Monday, 16 February 2026

लुधियाना: आगामी सात दिवसीय श्री मद्भागवत कथा

Emailed on Monday 16th February 2026 at 5:45 PM Regarding Bhagwat Katha Week Event 
बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और उसके दुष्प्रभावों पर होगी विशेष चर्चा

लुधियाना: 16 फरवरी 2026: (मीडिया लिंक रविंद्र/ /आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::


भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं संस्कृति मंच द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री मद्भागवत कथा का ऐलान आज नागपाल रीजेंसी होटल फिरोजपुर लुधियाना में आयोजित प्रेस वार्ता में किया गया।

प्रेस वार्ता की अगुवाई संस्थान के प्रतिनिधि स्वामी गुरुकृपानंद जी संयोजक दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान लुधियाना , स्वामी प्रकाशानंद जी, साध्वी कपिला भारती जी, साध्वी मीनाक्षी भारती एवं साध्वी मनेंद्रा भारती जी ने संयुक्त रूप से की।

स्वामी गुरुकृपानंद जी ने बताया कि 19 से 25 फरवरी 2026 तक सेक्टर 32 A स्थित मार्किट ग्राउंड में यह विशाल श्री मद्भागवत कथा आयोजित होगी। प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाला यह कार्यक्रम निःशुल्क होगा व हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

कथा दौरान बच्चों के लिए विशेष सत्र
इस कथा का विशेष फोकस आधुनिकता की दौड़ में बच्चों के खेल कूद का मैदान अब मोबाइल फोन बनता जा रहा है, जो तनाव का मुख्य कारण बनता जा रहा है, इस विषय पर होगा।

बच्चों के लिए बढ़ते स्क्रीन टाइम और उसके दुष्प्रभावों पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होगा।
स्वामी गुरुकृपानंद जी ने हेल्पलाइन नंबर 9814002124 जारी किया। जो स्कूल या बच्चों के अभिभावक इस नंबर पर रजिस्ट्रेशन करवाएंगे उनके लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होगा।

साध्वी मनेंद्रा  भारती जी ने कहा सभी श्रद्धालुओं से शामिल होने होने का विशेष अनुरोध करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जीवनचरित हर आयु वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह कथा मन, विचार और जीवन को पवित्र करने का माध्यम है। उन्होंने सभी परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने परिजनों और मित्रों के साथ इस आध्यात्मिक महोत्सव में अवश्य पधारें।

उन्होंने बताया कि विश्वविख्यात कथा व्यास साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी कथा का वाचन करेंगी। साध्वी जी देश-विदेश में अपने ज्ञान, वाणी और आध्यात्मिकता से लाखों लोगों को प्रेरित कर चुकी हैं। कथा के माध्यम से वह भगवान श्री कृष्ण के संदेशों को आधुनिक समाज की चुनौतियों—जैसे बच्चों में बढ़ती स्क्रीन टाइमिंग,नशा-निवारण, कन्या भ्रूण हत्या, नारी संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण—के संदर्भ में प्रस्तुत करेंगी।

17 फरवरी को निकलेगी 1100 महिलाओं की मंगल कलश यात्रा

साध्वी जी ने बताया कि कार्यक्रम से दो दिन पूर्व 17 फ़रवरी 2026 को 1100 महिलाओं की भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा कथा स्थल से शुरू होकर सेक्टर 32 A,और 33 के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कथा स्थल तक पहुँचेगी। यह यात्रा विश्व शांति और सामाजिक सौहार्द का संदेश देगी।

Friday, 6 February 2026

जादू की तरह फायदा पहुंचाती हैं हस्त मुद्राएं

Rector Kathuria on Thursday 05th February 2026 at 20:28 Regarding Finger Yoga  or Hand Yoga Regarding 

लेकिन किस योग्य मार्गदर्श्क की देखरेख में ही करना उचित होगा


लुधियाना
:6 फरवरी 2025: (रेक्टर कथूरिया//मीडिया लिंक रविंदर//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::

उम्र बढ़ती जा रही है और समय हाथ से निकला जा रहा है। ज़िंदगी की गर्दिश और संघर्ष ने बहुत कुछ दिखाया भी समझाया भी लेकिन फिर भी उलझनें मन को उलझाती रही। कई बार ज़िंदगी निरथर्क भी लगने लगती। स्वास्थ्य बिगड़ा तो मुश्किलें और बढ़ गई। अंग्रेज़ी मेडिकल सिस्टम की दवाओं से तो मन ही चलने लगा। इन दवाओं से अगर एक मर्ज़ ठीक होती तो दस नई बीमारियां और लगने लगती। ऊपर से यह सिस्टम महंगा भी बहुत है। इस हालात में चिंता भी बहुत हुई लेकिन इसी चिंता का सामना करते करते चिंतन भी बढ़ा। मेडिटेशन और अच्छी लगने लगी। सेहत ज़्यादा बिगड़ी तो तिब्बती इलाज प्रणाली की शरण में जाने का मन हुआ। तिब्बत वाले मेडिसिन सिस्टम ने मौत के मुँह से निकालने का चमत्कार कर दिखाया। जान बच गई लेकिन साथ में बुढ़ापे की अपनी अलह दुश्वारियां होती हैं। उम्र 68 को पार करने लगी तो भविष्य अंधेरा भी लगने लगा। कई छोटी छोटी मुश्किलें भी अभी बाकी हैं। इसके बाद अच्छी,किस्मत से मिला हस्त मुद्रा योग साधना का ज्ञान। 

सही ढंग तरीका तो यह है कि इस साधना को ठीक से बैठ कर करना चाहिए और रीढ़ बिलकुल सीढ़ी रहे। लेकिन बुढ़ापे वाली उम्र और स्वास्थ्य कारणों से ज़्यादा समय तक सीधे बैठना कठिन हो जाता। इस लिए तलाश कर रहा है कि लेट कर कौन कौन सी मुद्रा संभव है। 

छह दशक से अधिक की उम्र अर्थात 68 प्लस की उम्र में लेट कर की जाने वाली हस्त मुद्रा के लिए ज्ञान मुद्रा एक अच्छा विकल्प है। यह मुद्रा न केवल लेट कर की जा सकती है, बल्कि यह ध्यान और श्वास अभ्यास के लिए भी बहुत उपयोगी है। इस से बहुत फायदा भी हुआ। एक तो जल्दी से नींद आने लगी। दूसरा फायदा यह कि मन भी शांत होने लगा। विचारों पर नियंत्रण भी बढ़ने लगा और बार बार इधर उधर भागता मन भी काबू में आने लग। 

विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन करते हुए बताया कि ज्ञान मुद्रा के अलावा, आप शून्य मुद्रा (चिन मुद्रा) भी लेट कर कर सकते हैं। इसमें आप अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें और अपने अंगूठे को अपनी सूचक अँगली के साथ जोड़ें। यह मुद्रा भी ध्यान और श्वास अभ्यास के लिए बहुत उपयोगी है।

इसके अलावा, आप प्राण मुद्रा भी लेट कर कर सकते हैं। इसमें आप अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें और अपने अंगूठे को अपनी सूचक अँगली और मध्यमा अँगली के साथ जोड़ें। यह मुद्रा ऊर्जा को बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करती है।

फ़िलहाल इतना ही लेकिन एक बात ज़रूर ध्यान रखें कि यदि कोई स्वास्थ्य समय हो तो किसी योग एक्सपर्ट से मार्गदर्शन ज़रूर ले लें। इन मुद्राओं को करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना उचित होगा, खासकर अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है। गलत मुद्रा अपनाने से नुकसान की संभावना भी बनी रहती है। 

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