Thursday, 11 January 2018
Monday, 25 December 2017
साध्वी मीमासां भारती ने किया सभी को मंत्रमुग्ध
Mon, Dec 25, 2017 at 11:24 AM
कर्म ही हमारे जीवन का करता धरता
कर्म ही हमारे जीवन का करता धरता
लुधियाना: 25 दिसम्बर 2017: (आराधना टाईम्स ब्यूरो)::
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के द्धारा कैलाश नगर आश्रम में अध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन किया गया जिसमें श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी मीमासां भारती जी ने आए हुए समुह को संबोधित करते हुए कहा कि कण-कण में ईश्वर निवास करता है। वही ईश्वर हमारे घट में विराजमान है उसी से मिल जाना ही आज के इंसान का प्रथम लक्ष्य है। जिस प्रकार से तेज वेग के साथ बहती हुई नदी का लक्ष्य है सागर में मिलना ठीक वैसे ही एक जीव आत्मा का उदेश्य सागर रूपी प्रभु में मिल जाना है। तभी जीव आनंद, शांति और सुख को प्राप्त कर सकता है। हर जीव अपने कर्म के अनुसार ही सुख और दुख को प्राप्त करता है। कर्म ही हमारे जीवन का करता धरता भी है। जिसको किए बिना हमारा जीवन चल ही नही सकता। इंसान जीवन और मृत्यु के बीच में बहुत से कार्य करता है। पर हमने विचार यह करना है कि हमने कर्म कौन सा करना है। प्रमात्मा के द्धारा बनाई गई यह सृष्टि कितनी सुन्दर और कितनी प्रेरणा दायक है। अगर इंसान चाहे तो इससे बहुत कुछ सीख सकता है। जैसे हम हर सुबह सुरज को देखते है जब वह निकलता है तो जो उसकी रौशनी सारी धरती पर पड़ती है क्या वह सदा के लिए धरती पर रहती है? चांद निकलता है अपनी मधुर रौशनी देता है तो क्या उसकी रौशनी भी सदा के लिए धरती पर रहती है? विशाल सागर को देखे उसकी विशाल लहरे पुरे दम खम के साथ तट की और आती हैं उसे छुने के लिए तो क्या तट को छू लेने के बाद वह सदा सदा के लिए तट की होकर रह गई? नही यह सत्य नहीं है। यह सभी कुछ हमारे लिए है हमे समझाने के लिए है सांझ ढलने पर जो सुरज की रौशनी है वह वापिस सूरज में समाहित होती है, चांद की रौशनी को चांद में लौटकर शांति मिलती है इसी तरह सागर की लहरों को भी सागर में लौटना होता है। क्यूँकि अंशी सदैव अपने अंश की और ही बढा करता है।
आगे साध्वी जी ने कहा कि प्रभु की एक अदुभुत भेंट इस सृष्टि को इंसान जिसका यह सौभाग्य प्राप्त है कि वह ईश्वर का अंश है। इंसान के अंश होने के साथ इसका अंशी वह प्रमात्मा है। हम देखें कि जहां सभी अंश अपने अंशी की ओर जा रहे हैं वही पर आज के मानव को अपने अंशी की बिलकुल भी खबर नही है। उसकी बिलकुल भी याद इंसान के भीतर नही है। वह प्रमात्मा से बेमुख हो चुका है। वह अपने कर्म को भुल कर इस संसार की मौह माया की नींद में सो गया है। लेकिन हमारे महापुरूष कहते है कि इंसान इस संसार में तेरा कोई नही है और ना ही तुमने इस संसार में सदा सदा के लिए रहना है तुझे एक ना एक दिन इस संसार को छोड कर जाना है इस लिए तु जाग इस नींद से और अपने अंशी उस प्रभु की और मुख कर उसे जान और अपने जीवन को सार्थक कर। और इस जीवन को मुल्य को जानने के लिए अपने अंशी से मिलने के लिए तुमे आज जरूरत है एक मार्ग दर्शक की। और इंसान का मार्ग