स के समीप फेसिलिटी सेन्टर क्रमांक-2 स्थित है, जहां जूते, चप्पल और बैग जमा करने की व्यवस्था की गई है। समीप ही शौचालय और नाश्ते तथा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी की गई है।

महाकाल लोक में देश का पहला नाईट गार्डन बनाया गया है, जहां दिन में भी रात्रि का एहसास होता है। गोलाकार नाईट गार्डन के बीच शिव की विशाल ध्यानमग्न प्रतिमा बनाई गई है। इसके ठीक सामने के हिस्से में नीलकंठ परिसर है। लगभग 20 एकड़ में फैले महाकाल लोक में आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। रात्रि के समय जब मूर्तियों और म्युरल्स पर रोशनी पड़ती है तो पूरा लोक स्वर्णिम आभा से चमकने लगता है। 

(तस्वीर और जानकारी मोदीनामा से साभार)

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Monday, 3 October 2022

दशहरा पर राम भक्तों को प्रभु राम की कृपा प्राप्त होगी:अश्वनी बेदी

Monday:3rd October 2022 at 06:11 PM

विजय दशमी पर होगा 60 फुट रावण दहन:प्रधान कीमत राय सिकरी

लुधियाना: 3 अक्टूबर 2022: (संजय//आराधना टाईम्ज़)::

रामलीला का मंचन सदियों से लोगों को आकर्षित करता आ रहा है। रामायण के सभी पात्र अपनी अपनी  भूमिका में कोई गहरा संदेश मन पर छोड़ते हैं। जिन जिन स्थानों पर रामलीला का मंचन बेहद लोकप्रिय रहा है उनमें पंजाब का लुधियाना शहर भी शामिल है। लुधियाना में रामलीला और दशहरा सदियों से लोकप्रिय हैं। लुधियाना का दरेसी मैदान, उपकार नगर,  हैबोवाल, सराभा नगर, किचलू नगर और बहुत से इलाकों में इसकी लोकप्रियता अपने अपने समय में शिखर छूती रही है। जब पंजाब में  था उस समय के कुछ अल्पकाल को छोड़कर रामलीला और दशहरा हमेशां ही लोकप्रिय रहे। इस बार भी वही उत्साह देखने को मिल रहा है। 

श्री रामलीला कमेटी रजि. सिविल लाइन द्वारा दशहरा उत्सव पुरानी कचहरी वाली जगह पुड्डा  ग्राउंड में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी के उपलक्ष्य में माल रोड पर स्थित श्री राम शरणम राम पार्क के प्रमुख अश्विनी बेदी  द्वारा अमृतवाणी का पाठ किया गया। इस मौके पर हल्का सेंट्रल के विधायक अशोक पराशर पप्पी, विधायक चौधरी मदनलाल बग्गा और भाजपा नेता जीवन गुप्ता भी उपस्थित हुए। 

पहली बार श्री राम जन्म भूमि से राम सेना और रावण सेना द्वारा प्रदर्शन एवं रामानंद सागर की रामायण का एल इ डी स्क्रीन पर प्रतिदिन प्रसारण किया जा रहा है। इसका प्रसारण ठीक शाम 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक किया जाता है। 

रामायण में शूर्पणखा का मनमोहक स्वरूप देखने योग्य होगा। आए हुए सभी मुख्य मेहमानों को कमेटी द्वारा सम्मानित किया गया। इस मौके पर कमेटी के प्रधान कीमत राय सिकरी और महासचिव सुनील मेहरा ने कहा कि दशहरा पर्व वाले दिन 5 अक्टूबर को 60 फुट रावण का दहन किया जाएगा। 

इस अवसर पर रामलीला कमेटी के चेयरमैन विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी, वाइस चेयरमैन सुभाष गुप्ता, प्रधान कीमती राय सिकरी, सचिव सुमन गुप्ता, सीनियर उपप्रधान हरीश सग्गड़, वाइस चेयरमैन राजेश कश्यप,  महासचिव डॉक्टर एम एस चौहान, सचिव चंद्रमोहन खुराना, वित्त सचिव विश्वजीत सेठी, महासचिव सुनील मेहरा, सलाहकार संत कुमार अनेजा,  सचिव राजेश भनोट, चार्टर्ड अकाउंटेंट अनिल खन्ना,  कैशियर राजेंद्र शर्मा, सचिव प्रवीण शर्मा, विकास जिंदल, राजीव शर्मा, संगठन मंत्री अश्विनी महाजन, आशु शर्मा, गुरदीप सिंह भोगल, उमेश सोनी,   अमित गुप्ता आदि उपस्थित थे। 

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Thursday, 29 September 2022

सांई मूर्ती स्थापना का दसवां आयोजन जालंधर के निकट तीन को

Posted on 29th September 2022 at 06:36 PM Updated on 3rd October 2022 at 10:24 AM

