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Tuesday, 18 October 2022

वार्षिक जप-प्रयोग तथा अस्सू का मेला श्रद्धा और आस्था से लगा

होती रही प्रेम, ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिकता के रंगों की अमृत वर्षा 

सतगुरु दलीप सिंह जी  गुरु के अवतरण की ज़रूरत और अहमियत 

*जब तक गुरु अवतार धारण करके नहीं आते तब तक मार्गदर्शन भी नहीं 

*तब तक गुरुवाणी को भी समझा नहीं जा सकता  

श्री गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब, डेरा बाबा तरसेम सिंह में  दीवान 


डेरा कार सेवा बाबा तरसेम सिंह/उत्तराखंड: 17  अक्टूबर 2022:(गुरमीत सग्गु//आराधना टाईम्ज़)::  

प्रत्येक बरस की तरह इस वर्ष भी सतगुरु दलीप सिंह जी की छत्रछाया में नामधारी संगत द्वारा रखे गए  40 दिन के वार्षिक जप-प्रयोग (सिमरन साधना) के उपरांत दो दिनों का अस्सू का मेला; आपसी एकता, प्रेम, ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिकता के रंग बिखेरता हुआ सम्पन्न हुआ। 
इस दौरान अनुशासन के नियमों का भी पूरी तरह से पालन किया गया और प्रत्येक प्रोग्राम को लाइव टेलेकास्ट कर, दूर बैठी संगतों तक संचारित किया गया। वर्णनयोग्य है कि नामधारी पंथ के सृजनहार सतगुरु राम सिंह जी द्वारा दर्शाये गए दिशा-निर्देश अनुसार चलते हुए, नामधारी सिक्ख प्रत्येक वर्ष जप-प्रयोग के आयोजन द्वारा अपने जीवन को गुरु वाणी अनुसार जीने तथा इस पर दृढ रहने का अभ्यास करते हैं। इस दौरान अमृत वेले से लेकर शाम तक लगभग  8-9 घण्टे परमात्मा के साथ जुड़कर, एकाग्रचित हो कर सेवा-सिमरन, कथा-कीर्तन, गुरु इतिहास की जानकारी लेते हुए एक आदर्श जीवन जीने के गुण सीखते हैं। इस समागम में विशेष रूप से सतगुरु दलीप सिंह जी ने विदेश से लाईव दर्शन देकर अपने प्रवचनों से निहाल किया। आपने संगत को गुरुवाणी आशय अनुसार चलते हुए अपने परिवारिक व समाजिक जीवन सुखी रखने एवं आदर्श जीवन जीने के तरीके बताते हुए एक दूसरे से मीठा बोलने, क्षमा करने, विनम्रता जैसे गुण धारण करने, किसी को बुरा न कहने एवं स्त्रियों को मंदा न कहने भाव शुभ कर्म करने की भी शिक्षा दी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सतगुरु नानक देव जी ने "आसा की वार" में लिखा है कि जीवन में पूर्ण सतगुरु बड़े सौभाग्य से मिलते हैं और सतगुरु ही हमारे जीवन में अज्ञान का अँधेरा दूर कर सकता है तथा सतगुरु के चरण कमलों से जुड़ कर जीवन का पार उतारा हो सकता है। आपने गुरुवाणी और गुरु को भिन्न बताया और कहा कि जब तक गुरु अवतार धारण करके नहीं आते, गुरुवाणी को समझा नहीं समझा जा सकता, क्योंकि गुरुवाणी तो गुरु जी के मुखवाक से उच्चारी हुई है। इसके साथ ही आपने कहा कि नामधारी सतगुरु राम सिंह जी को हमेशा याद रखने को कहा क्योंकि उन्होंने हमें गुरुवाणी के साथ जोड़ा एवं शुभ कर्म करने लगाया। 

40 दिन लगातार चलता हुआ यह कार्यक्रम प्रतिदिन आनन्द और सकारात्मक-ऊर्जा प्रदान करता रहा।  इन दिनों में वातावरण को शुद्ध करने लिए हवन आदि भी मर्यादा अनुसार किए गए। इस अवसर पर गुरमत मर्यादा अनुसार,  गुरुवाणी के पाठों के भोग डाले गए एवं गुरु का अतूट लंगर वितरित किया। इस शुभ अवसर पर कथा- कीर्तन एवं नाम-वाणी का प्रवाह चला। यह सारा कार्यक्रम गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब, डेरा कार सेवा बाबा तरसेम सिंह / उत्तराखंड कमेटी के सहयोग से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सूबा भगत सिंह जी बहेड़ी, जथेदार  कवि पंजाब सिंह पंजाब, सूबा तरसेम सिंह जी इंग्लैंड, सूबा रतन सिंह जी, सूबा अमरीक  सिंह जी, जत्थेदार संत करतार सिंह नशहरे वाले, जत्थेदार अमरीक सिंह, जत्थेदार अवतार सिंह, जत्थेदार गोपाल सिंह, जत्थेदार कृपा सिंह, सूबा दर्शन सिंह जी, गुरमीत सग्गु दिल्ली, जत्थेदार मनमोहन सिंह जी,  ब्लॉक प्रमुख खटीमा रणजीत सिंह नामधारी, साधु सिंह नामधारी, संत कुलतार सिंह नामधारी, सुरेंदर सिंह नामधारी, राजपाल जी उपाध्यक्ष किसान आयोग उत्तराखण्ड, सरदार सुखदेव सिंह नामधारी बाजपुर, बलदेव सिंह नामधारी बाजपुर, एवं उनका जथा एवं कुछ खास शख्सियतों ने शामूलियत की