दर्शक तो एक गुरू-एक संत ही हो सकता है जो उसका मार्ग प्रशस्त करे। इस संसार की ओर नही बल्कि उसके अंशी उस प्रमात्मा की तरफ जाना ही लक्ष्य हो। वह लक्ष्य जिससे मिलने के लिए उसे यह मानव तन प्राप्त हुआ। इंसान अपने जीवन में बहुत से पाप कर्म करता है इन पापों का निवारण इंसान गुरू की शरण को प्राप्त कर ही कर सकता है। ब्रह्मज्ञान को प्राप्त करना और अपने जीवन को उसके माध्यम से सफल बनाना ही वह कर्म है जिसे करने के लिए प्रमात्मा ने इंसान को इस संसार में सब से ऊंचा दर्जा दिया।
अंत में इसी अवसर पर साध्वी रवनीत भारती जी के द्धारा प्रेरणा दायक भजनों का गायन किया गया।
Sunday, 5 November 2017
भगवान कृष्ण की रासलीला के गहन रहस्यों की चर्चा
Sun, Nov 5, 2017 at 12:45 PM
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से विशेष आयोजन
लुधियाना: 5 नवंबर 2017: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
जुर्म और बुराई की आंधी के बावजूद आध्यात्मिक तरंगों के आयोजन का सिलसिला लुधियाना में बड़े पैमाने पर जारी है। शायद इन्हीं तरंगो के कारण अभी तक बहुत से लोगों के मन में भगवान का डर बना हुआ है और वे पाप करते समय कई कई बार सोचते हैं।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से गगन नगर, ग्यासपुरा में समूह इलाका निवासीयों के सहयोग से शुरू हुई नौ दिवसीय श्री मद्धभागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अष्टम दिवस की सभा का शुभारंभ श्री सि़ग़ल, सुमन ठाक़ुर जी ने परिवार सहित भागवत पूजन कर किया। इसके उपरांत आज के मुख्य अतिथी विश्वनाथ सिह,रजिनदर मरपाल जी ने ज्योति प्रज्वलित कर किया। कथा को भक्तों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या महामनस्विनी कथा व्यास साध्वी भागयाश्री भारती जी ने भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि जिस प्रकार शबरी और केवट ने प्रभु श्री राम से अन्नय प्रेम स्थापित किया उसी प्रकार द्वापर में भी भगवान श्री कृष्ण के साथ गोपियों का अन्नय प्रेम था। भगवान श्री कृष्ण के साथ उन गोपियों का अटूट प्रेम, विश्वास एवं श्रद्धा थी। इसी कारण वह प्रेम में मगन हो चुकी थी। लेक्नि आज संसार गोपियों के उस प्रेम को संदेहात्मक दृष्टि से देखता है। इस संबंध में लोगो के तरह तरह के बिचार है कि वह तो गोपियों के साथ रासलीला करते थे। भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ जो रासलीला की उस समय उनकी बालक अवस्था थी और गोपियाँ कुछ वृद्धा कुछ यौवनाए एवं बालक अवस्था की थी। रासलीला के पीछे छुपे हुए रहस्यों को उजागर करने के साथ-साथ संशयात्मक दृष्टिकोण को भी दूर किया कि वास्तव में रास लीला का क्या अर्थ है? हमारे शास्त्रों में कहा गया है जिस रस से आनन्द की प्राप्ति होती है वह रस है परमात्मा। परमात्मा ही रस है। श्वेतासर उपनिषद में भी इस संबंधी कहा गया है कि विश्व के निवासी उस अमृत रस रूपी ईश्वर संतान है। जब आत्मा और परमात्मा का मिलाप होता है तभी रास लीला होती है। यह अन्तर की स्थिति होती है। यह मिलन केवल पूर्ण संत सद्गुरू की कृपा से ही संभव है।
