Divya Jyoti Ldh on 19th 2026 at 3:54 PM Regarding Meditation and Sadhna Shivir
साध्वी राधिका भारती जी ने बताए आज की भागदौड़ में चैन के गुर
लुधियाना: 19 अप्रैल 2026: (मीडिया लिंक//आराधना टाईम्ज़ डेस्क)::
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय आश्रम हरनामपुरा में ध्यान एवं योग शिविर का आयोजन किया गया। आए हुए सभी लोगों को संबोधित करते हुए दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री राधिका भारती जी ने कहा कि आज प्रत्येक इंसान की जिंदगी में दौड़ भाग लगी हुई है। हर पल जीवन में एक प्रतिस्पर्धा और प्रतियोगिता लगी रहती है। इसी अंधी दौड़ के कारण आज प्रत्येक व्यक्ति तनाव ग्रस्त है। परंतु जीवन की इस गति के पीछे कोई तो ऐसी स्थिर सत्ता होनी चाहिए जो हमारे अस्तित्व का आधार हो। उन्होंने कहा कि जीवन की प्रत्येक विकलता से निकलने का एक ही उपाय है वह यह है कि हम अपने अस्तित्व के उस आधारभूत स्थिर-बिंदु को खोजें और उससे जुड़ने की कला सीख लें। क्या है यह कला? हमारे आर्य ग्रंथों में स्थिर जीवन की पद्धति को कहा गया -ध्यान।
साध्वी जी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि आज का समाज इस पद्धति की महत्वता से बेखबर है। सच तो यह है कि आज मेडिटेशन करना एक 'ट्रेंड' या 'स्टेटस सिंबल' बन गया है। परंतु आज इंसान जिन ध्यान की पद्धतियों को अपनाता है वो उसे केवल कुछ समय के लिए ही शांति और आनंद देती हैं। इसका कारण है कि हम ध्यान की सही पद्धति को नहीं जानते।
ध्यान केवल बाहरी नेत्रों को बंद करना नहीं होता अपितु दिव्य नेत्र का खुलना ध्यान का आरंभ है। हमारे शास्त्रों के अनुसार जब एक व्यक्ति का तृतीय नेत्र खुलता है तो प्रभु के प्रकाश रूप का दर्शन घट के भीतर होता है। इसी प्रकाश रूप में अपने मन को केंद्रित करना ही वास्तव में ध्यान कहलाता है। परंतु यह दिव्य नेत्र केवल ब्रह्मज्ञान की दीक्षा के समय पूर्ण सतगुरु ही खोलने का सामर्थ्य रखते हैं। कार्यक्रम के दौरान साध्वी जी ने शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बात की और जीवन में योग की महत्वता को बताते हुए विभिन्न प्रकार के योगासन करवाए।

No comments:
Post a Comment