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Monday, 5 April 2021

होला मोहल्ला पर जीवन नगर में हुए विशेष आयोजन

सतगुरु दलीप सिंह ने बताया समाज को मज़बूत बनाने का गुर 

*सतगुरु दलीप सिंह जी ने स्त्रियों को महान समागम का संचालन करने का दायित्व संभाला  

*होले महल्ले के दौरान किया नया ऐलान 

*बहू-बेटियों को समाज में आगे बढ़ाने से उनका हौंसला एवं आत्मसम्मान बढ़ता है

*दूसरे दिन भी नामधारी होला-महल्ला का समागम आस्था की भावना से हुआ 

*सेवा, प्रभु भक्ति एवं नई परम्पराओं का सबूत देता हुआ 

लुधियाना: 3 अप्रैल 2021: (*गुरमीत सिंह सग्गू//आराधना टाईम्ज़)::

गुरद्वारा श्री जीवन नगर में चल रहा  प्रोग्राम वर्तमान नामधारी प्रमुख सतगुरु दलीप सिंह जी की अगुवाई में पूरे उत्साह, श्रद्धा एवं प्रेम भक्ति से सराबोर रहा । यह प्रोग्राम बहुत ही नियमबद्ध  एवं अनुशासित तरीके से मनाया जा रहा है।  इस दौरान सतगुरु दलीप सिंह जी की आज्ञानुसार सारे समागम का प्रबंधन विशेष रूप से नामधारी महिलाओं ने संभाला। समागम में शामिल हो प्रत्येक कार्यभार संभाला और सतगुरु जी द्वारा दिए अधिकारों को अपना धन्य भाग समझा। आज फिर से इस समागम के दौरान नाम-सिमरन, कवि दरबार, कथा-कीर्तन तथा गुरुवाणी के पाठों का प्रवाह चला।

यह प्रोग्राम आज "आसा की वार" से शुरू हुआ तथा सतगुरु दलीप सिंह जी ने (लाइव कॉन्फ्रेंस) द्वारा अपने  कल्याणकारी संदेश द्वारा बताया कि गुरुवाणी में लिखा है, "दुख रोग संताप उतरै सुनी सच्ची बानी" अतः आप जी ने बताया कि गुरुवाणी पढ़ने से एक नहीं अनेक लाभ हैं, आपने  गुरुवाणी पढ़ने, सुनने एवं मानने के लाभों से परिचय करवाया।  

इस समागम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इस महान समागम की जिम्मेवारी नामधारी महिलाओं को देकर  महिलाओं के सम्मान में एक और क्रन्तिकारी पहल की। आप जी ने बताया कि मैंने स्त्रियों को समाज में आगे बढ़ाने के लिए, इस समागम का प्रबंधन महिलाओं को सौंपा है ताकि उनमें काम करने का उत्साह और आत्मविश्वास  बढ़े कि वे किसी भी काम में पीछे नहीं हैं।  

आप जी ने बेटियों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा पढ़ाने तथा गरीबों की मदद करने की प्रेरणा दी। आप ने कहा कि हमें फिजूलखर्ची और महंगे लंगर लगाने छोड़कर जरूरतमंद लड़कियों को पढ़ाने तथा जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए। आप स्त्रियों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए यत्नशील हैं।                                   

आज होले महल्ले के दूसरे दिन सुबह अमृत वेले  आसा की वार के कीर्तन में सारी संगत ने रागी सिंघों के साथ मिलकर गुरुवाणी गायन किया । इस अवसर पर सतगुरु गोबिंद सिंह जी के फौजी सिक्खों अर्थात गतके की टीम ने ने वीर रस का प्रतीक गतके के जौहर दिखाकर सब को निहाल किया। इसके साथ ही पंथ के महान जत्थेदारों, जत्थेदार जोगिन्दर सिंह मुक्ता जी ने साथ में होले महल्ले से संबंधित वीर रस से ओत-प्रोत  शबद गायन किया; "सुरा सो पहचानिए जो लरै दीन के हेत"  इस अवसर पर जसपाल सिंह, प्रधान सुखदेव सिंह, रघबीर सिंह सग्गू, अजीत सिंह, सूबा बलजीत सिंह, मोहन सिंह झब्बर, अंग्रेज सिंह, नरिंदर सिंह, गुरनाम सिंह, गुरभेज सिंह, मुख्तयार सिंह, बीबी दलजीत कौर, सतनाम कौर, जसवीर कौर, मंजीत कौर,कुलदीप कौर, जसविंदर कौर, मंजीत कौर, राजपाल कौर, भूपिंदर कौर, संदीप कौर, भगवंत कौर, गुरवंत कौर, हरप्रीत कौर, रंजित कौर, बलविंदर कौर के अलावा विशाल संगत हाजिर हुई । गुरु का लंगर सुनियोजित तरीके से चलता रहा। 

*गुरमीत सिंह सग्गू नामधारी समाज में परिवार सहित सक्रिय रहने वाले सज्जन पुरुष हैं।