सांय सात बजे शुरू हो कर सांई इच्छा तक चलेगा कार्यक्रम 

जालंधर: 29 सितंबर 2022: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्ज़):: 

साईं बाबा के भक्तों में एक परिवार डाक्टर जगमोहन उप्पल का भी है। कई बरसों से पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ सांई के चरणों में समर्पित। चिक्तिसा विज्ञान की पूरी शिक्षा और ज्ञान के साथ मान्यता यही कि वही होता है जो सांई करते हैं। ईश्वरीय सत्ता ही सर्वोच्च है और सांई के ज़रिए ही होती है ईश्वर तक पहुंच। वही बनते हैं पुल। वही पकड़ते हैं हर संकट में हमारा हाथ। उनके बिन कोई नहीं हमारा। 
यह परिवार जालंधर में भी सक्रिय हैं और नकोदर के क्षेत्र में भी। उनके साथी भी साईं के भक्त हैं। इस बार खांबरा में सांई बाबा का दसवां मूर्ती स्थापना कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन सोमवार तीन अक्टूबर 2022 को सांय सात बजे शुरू हो जाएगा। भजन कीर्तन के अलौकिक से संगीत से एक आध्यात्मिक रंग छा जाएगा। एक अमृत वर्षा का अहसास होगा जिसमें वहां पहुँचने वालों में से भी किस्मत वाले लोग ही सराबोर हो पाएंगे। तन और मन के क्लेश की ताप को हर लेंगीं इस अदृश्य अमृत वर्षा की बूंदें।  आप चाहें तो स्वयं पहुंच कर भी इसका अहसास कर सकते हैं। 

इस सारे आयोजन की सफलता के लिए डाक्टर जगमोहन उप्पल के सहयोगी साथियों में राजेश चोपड़ा, सुदेश कक्क्ड़, तरन्नुम कौर खख, मनीत कलसी, सिधानी सहगल के नाम भी उल्लेखनीय हैं। यह साड़ी टीम बहुत ही श्रद्धा आस्था और सम्मान के साथ सारा आयोजन करती है।

इस बार भी इस भव्य आयोजन में सब कुछ देखने वाला होगा। सांई बाबा की कृपा से यहां आने वाले लोगों में भक्ति भावना भी जगेगी और और सब का मालिक एक की भावना भी मज़बूत होगी। आप सभी भी सांईं वंदना के इस आयोजन में शामिल होने के लिए ह्रदय से निमंत्रित हैं। 

दिलचस्प बात यह भी कि इस आयोजन के लिए सक्रिय लोगों के पास सांई बाबा के साथ अपने  अनुभवों की सच्ची कहानियां भी हैं जो आपको बिलकुल नई लगेंगी। आप चाहें तो आप की सच्ची कहानी भी सुनी जाएगी। इस आयोजन में शामिल हो कर आप भी सांईं कृपा के पात्र बन जाएंगे। 

इन सांईं भक्तों के दरम्यान पहुंच कर आप को पावन धाम शिरड़ी की सुखद यात्रा का अहसास होगा। आप इस महान यात्रा के आनंदमई अहसास को महसूस कर पाएंगे। आप सभी के स्वागत में आप सभी को यहाँ मौजूद सभी सांई भक्त उत्सुक और तैयार मिलेंगे। आपको लगेगा जैसे आप एक बड़े सात्विक परिवार में पहुँच गए जिसकी पहुंच भगवान की सत्ता तक है।  

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Wednesday, 31 August 2022

हर तरफ धूम है गणेश जी की-इस बार विशेष योग भी हैं

गणेश जी के जन्म पर भी इसी तरह के योग थे 

चंडीगढ़: 30 अगस्त 2022: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::

हर तरफ होती है गणेश उत्सव की धूम। इस बार भी है। यहां भी है। हर तरफ होता है एक नया जोश और नया उत्साह। इस त्यौहार पर उत्सव सा माहौल स्वतः ही बन जाता है। मन में खुशियों की लहरें उठने लगती हैं। झूमना और गाना हर तरफ देखा जा सकता है।बच्चे बज़ुरग नौजवान सभी उत्साह में हैं। 

गौरतलब है कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणपति बप्पा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हर गली मौहल्ले में छोटे बड़े आजोजन देखे जा सकते हैं। इस दिन घर-घर में बप्पा की स्थापना की जाती है। इसका सिलसिला 10 दिनों तक चलता है। गणेश उत्सव का ये पर्व बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। 