आगे साध्वी जी ने सदगुरु के बारे में बताते हुए कहा कि कुछ समाज विरोधी तत्व ऐसे गुरू का विरोध करते आए है। क्योकि वह नही चाहते कि समाज में किसी प्रकार की शांति या अमन फैले वह तो इंसान का इंसान से बंटवारा चाहते हैं। लोगो में एैसे संतो के विषय में निराधारा गलत धारणाओं व अफवाहों को फैला देते है तांकि लोगो के मन में ऐसे संतो के प्रति हफरत पैदा हो सके। लेकिन जिस ने भी संत सद्गुरू की कृपा से अपने भीतर प्रभु का दर्शन किया है वह कभी भी इस तरह की व्यर्थ बातों पर विश्वास नही करते। संत की पहचान करने वाले कभी भी संत का विरोध नही करते। विरोध करने वाले तो वह लोग होते है जिनका धर्म व सत्य से कोई लेना देना नही होता। आगे साध्वी जी ने कथा प्रसंग की आते हुए कहा कि भगवन श्री कृष्ण की लीलाएं एक दिव्य संदेश प्रस्तुत करती है। जिसका भगवन श्री कृष्ण ने भी भागवद्गीता में उद्घोषण किया है कि मेरे जन्म और कर्म दिव्य व अलौकिक है। पभु इन उदगारों का अर्थ यही है कि वह अपने जीवन के प्रत्येक पहलू से कोई ऐसी सीख, कोई ऐसा संदेश प्रस्तुत करते है जिसे अपने जीवन में धारण करने हर मानव दुख और क्षोभ को छोडकर आनन्द को प्राप्त कर सकेगा। उस सुख को प्राप्त कर सकेगा जिसकी प्राप्ति के लिए वह ताउम्र प्रयासों में लगा रहता है। यदि वर्तमान मानव की समस्याओं को देखे इससे निजात का मात्र एक ही तरीका है। प्रभु का साक्षातकार जिससे न केवल मन को सही दिशा ही मिलेगी बल्कि एक अंकुश भी मिलेगा। यह केवल पूर्ण गुरू के चरणों में अर्पित हो, ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति से ही सम्भव है। ब्रह्म ज्ञान का अर्थ ही गुरू कृपा के द्धारा मानव तन के भीतर प्रभु दर्शन करना है या यूँ कहिए कि यही प्रभु का अवतरण है।
इसी अवसर पर साध्वी सुश्री भगवती भारती जी, साध्वी सुश्री सतिन्दर भारती जी, साध्वी पुष्पभद्रा भारती जी, साध्वी संदीप भारती, साध्वी रेनु भारती जी के द्वारा सुन्दर भजनों का गायन किया गया। विशेष रूप मे परमहंस, रमन शर्मा, के.एस. ठाकुर , लाला रमेश, संदीप सिंह ढिल्लों, दर्शन गोगना, अर्वन कुमार, सतनाम सिंह, सरबजीत सिंह, सधु सुद, मान सिंह, कैलाश चौधरी, जतिंदर मलहौत्रा जी ने अपनी हाजरी लगवाई। कथा को विराम प्रभु की पावन आरती के साथ दिया गया।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से विशेष आयोजन
लुधियाना: 5 नवंबर 2017: (आराधना टाईम्ज़ ब्यूरो)::
जुर्म और बुराई की आंधी के बावजूद आध्यात्मिक तरंगों के आयोजन का सिलसिला लुधियाना में बड़े पैमाने पर जारी है। शायद इन्हीं तरंगो के कारण अभी तक बहुत से लोगों के मन में भगवान का डर बना हुआ है और वे पाप करते समय कई कई बार सोचते हैं।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से गगन नगर, ग्यासपुरा में समूह इलाका निवासीयों के सहयोग से शुरू हुई नौ दिवसीय श्री मद्धभागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अष्टम दिवस की सभा का शुभारंभ श्री सि़ग़ल, सुमन ठाक़ुर जी ने परिवार सहित भागवत पूजन कर किया। इसके उपरांत आज के मुख्य अतिथी विश्वनाथ सिह,रजिनदर मरपाल जी ने ज्योति प्रज्वलित कर किया। कथा को