Tuesday, 21 August 2018

Hazrat Sunet Wali Shah 27th June 2018

कर्म परछाई की तरह पीछा करते हैं

*महाभारत के युद्ध के बाद*

Vipul Gaur ने फेसबुक पर ज़िंदगी इतनी भी आसान नहीं ग्रुप में पोस्ट किया 
18 दिन के युद्ध ने द्रोपदी की उम्र को 80 वर्ष जैसा कर दिया था शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी। उसकी आंखे मानो किसी खड्डे में धंस गई थी, उनके नीचे के काले घेरों ने उसके रक्ताभ कपोलों को भी अपनी सीमा में ले लिया था। श्याम वर्ण और अधिक काला हो गया था। युद्ध से पूर्व प्रतिशोध की ज्वाला ने जलाया था और युद्ध के उपरांत पश्चाताप की आग तपा रही थी। ना कुछ समझने की क्षमता बची थी ना सोचने की। कुरूक्षेत्र मेें चारों तरफ लाशों के ढेर थे । जिनके दाह संस्कार के लिए न लोग उपलब्ध थे न साधन। शहर में चारों तरफ विधवाओं का बाहुल्य था पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और उन सबकी वह महारानी द्रौपदी हस्तिनापुर केे महल मेंं निश्चेष्ट बैठी हुई शूूूून्य को ताक रही थी । तभी कृष्ण कक्ष में प्रवेश करते हैं! 
महारानी द्रौपदी की जय हो। 
द्रौपदी कृष्ण को देखते ही दौड़कर उनसे लिपट जाती है कृष्ण उसके सर को सहलातेे रहते हैं और रोने देते हैं थोड़ी देर में उसे खुद से अलग करके समीप के पलंग पर बिठा देते हैं। 
*द्रोपती* :- यह क्या हो गया सखा ऐसा तो मैंने नहीं सोचा था।
*कृष्ण* :-नियति बहुत क्रूर होती है पांचाली वह हमारे सोचने के अनुरूप नहीं चलती हमारे कर्मों को परिणामों में बदल देती है तुम प्रतिशोध लेना चाहती थी और तुम सफल हुई द्रौपदी ! तुम्हारा प्रतिशोध पूरा हुआ । सिर्फ दुर्योधन और दुशासन ही नहीं सारे कौरव समाप्त हो गए तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए ! 
*द्रोपती*:-सखा तुम मेरे घावों को सहलाने आए हो या उन पर नमक छिड़कने के लिए! 
*कृष्ण* :-नहीं द्रौपदी मैं तो तुम्हें वास्तविकता से अवगत कराने के लिए आया हूं। हमारे कर्मों के परिणाम को हम दूर तक नहीं देख पाते हैं और जब वे समक्ष होते हैं तो हमारे हाथ मेें कुछ नहीं रहता।
*द्रोपती* :-तो क्या इस युद्ध के लिए पूर्ण रूप से मैं ही उत्तरदाई हूं कृष्ण ? 
*कृष्ण* :-नहीं द्रौपदी तुम स्वयं को इतना महत्वपूर्ण मत समझो।
लेकिन तुम अपने कर्मों में थोड़ी सी भी दूरदर्शिता रखती तो स्वयं इतना कष्ट कभी नहीं पाती।

*द्रोपती* :-मैं क्या कर सकती थी कृष्ण ?
*कृष्ण*:- 👉जब तुम्हारा स्वयंबर हुआ तब तुम कर्ण को अपमानित नहीं करती और उसे प्रतियोगिता में भाग लेने का एक अवसर देती तो शायद परिणाम कुछ और होते! 
👉इसके बाद जब कुंती ने तुम्हें पांच पतियों की पत्नी बनने का आदेश दिया तब तुम उसे स्वीकार नहीं करती तो भी परिणाम कुछ और होते। 
और 
👉उसके बाद तुमने अपने महल में दुर्योधन को अपमानित किया वह नहीं करती तो तुम्हारा चीर हरण नहीं होता तब भी शायद परिस्थितियां कुछ और होती।

*हमारे शब्द भी हमारे कर्म होते हैं द्रोपदी और हमें अपने हर शब्द को बोलने से पहले तोलना बहुत जरूरी होता है अन्यथा उसके दुष्परिणाम सिर्फ स्वयं को ही नहीं अपने पूरे परिवेश को दुखी करते रहते हैं ।*

*संसार में केवल मनुष्य*
*ही एकमात्र ऐसा प्राणी*
*है*

*जिसका " जहर "*
*उसके " दांतों " में नही,*
*" शब्दों " में है...*

*इसलिए शब्दों का प्रयोग सोच समझकर करिये। ऐसे शब्द का प्रयोग करिये जिससे किसी की भावना को ठेस ना पहुंचे।*

