24th May 2022 at 2:05 PM
ब्राह्मण हिंदू समाज को संगठित करके राष्ट्र सेवा में लगे हैं
पंडित सुनील भराला ने किया संस्कृति,धर्म,सेवा और समर्पण में अग्रसित होने का भी दावा
24th May 2022 at 2:05 PM
ब्राह्मण हिंदू समाज को संगठित करके राष्ट्र सेवा में लगे हैं
पंडित सुनील भराला ने किया संस्कृति,धर्म,सेवा और समर्पण में अग्रसित होने का भी दावा
10th May 2022 at 11:16 PM
ईंधन के रूप में बढ़ रहे प्रयोग से गहरा है चारे का संकट
घास-चारा-पराली के ईंट भट्टों,कागज मिलों आदि फैक्ट्रियों में कच्चे माल का होता है ईंधन के रूप में प्रयोग
देश के संतवृंदो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों एवं मुख्य सचिवों को भी लिखा पत्र
प्रकृति एवं परमात्मा ने सभी फसलों के ऊपरी भाग अनाज व तिलहन को मनुष्य के लिए तथा नीचे का घास व भूसा-चारा गोवंश व पशुधन हेतु ही प्रदान किया है पूनम राजपुरोहित मानवताधर्मी ने उठाया मुद्दा
सुखा घास-चारा-पराली-भूसा के कागज मिलों,ईंट भट्टों एवं फैक्ट्रियों में उपयोग से पंजाब के समस्त गोवंश एवं पशुपालकों के सामने अभुतपूर्व संकट खडा हो गया है। पंजाब की 500 से अधिक तथा देश में संचालित हजारों गोशालाओं में अधिकतर अपंग,वृद्ध,लाचार,बीमार,दुर्घटनाग्रस्त एवं कत्लखानों जाते हुए छुडाये गये लाखों संख्या में गोवंश की सुचारू सेवा-सुश्रुषा बुरी तरह प्रभावित हो रही है। चारे की अनुपलब्धता एवं अभुतपूर्व मंहगाई से गोशालाओं तथा आम पशुधन पालकों के सामने भयंकर आर्थिक समस्या है। चारा के भाव दुगुने होकर आसमान छू रहे है और घास-चारा की खरीद असंभव हो रही है।
उपरोक्त व्यक्तव्य देते हुए श्रीपथमेडा गोधाम महातीर्थ एवं गोसेवा मिशन के वरिष्ठत्तम गोसेवक तथा राष्ट्रीय गो-अधिकार विचार मंच के संस्थापक अध्यक्ष पूनम राजपुरोहित मानवताधर्मी ने पंजाब सरकार से तत्काल प्रभाव से सुखी तुडी-पराली-भूसा आदि पषुधन के प्राण बचाने वाले सभी प्रकार के सुखे घास-चारा को कागज मिलों,ईंट भट्टों एवं फैक्ट्रियों में कच्चे माल तथा र्इ्रंधन के रूप में उपयोग पर कठोरता से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि गोसेवा मिशन के अध्यक्ष स्वामी कृश्णानंद महाराज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद,पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान,राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और सभी प्रमुख प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों एवं मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर देश के समस्त गोभक्तों-गोसेवकों,गोशाला संचालकों एवं पशुपालक जनमानस की समस्याओं से अवगत करवाया है।
देश के प्रमुख गोसेवा-गोरक्षा आन्दोलनों के अग्रदूत रहे श्री राजपुरोहित ने कहा है कि ‘‘प्रकृति एवं परमात्मा ने फसलों का ऊपरी भाग अनाज व तिलहन को मनुष्य तथा नीचे का घास-भूसा-चारा गोवंश व पशुधन के लिये बनाया है। अतः इस प्राकृत एवं व्यवहारिक नियम से घास-चारा पर एकमात्र अधिकार गोवंश और पशुधन का है। गोवंश देश व राज्यों की अर्थव्यवस्था,ग्रामीण रोजगार,प्राकृतिक खेती,मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण संरक्षण का मूल आधार है। उन्होंने कहा है कि घास-चारा का अनावश्यक स्टाक पर सख्त कार्यवाही कर सरकार गोशालाओं एवं पशुपालकों को सस्ता घास-चारा उपलब्ध करवाये।’’