भक्तों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या महामनस्विनी कथा व्यास साध्वी भागयाश्री भारती जी ने भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि जिस प्रकार शबरी और केवट ने प्रभु श्री राम से अन्नय प्रेम स्थापित किया उसी प्रकार द्वापर में भी भगवान श्री कृष्ण के साथ गोपियों का अन्नय प्रेम था। भगवान श्री कृष्ण के साथ उन गोपियों का अटूट प्रेम, विश्वास एवं श्रद्धा थी। इसी कारण वह प्रेम में मगन हो चुकी थी। लेक्नि आज संसार गोपियों के उस प्रेम को संदेहात्मक दृष्टि से देखता है। इस संबंध में लोगो के तरह तरह के बिचार है कि वह तो गोपियों के साथ रासलीला करते थे। भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ जो रासलीला की उस समय उनकी बालक अवस्था थी और गोपियाँ कुछ वृद्धा कुछ यौवनाए एवं बालक अवस्था की थी। रासलीला के पीछे छुपे हुए रहस्यों को उजागर करने के साथ-साथ संशयात्मक दृष्टिकोण को भी दूर किया कि वास्तव में रास लीला का क्या अर्थ है? हमारे शास्त्रों में कहा गया है जिस रस से आनन्द की प्राप्ति होती है वह रस है परमात्मा। परमात्मा ही रस है। श्वेतासर उपनिषद में भी इस संबंधी कहा गया है कि विश्व के निवासी उस अमृत रस रूपी ईश्वर संतान है। जब आत्मा और परमात्मा का मिलाप होता है तभी रास लीला होती है। यह अन्तर की स्थिति होती है। यह मिलन केवल पूर्ण संत सद्गुरू की कृपा से ही संभव है।
आगे साध्वी जी ने सदगुरु के बारे में बताते हुए कहा कि कुछ समाज विरोधी तत्व ऐसे गुरू का विरोध करते आए है। क्योकि वह नही चाहते कि समाज में किसी प्रकार की शांति या अमन फैले वह तो इंसान का इंसान से बंटवारा चाहते हैं। लोगो में एैसे संतो के विषय में निराधारा गलत धारणाओं व अफवाहों को फैला देते है तांकि लोगो के मन में ऐसे संतो के प्रति हफरत पैदा हो सके। लेकिन जिस ने भी संत सद्गुरू की कृपा से अपने भीतर प्रभु का दर्शन किया है वह कभी भी इस तरह की व्यर्थ बातों पर विश्वास नही करते। संत की पहचान करने वाले कभी भी संत का विरोध नही करते। विरोध करने वाले तो वह लोग होते है जिनका धर्म व सत्य से कोई लेना देना नही होता। आगे साध्वी जी ने कथा प्रसंग की आते हुए कहा कि भगवन श्री कृष्ण की लीलाएं एक दिव्य संदेश प्रस्तुत करती है। जिसका भगवन श्री कृष्ण ने भी भागवद्गीता में उद्घोषण किया है कि मेरे जन्म और कर्म दिव्य व अलौकिक है। पभु इन उदगारों का अर्थ यही है कि वह अपने जीवन के प्रत्येक पहलू से कोई ऐसी सीख, कोई ऐसा संदेश प्रस्तुत करते है जिसे अपने जीवन में धारण करने हर मानव दुख और क्षोभ को छोडकर आनन्द को प्राप्त कर सकेगा। उस सुख को प्राप्त कर सकेगा जिसकी प्राप्ति के लिए वह ताउम्र प्रयासों में लगा रहता है। यदि वर्तमान मानव की समस्याओं को देखे इससे निजात का मात्र एक ही तरीका है। प्रभु का साक्षातकार जिससे न केवल मन को सही दिशा ही मिलेगी बल्कि एक अंकुश भी मिलेगा। यह केवल पूर्ण गुरू के चरणों में अर्पित हो, ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति से ही सम्भव है। ब्रह्म ज्ञान का अर्थ ही गुरू कृपा के द्धारा मानव तन के भीतर प्रभु दर्शन करना है या यूँ कहिए कि यही प्रभु का अवतरण है।