🙏🏻*जय श्री कृष्णा* 🙏🏻

Monday, 30 July 2018

Ludhiana:नवनिर्मित ओशो मेडिटेशन सेंटर में ध्यान शिविर संपन्न

अमेरिका से आई माँ किम लॉरियल ने करवाई ध्यान विधियां
लुधियाना: 29 जुलाई 2018: (आराधना टाईम्ज़ टीम )::
पंजाब के हालात फिर नाज़ुक हैं। इस बार नशे की ओवर डोज़ आये दिन किसी न किसी घर में मातम ला रही है। पंजाब का शायद ही कोई गाँव बचा हो जहां नशे के आतंक ने मौत की दस्तक न दी हो। पंजाब की युवा पीढ़ी फिर मौत के मुँह में जा रही है। सियासी और समाजिक लोग इस मुद्दे पर कैंडल मार्च जैसे आयोजन करके अखबारी सुर्खियां बटोरने में लगे हैं। इस समस्या के हल की बात चलती है तो पता लगता है कि अफीम और भुक्की के ठेके खोल कर समस्या हल हो जाएगी। यानि एक नशा छुड़वा कर दूसरा नशा लगा दिया जायेगा। युवा वर्ग होश में आये यह बात शायद कोई नहीं चाहता। 
ऐसे माहौल में एक बार फिर पंजाब में जगा है ओशो का जादू। युवा वर्ग को नशे और जुर्म की दुनिया से दूर केवल मस्ती की दुनिया--एक ऐसी मस्ती जिसमें पूर्ण होश भी है। एक ऐसी मनोअवस्था जो ज़िंदगी और समाज की हर चुनौती का सामना करने में सक्षम बनने की क्षमता देती है। 
कैम्प में शामिल लोगों को एक नज़र देखा तो महसूस हुआ वे लोग बदल चुके थे। उनके चेहरों पर एक ऊर्जा की चमक थी। पूछने पर पता चला यह ऊर्जा और चमक उन्हें इसी कैम्प से मिली।  यह ध्यान शिविर तीन दिनों तक चला।  सादा सा सात्विक भोजन और संगीत की लहरियों में तन और मन को तनावमुक्त करती हुई साधना पद्धतियां।
यहां पुरुष भी थे-महिलाएं भी---पर किसी भी चेहरे पर वासना की कोई झलक तक न थी। सभी एक दिव्य रंग में रंगे हुए थे।फिर भी हमारी टीम का मन आशंकित था भला ऐसे कैसे हो सकता है। इतने में एक साधक ने किसी युवा और खूबसूरत साधिका को आवाज़ दी-मां ! ज़रा इधर आना। मीडिया वाले आये हैं।
बस यह मां शब्द सुनते ही हमारी सारी शंकाये दूर हो गयी। वास्तव में ओशो ने महिला को मां का दर्जा दे कर एक दैवी सम्मान दिया था। ओशो के पैरोकार अंध विश्वासी नहीं होते। उन्हें विश्वास नहीं शक करना सिखाया जाता है। यही शक उनको मार्ग दिखता है। हर रोज़ नए अनुभव कराता है।
ओशो लुधियाना मेडिटेशन सोसाइटी द्वारा गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में पहला तीन दिवसीय ओशो ध्यान शिविर करवाया गया। हंबड़ा रोड स्थित नवनिर्मित ओशो लुधियाना मेडिटेशन सेंटर में आयोजित इस ध्यान शिविर में अमेरिका से ओशो की विशेष दूत मा किम लॉरियल में ध्यान विधियों द्वारा सैंकड़ो मित्रों का मार्गदर्शन किया। विभिन ध्यान विधिया करवाते हुए किम लॉरियल ने सभी को ध्यान के द्वारा तनाव मुक्त जीवन जीने की कला से अवगत करवाया। साथ ही जीवन की सही राह के बारे में ओशो द्वारा रचित तंत्रा ध्यान विधियों को विस्तार पूर्वक समझाया गया। इस दौरान उत्तराखंड ऋषिकेश से पधारे संगीतज्ञ वायोलीन वादक शिवानंद शर्मा, बासुरी वादक  शिवरात्रि गिरि बाबाजी, तबला वादक सोमनाथ निर्मल ने संगीत यंत्रो के माध्यम से ध्यान विधिया करवाई। शिविर में 25 के करीब मित्रों ने सद्गुरु ओशो के नाम की दीक्षा ली। शिविर प्रबंधक स्वामी सुमित ने बताया मित्रों के उत्साह को देखते हुए अगले महीने इसी सेंटर में एक और ध्यान शिविर लगाया जाएगा, जिसकी तिथि की सूचना जल्द ही सभी को पहुंचा दी जाएगी। इस कैम्प को सफल बनाने में स्वामी सुमित, स्वामी रंजीत, स्वामी कुनाल धवन , स्वामी रिंकू , स्वामी अशोक भारती, स्वामी हितेश गुप्ता, स्वामी अमरजीत, स्वामी अजय, स्वामी रमन, स्वामी अतुल सहित सैंकड़ो मित्रों ने सहयोग दिया। (रेक्टर कथूरिया//एम एस भाटिया//सहयोग: अशोक भारती)