गणेश जी की पूजा अर्चना के बिना बात सही से शुरू ही नहीं होती है। इसी से होता है वास्तविक शुभारम्भ। अब तो उत्तर भारत में इसका प्रचलन बहुत बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि हिंदू धर्म में गौरी पुत्र भगवान श्री गणेश को सुख, समृद्धि, वैभव, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी बुद्धि के भी देवता माने जाते हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा जरूर की जाती है। पौराणिक मान्यता है के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्याह्र काल में, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। भाद्रपद माह की गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी और डण्डा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी में कुछ विशेष संयोग बन रहे हैं। इस संयोगों से बहुत से लोगों को लाभ मिल सकेगा। इन में से 3 शुभ योग और 1 सर्वार्थ सिद्धि योग शामिल है। आइए जानते हैं चतुर्थी से लेकर चतुर्दशी तक के शुभ योग के बारे में इन योगों पर सही पूजन से फायदा भी पक्का मिलेगा। 

कैसे हैं गणेश चतुर्थी पर बन रहे यह खास संयोग 

कुल मिलाकर इस बार की गणेश चतुर्थी बेहद खास है। इस बरस करीब-करीब वो सभी ख़ास योग-संयोग बन रहे हैं, जो गणेश जी के जन्म पर पर भी बने थे। इसलिए ऐसा अतिविशेष संयोग बार बार कहां आता है। उल्लेखनीय है कि गणपति का आगमन चित्रा नक्षत्र, रवि योग और शुक्‍ल योग में होगा. गणेश चतुर्थी पर दोपहर के समय चित्रा नक्षत्र में ही पार्वती जी ने मिट्टी के गणेश बनाए थे और उसमें प्राण डाले थे। रवि योग और शुक्‍ल योग दोनों को काफी शुभ माना गया है। इसलिए इस सरे संयोग का फायदा भी तकरीबन सभी को ही होगा। 

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि 31 अगस्त, बुधवार को गणेश चतुर्थी है। और इस बार चतुर्थी तिथि रवि योग में है। रवि जोग का खास महत्व होता ही है। रवि योग प्रात: 05:58 बजे से लेकर देर रात 12:12 बजे तक है।  इसके अलावा दो शुभ योग ब्रह्म और शुक्ल योग भी बन रहे हैं। इसमें शुक्ल योग प्रातः काल से लेकर रात 10:48 बजे तक है। उसके बाद से ब्रह्म योग प्रारंभ हो जाएगा। यह तीनों योग पूजा पाठ की दृष्टि से शुभ माने जाते हैं। बड़े बड़े कार्य इन योगों पर सिद्ध हो जाते हैं। 

तिथि के हिसाब से शुभ योग

इसलिए अब धन सम्पदा के रुके हुए काम भी बनेंगे। ज़मीन जायदाद के उलझे हुए मामले भी सुलझ जाएंगे। स्वास्थ्य भी उत्तम हो जाएगा। रिश्ते नातों में भी मिठास आएगी। कारोबारी संबंध भी सुधरेंगे। दुश्मन स्वयं ही मंद पड़ जाएंगे। बस विधि विधान का ध्यान ज़रुर रखियेगा। आस्था से ही होते हैं चमत्कार। आस्था अंतर्मन से ही आएगी। 

इस बार 31 अगस्त, बुधवार को रवि योग प्रात: 05:58 से देर रात 12:12 बजे तक रहेगा। 

इसी तरह 01 सितंबर, गुरुवार को रवि योग, देर रात 12:12 से  प्रातः 05:59 बजे तक रहेगा। 

इसके बाद अगले ही दिन 02 सितंबर, शुक्रवार: सर्वार्थ सिद्धि योग, रात्रि 11:47 से 3 सितंबर, शनिवार प्रातः 06:00 बजे तक बनेगा। 

 फिर उसी तारीख को अर्थात 02 सितंबर, शुक्रवार को भी रवि योग: प्रातः 05:59 बजे से रात्रि 11:47 बजे तक बना रहेगा। 

इसके बाद 3 सितंबर, शनिवार कोई  कोई विशेष योग नज़र नहीं आ रहा। 

फिर 4 सितंबर रविवार को बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग रात्रि 09:43 से प्रातः 06:01 बजे तक, रवि योग भी सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ही। यह एक अति विशेष अवसर होगा। 

फिर 5 सितंबर सोमवार को भी रवि योग, पूरे दिन रहेगा। आपके कार्य गणेश जी की कृपा से सिद्ध होंगें। 

इसके बाद 6 सितंबर, मंगलवार: रवि योग, प्रातः 06:01 बजे से शाम 06:09 बजे तक रहेगा। यह भी बहुत अच्छा अवसर रहेगा। 

अगले ही दिन अर्थात 7 सितंबर, बुधवार को त्रिपुष्कर योग, प्रातः 03:04 बजे से सुबह 06:02 बजे तक रहेगा। साधकों को विशेष लाभ होगा। 

इसके बाद 8 सितंबर, गुरुवार को रवि योग, दोपहर 01: 46  बजे से अगले दिन सुबह 06:03 बजे तक रहेगा। 

9 सितंबर, शुक्रवार को रवि योग, सुबह 06:03 बजे से सुबह 11:35 बजे तक बनेगा। इस काम समय में भी आप सभी लाभाविंत हो सकेंगे।