इसी अवसर पर साध्वी सुश्री भगवती भारती जी, साध्वी सुश्री सतिन्दर भारती जी, साध्वी पुष्पभद्रा भारती जी, साध्वी संदीप भारती, साध्वी रेनु भारती जी के द्वारा सुन्दर भजनों का गायन किया गया। विशेष रूप मे परमहंस, रमन शर्मा, के.एस. ठाकुर , लाला रमेश, संदीप सिंह ढिल्लों, दर्शन गोगना, अर्वन कुमार, सतनाम सिंह, सरबजीत सिंह, सधु सुद, मान सिंह, कैलाश चौधरी, जतिंदर मलहौत्रा जी ने अपनी हाजरी लगवाई। कथा को विराम प्रभु की पावन आरती के साथ दिया गया।
Tuesday, 12 September 2017
आज सारा संसार बारूद के ढेर पर बैठा है
Tue, Sep 12, 2017 at 5:48 AM
मन को बेलगाम छोड़े रखा तो विनाश निश्चित
लुधियाना: 12 सितम्बर 2017:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्धारा लोहारा में चल रहे दो दिवसीया सतसंग विचारों के दुसरे दिन की अध्यक्षता करते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी तेजस्वनी भारती जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि सादा सरल और सफल जीवन जीने के लिए कुदरत को समझना बहुत जरूरी है। मानव का कुदरत के नियमों के साथ अटूट संबंध है। मानव ने कुदरत में से ही जन्म लिया है लेकिन आज इंसान की जिन्दगी के अलग-अलग क्षेत्रों में गंभीर संकटो का सामना कर रहा है। पदार्थवाद का बढ़ रहा असर और जीवन में सुख प्राप्त करने की लालसा ने मानव की सामाजिक दशा के ऊपर बहुत असर डाला है। जिस कारन इंसान रूझान ऊँच कदरों कीमतों से मुडकर भ्रष्टाचार, नफरत और ईर्खा की और ज्यादा हो गया है। इसी कारण सत्य, दया और नैतिकता जैसे सदाचारक पहलुओं पर आधारित जीवन की कदरों कीमतों को बहुत नुकसान पहुँचा है। परिवारिक रिश्तों में विखराव बड़ गया है। इसको रोका जा सकता है अगर कुदरत के नियमों के अनुसार आपस में प्यार से रहते हुए ऊंचे सदाचारक गुणों को जीवन में धारण किया जाए और अध्यात्मिक और नैतिक क़द्रों कीमतों के उपर अधारित जीवन की तरफ कद़म बढाए जाएँ।
साध्वी जी ने कहा कि इंसान इस सृष्टि का सबसे विकसित प्राणी है। उसने अपनी बुद्धि से इस संसार के रहस्यों का काफी हद तक पता लगा लिया है। कुदरत में छिपे रहस्यों को जान कर उसने अपनी जिन्दगी को खुशहाल बनाया है। लेकिन इस विकास के दौर में उसका स्वार्थ पता नही कब शामिल हो गया कि उसने अपनी बुद्धि का नकारात्मक प्रयोग करना शुरू कर दिया। मानव का विकास तब तक अधुरा ही रहेगा जब तक वह अंत्रमुखी होकर अपने सच्चे स्वरूप की पहिचान नही कर लेता। जिस तरह विज्ञान बाहरी जगत से अवगत करवाता है इसी तरह अध्यात्म विज्ञान मानव के भीतरी जगत के भेद खोलता है। यह विज्ञान ही देन है कि आज सारा संसार बारूद के ढेर के उपर बैठा है। कोई पता कि कब एक धमाका हो और सारा विश्व तहस नहस हो जाए। मानवी समाज आज लाचार होकर विनाश के किनारे पर खड़ा है। आज का मानव लोक कलयाण की भावना को विसार चुका है। मानव के अंदर बैठा शैतान इतनी तेजी से काम कर रहा है कि वह दिन दुर नही है जब जीवित लोग मुर्दों से ईर्ष्या करनी शुरू कर देंगे। नैतिक मुल्य स्वार्थ की भेंट चड़ कर अपने आप खत्म हो रहै है। आज युवा अपने राह से