Friday, 8 June 2018

लाखों मुस्लमानों ने अदा की अलविदा जुम्मे की नमाज

Fri, Jun 8, 2018 at 3:20 PM
रमजान का महीना अल्लाह से इश्क का महीना: शाही इमाम पंजाब
लुधियाना: 8 जून 2018: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
आज पवित्र रमजान शरीफ के अलविदा जुम्मा के मौके पर फील्डगंज चौंक स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में हजारों मुस्लमानों ने नमाज अदा की। नमाजियों की संख्या को देखते हुए शाहपुर रोड व जेल रोड पर नमाज के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। इस मौके पर संबोधित करते हुए पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि रमजान शरीफ का महीना अल्लाह ताआला से इश्क और मोहब्बत का महीना है। इस मुबारक महीने में बंदा खुदा और उसके रसूल सल्ललाहु अलैहीवसल्लम से अपने इश्क का इकाहार करते हुए गुनाहों से तौबा करता है। शाही इमाम मौलाना हबीब ने कहा कि रमजान के आठ रोजे अभी बाकी है, हमें चाहिए कि इस वक्त की खूब कद्र करे और ज्यादा से ज्यादा इबादत में लगे रहे। खुले दिल से गरीबों की मदद करें। आपसी रंजिशों को खत्म करके एक-दूसरे से मोहब्बत का इकाहार करे। वर्णनयोग है कि आज पवित्र रमजान शरीफ का आखिरी जुम्मा था। शहर की सभी मस्जिदों में लाखों की संख्या में नामाजी एकत्रित हुए। नायब शाही इमाम मौलाना उसमान रहमानी लुधियानवी ने बताया कि शहर में 5 लाख से ज्यादा मुस्लमानों नें अलविदा जुम्मे की नमाज अदा की। तस्वीर में  आप हैं जामा मस्जिद लुधियाना में हजारों की संख्या में मुस्लमान नमाज अदा करते हुए। आप देख सकते हैं इनके चेहरे पर अंतर्मन की कितनी श्रद्धा झलक रही है। इबादत में झुके सिर ही इन्हें ज़िंदगी में हर मुसीबत से दूर रखते हुए हर क्षेत्र में विजय दिलाएंगे। गौरतलब है कि रमज़ान या रमदान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है। इस साल रमजान का महीना अंग्रेजी कैलेंडर की 28 मई से शुरू है। इस बार पहला रोजा भारत में 15 घंटे लंबा होगा। रमजान को रहमतो और बरकतों का महीना कहा जाता है। इस माह को कुरान शरीफ के नाजिल का महीना भी माना जाता है। रमजान का महीने 24 जून को पूरा होगा।

Sunday, 27 May 2018

बुराई की जड़ पर वार करना ज़रूरी-साध्वी महाशारदा भारती

Sun, May 27, 2018 at 2:27 PM
तभी मानव वास्तव में मानव बन पायेगा
लुधियाना: 27  मई 2018: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा गांव हरनाममपुरा   में अध्यात्मिक सत्संग विचारों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समुधर भजन ‘देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान’ के गायन से की गई। 
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को अध्यात्मिक विचार देते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी  महाशारदा भारती जी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज नफरत, स्वार्थ, आतंकवाद जैसी तरह-तरह की कुरीतियों से ग्रस्त है। अमानवीय आचार-विचार मानवीय निष्ठाओं का गला घोंट रहे हैं। समाज में तरह-तरह की कुरीतियां मानव का दमन कर रही हैं। ऐसा नहीं कि कुरीतियों को समाप्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा, निरन्तर कोशिशें जारी हैं, पर परिणाम सामने नजर नहीं आ रहे। दरअसल प्रयास तो मौजूद हैं, परन्तु सही दिशा का अभाव है। हमें खत्म करना था आतंकवाद को, लेकिन हमने खत्म किये आतंकवादी, हमें लगता है कि इसमें गलत क्या है। यहां पर एक छोटी सी गलती हो गई, हमने समाप्त करना था आतंकवाद एक, आतंकवादी को मार दिया और अनेकों आतंकवादियों ने जन्म ले लिया। ठीक वैसे ही जैसे एक