सुप्रसिद्ध विचारक,चिंतक,लेखक एवं गोसेवा-गोरक्षा विषयक जाने माने नीतिकार पूनम राजपुरोहित ने स्वामी कृष्णानंद महाराज द्वारा लिखे गये पत्र को पथमेडा संस्थापक गोऋषि स्वामी दत्तशरणानंद महाराज,मलूक पीठाधीश्वर राजेन्द्रदास महाराज तथा स्वंय उनकी भावनाओं का समावेश बताया है। उन्होंने गोसेवा मिशन के आन्दोलनात्मक प्रयासों पश्चात होशियारपुर जिला कलेक्टर द्वारा सभी प्रकार की फेक्ट्रियों में कच्चा माल एवं ईंधन के रूप में सुखे घास-तुडी उपयोग पर 08 मई,2022 को पाबंदी लगाने के आदेश को पूरे पंजाब एवं देश में तत्काल लगाने की मांग उठाई है।
संपर्कः- 9414154706]7742897640
3rd May 2022 at 4:11 PM
गाने के माध्यम से बताया माता का इतिहास
प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2022 4:03PM by PIB Delhi
राष्ट्रपति ने कहा कि हरिद्वार में दिव्य प्रेम सेवा मिशन अनुकरणीय है
आज कच्छ संक्षित सी चर्चा करते हैं दिव्य प्रेम सेवा मिशन की। धोखा, लालच, निराशा और स्वार्थ के जितने हल्ले आशीष भाई जी पवार हुए कोई आम इंसान होता तो बुरी तरह निराश हो गया होता लेकिन आशीष भाई निराशा के इस दौर में अंतर्मन की रौशनी को ही सहारा बनाया और और आज यह संस्थान एक बड़ा काफिला बन चूका है। इस सब की पूरी कहानी हम फिर कभी आप के सामने रखेंगे आज चर्चा केवल इतनी कि महामहिम राष्ट्रपति भी वहां जा कर सब देख कर आए।
राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि स्वतन्त्रता के बाद अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया गया और संविधान के तहत दंडनीय अपराध बना दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 17 द्वारा जाति और धर्म पर आधारित अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया गया था, लेकिन कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के प्रति सदियों पुरानी अस्पृश्यता आज भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस बीमारी को लेकर समाज में अभी भी कई भ्रांतियां और कलंक मौजूद हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति को किसी अन्य रोग से पीड़ित व्यक्ति की तरह परिवार और समाज के अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। ऐसा करके ही हम अपने समाज और राष्ट्र को एक संवेदनशील समाज और राष्ट्र कह सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि कुष्ठ पीड़ित लोगों का मनोवैज्ञानिक पुनर्वास उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उनका शारीरिक उपचार। संसद ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम- 2016 पारित किया है जिसके तहत भारतीय कुष्ठ रोग अधिनियम 1898 को निरस्त कर दिया गया है और कुष्ठ से पीड़ित लोगों के खिलाफ भेदभाव को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया है। कुष्ठ रोग से ठीक हुए व्यक्तियों को भी अधिनियम 2016 के लाभार्थियों की सूची में शामिल किया गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी अपने जीवन में मानवता की सेवा के लिए समर्पित थे और कुष्ठ रोगियों का उपचार और देखभाल करते थे। गांधीजी के अनुसार, स्वयं को जानने का सबसे अच्छा तरीका मानव जाति की सेवा में स्वयं को समर्पित करना है। उनका मानना था कि कुष्ठ भी