भटक रहा है और उसे देखकर यह लग रहा है कि अगर समय के रहते हुए उसे सही रास्ता ना दिखाया गया तो समाज का विनाश निशचित है। यह बात बिल्कुल सत्य है कि नैतिक और अध्यात्मिक कदरो कीमतो के स्थान पर इंद्रीयों के सुख को ज्यादा महत्व देने वाले भौतकिवादी आदर्श और अपने सुख बढ़ाने वाले दुसरो का नुक्सान करने वाली प्रावृति मानवता को घोर विनाश के मार्ग की और लेकर जा रही है। अगर हमने अपने सुखो को प्राप्त करने के लिए अपनी आत्मा की आवाज को अनसुना कर दिया तो इन सब का कया लाभ? अगर इंसान अपने ही मन पर लागु नही कर सकता तो फिर अनेको पुलाड़ी यंत्रों को काबु करने का कया फायदा? जबकि हमारे महापुरूषों ने कहा है कि- ‘मन जीते जग जीत’ अगर हमने अपने मन को वश में कर लिया तो हम सारे संसार को जीत लेंगे। लेकिन हम अपने मन की लगाम को खुला छोडक़र सब कुछ हासिल करना चाहते है और हमारी इसी सोच के नतीजे आज हमारे सब के सामने है।
इसी अवसर पर साध्वी रवनीत भारती जी ने सुमधुर भजनो का गायन भी किया। विशेश रूप में मनजीत सिंह, बलबीर सिंह कुलार, सतवंत सिंह, जसप्रीत सिंह, सुखदेव सिंह, सतनाम सिंह आदि ने अपनी उपस्थति दी।
Monday, 11 September 2017
शिष्य वही जिसे गुरू वचनों पर विश्वास है-साध्वी भारती जी
Mon, Sep 11, 2017 at 7:07 AM
शिष्य तो वह है जो चुनौतियों का डट कर सामना करे
लुधियाना: 11 सितम्बर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा लोहारा में दो दिवसीय विषेश सभा का आयोजन किया गया। प्रथम दिवस मे कार्यक्रम की शुरूआत साध्वी रवनीत भारती जी द्धारा गुरु महिमा में एक भजन ‘धीरज रख वो रहमत की वर्षा बरसा भी देगा’ गाकर की। इसके उपरांत सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी ममता भारती जी द्धारा उपस्थित भक्तों को विचार देते हुए कहा कि जैसे एक स्त्री श्रृंगार के बिना और वृक्ष पत्तों व फूल के बिना सुंदर नहीं लगते, ठीक वैसे ही एक साधक भी धीरज, दया, प्रेम, विश्वास, श्रद्धा आदि के बिना साधक नहीं बन पाता। हमारे धार्मिक ग्रंथों में कहा गया कि शिष्य वो नहीं जो पल-प्रतिपल संकट से घबराकर डर जाये, शिष्य तो वह है जो चुनौतियों का डट कर सामना करे। जैसे भक्त हनुमान जी जब भक्ति को प्राप्त करने के लिए चले तो उनका मार्ग रोकने वाले कितने ही लोग आये, परन्तु वह सभी का डटकर सामना करते हैं। भक्त को यदि कोई विजय दिला सकता है तो वह भक्त का दृढ़ विश्वास जैसा विश्वास शबरी जी के पास था। उनके गुरु मंतग मुनी जी ने कहा एक दिन तुमहारी ‘कुटीया में श्रीराम जी अवश्य आयेंगे’। उन्हें अपने गुरु के वचनों पर विश्वास था और वह इंतजार करती है और एक दिन वह भी आता है, जब उसकी कुटिया में श्री राम जी आते भी हैं। कहने का भाव यदि विश्वास हो तो चट्टान की तरह मजबूत।