रोगी का रोग खत्म करने के स्थान पर हम उसका यदि रोग कुछ समय के लिए दबा दें तो क्या उसका रोग खत्म होगा, नहीं। उसका रोग समाप्त करने के लिए हमें रोग की जड़ तक जाना पड़ेगा, फिर ही वह रोगी रोग मुक्त होगा। साध्वी जी ने कहा जैसे यदि कोई जंगली पौधा उग जाए तो उसे समाप्त करने के लिए उसके पत्ते, टहनियों को काट देना प्रयत्न नहीं होता, उसकी जड़ पर वार करना पड़ता है। ठीक वैसे ही समाज में फैली समस्त कुरीतियों को ऊपज मानव मन है, आज आवश्यकता है ब्रह्मज्ञान द्वारा मन को सही दिशा पर लेकर जाने की। आज आवश्यकता है निकृष्ट विचारों का दमन करने की और यदि ऐसा हो जाता है तो
मानव वास्तव में मानव बन पायेगा। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्मज्ञानी साधकों ने प्रभु ध्यान कर विश्व शांति की मंगल कामना की। 

Thursday, 1 February 2018

अध्यातिमक परिर्वतन द्धारा ही युवा वर्ग कुरीतयो का अंत कर सकता है

Thu, Feb 1, 2018 at 11:08 AM
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के द्धारा होटल महल  में संगीत मई भजन संधया का आयोजन किया गया

लुधियाना: 31 जनवरी 2018: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
हमारी सनातन पद्धति को निभाते हुए श्री  रजनीश धिमान (बी.जे.पी सैकरेटरी लुधियाना), ज्ञान चनद शरमाजी के द्वारा ज्योति को प्रज्जवलित  किया गया। जिसमें सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के परम शिष्य साध्वी गरिमा भारती जी ने अध्यातम की जानकारी देते हुए समुह को संबोधित किया कि आज इंसान ने संसार की हर बुलंदी को छुआ है। चाहै वह विज्ञान का जगत हो या फिर राजनीतिक जगत। पर इन बुलंदीयो को प्राप्त कर लेना ही जीव की असल प्राप्ति नही है। कयोकि इन सभी का सबंध अध्यातिमक जगत से है। कयोकि अध्यातम को जाने बिनां इंसान का जीवन अपूर्ण है। जब इंसान अध्यात्म की शरण में जाता है तो उसके जीवन में आंतरिक बदलाव आता है। बाहर से जीव जितना भी बदल जाए कितनी भी उन्ती कयो न कर लें। यदि उसने अपने आप को नही बदला, अच्छाई को अपने भीतर आरोपित नही किया। तब तक वह असली जीत को हासिल नही कर सकता और यह बदलाव एक पुर्ण संत की शरण में जाकर ही हासिल हो सकता है।  
           आगे साध्वी जी ने बताया कि जैसे अंगुलीमार डाकू अपने जीवन में पाप करने के लिए चाहे कितना दृढ संकलपी था पर उसके जीवन को सही दिशा तब ही मिली, जब उसके जीवन में भगवान बुद्ध जी का आगमन हुआ। कयोंकि बुद्ध जी ने ऊंगलीमार के जीवन में अध्यातिमक परिर्वतन किया। जिसके कारण वह डाकु से भकत बन गया। संसार में अनेक प्रकार की क्रांतियां अनेक प्रयासों के द्धारा की जाती हैं। अध्यातिमक क्रांति केवल पुर्ण संत के द्धारा ही संभव है। सत्संग में जाकर इंसान की सोच परिवर्तित होती है और जो इंसान सोचता है वही उसके कर्म में दिखाई देता है और कर्म के आधार पर ही इंसान की आसतित्व निरधारित होता है। सत्संग में ही इंसान की हैबानीयत या बुराई भरी सोच को परिवर्तत करके अच्छाई में तबदील किया जाता है।  
           आगे साध्वी जी ने कहा कि आज समाज में जो सबसे बढी समस्या है वह है युवा वर्ग में नशे की समस्या नशे की बढती हुई लत। समाज का प्रत्येक वर्ग इस गंभीर बिमारी से जुझ रहा है। आज यदि इस समस्या को नियंत्रण ना किया गया तो इसके बहुत ही कुप्रभाव हमारे समाज को देखने को मिलेगे। एक मात्र सत्संग ही ऐसा माध्यम है जो युवा वर्ग को उस की वास्तविक पहचान करा सकता है। 
          इसी अवसर पर विशेष रूप में स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी गुरु कृपा नंद, ने अपनी अपस्थित दी।