हैजा और प्लेग जैसा रोग है जिसका इलाज किया जा सकता है। इसलिए, जो इसके रोगियों को हीन समझते हैं, वे ही वास्तविक रोगी हैं। गांधी जी का संदेश आज भी प्रासंगिक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश के युवा लोगों में कुष्ठ रोग से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने में अपना योगदान दे सकते हैं। वे एनएसएस जैसे संगठनों के माध्यम से इस रोग के उपचार के बारे में लोगों में जागरूकता फैला सकते हैं। उन्होंने युवाओं से कुष्ठ पीड़ित लोगों की सेवा करने के अनुकरणीय उदाहरणों से प्रेरणा लेने और कुष्ठ रोग से जुड़े सामाजिक कलंक के उन्मूलन में अपना सक्रिय योगदान देने का भी अनुरोध किया।
सम्पर्क है : Sewa Kunj, below Chandighat Bridge, Haridwar, Uttarakhand 249408 01334 - 222211
divyaprem03@gmail.com
अंतिम दर्शन का सिलसिला डगशाई (हिमाचल) में जारी है
अंतिम संस्कार दिनांक 5 मार्च 2022 को प्रातः 11 बजे डगशाई में
पंचकूला//खरड़: 3 मार्च 2022: (आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::
कहते हैं न ज़िंदगी हर कदम इक नई जंग है। यह फ़िल्मी गीत किसी ज़माने में बहुत ही लोकप्रिय हुआ था। इस गीत में बहुत सी हकीकत भी है लेकिन बहुत कुछ अनकहा भी है। दुःख, दर्द और गम के मारे हुए समाज ने फूलों का खिलना भी जंग समझ लिया। हवा का चलना भी जंग समझ लिया। दरिया का बहना ही एक जंग समझ लिया। हमें सहजता भूलती चली गई। हम दवाओं के गुलाम होते चले गए। हम नशे की दलदलों में फंसते चले गए। स्थिति बद से बदतर होती चली गई। हार्ट अटैक, कैंसर, ब्रेन हैमरेज, ब्लड प्रेशर, शूगर बहुत सी बीमारियां हमारा नसीब बन गईं। गौरतलब है कि यह सब अचानक नहीं हुआ। दशकों से हम इसी जाल में फंसते चले आ रहे हैं। गरीबी एक अभिशाप बन चुकी है हमारे समाज में। हर तरफ दुःख, दर्द और गम का अंधेरा।
ऐसे में एक नई रौशनी आई विश्वास फाउंडेशन के रूप में। हिमाचल में स्थित डगशई से यह रौशनी आई स्वामी विश्वास का रूप धर कर। यह 1978 का वर्ष था जब विश्वास फाउंडेशन ने अपनी स्थापना के बाद हिमाचल के बाहर भी मेडिटेशन के आयोजन करने शुरू किए। हमारी टीम ने पहली बार विश्वास फाउंडेशन का आयोजन देखा लुधियाना की फ़िरोज़पुर रोड पर स्थित एक बड़े से पैलेस में। पूरे शहर में उन दिनों इसी आयोजन की चर्चा रही। जो लोग भी इस आयोजन से कुत्ते उनके चेहरों पर एक रौनक सी होती। आँखों में एक नहीं चमक होती।
मेडिटेशन के साथ साथ इस संस्थान ने शिक्षा, संस्कृति, मेडिकल राहत, गरीबों के लिए सुविधाएं जैसे बहुत से अन्य मिशन भी शुरू किए। दूर दूर तक यह नेटवर्क फैलता चला गया। ऐसे में ही जब कोरोना आया तो बहुत मुश्किल था इससे लड़ना। न ज़रूरत के मुताबिक वैक्सीन मिल पा रही थी और न ही कोरोना के मरीज़ों को सभी दवाएं। विशवास फाउंडेशन ने स्पेशल किते बनवाईं जिनमें एनर्जी लेवल कायम रखने जैसी बेहतरीन दवाएं शामिल रहीं। इस तरह की की पंचकूला में निःशुल्क बांटी गईं। कोरोना से लड़ने के लिए एनर्जी लेवल बहुत अच्छा रहे इस मकसद के लिए पत्रकारों को भी इस तरह की किट गिफ्ट के तौर पर दी गईं।
20th February 2022 at 4:00 PM
वर्तमान संदर्भ में संघ और संगठन की मजबूती ही एकमात्र बहुमूल्य अवधारणा है
समारोह में दीप प्रज्ज्वलित किया आयुष मंत्री, श्री सर्बानंद सोनोवाल ने