आगे साध्वी जी ने कहा कि यदि हम संसार की ओर ध्यान से देखें तो इसमें यदि कुछ महतवपूर्ण है तो वह है केवल मात्र विश्वास-जैसे बनाने के लिए बहुत लम्बा समय लगता है और टूट जाने के लिए पल भर। इसलिए भक्त भी गुरु चरणों में सदैव विश्वास के सहारे अपनी प्रीत जोडक़र रखता है और ऐसी प्रीत की एक उदाहरण है भक्त प्रलाहद जी। उनका पिता उनके ऊपर कितने अत्याचार करता था, परन्तु भक्त प्रलाहद जी सदैव अपने श्री हरि पर विश्वास और प्रेम होने के कारण हर संकट से बच जाते और एक दिन जब प्रलाहद जी ने कहा कि मेरा प्रभु इस स्तंभ में भी है तो प्रभु को अपने भक्त की रक्षा और विश्वास को जीतने के लिए प्रकट होना पड़ता है। इसीलिए विश्वास सदैव जीतता है, हार कभी नहीं होती।
अंत में साध्वी जी ने कहा कि हमें भी अपने ईष्ट पर पूर्ण विश्वास व श्रद्धा रखनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने विश्व शांति की मंगलमयी कामना को धारण करते हुए सामूहिक ध्यान साधना भी की और साध्वी रवनीत भारती द्धारा समधुर भजनों का गायन किया गया।
Sunday, 3 September 2017
गुरुद्धारा दुःख भंजन साहिब में गुरमति आयोजन
भाजपा नेता प्रवीण बांसल ने भी देर रात तक उठाया अलौकिक आनंद
लुधियाना: 3 सितम्बर 2017: (कार्तिका सिंह//आराधना टाईम्स)::
बहुत से लोग बेचैन हैं क्यूंकि उनके पास दो वक़्त की रोटी का भी प्रबंध नहीं। गरीबी ही उनको हर दुःख दर्द का कारण लगने लगती है जबकि ऐसा है नहीं। दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास कितना धन है इसका पता उनको खुद भी नहीं होता लेकिन वे गरीब से भी ज़्यादा दुखी हैं। हिम्मत करके पूछा शायद आपने किसी का हक मारा हो तो वो कर्म और उसका फल आपको दुखी कर रहा हो? जवाब मिला ऐसा भी नहीं। तब याद आये लुधियाना के जाने माने रागी भाई हरबंस सिंह जगाधरी वाले जो बहुत ही अच्छा कीर्तन किया करते थे और साथ ही ध्यान में बिजली की तरह नाम कौंधा संत सिंह मस्कीन जी का जो कहा करते थे जिसे गुरबाणी का कीर्तन सुन कर आनंद नहीं आता उसे किसी भी सुख-सुविधा या अन्य गीत संगीत से आनंद नहीं आ सकता।
संगीत के सुनिश्चित रागों में आधारित गुरुबाणी के शब्दों का गायन जब पूरी श्रद्धा और नियम से होता है तो अंतर्मन के सभी ताप और संताप तुरंत दूर होने लगते हैं। एक अलौकिक सी शीतलता उस रूहानी संगीत की वर्षा से ऐसी उतरती है कि इंसान उसी में लीन हो जाता है।
पर आजकल के व्यस्त समय में न तो किसी के पास वक़्त है और न ही सुविधा के कुछ पल जो इस कीर्तन को सुन कर निहाल हो सके। नसीबों के बिना यह खज़ाना हाथ में आता भी नहीं। आज के व्यस्त जीवन में न्यू कुंदनपुरी में स्थित गुरुद्धारा श्री दुःख भंजन साहिब में अक्सर ही ऐसे आयोजन होते रहते हैं जो इस तरह के अवसर प्रदान कराते हैं। ऐसा ही एक यादगारी आयोजन हुआ गत 2 सितंबर 2017 की रात को जो आधी रात तक जारी रहा। गर्मी के जाते हुए मौसम में रात के समय रुक रुक कर चलती ठंडी ठंडी हवा इस सारे माहौल को और भी प्राकृतिक और सुंदर बना रही थी। आसमान के सितारे और हवा का छूना आरती के शब्दों की याद दिला रहा था। महसूस हो रहा था कि कैसे सारी प्रकृति उस अदृश्य भगवान का गुणगान कर रही है।
इस अवसर पर जो लोग पहुँच सके वो बहुत ही किस्मत वाले लोग थे। इनमें जानेमाने भाजपा नेता प्रवीण बांसल भी शामिल थे जो अक्सर लोगों के हर दुःख सुख में अवश्य पहुंचते हैं। जागरण हो या कीर्तन दरबार वह अपनी हाज़िरी लगवाना नहीं भूलते। खास बात यह भी कि अन्य नेताओं की तरह झट से भागने की नहीं करते बल्कि आराम से बैठ कर भजनों और शब्दों का आनंद लेते हैं। उनकी मौजूदगी से सभी लोग अच्छा महसूस कर रहे थे।
इस बार गुरमत समागम में भाई प्रिंस पाल सिंह, ज्ञानी निर्मल सिंह, भाई हरविंदर सिंह, भाई राणा प्रताप सिंह के जत्थों ने कीर्तन और कथा से संगत को निहाल किया और याद दिलाया कि बाहर के इस संसार के साथ साथ एक संसार हमारे अंदर भी होता है। उसका सुधर नहीं हुआ तो बाहर की सारी उन्नति बेकार है। इसलिए अंतर मन की झलक भी लेते रहना चाहिए और गुरुबाणी इसमें बहुत सहायक है। एक एक शब्द आपको बाहरी संसार और अंतर मन में बसी दुनिया की हकीकत बतलाता है।
गुरुद्धारा प्रबंधक कमेटी की ओर से श्री बांसल और कीर्तनी जत्थों को सम्मानित भी किया गया। इसके बाद कड़ाह प्रसाद की देग भी सभी ने बहुत सम्मान से ली। गुरु का अटूट लंगर भी देर रात तक चला जिसका आनंद ही कुछ और था। कुल मिला कर यह एक यादगारी आयोजन रहा। इस बार आपनाहीं आ पाए तो अगली बार के प्रोग्राम में आना न भूलें।
दोराहा नहर में गणेश प्रतिमा को विसर्जित कर सभी आँखे हुई नम
लुधियाना से दोराहा तक गणपति बप्पा मौर्य के जयकारों की गूंज
लुधियाना: 2 सितम्बर 2017: (आराधना टाईम्स ब्यूरो)::
आशुतोष क्लब द्वारा 25 अगस्त से शुरू किए गए गणपति महोत्सव में शनिवार को दोराहा नहर में विधिपूर्वक विसर्जन से उत्सव का समापन हुआ न्यू कुंदन पूरी कृष्णा चौक से विशाल शोभायात्रा शुरू हुई जो उपकार नगर, कुंदन पूरी, प्रेम नगर, शाही मोहल्ला, वृंदावन रोड, सिंडिकेट चौक, कैलाश चौक, सैशन चौक, फव्वारा चौक इत्यादि कई क्षेत्रों तक गणेशमय संकीर्तन में ढोल नगाड़ों के साथ क्लब प्रधान नरेंद्र काकू व उनकी टीम के कुशल प्रबन्दन में पहुँची व आज श्री हिन्दू तख्त के प्रमुख प्रदेश प्रचारक वरुण मेहता प्रदेश कांग्रेस महासचिव अशोक पराशर पप्पी उप प्रमुख हरकीरत खुराना पूर्व पार्षद राजू थापर प्रमुख तौर पर शामिल थे।
फव्वारा चौक से सभी भक्त गाड़ियों में सवार होकर गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ का उद्धगोष करते हुए दोराहा नहर पर पहुँचे जहाँ सभी भक्तों ने जोश व उत्साह में जयकारे लगाते हुए लेकिन 8 दिन तक रोजाना पूजन करने से नम आंखों के साथ गणेश प्रतिमा को सनातन धर्म के पूर्ण रीति रिवाज़ों के साथ विधिपूर्वक विसर्जित किया व इस अवसर पर क्लब की तरफ से एक जरूरतमंद कन्या की शादी के लिए 5100 रुपए का शगुन भी दिया गया । वरुण मेहता ने कहा कि इस बार गणपति आयोजन पर क्लब की तरफ से वर्ष भर समाज सेवा कन्या भ्रूण हत्या रोकने व अन्य सामाजिक मुद्दों पर कार्य करने का संकल्प लिया गया है क्योकि धर्म व राष्ट्र प्रेम जाग्रत होने से हमारे समाज को नई दिशा मिलेगी इस अवसर पर प्रधान नरेंद्र चौधरी द्वारा चौथे गणपति उत्सव के दौरान सहयोग करने वाली सहयोगी सस्थायो व दानी सज़्ज़नो का आभार व्यक्त किया इस अवसर पर चंद्रमोहन अशनूर सिद्धू विमल कुमार नरेश कुमार सुनील कुमार रमेश कुमार कुलदीप सिंह देव कुमार आशीष कुमार नैतिक मेहता गौरव बावा नीना मेहता शोभा रानी गुरप्रीत नरेंद्र शारदा रानी सीमा कुमारी व अन्य भी उपस्थित थे ।
Subscribe to:
Comments (Atom)





